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मैहर के भटूरा में संचालित द मैहर लाइम स्टोन कंपनी की खदान एक बड़े हादसे को खुला न्योता देती नजर आ रही है। यहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या खनिज, पर्यावरण और श्रम विभाग खदान माफियाओं के सामने नतमस्तक हो चुके हैं? श्रमिकों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमाने का यह खेल आखिर कब तक चलेगा? स्थानीय लोगों में आक्रोश है और चर्चा तेज—क्या प्रशासन ने नियमों को खदान में दफन करने की खुली छूट दे दी है?
Shiv Singh rajput dahiya journalist MP
मैहर के भटूरा में संचालित द मैहर लाइम स्टोन कंपनी की खदान एक बड़े हादसे को खुला न्योता देती नजर आ रही है। यहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या खनिज, पर्यावरण और श्रम विभाग खदान माफियाओं के सामने नतमस्तक हो चुके हैं? श्रमिकों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमाने का यह खेल आखिर कब तक चलेगा? स्थानीय लोगों में आक्रोश है और चर्चा तेज—क्या प्रशासन ने नियमों को खदान में दफन करने की खुली छूट दे दी है?
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- मैहर के भटूरा में संचालित द मैहर लाइम स्टोन कंपनी की खदान एक बड़े हादसे को खुला न्योता देती नजर आ रही है। यहां सुरक्षा मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। सवाल उठ रहा है कि क्या खनिज, पर्यावरण और श्रम विभाग खदान माफियाओं के सामने नतमस्तक हो चुके हैं? श्रमिकों की जान जोखिम में डालकर मुनाफा कमाने का यह खेल आखिर कब तक चलेगा? स्थानीय लोगों में आक्रोश है और चर्चा तेज—क्या प्रशासन ने नियमों को खदान में दफन करने की खुली छूट दे दी है?1
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- कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर ने जिले में पेट्रोल, डीज़ल और गैस की उपलब्धता को लेकर समीक्षा बैठक की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दमोह जिले में किसी भी प्रकार की कोई कमी नहीं है और सभी व्यवस्थाएँ पूरी तरह सामान्य रूप से संचालित हो रही हैं। कलेक्टर ने नागरिकों से अपील की है कि अफवाहों पर ध्यान न दें, अनावश्यक रूप से पेट्रोल, डीज़ल या गैस का स्टॉक न करें और अपनी जरूरत के अनुसार ही सामग्री लें, ताकि सभी को सुचारु रूप से आपूर्ति मिलती रहे। #Damoh1
- *सत्ता की आड़ में ‘जमीन की भूख’! मऊगंज में भाजपाइयों पर प्रशासन का बेजा इस्तेमाल के आरोप!* *गरीबों की जमीन हड़पने के प्रयास, प्रशासन पर दबाव बनाने की चर्चा तेज!* मऊगंज। नवगठित जिला मऊगंज में सत्ताधारी दल के कुछ नेताओं पर सत्ता का दुरुपयोग कर जमीन कब्जाने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। क्षेत्र में लगातार सामने आ रहे मामलों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या विकास के बजाय अब राजनीति जमीन के खेल में उलझती जा रही है। सूत्रों के अनुसार, कुछ कथित भाजपाई नेता प्रशासन पर दबाव बनाकर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। आरोप है कि ट्रांसफर-पोस्टिंग से लेकर जमीन से जुड़े मामलों में हस्तक्षेप कर अपने हित साधे जा रहे हैं। खासकर गरीब और असहाय लोगों को निशाना बनाकर उनकी जमीन पर कब्जा करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। हाल ही में मऊगंज बाईपास से जुड़ा जमीन विवाद पूरे प्रदेश में सुर्खियों में रहा, जिसमें राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक भूमिका पर सवाल उठे थे। इसके बाद भी ऐसे मामलों में कमी नहीं आई है। ताजा प्रकरण में एक मानसिक रूप से कमजोर ब्राह्मण की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास सामने आया है, जिससे क्षेत्र में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रशासन भी कहीं न कहीं सत्ता के दबाव में कार्य करता नजर आ रहा है, जिससे पीड़ित पक्षों को न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है। इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं, *पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना* ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पीड़ितों को समर्थन देने की बात कही है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि जरूरत पड़ी तो इस मुद्दे को लेकर सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जाएगा और किसी भी हाल में गरीबों के अधिकारों का हनन नहीं होने दिया जाएगा। मऊगंज में लगातार बढ़ते ऐसे विवादों ने यह चिंता बढ़ा दी है कि कहीं विकास की राह भटककर जिला विवादों और सत्ता के दुरुपयोग का केंद्र न बन जाए।1