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फायर सेफ्टी और मानकों की धज्जियां: स्कूल में आपातकालीन निकास (एग्जिट) और अग्निशमन यंत्रों का पूरी तरह है अभाव। अजीत मिश्रा (खोजी) 800 बच्चों की जिंदगी दांव पर: करहल के 'प्रयाग पब्लिक स्कूल' में मौत का साया, फायर सेफ्टी और मानकों की उड़ रही धज्जियां! फायर सेफ्टी और मानकों की धज्जियां: स्कूल में आपातकालीन निकास (एग्जिट) और अग्निशमन यंत्रों का पूरी तरह है अभाव। ​मासूमों पर जुल्म: प्रबंधक अरुणेंद्र यादव पर बच्चों को प्रताड़ित करने और विरोध करने पर अभिभावकों को दबाने का गंभीर आरोप। ​संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत: सुरेखा देवी ने प्रार्थना पत्र देकर लखनऊ जैसी घटना से पहले तुरंत कार्रवाई की मांग की। ​मैनपुरी (करहल): जिले के करहल कस्बे में शिक्षा के नाम पर एक बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दिया जा रहा है। मोहल्ला काजी स्थित प्रयाग पब्लिक स्कूल का भवन अत्यंत असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 800 मासूम छात्र-छात्रों का जीवन बिना किसी सुरक्षा मानकों के भगवान भरोसे चल रहा है। ​हादसों को न्योता देते हालात ​दमघोंटू और छोटे कमरे: स्कूल के कमरे बेहद छोटे हैं, जिनमें लगभग 800 बच्चे ठूंस-ठूंसकर पढ़ने को मजबूर हैं। खेलने के लिए एक इंच भी खुली जगह उपलब्ध नहीं है। ​आपातकालीन निकास (एग्जिट) का अभाव: भवन में संकट या आग लगने जैसी आपात स्थिति के समय बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई उचित निकास द्वार या एग्जिट की व्यवस्था नहीं है। ​फायर सेफ्टी शून्य: स्कूल भवन में न तो अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) हैं, न फायर अलार्म, और न ही कोई इमरजेंसी लाइट। ऐसे में किसी भी अनहोनी की स्थिति में लखनऊ जैसी किसी बड़ी भीषण दुर्घटना की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। ​तानाशाही और दबंगई का आलम ​स्कूल के प्रबंधकों की मनमानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल बिल्डिंग कोड और उत्तर प्रदेश के स्कूल सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधक अरुणेंद्र यादव द्वारा फीस जमा न करने या होमवर्क न करने पर मासूम बच्चों के साथ बुरी तरह मारपीट और अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। ​विद्यालय के रोशनदान और एसी के आउटडोर पास ही बने घरों की तरफ खुले होने के कारण बच्चों की चीख-पुकार और प्रताड़ना की आवाजें पड़ोसियों तक साफ सुनाई देती हैं। विरोध करने पर विद्यालय प्रबंधक द्वारा दबंगई दिखाते हुए अभिभावकों को भी डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है। ​जिला प्रशासन से तीखा सवाल और गुहार ​स्थानीय निवासी सुरेखा देवी ने संपूर्ण समाधान दिवस (करहल, मैनपुरी) में प्रार्थना पत्र देकर इस गंभीर मामले की पोल खोली है। शिकायकर्ताओं का आरोप है कि पहले भी जब इस अवैध संचालन के खिलाफ आवाज उठाई गई, तो स्कूल प्रबंधन ने अधिकारियों को मोटी रकम खिलाकर मामले को दबा दिया। ​अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े अग्निकांड या हादसे के बाद ही नींद से जागेगा? क्या मासूमों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे स्कूलों पर ताला लगाने की हिम्मत प्रशासन जुटा पाएगा? ​अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने तत्काल प्रभाव से स्कूल का औचक निरीक्षण करने, भवन को सील/शिफ्ट करने तथा स्कूल प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

12 hrs ago
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
12 hrs ago

फायर सेफ्टी और मानकों की धज्जियां: स्कूल में आपातकालीन निकास (एग्जिट) और अग्निशमन यंत्रों का पूरी तरह है अभाव। अजीत मिश्रा (खोजी) 800 बच्चों की जिंदगी दांव पर: करहल के 'प्रयाग पब्लिक स्कूल' में मौत का साया, फायर सेफ्टी और मानकों की उड़ रही धज्जियां! फायर सेफ्टी और मानकों की धज्जियां: स्कूल में आपातकालीन निकास (एग्जिट) और अग्निशमन यंत्रों का पूरी तरह है अभाव। ​मासूमों पर जुल्म: प्रबंधक अरुणेंद्र यादव पर बच्चों को प्रताड़ित करने और विरोध करने पर अभिभावकों को दबाने का गंभीर आरोप। ​संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत: सुरेखा देवी ने प्रार्थना पत्र देकर लखनऊ जैसी घटना से पहले तुरंत कार्रवाई की मांग की। ​मैनपुरी (करहल): जिले के करहल कस्बे में शिक्षा के नाम पर एक बड़े हादसे को खुला निमंत्रण दिया जा रहा है। मोहल्ला काजी स्थित प्रयाग पब्लिक स्कूल का भवन अत्यंत असुरक्षित, भीड़भाड़ वाले और नियमों को ताक पर रखकर संचालित किया जा रहा है। यहाँ लगभग 800 मासूम छात्र-छात्रों का जीवन बिना किसी सुरक्षा मानकों के भगवान भरोसे चल रहा है। ​हादसों को न्योता देते हालात ​दमघोंटू और छोटे कमरे: स्कूल के कमरे बेहद छोटे हैं, जिनमें लगभग 800 बच्चे ठूंस-ठूंसकर पढ़ने को मजबूर हैं। खेलने के लिए एक इंच भी खुली जगह उपलब्ध नहीं है। ​आपातकालीन निकास (एग्जिट) का अभाव: भवन में संकट या आग लगने जैसी आपात स्थिति के समय बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कोई उचित निकास द्वार या एग्जिट की व्यवस्था नहीं है। ​फायर सेफ्टी शून्य: स्कूल भवन में न तो अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) हैं, न फायर अलार्म, और न ही कोई इमरजेंसी लाइट। ऐसे में किसी भी अनहोनी की स्थिति में लखनऊ जैसी किसी बड़ी भीषण दुर्घटना की पुनरावृत्ति से इंकार नहीं किया जा सकता। ​तानाशाही और दबंगई का आलम ​स्कूल के प्रबंधकों की मनमानी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेशनल बिल्डिंग कोड और उत्तर प्रदेश के स्कूल सुरक्षा मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। आरोप है कि विद्यालय प्रबंधक अरुणेंद्र यादव द्वारा फीस जमा न करने या होमवर्क न करने पर मासूम बच्चों के साथ बुरी तरह मारपीट और अमानवीय यातनाएं दी जाती हैं। ​विद्यालय के रोशनदान और एसी के आउटडोर पास ही बने घरों की तरफ खुले होने के कारण बच्चों की चीख-पुकार और प्रताड़ना की आवाजें पड़ोसियों तक साफ सुनाई देती हैं। विरोध करने पर विद्यालय प्रबंधक द्वारा दबंगई दिखाते हुए अभिभावकों को भी डरा-धमकाकर चुप करा दिया जाता है। ​जिला प्रशासन से तीखा सवाल और गुहार ​स्थानीय निवासी सुरेखा देवी ने संपूर्ण समाधान दिवस (करहल, मैनपुरी) में प्रार्थना पत्र देकर इस गंभीर मामले की पोल खोली है। शिकायकर्ताओं का आरोप है कि पहले भी जब इस अवैध संचालन के खिलाफ आवाज उठाई गई, तो स्कूल प्रबंधन ने अधिकारियों को मोटी रकम खिलाकर मामले को दबा दिया। ​अब सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन किसी बड़े अग्निकांड या हादसे के बाद ही नींद से जागेगा? क्या मासूमों की जान से खिलवाड़ करने वाले ऐसे स्कूलों पर ताला लगाने की हिम्मत प्रशासन जुटा पाएगा? ​अभिभावकों और क्षेत्रवासियों ने तत्काल प्रभाव से स्कूल का औचक निरीक्षण करने, भवन को सील/शिफ्ट करने तथा स्कूल प्रबंधन पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है, ताकि किसी बड़ी अनहोनी से पहले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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    आप सभी सम्मानित जनो से निवेदन है की आप सब इस गीत को लाइक सेयर के साथ ही कमेन्ट अवश्य करे ..............
    user_Shailendra Pandey
    Shailendra Pandey
    Singing teaching and political work. खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    10 hrs ago
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    कांड हो गया वाला कॉमेडी वीडियो 🤑🤣 एकदम नई कॉमेडी वीडियो
    user_Pradeep Karauni Official
    Pradeep Karauni Official
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    1 hr ago
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    Vinay kumar giri
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    12 hrs ago
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    TEESRI AANKHEN
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    13 hrs ago
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आलापुर समाचर
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    user_TEESRI AANKHEN
    TEESRI AANKHEN
    अल्लापुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश•
    13 hrs ago
  • विश्व स्तनपान सप्ताह: नुक्कड़ नाटकों के जरिए गांव-गांव पहुंचा मातृ एवं शिशु पोषण का संदेश विश्व स्तनपान सप्ताह: नुक्कड़ नाटकों के जरिए गांव-गांव पहुंचा मातृ एवं शिशु पोषण का संदेश सहजनवा, गोरखपुर। विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बाल विकास विभाग, गोरखपुर एवं प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को सहजनवा विकास खंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सहजनवा तथा बेलहर और जुड़ियन गांवों में मातृ एवं शिशु पोषण जागरूकता अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, स्तनपान, कुपोषण की रोकथाम और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना था। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. व्यास कुशवाहा एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी ऋचा पांडेय ने किया। डॉ. व्यास कुशवाहा ने कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए संतुलित पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है। बाल विकास परियोजना अधिकारी ऋचा पांडेय ने कहा कि कुपोषित बच्चों का प्रबंधन घर पर भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों के भोजन में कम से कम चार खाद्य समूह शामिल करने, दूध एवं दुग्ध उत्पादों का नियमित सेवन कराने तथा पौष्टिक आहार अपनाने की अपील की। साथ ही प्रोग्रेसिव फाउंडेशन की इस पहल की सराहना की। "सही पोषण–स्वस्थ बचपन" विषय पर आधारित नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने गीत, संवाद और अभिनय के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, नियमित टीकाकरण और कुपोषण की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी संदेश दिए। कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहुओं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। अंत में ऋचा पांडेय ने बताया कि यह जागरूकता अभियान 1 से 3 अगस्त 2026 तक सहजनवा, उरुवा और खोराबार विकास खंड के चयनित गांवों में संचालित किया जाएगा, ताकि "सही पोषण–देश रोशन" का संदेश अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाया जा सके।
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    विश्व स्तनपान सप्ताह: नुक्कड़ नाटकों के जरिए गांव-गांव पहुंचा मातृ एवं शिशु पोषण का संदेश

विश्व स्तनपान सप्ताह: नुक्कड़ नाटकों के जरिए गांव-गांव पहुंचा मातृ एवं शिशु पोषण का संदेश
सहजनवा, गोरखपुर।
विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर बाल विकास विभाग, गोरखपुर एवं प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को सहजनवा विकास खंड के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सहजनवा तथा बेलहर और जुड़ियन गांवों में मातृ एवं शिशु पोषण जागरूकता अभियान के तहत नुक्कड़ नाटकों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीणों को मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, स्तनपान, कुपोषण की रोकथाम और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. व्यास कुशवाहा एवं बाल विकास परियोजना अधिकारी ऋचा पांडेय ने किया। डॉ. व्यास कुशवाहा ने कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर नवजात को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध (कोलोस्ट्रम) अवश्य पिलाना चाहिए। उन्होंने बताया कि जन्म से छह माह तक केवल मां का दूध ही शिशु के लिए सर्वोत्तम आहार है तथा कुपोषण की रोकथाम के लिए संतुलित पोषण और नियमित स्वास्थ्य जांच आवश्यक है।
बाल विकास परियोजना अधिकारी ऋचा पांडेय ने कहा कि कुपोषित बच्चों का प्रबंधन घर पर भी प्रभावी ढंग से किया जा सकता है। उन्होंने बच्चों के भोजन में कम से कम चार खाद्य समूह शामिल करने, दूध एवं दुग्ध उत्पादों का नियमित सेवन कराने तथा पौष्टिक आहार अपनाने की अपील की। साथ ही प्रोग्रेसिव फाउंडेशन की इस पहल की सराहना की।
"सही पोषण–स्वस्थ बचपन" विषय पर आधारित नुक्कड़ नाटक में कलाकारों ने गीत, संवाद और अभिनय के माध्यम से गर्भवती महिलाओं की देखभाल, सुरक्षित संस्थागत प्रसव, छह माह तक केवल स्तनपान, समय पर पूरक आहार, नियमित टीकाकरण और कुपोषण की पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रभावी संदेश दिए।
कार्यक्रम में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा बहुओं, स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों, प्रोग्रेसिव फाउंडेशन के प्रतिनिधियों तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया। अंत में ऋचा पांडेय ने बताया कि यह जागरूकता अभियान 1 से 3 अगस्त 2026 तक सहजनवा, उरुवा और खोराबार विकास खंड के चयनित गांवों में संचालित किया जाएगा, ताकि "सही पोषण–देश रोशन" का संदेश अधिक से अधिक परिवारों तक पहुंचाया जा सके।
    user_सर्वेश कुमार शुक्ला
    सर्वेश कुमार शुक्ला
    सहजनवा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
  • मासूम की हत्या के विरोध में घघसरा में निकला कैंडल मार्च, हत्यारे को फांसी देने की उठी मांग मासूम की हत्या के विरोध में घघसरा में निकला कैंडल मार्च, हत्यारे को फांसी देने की उठी मांग घघसरा (गोरखपुर)। मासूम बच्चे की निर्मम हत्या के विरोध में गोरखपुर जिले के विकास खंड पाली क्षेत्र स्थित घघसरा कस्बे में समाजसेवियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला और दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की। कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने "हत्यारे को फांसी दो", "मासूम को न्याय दो" और "अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करो" जैसे नारे लगाते हुए सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी एवं उन्हें कठोरतम सजा दिलाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मासूम बच्चों के साथ होने वाली ऐसी जघन्य घटनाएं पूरे समाज को झकझोर देती हैं। यदि दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा नहीं मिली तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे। समाजसेवियों ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में इस प्रकार की अमानवीय घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर आरोपियों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी की सजा दिलाने की मांग की। कैंडल मार्च घघसरा के प्रमुख मार्गों से होकर निकला, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। मार्च के अंत में सभी ने दिवंगत मासूम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा तथा ईश्वर से शोक संतप्त परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि मासूम को न्याय मिलने तक वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
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    मासूम की हत्या के विरोध में घघसरा में निकला कैंडल मार्च, हत्यारे को फांसी देने की उठी मांग
मासूम की हत्या के विरोध में घघसरा में निकला कैंडल मार्च, हत्यारे को फांसी देने की उठी मांग
घघसरा (गोरखपुर)। मासूम बच्चे की निर्मम हत्या के विरोध में गोरखपुर जिले के विकास खंड पाली क्षेत्र स्थित घघसरा कस्बे में समाजसेवियों, युवाओं एवं स्थानीय नागरिकों ने कैंडल मार्च निकालकर अपना आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान लोगों ने हाथों में मोमबत्तियां लेकर शांतिपूर्ण मार्च निकाला और दोषियों के विरुद्ध कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की।
कैंडल मार्च में शामिल लोगों ने "हत्यारे को फांसी दो", "मासूम को न्याय दो" और "अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करो" जैसे नारे लगाते हुए सरकार और प्रशासन से जल्द से जल्द आरोपियों की गिरफ्तारी एवं उन्हें कठोरतम सजा दिलाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि मासूम बच्चों के साथ होने वाली ऐसी जघन्य घटनाएं पूरे समाज को झकझोर देती हैं। यदि दोषियों को शीघ्र और कड़ी सजा नहीं मिली तो अपराधियों के हौसले और बढ़ेंगे।
समाजसेवियों ने कहा कि किसी भी सभ्य समाज में इस प्रकार की अमानवीय घटनाओं के लिए कोई स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन से निष्पक्ष एवं त्वरित जांच कर आरोपियों के विरुद्ध फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी की सजा दिलाने की मांग की।
कैंडल मार्च घघसरा के प्रमुख मार्गों से होकर निकला, जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न संगठनों के लोग शामिल हुए। मार्च के अंत में सभी ने दिवंगत मासूम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए दो मिनट का मौन रखा तथा ईश्वर से शोक संतप्त परिवार को इस दुख की घड़ी में संबल प्रदान करने की प्रार्थना की। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि मासूम को न्याय मिलने तक वे अपनी आवाज बुलंद करते रहेंगे।
    user_उपेंद्र राज
    उपेंद्र राज
    सहजनवा, गोरखपुर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
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