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लखीमपुर खीरी के पलिया वन रेंज के खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ 'मोनोकल्ड कोबरा' (चंद्र नाग) के निकलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों ने इसे पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण बताया और लोगों से सांपों को न मारने की अपील की।

7 hrs ago
user_FH.NEWS
FH.NEWS
Classified ads newspaper publisher पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
7 hrs ago

लखीमपुर खीरी के पलिया वन रेंज के खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ 'मोनोकल्ड कोबरा' (चंद्र नाग) के निकलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों ने इसे पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण बताया और लोगों से सांपों को न मारने की अपील की।

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  • @मनदीप मकान बिक्री के लिए जिस किसी को खरीदा है सड़क पर संपर्क करें
    1
    @मनदीप
मकान बिक्री के लिए जिस किसी को खरीदा है सड़क पर संपर्क करें
    user_Mandeep Singh
    Mandeep Singh
    Farmer पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • युवकों को भीरा पुलिस ने थाने में जमकर पीटा -राजनीति दबाव के चलते एक पक्षीय है की कार्रवाई दो युवकों को भीरा पुलिस ने थाने में जमकर पीटा -राजनीति दबाव के चलते एक पक्षीय है की कार्रवाई पलिया कलां। भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगदेवपुर के मजरा मेडईपुरवा में हुई मारपीट में दोनों तरफ के लोग चोटिल हुए थे। जिन पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की। इसमें से एक पक्ष पर पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते चोटिल एक युवक को थाने में जमकर पीटा और न्यायलय के समक्ष भेज दिया। आपको बता दें बीती गुरुवार को मेडईपुरवा थाना भीरा निवासी गोलू मिश्रा पुत्र मनकेश मिश्रा के साथ गांव निवासी आशुतोष, जितेन, धर्मेन्द्र, रामजी व बीरेन्द्र पुत्र रोशनलाल नें अकारण गाली देकर लाठी डन्डा व धारदार हथियार से घर में घुसकरमारा पीटा जिसमे गोलू को बचाने आये नितिन व लकी पुत्रगण अखिलेश मिश्रा व मनोरमा देवी, आरती देवी व नन्ही देवी को मारा पीटा, जिसमे सभी को गहरी चोट लगी। वहीं बचाव के दौरान विपक्षी भी चोटिल हुए। इसके बाद भीरा पुलिस मैं कार्रवाई करते हुए दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज कर लिया था। रविवार को थाना प्रभारी रोहित दुबे पुलिस बल के साथ मेडईपुरवा पहुंचे और खेत पर काम कर रहे बादल मिश्रा व उसके मामा सनेही शुक्ला को जबरदस्ती गाड़ी में बैठ कर थाने ले गए। जहां पर विपक्षी नें थाना प्रभारी रोहित दुबे पर राजनीतिक दबाव बनाकर बादल मिश्रा व सनेही को थाने में गौड़ सिपाही से जमकर पिटवाया और 151 कार्रवाई करते हुए एसडीएम कोर्ट तहसील पलिया भेज दिया। जहां पर मौजूद मीडिया कर्मियों को बादल मिश्रा व सनेही शुक्ला ने बताया की थाना प्रभारी रोहित दुबे ने उनके साथ गाली गलौज करते हुए गौड़ सिपाही से जमकर पिटवाया। मेरे घाव पर उन्होंने मारा जिससे कही निशान न मिले। मेरा खून रिसता रहा लेकिन उन्होंने मारना बंद नहीं किया। जब की स्नेही शुक्ला पर ना तो मुकदमा दर्ज है ना ही कोई आरोप है इसके बावजूद बेवजह पुलिस उसको उठा कर ले गई और थाने में पीटा है। वर्जन - बादल मिश्र व सनेही शुक्ला व विपक्षी एक व्यक्ति को उठाकर थाने लाया गया था। यहां पर बादल मिश्रा बेवजह महिला सिपाहियों को गाली दे रहा था। जिसके चलते हो सकता है उसको मारा गया हो, फिलहाल मेरे द्वारा उसके साथ मारपीट नहीं की गई वह जो भी आरोप लगा रहा है, वह गलत है। रोहित दुबे - थाना प्रभारी भीरा
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    युवकों को भीरा पुलिस ने थाने में जमकर पीटा
-राजनीति दबाव के चलते एक पक्षीय है की कार्रवाई
दो युवकों को भीरा पुलिस ने थाने में जमकर पीटा
-राजनीति दबाव के चलते एक पक्षीय है की कार्रवाई
पलिया कलां। भीरा थाना क्षेत्र के ग्राम जगदेवपुर के मजरा मेडईपुरवा में हुई मारपीट में दोनों तरफ के लोग चोटिल हुए थे। जिन पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर कार्यवाही की। इसमें से एक पक्ष पर पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते चोटिल एक युवक को थाने में जमकर पीटा और न्यायलय के समक्ष भेज दिया।
आपको बता दें बीती गुरुवार को मेडईपुरवा थाना भीरा निवासी गोलू मिश्रा पुत्र मनकेश मिश्रा के साथ गांव निवासी आशुतोष, जितेन, धर्मेन्द्र, रामजी व बीरेन्द्र पुत्र रोशनलाल नें अकारण गाली देकर लाठी डन्डा व धारदार हथियार से घर में घुसकरमारा पीटा जिसमे गोलू को बचाने आये नितिन व लकी पुत्रगण अखिलेश मिश्रा व मनोरमा देवी,  आरती देवी व नन्ही देवी को मारा पीटा, जिसमे सभी को गहरी चोट लगी। वहीं बचाव के दौरान विपक्षी भी चोटिल हुए। इसके बाद भीरा पुलिस मैं कार्रवाई करते हुए दोनों तरफ से मुकदमा दर्ज कर लिया था। रविवार को थाना प्रभारी रोहित दुबे पुलिस बल के साथ मेडईपुरवा पहुंचे और खेत पर काम कर रहे बादल मिश्रा व उसके मामा सनेही शुक्ला को जबरदस्ती गाड़ी में बैठ कर थाने ले गए। जहां पर विपक्षी नें थाना प्रभारी रोहित दुबे पर राजनीतिक दबाव बनाकर बादल मिश्रा व सनेही को थाने में गौड़ सिपाही से जमकर पिटवाया और 151 कार्रवाई करते हुए एसडीएम कोर्ट तहसील पलिया भेज दिया। जहां पर मौजूद मीडिया कर्मियों को बादल मिश्रा व सनेही शुक्ला ने बताया की थाना प्रभारी रोहित दुबे ने उनके साथ गाली गलौज करते हुए गौड़ सिपाही से जमकर पिटवाया। मेरे घाव पर उन्होंने मारा जिससे कही निशान न मिले। मेरा खून रिसता रहा लेकिन उन्होंने मारना बंद नहीं किया। जब की स्नेही शुक्ला पर ना तो मुकदमा दर्ज है ना ही कोई आरोप है इसके बावजूद बेवजह पुलिस उसको उठा कर ले गई और थाने में पीटा है। 
वर्जन -
बादल मिश्र व सनेही शुक्ला व विपक्षी एक व्यक्ति को उठाकर थाने लाया गया था। यहां पर बादल मिश्रा बेवजह महिला सिपाहियों को गाली दे रहा था। जिसके चलते हो सकता है उसको मारा गया हो, फिलहाल मेरे द्वारा उसके साथ मारपीट नहीं की गई वह जो भी आरोप लगा रहा है, वह गलत है।
रोहित दुबे - थाना प्रभारी भीरा
    user_Aman kumar gupta
    Aman kumar gupta
    पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • *लखनऊ में प्रदर्शन से पहले माले नेताओं की घेराबंदी, हाउस अरेस्ट किए कामरेड नेता* संजय कुमार तहसील प्रभारी *विधानसभा का घेराव से पहले सख्त हुआ प्रशासन रात नौ बजे से ही पलिया से आरती राय,कमलेश राय,निघासन से रामदास व रंजीत,मैलानी से जवाहर को हाउस अरेस्ट किया गया ।* *विधानसभा घेराव का मुख्य उद्देश्य था प्रदर्शन में गिरफ्तार 600 मजदूर को बिना शर्त के रिहा करें।* *प्रदेश के सभी मजदूरों की न्यूनतम आयु प्रतिमा 44000 सुनिश्चित की जाए।* पलिया कलां खीरी:- पुलिस की कड़ी घेराबंदी और **नजरबंदी (House Arrest)** के बावजूद कार्यकर्ताओं का विधानसभा तक पहुँचना आंदोलन की तीव्रता को दर्शाता है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य रिहाई और न्याय के लिए था। आज के *'विधानसभा घेराव'* का प्राथमिक लक्ष्य उन 600 मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करना था, जिन्हें अप्रैल में नोएडा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। अप्रैल 2026 में नोएडा के सेक्टर-80 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 42,000 मजदूरों ने न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस ने 'साजिश' और 'दंगे' का आरोप लगाते हुए सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। जिनमें से 600 प्रमुख कार्यकर्ताओं को अब तक रिहा नहीं किया गया है। पुलिस की 'हाउस अरेस्ट' कार्रवाई प्रशासन ने आज के प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। लखनऊ के लालकुआं स्थित भाकपा (माले) के राज्य कार्यालय और राज्य सचिव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के आवास पर सुबह से ही पुलिस का पहरा बैठा दिया गया ताकि वे विधानसभा तक न पहुँच सकें और सीमाओं पर चेकिंग सीतापुर, बाराबंकी और कानपुर रोड से आने वाले कार्यकर्ताओं को बसों और ट्रेनों से उतरते ही रोकने की कोशिश की गई। फिर भी 'चोरी-चुपके' विधानसभा पहुँचे कार्यकर्ता जैसा कि आपने उल्लेख किया, पुलिस की इतनी सख्ती के बावजूद आंदोलन की रणनीति सफल रही। कई कार्यकर्ता सादे कपड़ों में या टुकड़ियों में अलग-अलग रास्तों से होते हुए विधानसभा के गेट तक पहुँचने में सफल रहे। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अचानक नारेबाजी शुरू की और अपनी मांगों के पोस्टर लहराए, जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मजदूरों की मांगें विधानसभा तक पहुँचे और हाउस अरेस्ट किए गए नेताओं की प्रमुख मांगें ये हैं कि नोएडा और मानेसर के गिरफ्तार मजदूरों पर दर्ज *'फर्जी मुकदमे'* वापस लिए जाएं। *नए *लेबर कोड को रद्द किया जाए। श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की गारंटी दी जाए। आरती राय ने बताया कि सत्ता पक्ष कहीं ना कहीं यह दमन का कार्य कर रही है सरकार कम्युनिस्ट से भयभीत है इसीलिए उन्होंने कार्यक्रम से पहले ही हम लोगों का हाउस अरेस्ट कर दिया। किंतु हमारे को साथी कम संख्या में ही सही किंतु विधानसभा पहुंचकर अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं और हम यहां से मीडिया के माध्यम से उनका धन्यवाद कर रहे हैं कि जो जनता की आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हो श्रेष्ठ यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं सत्ता पक्ष कमिश्नर से डरी हुई है इसलिए उन्होंने जगह-जगह पर हमारे साथियों को हाउस अरेस्ट किया है। *लखनऊ में प्रदर्शन से पहले माले नेताओं की घेराबंदी, हाउस अरेस्ट किए कामरेड नेता* NEWS 🌍 WORLD 24X7 *विधानसभा का घेराव से पहले सख्त हुआ प्रशासन रात नौ बजे से ही पलिया से आरती राय,कमलेश राय,निघासन से रामदास व रंजीत,मैलानी से जवाहर को हाउस अरेस्ट किया गया ।* *विधानसभा घेराव का मुख्य उद्देश्य था प्रदर्शन में गिरफ्तार 600 मजदूर को बिना शर्त के रिहा करें।* *प्रदेश के सभी मजदूरों की न्यूनतम आयु प्रतिमा 44000 सुनिश्चित की जाए।* पलिया कलां खीरी:- पुलिस की कड़ी घेराबंदी और **नजरबंदी (House Arrest)** के बावजूद कार्यकर्ताओं का विधानसभा तक पहुँचना आंदोलन की तीव्रता को दर्शाता है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य रिहाई और न्याय के लिए था। आज के *'विधानसभा घेराव'* का प्राथमिक लक्ष्य उन 600 मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करना था, जिन्हें अप्रैल में नोएडा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था। अप्रैल 2026 में नोएडा के सेक्टर-80 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 42,000 मजदूरों ने न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस ने 'साजिश' और 'दंगे' का आरोप लगाते हुए सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। जिनमें से 600 प्रमुख कार्यकर्ताओं को अब तक रिहा नहीं किया गया है। पुलिस की 'हाउस अरेस्ट' कार्रवाई प्रशासन ने आज के प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। लखनऊ के लालकुआं स्थित भाकपा (माले) के राज्य कार्यालय और राज्य सचिव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के आवास पर सुबह से ही पुलिस का पहरा बैठा दिया गया ताकि वे विधानसभा तक न पहुँच सकें और सीमाओं पर चेकिंग सीतापुर, बाराबंकी और कानपुर रोड से आने वाले कार्यकर्ताओं को बसों और ट्रेनों से उतरते ही रोकने की कोशिश की गई। फिर भी 'चोरी-चुपके' विधानसभा पहुँचे कार्यकर्ता जैसा कि आपने उल्लेख किया, पुलिस की इतनी सख्ती के बावजूद आंदोलन की रणनीति सफल रही। कई कार्यकर्ता सादे कपड़ों में या टुकड़ियों में अलग-अलग रास्तों से होते हुए विधानसभा के गेट तक पहुँचने में सफल रहे। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अचानक नारेबाजी शुरू की और अपनी मांगों के पोस्टर लहराए, जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मजदूरों की मांगें विधानसभा तक पहुँचे और हाउस अरेस्ट किए गए नेताओं की प्रमुख मांगें ये हैं कि नोएडा और मानेसर के गिरफ्तार मजदूरों पर दर्ज *'फर्जी मुकदमे'* वापस लिए जाएं। *नए *लेबर कोड को रद्द किया जाए। श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की गारंटी दी जाए। आरती राय ने बताया कि सत्ता पक्ष कहीं ना कहीं यह दमन का कार्य कर रही है सरकार कम्युनिस्ट से भयभीत है इसीलिए उन्होंने कार्यक्रम से पहले ही हम लोगों का हाउस अरेस्ट कर दिया। किंतु हमारे को साथी कम संख्या में ही सही किंतु विधानसभा पहुंचकर अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं और हम यहां से मीडिया के माध्यम से उनका धन्यवाद कर रहे हैं कि जो जनता की आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हो श्रेष्ठ यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं सत्ता पक्ष कमिश्नर से डरी हुई है इसलिए उन्होंने जगह-जगह पर हमारे साथियों को हाउस अरेस्ट किया है।
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    *लखनऊ में प्रदर्शन से पहले माले नेताओं की घेराबंदी, हाउस अरेस्ट किए कामरेड नेता*


संजय कुमार तहसील प्रभारी

*विधानसभा का घेराव से पहले सख्त हुआ प्रशासन रात नौ बजे से ही पलिया से आरती राय,कमलेश राय,निघासन से रामदास व रंजीत,मैलानी से जवाहर को हाउस अरेस्ट किया गया ।* 

*विधानसभा घेराव का मुख्य उद्देश्य था प्रदर्शन में गिरफ्तार 600 मजदूर को बिना शर्त के रिहा करें।*

*प्रदेश के सभी मजदूरों की न्यूनतम आयु प्रतिमा 44000 सुनिश्चित की जाए।*



पलिया कलां खीरी:- पुलिस की कड़ी घेराबंदी और **नजरबंदी (House Arrest)** के बावजूद कार्यकर्ताओं का विधानसभा तक पहुँचना आंदोलन की तीव्रता को दर्शाता है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य रिहाई और न्याय के लिए था। आज के *'विधानसभा घेराव'* का प्राथमिक लक्ष्य उन 600 मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करना था, जिन्हें अप्रैल में नोएडा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
अप्रैल 2026 में नोएडा के सेक्टर-80 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 42,000 मजदूरों ने न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस ने 'साजिश' और 'दंगे' का आरोप लगाते हुए सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। जिनमें से 600 प्रमुख कार्यकर्ताओं को अब तक रिहा नहीं किया गया है। पुलिस की 'हाउस अरेस्ट' कार्रवाई
प्रशासन ने आज के प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। लखनऊ के लालकुआं स्थित भाकपा (माले) के राज्य कार्यालय और राज्य सचिव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के आवास पर सुबह से ही पुलिस का पहरा बैठा दिया गया ताकि वे विधानसभा तक न पहुँच सकें और सीमाओं पर चेकिंग सीतापुर, बाराबंकी और कानपुर रोड से आने वाले कार्यकर्ताओं को बसों और ट्रेनों से उतरते ही रोकने की कोशिश की गई। फिर भी 'चोरी-चुपके' विधानसभा पहुँचे कार्यकर्ता
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 *नए *लेबर कोड को रद्द किया जाए। श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की गारंटी दी जाए। आरती राय ने बताया कि सत्ता पक्ष कहीं ना कहीं यह दमन का कार्य कर रही है सरकार कम्युनिस्ट से भयभीत है इसीलिए उन्होंने कार्यक्रम से पहले ही हम लोगों का हाउस अरेस्ट कर दिया। किंतु हमारे को साथी कम संख्या में ही सही किंतु विधानसभा पहुंचकर अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं और हम यहां से मीडिया के माध्यम से उनका धन्यवाद कर रहे हैं कि जो जनता की आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हो श्रेष्ठ यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं सत्ता पक्ष कमिश्नर से डरी हुई है इसलिए उन्होंने जगह-जगह पर हमारे साथियों को हाउस अरेस्ट किया है।
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*विधानसभा का घेराव से पहले सख्त हुआ प्रशासन रात नौ बजे से ही पलिया से आरती राय,कमलेश राय,निघासन से रामदास व रंजीत,मैलानी से जवाहर को हाउस अरेस्ट किया गया ।* 
*विधानसभा घेराव का मुख्य उद्देश्य था प्रदर्शन में गिरफ्तार 600 मजदूर को बिना शर्त के रिहा करें।*
*प्रदेश के सभी मजदूरों की न्यूनतम आयु प्रतिमा 44000 सुनिश्चित की जाए।*
पलिया कलां खीरी:- पुलिस की कड़ी घेराबंदी और **नजरबंदी (House Arrest)** के बावजूद कार्यकर्ताओं का विधानसभा तक पहुँचना आंदोलन की तीव्रता को दर्शाता है। प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य रिहाई और न्याय के लिए था। आज के *'विधानसभा घेराव'* का प्राथमिक लक्ष्य उन 600 मजदूर नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई की मांग करना था, जिन्हें अप्रैल में नोएडा आंदोलन के दौरान गिरफ्तार किया गया था।
अप्रैल 2026 में नोएडा के सेक्टर-80 और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 42,000 मजदूरों ने न्यूनतम वेतन वृद्धि की मांग को लेकर प्रदर्शन किया था। उस दौरान पुलिस ने 'साजिश' और 'दंगे' का आरोप लगाते हुए सैकड़ों लोगों को हिरासत में लिया था। जिनमें से 600 प्रमुख कार्यकर्ताओं को अब तक रिहा नहीं किया गया है। पुलिस की 'हाउस अरेस्ट' कार्रवाई
प्रशासन ने आज के प्रदर्शन को रोकने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। लखनऊ के लालकुआं स्थित भाकपा (माले) के राज्य कार्यालय और राज्य सचिव सहित कई वरिष्ठ नेताओं के आवास पर सुबह से ही पुलिस का पहरा बैठा दिया गया ताकि वे विधानसभा तक न पहुँच सकें और सीमाओं पर चेकिंग सीतापुर, बाराबंकी और कानपुर रोड से आने वाले कार्यकर्ताओं को बसों और ट्रेनों से उतरते ही रोकने की कोशिश की गई। फिर भी 'चोरी-चुपके' विधानसभा पहुँचे कार्यकर्ता
जैसा कि आपने उल्लेख किया, पुलिस की इतनी सख्ती के बावजूद आंदोलन की रणनीति सफल रही। कई कार्यकर्ता सादे कपड़ों में या टुकड़ियों में अलग-अलग रास्तों से होते हुए विधानसभा के गेट तक पहुँचने में सफल रहे। वहाँ पहुँचकर उन्होंने अचानक नारेबाजी शुरू की और अपनी मांगों के पोस्टर लहराए, जिससे पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया। मजदूरों की मांगें
विधानसभा तक पहुँचे और हाउस अरेस्ट किए गए नेताओं की प्रमुख मांगें ये हैं कि नोएडा और मानेसर के गिरफ्तार मजदूरों पर दर्ज *'फर्जी मुकदमे'* वापस लिए जाएं।
*नए *लेबर कोड को रद्द किया जाए। श्रमिकों के लिए सम्मानजनक न्यूनतम वेतन और सुरक्षित कार्य परिस्थितियों की गारंटी दी जाए। आरती राय ने बताया कि सत्ता पक्ष कहीं ना कहीं यह दमन का कार्य कर रही है सरकार कम्युनिस्ट से भयभीत है इसीलिए उन्होंने कार्यक्रम से पहले ही हम लोगों का हाउस अरेस्ट कर दिया। किंतु हमारे को साथी कम संख्या में ही सही किंतु विधानसभा पहुंचकर अपनी आवाज को बुलंद कर रहे हैं और हम यहां से मीडिया के माध्यम से उनका धन्यवाद कर रहे हैं कि जो जनता की आवाज को सरकार के कानों तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। हो श्रेष्ठ यह दर्शाता है कि कहीं ना कहीं सत्ता पक्ष कमिश्नर से डरी हुई है इसलिए उन्होंने जगह-जगह पर हमारे साथियों को हाउस अरेस्ट किया है।
    user_Sanjay Kumar
    Sanjay Kumar
    पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • ग्राम पटीहन के खुशीपुर में निकला दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा, किया गया रेस्क्यू, ग्रामीणों में फैली दहशत पलिया कलां। दुधवा टाइगर रिजर्व के पलिया वन रेंज पटीहन के ग्राम खुशीपुर में बीते दिन शनिवार शाम करीब 7:00 बजे एक दुर्लभ सांप निकलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मौके पर राम गोविंद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। जहां सांप का सुरक्षित रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है । जानकारी देते हुए रामगोविन्द ने बताया कि यह एक अत्यंत विषैला 'मोनोकल्ड कोबरा' है, जिसे स्थानीय भाषा में 'चंद्र नाग' कहा जाता है और यह प्रजाति क्षेत्र में बहुत कम देखी जाती है और पर्यावरण के संतुलन के लिए वन्य जीवों का संरक्षण अनिवार्य है। हालांकि टीम ने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार का सांप दिखाई देने पर उसे मारें नहीं, बल्कि विशेषज्ञों को सूचना दें। साथ ही हिदायत दी कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय सीधे अस्पताल जाएं।
    1
    ग्राम पटीहन के खुशीपुर में निकला दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा, किया गया रेस्क्यू, ग्रामीणों में फैली दहशत
पलिया कलां। दुधवा टाइगर रिजर्व के पलिया वन रेंज पटीहन के ग्राम खुशीपुर में बीते दिन शनिवार शाम करीब 7:00 बजे एक दुर्लभ सांप निकलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही मौके पर राम गोविंद रेस्क्यू टीम मौके पर पहुंची। जहां सांप का सुरक्षित रेस्क्यू कर सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया है ।
जानकारी देते हुए रामगोविन्द ने बताया कि यह एक अत्यंत विषैला 'मोनोकल्ड कोबरा' है, जिसे स्थानीय भाषा में 'चंद्र नाग' कहा जाता है और यह प्रजाति क्षेत्र में बहुत कम देखी जाती है और पर्यावरण के संतुलन के लिए वन्य जीवों का संरक्षण अनिवार्य है। हालांकि टीम ने लोगों से अपील की कि किसी भी प्रकार का सांप दिखाई देने पर उसे मारें नहीं, बल्कि विशेषज्ञों को सूचना दें। साथ ही हिदायत दी कि सर्पदंश की स्थिति में झाड़-फूंक के बजाय सीधे अस्पताल जाएं।
    user_साइना
    साइना
    Local News Reporter पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी के पलिया स्थित खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा देखे जाने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे वन विभाग की टीम ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
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    लखीमपुर खीरी के पलिया स्थित खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा देखे जाने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंचे वन विभाग की टीम ने सांप को सुरक्षित रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ा, जिसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली।
    user_FH.NEWS
    FH.NEWS
    Classified ads newspaper publisher पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी के पलिया स्थित खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा (चंद्र नाग) निकलने से हड़कंप मच गया। यह अत्यंत विषैला सांप है जो इस क्षेत्र में बहुत कम देखा जाता है, जिसे रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों ने लोगों से सांपों को न मारने और सर्पदंश की स्थिति में सीधे अस्पताल जाने की अपील की है।
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    लखीमपुर खीरी के पलिया स्थित खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा (चंद्र नाग) निकलने से हड़कंप मच गया। यह अत्यंत विषैला सांप है जो इस क्षेत्र में बहुत कम देखा जाता है, जिसे रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों ने लोगों से सांपों को न मारने और सर्पदंश की स्थिति में सीधे अस्पताल जाने की अपील की है।
    user_Rida
    Rida
    Local News Reporter पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी के पलिया में शनिवार शाम एक दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा ('चंद्र नाग') निकलने से हड़कंप मच गया। अत्यधिक विषैले इस सांप को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया, जो इलाके में कम ही देखा जाता है। टीम ने लोगों से सांपों को न मारने और सर्पदंश पर सीधे अस्पताल जाने की अपील की है।
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    लखीमपुर खीरी के पलिया में शनिवार शाम एक दुर्लभ मोनोकल्ड कोबरा ('चंद्र नाग') निकलने से हड़कंप मच गया। अत्यधिक विषैले इस सांप को रेस्क्यू टीम ने सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया, जो इलाके में कम ही देखा जाता है। टीम ने लोगों से सांपों को न मारने और सर्पदंश पर सीधे अस्पताल जाने की अपील की है।
    user_Mo Daud
    Mo Daud
    Local News Reporter पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    7 hrs ago
  • लखीमपुर खीरी के पलिया वन रेंज के खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ 'मोनोकल्ड कोबरा' (चंद्र नाग) के निकलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों ने इसे पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण बताया और लोगों से सांपों को न मारने की अपील की।
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    लखीमपुर खीरी के पलिया वन रेंज के खुशीपुर गांव में एक दुर्लभ 'मोनोकल्ड कोबरा' (चंद्र नाग) के निकलने से ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम ने सांप को सुरक्षित पकड़कर जंगल में छोड़ दिया। विशेषज्ञों ने इसे पर्यावरण संतुलन के लिए महत्वपूर्ण बताया और लोगों से सांपों को न मारने की अपील की।
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