ओबरा में शहादत दिवस बना विरोध का मंच, प्रशासन पर लगे शोषण के आरोप ओबरा (सोनभद्र): शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर सोमवार को ओबरा का गांधी मैदान एक ओर जहां श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बना, वहीं दूसरी ओर नगर की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली के खिलाफ जनभावनाओं का बड़ा मंच भी बन गया। ‘सोन चेतना सामाजिक संगठन’ के बैनर तले आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि ओबरा का जनमानस अब चुप बैठने के मूड में नहीं है। कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरी ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और इसके बाद अपने संबोधन में नगर की मौजूदा स्थिति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने एक शोषणमुक्त, समानता आधारित भारत का सपना देखा था, आज उसी देश के ओबरा जैसे नगरों में आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। ओबरा की पहचान कभी ऊर्जा नगरी के रूप में होती थी, लेकिन आज यहां की तस्वीर जर्जर व्यवस्थाओं और उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल सभा में वक्ताओं ने ओबरा इंटर कॉलेज के निजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं ओबरा का सरकारी अस्पताल खुद “वेंटिलेटर” पर बताया गया, जहां संसाधनों की कमी और अव्यवस्था के कारण मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा। रोजगार और श्रमिक शोषण का मुद्दा गरमाया स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने पर भी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को तवज्जो दी जा रही है, जबकि योग्य स्थानीय युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। श्रमिकों की स्थिति को सबसे चिंताजनक बताते हुए कहा गया कि उनसे 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान 8 घंटे का भी नहीं दिया जाता—जो सीधे तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है। CSR फंड और ठेका प्रणाली पर उठे सवाल सभा में यह भी आरोप लगाया गया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है। ठेका आवंटन में पारदर्शिता की कमी और भुगतान में अनियमितताओं को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। वक्ताओं का कहना था कि शिकायत करने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। “बिखराव ही सबसे बड़ी कमजोरी” अभिषेक अग्रहरी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि ओबरा की बदहाली के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां के लोगों में एकजुटता की कमी है। जाति, वर्ग और व्यक्तिगत स्वार्थों में बंटा समाज प्रशासन और ठेकेदारों के लिए आसान लक्ष्य बन गया है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक जनता एक मंच पर नहीं आएगी, तब तक शोषण और अन्याय का सिलसिला जारी रहेगा। जनता ने लिया संघर्ष का संकल्प कार्यक्रम में मौजूद विकास पाठक, सूर्य पटेल, संजय गौतम, सिद्धांत पटेल, बाबूलाल सोनकर सहित अन्य नागरिकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे ओबरा में पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और जनहित के मुद्दों के लिए संगठित होकर आवाज उठाएंगे। निष्कर्ष: श्रद्धांजलि सभा केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर नहीं रह गई, बल्कि यह ओबरा के जनमानस के भीतर पनप रहे असंतोष का खुला मंच बन गई। साफ संकेत है कि यदि समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
ओबरा में शहादत दिवस बना विरोध का मंच, प्रशासन पर लगे शोषण के आरोप ओबरा (सोनभद्र): शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर सोमवार को ओबरा का गांधी मैदान एक ओर जहां श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बना, वहीं दूसरी ओर नगर की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली के खिलाफ जनभावनाओं का बड़ा मंच भी बन गया। ‘सोन चेतना सामाजिक संगठन’ के बैनर तले आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि ओबरा का जनमानस अब चुप बैठने के मूड में नहीं है। कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरी ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और इसके बाद अपने संबोधन में नगर की मौजूदा स्थिति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने एक शोषणमुक्त, समानता आधारित भारत का सपना देखा था, आज
उसी देश के ओबरा जैसे नगरों में आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। ओबरा की पहचान कभी ऊर्जा नगरी के रूप में होती थी, लेकिन आज यहां की तस्वीर जर्जर व्यवस्थाओं और उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल सभा में वक्ताओं ने ओबरा इंटर कॉलेज के निजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं ओबरा का सरकारी अस्पताल खुद “वेंटिलेटर” पर बताया गया, जहां संसाधनों की कमी और अव्यवस्था के कारण मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा। रोजगार और श्रमिक शोषण का मुद्दा गरमाया स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने पर भी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को तवज्जो दी जा रही
है, जबकि योग्य स्थानीय युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। श्रमिकों की स्थिति को सबसे चिंताजनक बताते हुए कहा गया कि उनसे 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान 8 घंटे का भी नहीं दिया जाता—जो सीधे तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है। CSR फंड और ठेका प्रणाली पर उठे सवाल सभा में यह भी आरोप लगाया गया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है। ठेका आवंटन में पारदर्शिता की कमी और भुगतान में अनियमितताओं को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। वक्ताओं का कहना था कि शिकायत करने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। “बिखराव ही सबसे बड़ी कमजोरी” अभिषेक अग्रहरी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि ओबरा की बदहाली के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां के लोगों में एकजुटता की कमी
है। जाति, वर्ग और व्यक्तिगत स्वार्थों में बंटा समाज प्रशासन और ठेकेदारों के लिए आसान लक्ष्य बन गया है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक जनता एक मंच पर नहीं आएगी, तब तक शोषण और अन्याय का सिलसिला जारी रहेगा। जनता ने लिया संघर्ष का संकल्प कार्यक्रम में मौजूद विकास पाठक, सूर्य पटेल, संजय गौतम, सिद्धांत पटेल, बाबूलाल सोनकर सहित अन्य नागरिकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे ओबरा में पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और जनहित के मुद्दों के लिए संगठित होकर आवाज उठाएंगे। निष्कर्ष: श्रद्धांजलि सभा केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर नहीं रह गई, बल्कि यह ओबरा के जनमानस के भीतर पनप रहे असंतोष का खुला मंच बन गई। साफ संकेत है कि यदि समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।
- ओबरा में शहीदों के नाम पर बड़ा सवाल उठ गया है! शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में प्रशासन पर तीखे आरोप लगे। ‘सोन चेतना सामाजिक संगठन’ के कार्यक्रम में अभिषेक अग्रहरी ने कहा कि ओबरा आज समस्याओं से जूझ रहा है—शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार तीनों पर संकट गहराता जा रहा है। मजदूरों के शोषण, CSR फंड में गड़बड़ी और ठेकों में पारदर्शिता की कमी जैसे मुद्दों ने माहौल गरमा दिया। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बिखरा हुआ जनमानस ही ओबरा की बदहाली की असली वजह है? अब देखना होगा कि लोग एकजुट होते हैं या हालात ऐसे ही बने रहते हैं।1
- ओबरा (सोनभद्र)। शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस के पावन अवसर पर सोमवार को स्थानीय गांधी मैदान में 'सोन चेतना सामाजिक संगठन' के तत्वाधान में एक भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरी ने अमर शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर नमन करते हुए ओबरा नगर की वर्तमान जर्जर स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए अभिषेक अग्रहरी ने तीखा प्रहार किया कि जिन क्रांतिकारियों ने शोषण मुक्त और न्यायपूर्ण भारत का सपना देखा था, आज उन्हीं के बलिदान की धरती ओबरा प्रशासनिक उत्पीड़न और जनमानस की उपेक्षा का केंद्र बन चुकी है। नगर में समस्याओं का अंबार लगा है ओबरा इंटर कॉलेज का निजीकरण कर गरीब बच्चों की शिक्षा छीनी जा रही है, ओबरा अस्पताल स्वयं वेंटिलेटर पर है और स्थानीय परियोजनाओं में योग्यता होने के बावजूद स्थानीय युवाओं को रोजगार के लिए दरकिनार किया जा रहा है। सबसे भयावह स्थिति श्रमिक वर्ग की है, जहाँ मजदूरों से 12-12 घंटे का कठिन परिश्रम लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें भुगतान मात्र 8 घंटे का भी नहीं मिल रहा है।CSR फंड का दुरुपयोग हो रहा है अभिषेक अग्रहरी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ओबरा की इस बदहाली का मुख्य कारण स्थानीय जनमानस का आपसी बिखराव और एकजुटता की कमी है, जिसका सीधा फायदा उठाकर प्रशासनिक अधिकारी और ठेकेदार आम आदमी का शोषण कर रहे हैं। जब तक ओबरा का नागरिक अपनी जाति और व्यक्तिगत स्वार्थों से ऊपर उठकर एक मंच पर नहीं आएगा, तब तक न्याय की उम्मीद बेमानी है। ठेका आवंटन में पारदर्शिता का अभाव और भुगतान की अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने पर भी न्याय न मिलना लोकतंत्र के लिए शर्मनाक है। कार्यक्रम में मुख्य रूप से विकास पाठक, सूर्य पटेल, संजय गौतम, सिद्धांत पटेल, बाबूलाल सोनकर सहित जागरूक नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में संकल्प लिया कि शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि तभी मिलेगी जब ओबरा का जनमानस संगठित होकर अपने संवैधानिक अधिकारों, पारदर्शी प्रशासन और भ्रष्टाचार मुक्त ऊर्जा नगरी के लिए साझा संघर्ष का बिगुल फूंकेगा।1
- ओबरा (सोनभद्र): शहीद-ए-आजम भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के शहादत दिवस पर सोमवार को ओबरा का गांधी मैदान एक ओर जहां श्रद्धा और सम्मान का केंद्र बना, वहीं दूसरी ओर नगर की बदहाल व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यशैली के खिलाफ जनभावनाओं का बड़ा मंच भी बन गया। ‘सोन चेतना सामाजिक संगठन’ के बैनर तले आयोजित इस श्रद्धांजलि सभा में सैकड़ों लोगों की उपस्थिति ने यह स्पष्ट कर दिया कि ओबरा का जनमानस अब चुप बैठने के मूड में नहीं है। कार्यक्रम के आयोजक अभिषेक अग्रहरी ने शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया और इसके बाद अपने संबोधन में नगर की मौजूदा स्थिति पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि जिन क्रांतिकारियों ने एक शोषणमुक्त, समानता आधारित भारत का सपना देखा था, आज उसी देश के ओबरा जैसे नगरों में आम जनता मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रही है। ओबरा की पहचान कभी ऊर्जा नगरी के रूप में होती थी, लेकिन आज यहां की तस्वीर जर्जर व्यवस्थाओं और उपेक्षा की कहानी बयां कर रही है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल सभा में वक्ताओं ने ओबरा इंटर कॉलेज के निजीकरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका कहना था कि इससे गरीब और मध्यम वर्ग के बच्चों की शिक्षा पर सीधा असर पड़ेगा। वहीं ओबरा का सरकारी अस्पताल खुद “वेंटिलेटर” पर बताया गया, जहां संसाधनों की कमी और अव्यवस्था के कारण मरीजों को पर्याप्त इलाज नहीं मिल पा रहा। रोजगार और श्रमिक शोषण का मुद्दा गरमाया स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता न मिलने पर भी नाराजगी जताई गई। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि बाहरी लोगों को तवज्जो दी जा रही है, जबकि योग्य स्थानीय युवा बेरोजगारी का दंश झेल रहे हैं। श्रमिकों की स्थिति को सबसे चिंताजनक बताते हुए कहा गया कि उनसे 12-12 घंटे काम लिया जा रहा है, लेकिन भुगतान 8 घंटे का भी नहीं दिया जाता—जो सीधे तौर पर श्रम कानूनों का उल्लंघन है। CSR फंड और ठेका प्रणाली पर उठे सवाल सभा में यह भी आरोप लगाया गया कि कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का सही उपयोग नहीं हो रहा है। ठेका आवंटन में पारदर्शिता की कमी और भुगतान में अनियमितताओं को लेकर भी लोगों ने नाराजगी जताई। वक्ताओं का कहना था कि शिकायत करने के बाद भी उचित कार्रवाई नहीं होना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। “बिखराव ही सबसे बड़ी कमजोरी” अभिषेक अग्रहरी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि ओबरा की बदहाली के पीछे सबसे बड़ा कारण यहां के लोगों में एकजुटता की कमी है। जाति, वर्ग और व्यक्तिगत स्वार्थों में बंटा समाज प्रशासन और ठेकेदारों के लिए आसान लक्ष्य बन गया है। उन्होंने आह्वान किया कि जब तक जनता एक मंच पर नहीं आएगी, तब तक शोषण और अन्याय का सिलसिला जारी रहेगा। जनता ने लिया संघर्ष का संकल्प कार्यक्रम में मौजूद विकास पाठक, सूर्य पटेल, संजय गौतम, सिद्धांत पटेल, बाबूलाल सोनकर सहित अन्य नागरिकों ने एक स्वर में संकल्प लिया कि वे ओबरा में पारदर्शी प्रशासन, भ्रष्टाचार मुक्त व्यवस्था और जनहित के मुद्दों के लिए संगठित होकर आवाज उठाएंगे। निष्कर्ष: श्रद्धांजलि सभा केवल औपचारिक कार्यक्रम बनकर नहीं रह गई, बल्कि यह ओबरा के जनमानस के भीतर पनप रहे असंतोष का खुला मंच बन गई। साफ संकेत है कि यदि समस्याओं पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में यह असंतोष एक बड़े जनआंदोलन का रूप ले सकता है।4
- रक्तदान कर शहीदों को दी सच्ची श्रद्धांजलि, थाना परिसर में अनोखी पहल चोपन/ सोनभद्र : शहीद दिवस की पूर्व संध्या पर थाना चोपन परिसर में एक अनोखी पहल देखने को मिली, जहां स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित कर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को सच्ची श्रद्धांजलि दी गई। उत्सव ट्रस्ट एवं थाना चोपन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस शिविर में कुल 17 लोगों ने पंजीकरण कराया, जिसमें से 9 लोगों ने रक्तदान किया। कार्यक्रम का शुभारंभ थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र ने स्वयं रक्तदान कर किया। इस दौरान शहीदों को पुष्प अर्पित कर, दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि दी गई और ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘भारत माता की जय’ एवं ‘वंदे मातरम’ के नारों से वातावरण गूंज उठा। विशेष बात यह रही कि जिले में पहली बार किसी थाना परिसर में इस प्रकार का स्वैच्छिक रक्तदान शिविर आयोजित किया गया। थाना चोपन के पुलिसकर्मियों के साथ स्थानीय नागरिकों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रक्तदान करने वालों में थानाध्यक्ष अखिलेश कुमार मिश्र, सिपाही राहुल यादव, एचएम बिंदुपाल सहित अन्य लोग शामिल रहे। शिविर में रक्तदान करने वाले सभी लोगों को प्रमाण पत्र एवं रिफ्रेशमेंट देकर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में उत्सव ट्रस्ट के संरक्षक स्वामी अरविंद सिंह, निदेशक डॉ. अजय शर्मा, कुंदन सिंह, मनीष तिवारी, संजय पाण्डेय, श्रीश पाठक सहित ट्रस्टी आशीष कुमार पाठक की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं ब्लड बैंक की टीम में डॉक्टर शुभम जैश, काउंसलर रविंद्र प्रसाद, एलटी दिनेश मोदनवाल सहित अन्य कर्मचारियों का भी सहयोग रहा। कार्यक्रम का संचालन आशीष कुमार पाठक ने किया।4
- चोपन थाना परिसर में रफ्तार शिविर का हुआ आयोजन थाना प्रभारी समेत स्थानीय लोगों ने बढ़-चढ़कर लिया हिस्सा1
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- जिलाधिकारी बद्रीनाथ सिंह ने बताया कि बिना फार्मर रजिस्ट्री के किसानों को अब किसान सम्मन निधि नहीं मिलेगी उन्होंने कहा कि जिंदगी किसानों ने अभी तक फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई है और तत्काल फॉर्म रजिस्ट्री करवा लें क्योंकि बिना फार्मर रजिस्ट्री हुई किसान सम्मन निधि की किस्त उनके खाते में नहीं भेजी जाएगी उन्होंने कहा कुछ ऐसे भी मामले आए हैं इनमें देखा गया है कि कुछ मृतक भी हैं जिनकी फार्मर रजिस्ट्री नहीं हो सकती उन मृतकों की किसान सम्मान निधि की धनराशि रोक दी गई है,किसी भी अपात्र के खाते में किसान सम्मान निधि नहीं भेजी जाएगी।1
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