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चम्पावत जिले के पाटी में जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के लिए एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।
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चम्पावत जिले के पाटी में जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) के लिए एक प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया गया।
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- तहसील दिवस के अवसर पर कुल 19 शिकायतें और समस्याएं दर्ज की गईं। इन सभी मामलों पर उपजिलाधिकारी (SDM) द्वारा तत्काल और त्वरित कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं।1
- तराई के पीपलपड़ाव रेंज में 'मिडनाइट ट्रैक्टर गेम' जैसी गतिविधियों की जानकारी सामने आई है। इन गतिविधियों पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इसका जिम्मेदार कौन है—क्या जंगल में कानून का राज है, या फिर 'पुष्पाराज राज' का शासन चल रहा है?1
- जनपद पीलीभीत के थाना सेहरामऊ उत्तरी अंतर्गत किशनपुर हरिपुर गांव में दबंगों के बुलंद हौसलों को लेकर पीड़ित मनोज कुमार ने पुलिस अधीक्षक से सुरक्षा की गुहार लगाई है। पीड़ित ने एक प्रार्थना पत्र के माध्यम से विपक्षी शेर सिंह, नवनीत कुमार और अन्य महिलाओं पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें घर में घुसकर महिलाओं को बंधक बनाने और जिंदा जलाने की धमकी देने की बात कही गई है। मनोज कुमार की शिकायत के अनुसार, 1 जून 2026 को जब वह घर पर मौजूद नहीं थे, तब विपक्षियों ने जबरन उनके घर में घुसकर महिलाओं को डराया-धमकाया। आरोप है कि उन्होंने मकान खाली न करने की स्थिति में मुख्य द्वार पर बाहर से ताला लगा दिया और पूरे परिवार को जिंदा जलाकर मार डालने की धमकी भी दी। पीड़ित परिवार ने बताया कि यह मामला एक संपत्ति विवाद से जुड़ा है जो फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है। इस घटना के बाद, पीड़ित परिवार ने पुलिस से तत्काल एफआईआर दर्ज करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।2
- उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के गढ़सेर समेत कत्युर घाटी के कई गांवों में इन दिनों कटखने बंदरों का जबरदस्त आतंक छाया हुआ है, जिससे स्थानीय निवासी खासे परेशान हैं। कत्युर घाटी के ग्रामीण बंदरों के साथ-साथ सूअरों के उत्पात से भी जूझ रहे हैं। इस गंभीर समस्या से निजात दिलाने के लिए ग्रामीणों ने तहसील दिवस में अपनी मांग उठाई है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए, ब्लॉक प्रमुख किशन बोरा ने भी प्रभागीय वनाधिकारी से दूरसंचार के माध्यम से बंदरों की इस समस्या पर विस्तृत चर्चा की है।1
- अमरिया से एक अच्छी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहाँ भीषण गर्मी के बीच अमरिया व्यापार मंडल ने जनसेवा की मिसाल पेश की है। व्यापार मंडल ने कस्बे के मुख्य बाजार में राहगीरों और वाहन चालकों को ठंडा मीठा शरबत और चना वितरित किया, साथ ही लोगों को गर्मी से बचाव के लिए जागरूक भी किया। व्यापार मंडल अध्यक्ष असगर अली ने बताया कि बढ़ते तापमान को देखते हुए आम जनता को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सुबह से देर शाम तक चले इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने शरबत पीकर गर्मी से राहत महसूस की और व्यापार मंडल की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की। इस मौके पर कौशल गुप्ता, मोहम्मद इमरान कादरी, विकास यादव, तारिक रजा सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।1
- यह एक भावनात्मक और ज़ोरदार अपील है जहाँ एक व्यक्ति दर्शकों से उनके चैनल को समर्थन देने का आग्रह कर रहा है। विशेष रूप से, यह निवेदन किया गया है कि दर्शक उनके चैनल को अवश्य लाइक और सब्सक्राइब करें।1
- चंपावत के विकास भवन में नगर पंचायत पाटी के आगामी निर्वाचन के लिए मतदान कार्मिकों का प्रशिक्षण सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। यह प्रशिक्षण जिलाधिकारी के तत्वावधान में पूरा हुआ।1
- हाल ही में आयोजित तहसील दिवस के दौरान जनता की आवाज जोर-शोर से गूंजी। इस अवसर पर कुल 19 शिकायतें दर्ज की गईं, जिनमें सड़क, पानी और बिजली से जुड़ी समस्याएँ मुख्य रूप से सामने आईं।1
- उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले के पूरनपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की बदइंतजामी का एक ताजा मामला सामने आया है। अस्पताल परिसर में स्थित प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र के कर्मचारियों की घोर लापरवाही उजागर हुई है, जहाँ सुबह 10 बजे खुलने वाला केंद्र 11 बजने के बाद भी पूरी तरह से बंद पाया गया। इस अव्यवस्था का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने सरकार के स्वास्थ्य दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़े अंतर को स्पष्ट किया है। वायरल वीडियो के अनुसार, निर्धारित समय सुबह 10 बजे के बाद भी जन औषधि केंद्र का शटर गिरा हुआ था और वहाँ कोई भी कर्मचारी मौजूद नहीं था। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दर्जनों मरीज और उनके तीमारदार, जिनमें महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे शामिल हैं, अस्पताल परिसर में भीषण गर्मी और धूप के बीच खुले में बैठकर दवाइयां मिलने का इंतजार कर रहे थे। डॉक्टरों से पर्चा बनवाने के बावजूद, सरकारी मुलाजिमों के अपनी मर्जी से ड्यूटी पर आने के कारण मरीजों को सस्ती और जरूरी दवाइयां नहीं मिल पा रही थीं। वीडियो बनाने वाले एक स्थानीय नागरिक ने इस स्थिति पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। इस घटना के सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ भारी आक्रोश व्याप्त है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि यह वीडियो वायरल होने के बाद जिम्मेदार उच्च अधिकारी इन लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ क्या उचित कदम उठाते हैं।3