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जिंदगी का हर सेकंड, मिनट, घंटा और हर लम्हा बेहद कीमती है, क्योंकि कल क्या होगा यह कोई नहीं जानता। इसी अप्रत्याशितता का शिकार एक 52 वर्षीय कंपनी का कर्मचारी हुआ, जब वह घर जा रहा था। अचानक ऊपर से एक लकड़ी की छड़ी उसके सर पर आकर लगी, जिससे वह व्यक्ति फिलहाल कोमा में चला गया है।
MD AZAD ABBAS
जिंदगी का हर सेकंड, मिनट, घंटा और हर लम्हा बेहद कीमती है, क्योंकि कल क्या होगा यह कोई नहीं जानता। इसी अप्रत्याशितता का शिकार एक 52 वर्षीय कंपनी का कर्मचारी हुआ, जब वह घर जा रहा था। अचानक ऊपर से एक लकड़ी की छड़ी उसके सर पर आकर लगी, जिससे वह व्यक्ति फिलहाल कोमा में चला गया है।
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- भागलपुर के घोघा स्थित यज्ञ मेला परिसर भोजपुरी जगत के गायक सुनील मिश्रा जी के आगमन से सुरैली और मधुर आवाजों से गूंज उठा। गायक सुनील मिश्रा जी ने घोघा यज्ञ पंडाल में अपनी मधुर गीतों और भक्तिपूर्ण प्रस्तुति से दर्शकों को जगमगा दिया।1
- यह संदेश उन अनकहे ज़ख्मों और दर्दों को बयां करता है जो सीधे शरीर पर नहीं, बल्कि भविष्य पर पड़ते हैं; जिनका इज़हार शब्दों से नहीं, बल्कि आँखों से बहते आँसुओं से होता है। यह सिर्फ एक ख़बर नहीं, बल्कि लाखों टूटते सपनों की चीख, बिखरते भविष्य की गवाही और एक पूरी पीढ़ी द्वारा महसूस की जा रही गहरी पीड़ा का मार्मिक चित्रण है।1
- भागलपुर के रसलपुर डाला रेलवे गेट के समीप शुक्रवार शाम करीब 7 बजे पंचगछिया निवासी 50 वर्षीय गोपाल शाह को जबरन टेंपो पर बैठाकर अपहरण करने की कथित कोशिश का मामला सामने आया है। पीड़ित गोपाल शाह ने आरोप लगाया है कि वे अपने पुत्र पुष्कर कुमार के साथ घर लौट रहे थे, तभी शिवम रजक, राणा रजक, बहरी चौकीदार, सुशील रजक, सरजू रजक, मुकेश रजक सहित कुछ अन्य लोगों ने उन्हें घेर लिया। इन लोगों ने उन्हें जबरन टेंपो पर बैठाने का प्रयास किया और जब उन्होंने विरोध किया तो उनके साथ मारपीट की गई। इस मारपीट के कारण गोपाल शाह के सिर और शरीर के कई हिस्सों में चोटें आई हैं।1
- बाबा बासुकीनाथ मंदिर में एक गंभीर घोटाला होने का आरोप लगाया गया है। पोस्ट में जोर देकर कहा गया है कि लोग खुद इस धांधली को अपनी नजरों से देख सकते हैं, जो मंदिर के भीतर की मौजूदा स्थिति को स्पष्ट रूप से उजागर करता है।1
- यह संदेश उस असहनीय पीड़ा को व्यक्त करता है जो शरीर पर नहीं बल्कि सीधे भविष्य पर गहरे ज़ख्म लगाती है। यह ऐसा दर्द है जो शब्दों में समा नहीं पाता, बल्कि केवल आँखों से आँसुओं के रूप में बह निकलता है। यह वस्तुतः लाखों टूटते सपनों की चीख है, उनकी गवाही है, और एक पूरी पीढ़ी की गहरी वेदना का प्रतीक है।1
- जिंदगी का हर सेकंड, मिनट, घंटा और हर लम्हा बेहद कीमती है, क्योंकि कल क्या होगा यह कोई नहीं जानता। इसी अप्रत्याशितता का शिकार एक 52 वर्षीय कंपनी का कर्मचारी हुआ, जब वह घर जा रहा था। अचानक ऊपर से एक लकड़ी की छड़ी उसके सर पर आकर लगी, जिससे वह व्यक्ति फिलहाल कोमा में चला गया है।1