सारंगढ़ में करोड़ों रुपये के ठगी कांड में पीड़ित ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके विरोध में आज फिर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्टर दफ्तर पहुंचे। बीते 13 जुलाई से ही पीड़ित ग्रामीण लगातार सारंगढ़ के कलेक्टर दफ्तर, एसपी कार्यालय और थानों में चक्कर काट रहे हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 'छत्तीसगढ़ युवा समाज सुधार समिति' नाम के एक एनजीओ (NGO) ने 'नारी रक्षा सम्मान निधि' के नाम पर पहले उनका भरोसा जीता और फिर उनसे बड़ा निवेश कराया। अब समय बीतने के साथ ही एनजीओ का कर्मचारी दिनेश बंजारे ग्रामीणों को पैसे वापस लौटाने और उनकी किस्तें भरने से साफ मुकर रहा है, जिसके बाद महिला समूहों को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ है। आज फिर 9 गांवों की सैकड़ों महिलाएं कलेक्टर जन दर्शन में उचित कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंचीं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपना सारा पैसा निकाल कर दिनेश बंजारे को दिया था, जो उन्हें अनुदान राशि देता था और किस्तें भी खुद ही जमा करता था। लेकिन अब दिनेश बंजारे ने किस्तें जमा करना बंद कर दिया है, जिसके कारण फाइनेंस कंपनियां महिलाओं को किस्त पटाने के लिए लगातार परेशान कर रही हैं। जैसे-जैसे इस मामले में पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे ठगी की रकम का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।
सारंगढ़ में करोड़ों रुपये के ठगी कांड में पीड़ित ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके विरोध में आज फिर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्टर दफ्तर पहुंचे। बीते 13 जुलाई से ही पीड़ित ग्रामीण लगातार सारंगढ़ के कलेक्टर दफ्तर, एसपी कार्यालय और थानों में चक्कर काट रहे हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 'छत्तीसगढ़ युवा समाज सुधार समिति' नाम के एक एनजीओ (NGO) ने 'नारी रक्षा सम्मान निधि' के नाम पर पहले उनका भरोसा जीता और फिर उनसे बड़ा निवेश कराया। अब समय बीतने के साथ ही एनजीओ का कर्मचारी दिनेश बंजारे ग्रामीणों को पैसे वापस लौटाने और उनकी किस्तें भरने से साफ मुकर रहा है, जिसके बाद महिला समूहों को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ है। आज फिर 9 गांवों की सैकड़ों महिलाएं कलेक्टर जन दर्शन में उचित कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंचीं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपना सारा पैसा निकाल कर दिनेश बंजारे को दिया था, जो उन्हें अनुदान राशि देता था और किस्तें भी खुद ही जमा करता था। लेकिन अब दिनेश बंजारे ने किस्तें जमा करना बंद कर दिया है, जिसके कारण फाइनेंस कंपनियां महिलाओं को किस्त पटाने के लिए लगातार परेशान कर रही हैं। जैसे-जैसे इस मामले में पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे ठगी की रकम का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।
- सारंगढ़ में करोड़ों रुपये के ठगी कांड में पीड़ित ग्रामीणों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिसके विरोध में आज फिर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण कलेक्टर दफ्तर पहुंचे। बीते 13 जुलाई से ही पीड़ित ग्रामीण लगातार सारंगढ़ के कलेक्टर दफ्तर, एसपी कार्यालय और थानों में चक्कर काट रहे हैं और न्याय की गुहार लगा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 'छत्तीसगढ़ युवा समाज सुधार समिति' नाम के एक एनजीओ (NGO) ने 'नारी रक्षा सम्मान निधि' के नाम पर पहले उनका भरोसा जीता और फिर उनसे बड़ा निवेश कराया। अब समय बीतने के साथ ही एनजीओ का कर्मचारी दिनेश बंजारे ग्रामीणों को पैसे वापस लौटाने और उनकी किस्तें भरने से साफ मुकर रहा है, जिसके बाद महिला समूहों को अपने साथ हुई इस बड़ी धोखाधड़ी का अहसास हुआ है। आज फिर 9 गांवों की सैकड़ों महिलाएं कलेक्टर जन दर्शन में उचित कार्रवाई की मांग को लेकर पहुंचीं। पीड़ित महिलाओं का कहना है कि उन्होंने अपना सारा पैसा निकाल कर दिनेश बंजारे को दिया था, जो उन्हें अनुदान राशि देता था और किस्तें भी खुद ही जमा करता था। लेकिन अब दिनेश बंजारे ने किस्तें जमा करना बंद कर दिया है, जिसके कारण फाइनेंस कंपनियां महिलाओं को किस्त पटाने के लिए लगातार परेशान कर रही हैं। जैसे-जैसे इस मामले में पीड़ितों की संख्या बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे ठगी की रकम का आंकड़ा भी बढ़ता जा रहा है।1
- रायगढ़ जिले में राष्ट्रीय गैर संचारी रोग कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिलेभर के सेक्टर प्रभारी शामिल हुए।1
- कोरबा के करतला में बडमार जंगल के भीतर जुए के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने इस कार्रवाई को अंजाम देते हुए मौके से 6 जुआरियों को गिरफ्तार किया है।1
- बलौदाबाजार के सदर बाजार और गांधी चौक स्थित बहुमूल्य संपत्तियों से जुड़े वर्षों पुराने बंटवारा एवं कब्जा विवाद में जिला न्यायालय ने बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने निष्पादन प्रकरण के तहत डिक्रीधारी राजकुमारी चावला, हरजीत चावला और प्रियंका चावला के हिस्से की संपत्ति का रिक्त कब्जा दिलाने के लिए कब्जा वारंट जारी करने का आदेश दिया है। इस बड़े और महत्वपूर्ण अदालती आदेश के बाद पूरे शहर के व्यापारिक वर्ग और आम नागरिकों के बीच इसकी चर्चा तेज हो गई है। यह पूरा विवाद स्वर्गीय बाबूलाल विश्नोई की संपत्तियों के बंटवारे से जुड़ा हुआ है। उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय स्तर पर प्रकरण के निराकरण के बाद, जिला न्यायालय में निष्पादन प्रकरण क्रमांक Execution/40/2023 के माध्यम से वास्तविक कब्जा दिलाने की कार्यवाही प्रारंभ की गई। डिक्रीधारियों के हिस्से में आई संपत्तियों का सीमांकन और राजस्व रिकॉर्ड में सुधार पहले ही किया जा चुका था, लेकिन दूसरे पक्ष समीर विश्नोई और उनके परिवार द्वारा अधिकांश संपत्ति को किरायेदारों को दिए जाने के कारण राजकुमारी चावला और उनके परिवार को वास्तविक कब्जा प्राप्त नहीं हो पा रहा था। इसके बाद डिक्रीधारियों की याचिका पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने कब्जा वारंट जारी करने का निर्णय लिया। तृतीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश विवेक गर्ग की अदालत द्वारा पारित इस आदेश के तहत सदर बाजार स्थित संपत्ति से राजेन्द्र साहू, कृष्ण कुमार साहू, प्रकाशचंद्र हेमनानी (अंजनि बूट हाउस), अंकित हेमनानी (पूर्व अशोक किराना), राजेश कुमार रोहरा (सूरज बूट हाउस) और वेद प्रकाश आरतानी (कैलाश बूट हाउस) के खिलाफ कब्जा वारंट जारी हुआ है। वहीं, गांधी चौक की संपत्ति से मनोहर गोविंदानी, ललित केशरवानी (ललित किराना स्टोर) और रमेश कुमार सोनी (रमेश रेडियो) से कब्जा खाली कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं। न्यायालय के आदेश के पालन में 9 जुलाई 2026 को राजस्व विभाग, न्यायालयीन कर्मचारियों और प्रशासनिक अमले ने मौके पर पहुंचकर सीमांकन किया और संबंधित पक्षों व किरायेदारों को तत्काल कब्जा खाली करने के निर्देश दिए। न्यायालय ने बलौदाबाजार तहसीलदार को कब्जा वारंट का विधिसम्मत निष्पादन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक राजस्व अमला उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।1
- सारंगढ़ जिले में महिलाओं को पैसे दोगुने करने का लालच देकर करोड़ों रुपये की ठगी का एक बड़ा मामला सामने आया है। इस धोखाधड़ी का शिकार हुईं दर्जनों गांवों की सैकड़ों ग्रामीण महिलाएं भारी संख्या में सिटी कोतवाली सारंगढ़ पहुंचीं और अपने साथ हुई ठगी की शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित महिलाओं का आरोप है कि ग्वालियरडीह निवासी दिनेश बंजारे ने उन्हें पहले खुद से जोड़ा और दावा किया कि वह एक एनजीओ चलाता है, जिसमें 'नारी रक्षा सम्मान निधि' नाम की एक बेहद बड़ी योजना है। आरोपी ने महिलाओं को झांसा दिया कि इस योजना में पैसे लगाने पर उनकी रकम दोगुनी करके वापस दी जाएगी, जिसके लालच में आकर सैकड़ों ग्रामीणों ने अपने पैसे लगा दिए। महिलाओं ने पुलिस को बताया कि दिनेश बंजारे समूह के माध्यम से उन सभी को माइक्रो फाइनेंस कंपनियों से लोन दिलवाता था। इसके बाद वह लोन के पैसे को डबल करने का दावा करके खुद ले लेता था और कहता था कि इस लोन की मासिक किस्त वह खुद पटाएगा और उन्हें हर महीने पैसा भी देगा। कुछ समय तक तो महिलाओं को पैसा मिलता रहा, लेकिन अब उन्हें पैसा मिलना बंद हो गया है। पैसे न मिलने से परेशान होकर पीड़ित ग्रामीण महिलाएं एकजुट होकर थाने पहुंचीं। करोड़ों रुपये की ठगी का आरोपी दिनेश बंजारे फिलहाल खुद एक म्युल अकाउंट मामले में पहले से ही जेल में बंद है। उसके खाते में साइबर ठगी के 2 करोड़ 71 लाख रुपये आए थे, जिसके संबंध में अन्य राज्यों में 50 से अधिक शिकायतें दर्ज हैं और इसी मामले में सारंगढ़ पुलिस ने उसे जेल भेजा था। अब दिनेश बंजारे के खिलाफ करोड़ों रुपये की ठगी का यह नया मामला सामने आया है, जिसके बाद सारंगढ़ बिलाईगढ़ की अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक निमिषा पांडे और पुलिस प्रशासन इस मामले में आगे की कार्रवाई की तैयारी में है।1
- महासमुंद जिले के सरायपाली ब्लॉक अंतर्गत जोगीदादर गांव में सरकारी विकास के दावों की पोल खुल गई है। आजादी के करीब 8 दशक बीत जाने के बाद भी इस गांव तक न तो कोई सड़क पहुंची है और न ही आवागमन के लिए कोई सुविधाजनक रास्ता बन पाया है। बारिश का मौसम शुरू होते ही ग्रामीणों की मुश्किलें और भी बढ़ जाती हैं, जिसके कारण लोग गांव में ही कैद होकर रह जाते हैं। कलेंडा पंचायत के इस आश्रित ग्राम जोगीदादर में लोगों को बुनियादी सुविधाएं भी नसीब नहीं हो रही हैं। गांव के लिए कोई सीधा पहुंच मार्ग न होने के कारण लोग खेतों की मेढ़ से होकर आने-जाने को मजबूर हैं। इसके अलावा, गांव के पास बहने वाला नाला ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बन चुका है। बारिश के दिनों में नाले में पानी भर जाने से बच्चों को जान जोखिम में डालकर नाला पार करना पड़ता है, ताकि वे दूसरे छोर पर स्थित प्राथमिक शाला जा सकें। सड़क सुविधा न होने से बीमार पड़ने वाले लोगों को समय पर इलाज मिलना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीण गांव में सड़क और नाले पर पुलिया निर्माण की लगातार मांग कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय नेता और राजनीतिक दल आकर सड़क-पुलिया का आश्वासन तो देते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही वे पलटकर भी नहीं देखते। क्षेत्रीय विधायक को भी इस समस्या से अवगत कराया गया, पर वहां से भी सिर्फ कोरा आश्वासन ही मिला। प्रशासनिक अधिकारियों के कभी गांव न आने के कारण ग्रामीण अपनी बात उन तक भी नहीं पहुंचा पा रहे हैं, जिससे यह क्षेत्र पूरी तरह शासन-प्रशासन की अनदेखी का शिकार बना हुआ है।4