लापरवाही की हद: चंद रुपयों की बचत ने ली मजदूरों की जान आफत में! अजीत मिश्रा (खोजी) रायबरेली के ऊँचाहार क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर हमारे सिस्टम, ठेकेदारों की घोर लापरवाही और इंसानियत की गिरती कीमतों को बेनकाब कर दिया है। निर्माणाधीन 'जलसा मैरिज लॉन' की छत पर जैसे ही स्लैब (लेंटर) डालने का काम चल रहा था, वह अचानक भरभरा कर जमींदोज़ हो गई। सिर्फ कुछ सेकंड लगे और वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। इस हादसे में 10 मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से 4 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। बड़े सवाल जो सिस्टम और ठेकेदारों से पूछे जाने चाहिए: घटिया सामग्री का इस्तेमाल क्यों? क्या एक मजबूत छत ढालने के लिए जरूरी तकनीकी मानकों और मजबूत सरिया-सीमेंट की क्वालिटी को ताक पर रख दिया गया था? सुरक्षा के इंतजाम कहां थे? क्या मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) के मौत के मुहाने पर झोंक दिया गया था? प्रशासन की नींद कब खुलेगी? क्या अवैध और बिना मानक के चल रहे निर्माण कार्यों पर तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए? "सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई यह घटना सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि लालच और आपराधिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है।" यह गरीब मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए सुबह घर से निकलते हैं, लेकिन तथाकथित 'विकास' और 'आधुनिकता' की अंधी दौड़ में उन्हें सिर्फ जोखिम और दर्द मिलता है। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति करके मामले को रफा-दफा करता है या फिर इन बेकसूर मजदूरों का खून बहाने वाले लापरवाह ठेकेदार और मैरिज लॉन मालिक पर कठोरतम कार्रवाई होती है। जब तक ऐसे मामलों में सख्त मिसाल पेश नहीं की जाएगी, तब तक गरीबों की जिंदगी यूं ही मलबे के नीचे दबती रहेगी।
लापरवाही की हद: चंद रुपयों की बचत ने ली मजदूरों की जान आफत में! अजीत मिश्रा (खोजी) रायबरेली के ऊँचाहार क्षेत्र से सामने आई एक दिल दहला देने वाली घटना ने एक बार फिर हमारे सिस्टम, ठेकेदारों की घोर लापरवाही और इंसानियत की गिरती कीमतों को बेनकाब कर दिया है। निर्माणाधीन 'जलसा मैरिज लॉन' की छत पर जैसे ही स्लैब (लेंटर) डालने का काम चल रहा था, वह अचानक भरभरा कर जमींदोज़ हो गई। सिर्फ कुछ सेकंड लगे और वहां काम कर रहे मजदूर मलबे के ढेर में तब्दील हो गए। इस हादसे में 10 मजदूर गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनमें से 4 की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है। बड़े सवाल जो सिस्टम और ठेकेदारों से पूछे जाने चाहिए: घटिया सामग्री का इस्तेमाल क्यों? क्या एक मजबूत छत ढालने के लिए जरूरी तकनीकी मानकों और मजबूत सरिया-सीमेंट की क्वालिटी को ताक पर रख दिया गया था? सुरक्षा के इंतजाम कहां थे? क्या मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Gears) के मौत के मुहाने पर झोंक दिया गया था? प्रशासन की नींद कब खुलेगी? क्या अवैध और बिना मानक के चल रहे निर्माण कार्यों पर तब तक कोई कार्रवाई नहीं होगी, जब तक कोई बड़ा हादसा न हो जाए? "सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई यह घटना सिर्फ एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि लालच और आपराधिक लापरवाही का जीवंत उदाहरण है।" यह गरीब मजदूर अपने परिवार का पेट पालने के लिए सुबह घर से निकलते हैं, लेकिन तथाकथित 'विकास' और 'आधुनिकता' की अंधी दौड़ में उन्हें सिर्फ जोखिम और दर्द मिलता है। अब देखना यह है कि प्रशासन सिर्फ खानापूर्ति करके मामले को रफा-दफा करता है या फिर इन बेकसूर मजदूरों का खून बहाने वाले लापरवाह ठेकेदार और मैरिज लॉन मालिक पर कठोरतम कार्रवाई होती है। जब तक ऐसे मामलों में सख्त मिसाल पेश नहीं की जाएगी, तब तक गरीबों की जिंदगी यूं ही मलबे के नीचे दबती रहेगी।
- नव निर्मित मां काली मंदिर की मूर्ति स्थापना ,प्राण प्रतिष्ठा व विशाल भंडारे का आयोजन ,महंत नागा दास *संतकबीरनगर।* ग्राम मझगवां में आज श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ नए मंदिर का निर्माण एवं काली माता की मूर्ति स्थापना कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। प्रिय भक्त *श्री वंश बहादुर यादव* के द्वारा कराए गए इस मंदिर निर्माण कार्य में बड़ी संख्या में ग्रामवासी और श्रद्धालु शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ काली माता की मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा की गई। पूजन के पश्चात उपस्थित श्रद्धालुओं ने *भोजन प्रसाद ग्रहण* किया। कार्यक्रम के दौरान भजन-कीर्तन का आयोजन भी किया गया। वातावरण भक्तिमय हो गया। ग्रामवासियों ने श्री वंश बहादुर यादव के इस धार्मिक कार्य की सराहना की और कहा कि नए मंदिर से क्षेत्र में धार्मिक आस्था और मजबूत होगी। इस कार्यक्रम मैं जिला पंचायत प्रत्याशी वार्ड नंबर 21 महंत नागा दास को अंग वस्त्र दे सम्मानित किया गया आसपास के गांवों लोग भी उपस्थित रहे।2
- आप सभी सम्मानित जनो से निवेदन है की आप सब इस गीत को लाइक सेयर के साथ ही कमेन्ट अवश्य करे ..............1
- कांड हो गया वाला कॉमेडी वीडियो 🤑🤣 एकदम नई कॉमेडी वीडियो1
- कमाने गया मजदूर, घर लौटी मौत की खबर—परिवार बेहाल #viral #followers #ambedkarnagarpolice #uppolice #ambedkar_nagar1
- फायर सेफ्टी और मानकों की धज्जियां: स्कूल में आपातकालीन निकास (एग्जिट) और अग्निशमन यंत्रों का पूरी तरह है अभाव। अजीत मिश्रा (खोजी) 800 बच्चों की जिंदगी दांव पर: करहल के 'प्रयाग पब्लिक स्कूल' में मौत का साया, फायर सेफ्टी और मानकों की उड़ रही धज्जियां! फायर सेफ्टी और मानकों की धज्जियां: स्कूल में आपातकालीन निकास (एग्जिट) और अग्निशमन यंत्रों का पूरी तरह है अभाव। मासूमों पर जुल्म: प्रबंधक अरुणेंद्र यादव पर बच्चों को प्रताड़ित करने और विरोध करने पर अभिभावकों को दबाने का गंभीर आरोप। संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत: सुरेखा देवी ने प्रार्थना पत्र देकर लखनऊ जैसी घटना से पहले तुरंत कार्रवाई की मांग की। मैनपुरी (करहल): जिले के करहल कस्बे में शिक्षा के नाम पर एक बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दिया जा रहा है। मोहल्ला काजी स्थित प्रयाग पब्लिक स्कूल का भवन अत्यंत असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 800 मासूम छात्र-छात्रों का जीवन बिना किसी सुरक्षा मानकों के भगवान भरोसे चल रहा है। हादसों को न्योता देते हालात दमघोंटू और छोटे कमरे: स्कूल के कमरे बेहद छोटे हैं, जिनमें लगभग 800 बच्चे ठूंस-ठूंसकर पढ़ने को मजबूर हैं। खेलने के लिए एक इंच भी खुली जगह उपलब्ध नहीं है। आपातकालीन निकास (एग्जिट) का अभाव: भवन में संकट या आग लगने जैसी आपात स्थिति के समय बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई उचित निकास द्वार या एग्जिट की व्यवस्था नहीं है। फायर सेफ्टी शून्य: स्कूल भवन में न तो अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) हैं, न फायर अलार्म, और न ही कोई इमरजेंसी लाइट। ऐसे में किसी भी अनहोनी की स्थिति में लखनऊ जैसी किसी बड़ी भीषण दुर्घटना की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। तानाशाही और दबंगई का आलम स्कूल के प्रबंधकों की मनमानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल बिल्डिंग कोड और उत्तर प्रदेश के स्कूल सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधक अरुणेंद्र यादव द्वारा फीस जमा न करने या होमवर्क न करने पर मासूम बच्चों के साथ बुरी तरह मारपीट और अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। विद्यालय के रोशनदान और एसी के आउटडोर पास ही बने घरों की तरफ खुले होने के कारण बच्चों की चीख-पुकार और प्रताड़ना की आवाजें पड़ोसियों तक साफ सुनाई देती हैं। विरोध करने पर विद्यालय प्रबंधक द्वारा दबंगई दिखाते हुए अभिभावकों को भी डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है। जिला प्रशासन से तीखा सवाल और गुहार स्थानीय निवासी सुरेखा देवी ने संपूर्ण समाधान दिवस (करहल, मैनपुरी) में प्रार्थना पत्र देकर इस गंभीर मामले की पोल खोली है। शिकायकर्ताओं का आरोप है कि पहले भी जब इस अवैध संचालन के खिलाफ आवाज उठाई गई, तो स्कूल प्रबंधन ने अधिकारियों को मोटी रकम खिलाकर मामले को दबा दिया। अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े अग्निकांड या हादसे के बाद ही नींद से जागेगा? क्या मासूमों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे स्कूलों पर ताला लगाने की हिम्मत प्रशासन जुटा पाएगा? अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने तत्काल प्रभाव से स्कूल का औचक निरीक्षण करने, भवन को सील/शिफ्ट करने तथा स्कूल प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।1
- हर घर तिरंगा अभियान चालू हो चुका है आप सभी लोग अपने-अपने छत पर एक तिरंगा जरुर लगाया जाए जय हिंद1
- ब्रेकिंग न्यूज संतकबीरनगर,, संदिग्ध हालात में युवती की मौत, जांच पड़ताल में जुट गई पुलिस *आज दिनांक 02.08.2026 को थाना कोतवाली खलीलाबाद को जिला अस्पताल संतकबीरनगर से प्राप्त मेमो के आधार पर जानकारी हुई कि गोरखाल खलीलाबाद में किराये के कमरे में रहकर पढ़ाई करने वाली एक छात्रा द्वारा प्रथम दृष्टया फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली गई है । उक्त घटना में पोस्मार्टम व प्रचलित अन्य विधिक कार्यवाही के संबंध में अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर द्वारा दी गई बाइट ।*1