NEET परीक्षा केंद्र पर मुस्लिम छात्रा कुलसुम बानो को कथित तौर पर बुर्का पहनकर पहुंचने के कारण प्रवेश से रोका गया। आरोप है कि उन्हें पहले दुपट्टा और फिर बुर्का उतारने के लिए दबाव डाला गया, जबकि छात्रा कुलसुम बानो का स्पष्ट कहना है कि NTA (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) ने इसकी अनुमति दी है। इस घटना के बाद कुलसुम बानो ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि 17-18 साल की बच्चियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने तल्खी से टिप्पणी की कि 'शर्म आनी चाहिए' और जोर देकर कहा कि 'पेपर लीक सिस्टम करवाता है, बच्चे नहीं', जिनके पास परीक्षा के लिए केवल आधार कार्ड, एडमिट कार्ड और फोटो होती है। कुलसुम ने दृढ़ता से कहा कि वह अपनी परीक्षा अपने हिजाब और बुर्के के साथ ही देंगी, अन्यथा नहीं देंगी। मामले में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब नियम बुर्का पहनने की अनुमति देते हैं, तो कुछ परीक्षा केंद्र अपनी मनमानी क्यों कर रहे हैं? यह भी पूछा गया कि क्या अब मुस्लिम छात्राओं को अपनी पढ़ाई (तालीम) और अपनी पहचान में से किसी एक को चुनने पर मजबूर किया जाएगा?
NEET परीक्षा केंद्र पर मुस्लिम छात्रा कुलसुम बानो को कथित तौर पर बुर्का पहनकर पहुंचने के कारण प्रवेश से रोका गया। आरोप है कि उन्हें पहले दुपट्टा और फिर बुर्का उतारने के लिए दबाव डाला गया, जबकि छात्रा कुलसुम बानो का स्पष्ट कहना है कि NTA (राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी) ने इसकी अनुमति दी है। इस घटना के बाद कुलसुम बानो ने व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि 17-18 साल की बच्चियों को बेवजह परेशान किया जा रहा है और उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। उन्होंने तल्खी से टिप्पणी की कि 'शर्म आनी चाहिए' और जोर देकर कहा कि 'पेपर लीक सिस्टम करवाता है, बच्चे नहीं', जिनके पास परीक्षा के लिए केवल आधार कार्ड, एडमिट कार्ड और फोटो होती है। कुलसुम ने दृढ़ता से कहा कि वह अपनी परीक्षा अपने हिजाब और बुर्के के साथ ही देंगी, अन्यथा नहीं देंगी। मामले में यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब नियम बुर्का पहनने की अनुमति देते हैं, तो कुछ परीक्षा केंद्र अपनी मनमानी क्यों कर रहे हैं? यह भी पूछा गया कि क्या अब मुस्लिम छात्राओं को अपनी पढ़ाई (तालीम) और अपनी पहचान में से किसी एक को चुनने पर मजबूर किया जाएगा?
- लखीमपुर खीरी के सदर कोतवाली के मालखाने से एक करोड़ रुपये से अधिक मूल्य के सोने के गहने गायब होने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। इस संबंध में पुलिस ने अदालत में जो दलील पेश की, उसने सभी को अचंभित कर दिया। पुलिस ने कोर्ट को बताया कि कुछ सोने के गहने बारिश के कारण खराब हो गए, जबकि शेष बचे हुए गहनों को बंदर उठा ले गए। पुलिस के इस असाधारण स्पष्टीकरण पर अदालत ने गहरी हैरानी व्यक्त की है और इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। करोड़ों के गहनों के इस तरह गायब होने को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं, और यह पूरा मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है।1
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध घुसपैठ और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कहा है कि "भारत कोई धर्मशाला नहीं है, जहां कोई भी आकर बस जाए।" यह महत्वपूर्ण बयान रोहिंग्या और अन्य अवैध घुसपैठियों के संदर्भ में दिया गया है, जिस पर सरकार का मानना है कि देश की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि अवैध रूप से देश में रहने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। सरकार की योजना है कि भारत में आने वाले सभी विदेशी नागरिकों की पहचान और उनके रिकॉर्ड सुनिश्चित किए जाएं। राष्ट्रीय सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, घुसपैठ के मामलों पर लगातार और कड़ी निगरानी रखी जाएगी ताकि ऐसी किसी भी गतिविधि को रोका जा सके। इस पूरे मामले में सरकार का मुख्य संदेश स्पष्ट है: अवैध घुसपैठ किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी, राष्ट्रीय सुरक्षा देश की सर्वोच्च प्राथमिकता है, और घुसपैठ के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।1
- पीलीभीत में 'नारी शक्ति' का रौद्र रूप देखने को मिला, जहाँ महिलाओं ने एक शराब के ठेके के विरोध में सड़क पर शराब की बोतलें बहा दीं। यह प्रदर्शन शराब पर चल रहे संग्राम का हिस्सा था, जिसमें महिलाओं ने इस ठेके को बंद करने की मांग को लेकर अपना कड़ा विरोध जताया। महिलाओं का कहना है कि इस शराब के ठेके के कारण गाँव के कई हंसते-खेलते परिवार पूरी तरह से बर्बाद हो चुके हैं और घरों की आर्थिक स्थिति भी चरमरा गई है। इस मामले में महिला प्रधान ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि यह शराब का ठेका बंद नहीं हुआ, तो एक बड़ा आंदोलन छेड़ा जाएगा।1
- पीलीभीत में एक हिंदू परिवार के घर के ठीक पीछे अवैध रूप से एक मजार का निर्माण किया गया था। इस मामले को लेकर शिकायत मिलने के बाद प्रशासन ने जांच के आदेश जारी किए थे। प्रशासन के आदेशों के बाद, वहीं के ग्रामीणों ने मिलकर उस अवैध मजार को ध्वस्त कर दिया।1
- Post by Sudheer Kumar1
- ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष परवेज हनीफ और मुख्य कार्यकारी अधिकारी मोहम्मद यूनुस ने पसमांदा मुस्लिम समाज को मुख्य धारा में लाने के विषय पर विस्तृत और सटीक चर्चा की है। इस चर्चा का मुख्य केंद्र पसमांदा मुस्लिम समुदाय के उत्थान और उन्हें समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के तरीकों पर रहा।1
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में पड़ रही भीषण गर्मी और रिकॉर्डतोड़ तापमान ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि दुधवा नेशनल पार्क के बाघों को भी बेहाल कर दिया है। चिलचिलाती धूप और उमस से राहत पाने के लिए जंगल के राजा दुधवा पार्क में बने कृत्रिम तालाबों (वाटर होल्स) का सहारा ले रहे हैं। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार, दोपहर में तापमान बढ़ने के साथ ही अमूमन शांत रहने वाले बाघ पानी के स्रोतों के आसपास जमावड़ा लगा लेते हैं। दुधवा के अलग-अलग इलाकों से ऐसी कई तस्वीरें सामने आई हैं, जिनमें बाघ घंटों पानी में डुबकी लगाकर अपने शरीर का तापमान नियंत्रित कर रहे हैं। पार्क प्रशासन वन्यजीवों को पीने के पानी और ठंडक की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए मुस्तैद है। सभी वाटर होल्स को टैंकरों और पंपिंग सेट के जरिए लगातार भरा रखने के निर्देश दिए गए हैं। यह नजारा पर्यटकों के लिए भी रोमांचक अनुभव से कम नहीं है।1
- सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें श्रमिक बंद गेट या बैरिकेड पार करके अपने कार्यस्थल पर पहुंचने की कोशिश करते दिखाई दे रहे हैं। यह स्थिति रोजगार की मजबूरी और समय पर ड्यूटी पहुंचने के दबाव के कारण उत्पन्न हुई है। लोगों का कहना है कि देर से पहुंचने पर वेतन कटौती के डर से कर्मचारी अपनी जान जोखिम में डालने को विवश हैं। श्रमिकों की इस जोखिम भरी कोशिश ने एक बहस छेड़ दी है कि इसकी जिम्मेदारी प्रबंधन की है, सुरक्षा व्यवस्था की है या फिर परिस्थितियों से जूझ रहे स्वयं श्रमिकों की। इस पूरे मामले को लेकर श्रमिक हितों और कार्यस्थल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1