उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में दो पत्रकारों को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में जिलेभर के पत्रकार एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। प्रेस क्लब में बैठक के बाद पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपने पहुंचे। जिलाधिकारी के उपलब्ध न होने पर पत्रकार विकास भवन के सभागार में धरने पर बैठ गए। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की पहल पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से वार्ता की। पत्रकारों ने एसओजी (SOG) टीम पर कार्रवाई की मांग रखी, जिस पर एसपी ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्रकारों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। बताया गया कि 23 जुलाई की शाम करीब सात बजे 'हिंदी खबर' टीवी चैनल और 'नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज' चैनल के पत्रकार शाहजहांपुर से पुवायां जा रहे थे। आरोप है कि चिनौर के पास एसओजी प्रभारी और उनकी टीम ने दोनों को बिना कोई स्पष्ट कारण बताए अपने वाहन में बैठा लिया और उनके मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए। करीब तीन घंटे तक पत्रकारों का अपने साथियों और परिजनों से संपर्क नहीं हो सका और भारी विरोध के बाद उन्हें छोड़ा गया। उन्हें डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के काफिले को काले झंडे दिखाए जाने का वीडियो वायरल करने के आरोप में उठाया गया था। ज्ञापन में पत्रकारों ने एसओजी प्रभारी व टीम पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है और कहा कि भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन को सूचना दी जाए।
उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में दो पत्रकारों को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में जिलेभर के पत्रकार एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। प्रेस क्लब में बैठक के बाद पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपने पहुंचे। जिलाधिकारी के उपलब्ध न होने पर पत्रकार विकास भवन के सभागार में धरने पर बैठ गए। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की पहल पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से वार्ता की। पत्रकारों ने एसओजी (SOG) टीम पर कार्रवाई की मांग रखी, जिस पर एसपी ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्रकारों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। बताया गया कि 23 जुलाई की शाम करीब सात बजे 'हिंदी खबर' टीवी चैनल और 'नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज' चैनल के पत्रकार शाहजहांपुर से पुवायां जा रहे थे। आरोप है कि चिनौर के पास एसओजी प्रभारी और उनकी टीम ने दोनों को बिना कोई स्पष्ट कारण बताए अपने वाहन में बैठा लिया और उनके मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए। करीब तीन घंटे तक पत्रकारों का अपने साथियों और परिजनों से संपर्क नहीं हो सका और भारी विरोध के बाद उन्हें छोड़ा गया। उन्हें डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के काफिले को काले झंडे दिखाए जाने का वीडियो वायरल करने के आरोप में उठाया गया था। ज्ञापन में पत्रकारों ने एसओजी प्रभारी व टीम पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है और कहा कि भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन को सूचना दी जाए।
- उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में दो पत्रकारों को कथित रूप से हिरासत में लिए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। घटना के विरोध में जिलेभर के पत्रकार एकजुट होकर सड़क पर उतर आए। प्रेस क्लब में बैठक के बाद पत्रकारों ने कलेक्ट्रेट तक विरोध मार्च निकाला और जिलाधिकारी को संबोधित ज्ञापन सौंपने पहुंचे। जिलाधिकारी के उपलब्ध न होने पर पत्रकार विकास भवन के सभागार में धरने पर बैठ गए। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) की पहल पर पुलिस अधीक्षक (एसपी) मौके पर पहुंचे और पत्रकारों से वार्ता की। पत्रकारों ने एसओजी (SOG) टीम पर कार्रवाई की मांग रखी, जिस पर एसपी ने मामले की जांच कर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इसके बाद पत्रकारों ने अपना धरना समाप्त कर दिया। बताया गया कि 23 जुलाई की शाम करीब सात बजे 'हिंदी खबर' टीवी चैनल और 'नेटवर्क-10 नेशनल न्यूज' चैनल के पत्रकार शाहजहांपुर से पुवायां जा रहे थे। आरोप है कि चिनौर के पास एसओजी प्रभारी और उनकी टीम ने दोनों को बिना कोई स्पष्ट कारण बताए अपने वाहन में बैठा लिया और उनके मोबाइल फोन कब्जे में ले लिए। करीब तीन घंटे तक पत्रकारों का अपने साथियों और परिजनों से संपर्क नहीं हो सका और भारी विरोध के बाद उन्हें छोड़ा गया। उन्हें डिप्टी सीएम बृजेश पाठक के काफिले को काले झंडे दिखाए जाने का वीडियो वायरल करने के आरोप में उठाया गया था। ज्ञापन में पत्रकारों ने एसओजी प्रभारी व टीम पर तत्काल कार्रवाई की मांग की है और कहा कि भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध कार्रवाई से पूर्व मान्यता प्राप्त पत्रकार संगठन को सूचना दी जाए।1
- भारतीय जनता पार्टी द्वारा पूरनपुर स्थित छीना पैलेस में बूथ अध्यक्ष सम्मेलन का भव्य आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री दुर्विजय सिंह शाक्य उपस्थित रहे और यह कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।1
- लोकसभा सांसद श्रीमती डिम्पल यादव ने पेपर लीक और छात्रों की मौतों के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए धर्मेंद्र प्रधान के साथ-साथ गृह मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। उन्होंने कहा कि सरकार को तुरंत NTA को हटाना चाहिए और नैतिकता के आधार पर शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। डिम्पल यादव ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि 2024 में पेपर लीक होने की वजह से बच्चों ने खुदकुशी की थी, और क्या सरकार उन 20 बच्चों की गई जानें वापस ला सकती है। उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों के हाथ बच्चों के खून से रंगे हैं। डिम्पल यादव के अनुसार, वे चाहते हैं कि सदन चले और सरकार इस मामले की पूरी जिम्मेदारी ले, क्योंकि नए बिल लेकर आने से इस समस्या का कोई समाधान नहीं निकलने वाला है।1
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- दिल्ली में चल रहे विरोध-प्रदर्शन का असर अब पूरे भारत के साथ-साथ पीलीभीत जिले में भी देखने को मिल रहा है। इस प्रदर्शन की वजह से जिले की राजनीति पूरी तरह से गरमा गई है।1
- गन्ना किसानों के हक में एक बड़ा फैसला सामने आया है, जहाँ मिल मालिकों की उस दलील को दरकिनार कर दिया गया जिसमें उन्होंने हजारों करोड़ रुपये का ब्याज देने पर मिलें बंद होने की बात कही थी। इस पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि गन्ना किसानों की बदहाली के लिए कोई तो जिम्मेवार होगा। अदालत ने इस मामले में गन्ना आयुक्त को सीधे तलब कर लिया है। अदालत ने गन्ना आयुक्त को निर्देश दिया है कि वह अगली तारीख 03 अगस्त 2026 को पिछले आदेशों के तहत गन्ना भुगतान के विलंब पर ब्याज भुगतान से जुड़े पूरे आंकड़े प्रस्तुत करें। फैसले के तहत गन्ना भुगतान में देरी होने पर अब 12 प्रतिशत की जगह 15 प्रतिशत की दर से ब्याज देना अनिवार्य होगा। वी एम सिंह पिछले 30 साल से इस मुद्दे पर संघर्षरत हैं।1
- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले में पूरनपुर के अहमदनगर मोहल्ले में सांप घूमते हुए देखे जा रहे हैं। इलाके में सांपों की इस तरह आवाजाही को देखते हुए स्थानीय लोगों को ध्यान देने और सतर्क रहने के लिए कहा जा रहा है।1