‘रामराज्य’ में पानी बेचना 'अपराध', स्मैक बेचना 'व्यापार': अयोध्या पुलिस के ‘शौर्य’ की अद्भुत दास्तान अजीत मिश्रा (खोजी) रामनगरी अयोध्या की पुलिस इन दिनों एक नए ‘मिशन’ पर है। मिशन—शहर को ‘अतिक्रमण’ से मुक्त कराना! और इस महान, ऐतिहासिक मिशन में पुलिस के हत्थे चढ़ा एक खूंखार, खतरनाक, अंतरराष्ट्रीय अपराधी—सरयू तट पर 10 रुपये की पानी की बोतल बेचने वाला दीपक कुमार सिंह! वाह रे खाकी! क्या वीरता दिखाई है! खाकी की 'बहादुरी': 10 रुपये की बोतल के पीछे खाकी का ‘ऑपरेशन’ ज़रा दृश्य की कल्पना कीजिए। एक तरफ वो 'सफ़ेदपोश' और नशा-माफिया हैं, जो गांजा और स्मैक की पुड़िया खुलेआम बेच रहे हैं। उनके आगे हमारी पुलिस बिल्कुल नतमस्तक है— नम्र, संस्कारी और एकदम मौन। लेकिन जैसे ही 10 रुपये की पानी की बोतल लेकर दीपक नज़र आता है, पुलिस की 'दबंगई' का मीटर चालू हो जाता है! खाकी की फुर्ती: गांजा बेचने वालों को देखकर जो पुलिस 'गांधी जी के बंदर' बन जाती है, वही पुलिस पानी बेचने वाले गरीब के पीछे ऐसे दौड़ी मानो कोई वांछित आतंकवादी भाग रहा हो। सफलता का पैमाना: नतीजा? दीपक बदहवास होकर गिरा और उसकी सांसें थम गईं। खाकी का 'अतिक्रमण हटाओ अभियान' शत-प्रतिशत सफल रहा! एक गरीब की ज़िंदगी ही खत्म हो गई, न रहेगा दीपक, न बेचेगा पानी! बिलखती पत्नी, मासूम का सवाल और 'साहब' का सन्नाटा गोद में मासूम बच्चे को लिए बिलख-बिलखकर रोती मनीषा देवी के आंसू इस चमकती-दमकती अयोध्या की दीवारों पर एक बदनुमा दाग की तरह छप गए हैं। "मासूम बच्चा अपनी माँ की गोद में रो रहा है, और व्यवस्था अपनी जेब में हफ़्ते की कमाई गिन रही है। साहब की गाड़ियों का हूटर बजता रहेगा, लेकिन उस अबोध बच्चे की सिसकी किसी साहब के केबिन का शीशा नहीं तोड़ पाएगी।" अब सवाल यह है कि क्या कप्तान साहब (SSP) इस 'शौर्य गाथा' पर अपने जाबांज़ सिपाहियों को मेडल देंगे? या फिर हमेशा की तरह एक घिसा-पिटा सरकारी बयान जारी होगा—"मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, कानून अपना काम कर रहा है!" 'सिंडिकेट' के आगे सरेंडर, गरीब के सीने पर बुलडोजर अयोध्या पुलिस की इस अनूठी कार्यशैली से कुछ बातें तो शीशे की तरह साफ हो चुकी हैं: नशा बेचना व्यापार है: अगर आप स्मैक या गांजा बेचते हैं, तो आप पुलिस के 'संरक्षित' ग्राहक हैं। आपको कोई नहीं दौड़ाएगा। पानी बेचना जघन्य अपराध है: अगर आप ईमानदारी से मेहनत करके दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं, तो आपकी जान की कीमत कौड़ी के भाव है। कानून का दोहरा मापदंड: अपराधियों के आगे नतमस्तक होना और लाचारों पर डंडा चलाना ही अगर 'स्मार्ट पुलिसिंग' है, तो फिर इस व्यवस्था पर शर्म शब्द भी छोटा पड़ता है। अब देखना यह है कि कानून के रखवालों की इस 'अद्भुत बहादुरी' पर शासन-प्रशासन की नींद खुलती है या फिर यह फाइल भी किसी गरीब की चीख के साथ फाइलों के नीचे दबा दी जाएगी! #AyodhyaPolice #ShauryaGatha #SmartPolicing #JusticeForDeepak #UpPolice #SaryuGhat #MediaReport
‘रामराज्य’ में पानी बेचना 'अपराध', स्मैक बेचना 'व्यापार': अयोध्या पुलिस के ‘शौर्य’ की अद्भुत दास्तान अजीत मिश्रा (खोजी) रामनगरी अयोध्या की पुलिस इन दिनों एक नए ‘मिशन’ पर है। मिशन—शहर को ‘अतिक्रमण’ से मुक्त कराना! और इस महान, ऐतिहासिक मिशन में पुलिस के हत्थे चढ़ा एक खूंखार, खतरनाक, अंतरराष्ट्रीय अपराधी—सरयू तट पर 10 रुपये की पानी की बोतल बेचने वाला दीपक कुमार सिंह! वाह रे खाकी! क्या वीरता दिखाई है! खाकी की 'बहादुरी': 10 रुपये की बोतल के पीछे खाकी का ‘ऑपरेशन’ ज़रा दृश्य की कल्पना कीजिए। एक तरफ वो 'सफ़ेदपोश' और नशा-माफिया हैं, जो गांजा और स्मैक की पुड़िया खुलेआम बेच रहे हैं। उनके आगे हमारी पुलिस बिल्कुल नतमस्तक है— नम्र, संस्कारी और एकदम मौन। लेकिन जैसे ही 10 रुपये की पानी की बोतल लेकर दीपक नज़र आता है, पुलिस की 'दबंगई' का मीटर चालू हो जाता है! खाकी की फुर्ती: गांजा बेचने वालों को देखकर जो पुलिस 'गांधी जी के बंदर' बन जाती है, वही पुलिस पानी बेचने वाले गरीब के पीछे ऐसे दौड़ी मानो कोई वांछित आतंकवादी भाग रहा हो। सफलता का पैमाना: नतीजा? दीपक बदहवास होकर गिरा और उसकी सांसें थम गईं। खाकी का 'अतिक्रमण हटाओ अभियान' शत-प्रतिशत सफल रहा! एक गरीब की ज़िंदगी ही खत्म हो गई, न रहेगा दीपक, न बेचेगा पानी! बिलखती पत्नी, मासूम का सवाल और 'साहब' का सन्नाटा गोद में मासूम बच्चे को लिए बिलख-बिलखकर रोती मनीषा देवी के आंसू इस चमकती-दमकती अयोध्या की दीवारों पर एक बदनुमा दाग की तरह छप गए हैं। "मासूम बच्चा अपनी माँ की गोद में रो रहा है, और व्यवस्था अपनी जेब में हफ़्ते की कमाई गिन रही है। साहब की गाड़ियों का हूटर बजता रहेगा, लेकिन उस अबोध बच्चे की सिसकी किसी साहब के केबिन का शीशा नहीं तोड़ पाएगी।" अब सवाल यह है कि क्या कप्तान साहब (SSP) इस 'शौर्य गाथा' पर अपने जाबांज़ सिपाहियों को मेडल देंगे? या फिर हमेशा की तरह एक घिसा-पिटा सरकारी बयान जारी होगा—"मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं, कानून अपना काम कर रहा है!" 'सिंडिकेट' के आगे सरेंडर, गरीब के सीने पर बुलडोजर अयोध्या पुलिस की इस अनूठी कार्यशैली से कुछ बातें तो शीशे की तरह साफ हो चुकी हैं: नशा बेचना व्यापार है: अगर आप स्मैक या गांजा बेचते हैं, तो आप पुलिस के 'संरक्षित' ग्राहक हैं। आपको कोई नहीं दौड़ाएगा। पानी बेचना जघन्य अपराध है: अगर आप ईमानदारी से मेहनत करके दो वक्त की रोटी कमाना चाहते हैं, तो आपकी जान की कीमत कौड़ी के भाव है। कानून का दोहरा मापदंड: अपराधियों के आगे नतमस्तक होना और लाचारों पर डंडा चलाना ही अगर 'स्मार्ट पुलिसिंग' है, तो फिर इस व्यवस्था पर शर्म शब्द भी छोटा पड़ता है। अब देखना यह है कि कानून के रखवालों की इस 'अद्भुत बहादुरी' पर शासन-प्रशासन की नींद खुलती है या फिर यह फाइल भी किसी गरीब की चीख के साथ फाइलों के नीचे दबा दी जाएगी! #AyodhyaPolice #ShauryaGatha #SmartPolicing #JusticeForDeepak #UpPolice #SaryuGhat #MediaReport
- शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद महाराज ने इंटरव्यू लेने वाले का ही इंटरव्यू ले लिया। उन्होंने कहा कि, “9 साल से योगी आदित्यनाथ सत्ता में बैठे हैं और आप कहते हो कि हम अखिलेश यादव से सवाल पूछें”1
- दिनाँक:-3-8-2026 ई0, शिकायत है :- "लापरवाह और आलसी सिस्टम " ❗ 👉🏾 वरिष्ठ शास्निक, प्रशासनिक अधिकारियों का लापरवाही एवं उदासीन रवैया का यह प्रमाण है ❗👈 ग्राम पंचायत भगवानपुर, ब्लाक बघौली, पुलिस स्टेशन बखिरा, तहसील खलीलाबाद, जनपद संत कबीर नगर, परगना (मगहरपुर्व ) उत्तर प्रदेश। यह समस्या अन्य भंडारण केंद्र (गोदाम) से जुड़ा हुआ है । ➡️ पिछले एक वर्ष से ग्राम पंचायत भगवानपुर में अंन्न भन्डारण केंद्र का निर्माण किया जा रहा है । इस गोदाम का निर्माण पिछले 1 वर्ष से चल रहा है । ‼️ लेकिन लापरवाह एवं आलसी तथा उदासीन रवैया के कारण यह अभी तक बनकर तैयार नहीं हुआ है ‼️ जैसा की स्पष्ट फोटो में दिखाई दे रहा है कि 👉🏾 यह आधा अधूरा काम करके छोड़ दिया गया है । किसी भी अधिकारी को इसकी चिंता नहीं है कि यह अभी तक क्यों नहीं तैयार हुआ ⁉️ और अधिकारी समुदाय चिंता कर भी नहीं सकते क्योंकि उनकी जांच पड़ताल करने वाला कौन है ⁉️ जब जांच पड़ताल करने वाली टीम ही बिक जाए तो पब्लिक को मिलने वाली सुविधाएं भगवान के सहारे चलता है । ➡️ किसी को कोई सुविधा मिल गई तो चमत्कार समझे । स्पष्ट प्रमाण दिखाई दे रहा है । ‼️ स्पष्ट प्रमाण दे रहा हूं ‼️ सबसे बड़े विडम्बना तो यह है कि किसी भी समस्या के उपाय के लिए कोई भी अधिकारी जवाब नहीं देता है । जैसे उन्हें इन सब समाचारों से कोई मतलब नहीं है। सिर्फ उन्हें अपनी सैलरी और अपने सुख सुविधाओं , गाड़ियों से मतलब है । "ब्लॉक स्तर के यही विकास सेवाएं हैं"! ऐसे ही पब्लिक का विकास किया जा रहा है। 🔥 पब्लिक का विकास तो नहीं होता, लेकिन शासनिक प्रशासनिक अधिकारियों का विकास अवश्य हो रहा है। ब्लॉक / जिला / जनपद संत कबीर नगर के अधिकारी प्रमाणित करेंगे ⁉️ कि यह गोदाम कितने दिनों में तैयार होगा ❓ अगर यह बन भी गया तो यह चालू कब होगा ❓ यहां पर अनाज का वितरण कब प्रारंभ होगा ❓1
- 3 अगस्त 2026 को बीएसएफ से सेवानिवृत्ति वंतवार निवासी अमरजीत यादव का धनघटा में होगा ऐतिहासिक स्वागत । जनपद संत कबीर नगर के धनघटा विधानसभा के अंतर्गत वंतवार गांव के निवासी अमरजीत यादव बीएसएफ की सेवा से इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत होकर अपने पैतृक निवास स्थान आ रहे हैं जिनके स्वागत में उनके भतीजे सुग्रीव यादव ने क्षेत्र के सभी सम्मानित जनता नौजवान एवं समाज सेवकों को आमंत्रित किया है इस स्वागत में बिरहा कलाकार हरकेश यादव एवं रुचि विश्वकर्मा द्वारा बिरहा कार्यक्रम भी रखा गया है2
- *आज दिनांक 02.08.2026 को थाना कोतवाली खलीलाबाद को जिला अस्पताल संतकबीरनगर से प्राप्त मेमो के आधार पर जानकारी हुई कि गोरखाल खलीलाबाद में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाली एक छात्रा द्वारा प्रथम दृष्टया फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई है । उक्त घटना में पोस्मार्टम व प्रचलित अन्य विधिक कार्यवाही के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर द्वारा दी गई बाइट ।*1
- लापरवाही की हद: चंद रुपयों की बचत ने ली मजदूरों की जान आफत में! अजीत मिश्रा (खोजी) रायबरेली के ऊँचाहार क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर हमारे सिस्टम, ठेकेदारों की घोर लापरवाही और इंसानियत की गिरती कीमतों को बेनकाब कर दिया है। निर्माणाधीन 'जलसा मैरिज लॉन' की छत पर जैसे ही स्लैब (लेंटर) डालने का काम चल रहा था, वह अचानक भरभरा कर जमींदोज़ हो गई। सिर्फ कुछ सेकंड लगे और वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। इस हादसे में 10 मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से 4 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। बड़े सवाल जो सिस्टम और ठेकेदारों से पूछे जाने चाहिए: घटिया सामग्री का इस्तेमाल क्यों? क्या एक मजबूत छत ढालने के लिए जरूरी तकनीकी मानकों और मजबूत सरिया-सीमेंट की क्वालिटी को ताक पर रख दिया गया था? सुरक्षा के इंतजाम कहां थे? क्या मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) के मौत के मुहाने पर झोंक दिया गया था? प्रशासन की नींद कब खुलेगी? क्या अवैध और बिना मानक के चल रहे निर्माण कार्यों पर तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए? "सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई यह घटना सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि लालच और आपराधिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है।" यह गरीब मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए सुबह घर से निकलते हैं, लेकिन तथाकथित 'विकास' और 'आधुनिकता' की अंधी दौड़ में उन्हें सिर्फ जोखिम और दर्द मिलता है। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति करके मामले को रफा-दफा करता है या फिर इन बेकसूर मजदूरों का खून बहाने वाले लापरवाह ठेकेदार और मैरिज लॉन मालिक पर कठोरतम कार्रवाई होती है। जब तक ऐसे मामलों में सख्त मिसाल पेश नहीं की जाएगी, तब तक गरीबों की जिंदगी यूं ही मलबे के नीचे दबती रहेगी।1