मुजफ्फरनगर में जिला पंचायत सदस्य अमरकांत उर्फ चिकू ने अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार पर भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अमरकांत चिकू ने योगेश कुमार को 'महाभ्रष्ट अधिकारी' बताते हुए आरोप लगाया कि वह पूरे जिला पंचायत को बेचना चाहते हैं और नोट भरकर गाजियाबाद अपने घर जाना चाहते हैं। चिकू का दावा है कि उनके पास अधिकारी के खिलाफ सबूतों का अंबार है, जिसे वह जल्द सार्वजनिक करेंगे। चिकू के अनुसार, योगेश कुमार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय में नहीं बैठते हैं, बल्कि अपने आवास से काम करते हैं और कर्मचारियों को वहीं बुलाते हैं, साथ ही छुट्टी की फर्जी एप्लीकेशन देकर रखते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करीब ढाई महीने पहले योगेश कुमार ने जिला पंचायत की गाड़ी को जिले से बाहर मेरठ टोल तक उपयोग किया था। लकड़ी के टेंडर में पारदर्शिता भंग करते हुए अपना 'कोड' डालने का आरोप भी लगा है, और चिकू ने टेंडर की विज्ञप्ति वाले अख़बारों की संख्या पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अधिकारी पर ठेकेदारों और जमीन की प्लॉटिंग से कमीशन व रुपए वसूलने के लिए एक 'प्राइवेट अटैटेक' रखने का भी आरोप लगाया। मीडिया और सीडीओ को पत्र देने के बावजूद टेंडर निरस्त न होने को उन्होंने पैसों का लालच बताया, और कहा कि पहले का टेंडर मान्य अध्यक्ष जी ने निष्पक्ष तरीके से कराया था। अमरकांत चिकू ने चेतावनी दी है कि यदि योगेश कुमार 23 तारीख से स्थायी रूप से कार्यालय में नहीं बैठेंगे, तो वह अनशन और भूख हड़ताल करेंगे, और यदि इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाने वाला अधिकारी अपनी ड्यूटी नहीं करेगा व जनता की पीड़ा नहीं सुनेगा, तो वह आत्मदाह करने का भी काम करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से योगेश कुमार की संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की, ताकि उनके पास इतना धन कहां से आता है, इसका पता चल सके। चिकू ने टेंडर को तुरंत निरस्त कर खुली बोली के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया से कराने की भी मांग की है। उन्होंने दो-तीन दिन के भीतर कुछ अन्य कर्मचारियों की भी पोल खोलने की बात कही, जिनके खिलाफ उनके पास जांच और सबूत मौजूद हैं।
मुजफ्फरनगर में जिला पंचायत सदस्य अमरकांत उर्फ चिकू ने अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार पर भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अमरकांत चिकू ने योगेश कुमार को 'महाभ्रष्ट अधिकारी' बताते हुए आरोप लगाया कि वह पूरे जिला पंचायत को बेचना चाहते हैं और नोट भरकर गाजियाबाद अपने घर जाना चाहते हैं। चिकू का दावा है कि उनके पास अधिकारी के खिलाफ सबूतों का अंबार है, जिसे वह जल्द सार्वजनिक करेंगे। चिकू के अनुसार, योगेश कुमार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय में नहीं बैठते
हैं, बल्कि अपने आवास से काम करते हैं और कर्मचारियों को वहीं बुलाते हैं, साथ ही छुट्टी की फर्जी एप्लीकेशन देकर रखते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करीब ढाई महीने पहले योगेश कुमार ने जिला पंचायत की गाड़ी को जिले से बाहर मेरठ टोल तक उपयोग किया था। लकड़ी के टेंडर में पारदर्शिता भंग करते हुए अपना 'कोड' डालने का आरोप भी लगा है, और चिकू ने टेंडर की विज्ञप्ति वाले अख़बारों की संख्या पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अधिकारी पर ठेकेदारों और जमीन की प्लॉटिंग से कमीशन व रुपए
वसूलने के लिए एक 'प्राइवेट अटैटेक' रखने का भी आरोप लगाया। मीडिया और सीडीओ को पत्र देने के बावजूद टेंडर निरस्त न होने को उन्होंने पैसों का लालच बताया, और कहा कि पहले का टेंडर मान्य अध्यक्ष जी ने निष्पक्ष तरीके से कराया था। अमरकांत चिकू ने चेतावनी दी है कि यदि योगेश कुमार 23 तारीख से स्थायी रूप से कार्यालय में नहीं बैठेंगे, तो वह अनशन और भूख हड़ताल करेंगे, और यदि इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाने वाला अधिकारी अपनी ड्यूटी नहीं
करेगा व जनता की पीड़ा नहीं सुनेगा, तो वह आत्मदाह करने का भी काम करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से योगेश कुमार की संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की, ताकि उनके पास इतना धन कहां से आता है, इसका पता चल सके। चिकू ने टेंडर को तुरंत निरस्त कर खुली बोली के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया से कराने की भी मांग की है। उन्होंने दो-तीन दिन के भीतर कुछ अन्य कर्मचारियों की भी पोल खोलने की बात कही, जिनके खिलाफ उनके पास जांच और सबूत मौजूद हैं।
- मुजफ्फरनगर जनपद में आगामी मोहर्रम और कांवड़ यात्रा के मद्देनजर पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में, सीओ सिटी सिद्धार्थ के. मिश्रा के नेतृत्व में आरएएफ और शहर के चारों थानों की पुलिस फोर्स ने नगर क्षेत्र में फ्लैग मार्च कर नागरिकों को सुरक्षा का एहसास कराया। यह फ्लैग मार्च शिव चौक से शुरू होकर शहर के प्रमुख बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों से गुजरा, जिसमें भगत सिंह रोड, सराफा बाजार, नॉवेल्टी चौक और मेरठ रोड सहित कई स्थानों पर पैदल गश्त की गई। इस दौरान पुलिस बल ने लोगों से संवाद भी स्थापित किया। फ्लैग मार्च का मुख्य उद्देश्य नागरिकों में सुरक्षा का विश्वास मजबूत करना और यह संदेश देना था कि मुजफ्फरनगर पुलिस हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है। सीओ सिटी सिद्धार्थ के. मिश्रा ने स्पष्ट किया कि आगामी धार्मिक आयोजनों को सकुशल संपन्न कराना पुलिस प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने चेतावनी दी कि त्योहारों के दौरान शांति व्यवस्था भंग करने, अफवाह फैलाने अथवा माहौल खराब करने का प्रयास करने वाले असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, आमजन से सोशल मीडिया पर भ्रामक सूचनाओं से बचने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल पुलिस को देने की अपील की गई।1
- मुजफ्फरनगर में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) के स्पष्ट निर्देश पर, रामपुर चौकी पुलिस ने रामपुर चौराहे पर एक विशेष और सघन वाहन चेकिंग अभियान चलाया। इस कार्रवाई के तहत, पुलिस ने दोपहिया और चारपहिया वाहनों की गहनता से जांच की, यह सुनिश्चित करते हुए कि यातायात नियमों का सख्ती से पालन किया जाए। अभियान के दौरान, संदिग्ध वाहनों की भी बारीकी से पड़ताल की गई। पुलिस की इस सक्रियता के चलते क्षेत्र के वाहन चालकों में हड़कंप की स्थिति देखी गई, वहीं नियम तोड़ने वालों को पुलिस द्वारा सख्त चेतावनी भी दी गई है।1
- मुजफ्फरनगर में गांधी नगर और हरिपुरम के निवासियों ने तहसील समाधान दिवस में एक शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सिंचाई विभाग ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के जेसीबी का उपयोग करके एक लगभग 20 वर्ष पुराने पैदल मार्ग को पूरी तरह से हटा दिया है। यह मार्ग दोनों मोहल्लों को आपस में जोड़ता था। शिकायतकर्ताओं ने बताया कि यह महत्वपूर्ण मार्ग स्थानीय लोगों के सहयोग से बनाया गया था और यह स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों तथा श्रद्धालुओं के लिए आवागमन का एक प्रमुख साधन था। निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि विभागीय अधिकारियों ने पहले तो इस मार्ग को बनाए रखने के लिए धनराशि की मांग की थी, लेकिन बाद में 12 जून, 2026 को बिना कोई सुनवाई किए इसे ध्वस्त कर दिया गया। इस मामले में, स्थानीय निवासियों ने संबंधित पैदल मार्ग को तत्काल बहाल करने और आवागमन की एक स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। तहसील समाधान दिवस कार्यालय ने इस शिकायत का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को निर्देश दिए हैं कि वे 7 दिनों के भीतर मामले की जांच करें और एक कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।1
- जनपद मुजफ्फरनगर पुलिस ने NEET UG Re-Exam 2026 परीक्षा को सफल, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने के उद्देश्य से व्यापक सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की है। यह कदम परीक्षा को बिना किसी बाधा के आयोजित करने के लिए उठाया गया है।1
- मुजफ्फरनगर की थाना खालापार पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक अंतरजनपदीय गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 10 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से 3 अवैध पिस्टल, 7 तमंचे, 10 जिंदा कारतूस, 10 मोबाइल फोन और एक सीबीजेड मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई मुखबिर की सूचना पर तहसील के पीछे स्थित एक खंडहरनुमा स्थान पर छापेमारी करके की गई। पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने यह स्वीकार किया कि वे मुजफ्फरनगर के अलावा शामली, सहारनपुर और गाजियाबाद समेत कई अन्य जिलों में अवैध हथियारों की सप्लाई करते थे। इस मामले में उमर और तस्लीम नामक दो आरोपी अभी भी फरार हैं, जिनकी तलाश पुलिस द्वारा की जा रही है। इस सराहनीय कार्रवाई के लिए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक संजय कुमार वर्मा ने थाना खालापार पुलिस टीम को ₹20,000 के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।1
- मुजफ्फरनगर के थाना खालापार पुलिस ने अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त में संलिप्त एक अंतरजनपदीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए 10 शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से तीन अवैध पिस्टल, सात तमंचे, दस जिंदा कारतूस, दस मोबाइल फोन और एक मोटरसाइकिल बरामद की है। पुलिस के अनुसार, मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए तहसील के पीछे एक खंडहरनुमा स्थान पर छापेमारी की गई, जहां से आरोपी अवैध असलाहों के साथ पकड़े गए। पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे मुजफ्फरनगर के अलावा शामली, सहारनपुर और गाजियाबाद सहित कई अन्य जनपदों में भी अवैध हथियारों की सप्लाई करते थे। इस मामले में दो अन्य आरोपी उमर और तस्लीम की तलाश अभी भी जारी है। पुलिस की इस सराहनीय कार्रवाई पर वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने खालापार पुलिस टीम को ₹20,000 के नकद पुरस्कार से सम्मानित किया है।1
- मुजफ्फरनगर में जिला पंचायत सदस्य अमरकांत उर्फ चिकू ने अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार पर भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं। अमरकांत चिकू ने योगेश कुमार को 'महाभ्रष्ट अधिकारी' बताते हुए आरोप लगाया कि वह पूरे जिला पंचायत को बेचना चाहते हैं और नोट भरकर गाजियाबाद अपने घर जाना चाहते हैं। चिकू का दावा है कि उनके पास अधिकारी के खिलाफ सबूतों का अंबार है, जिसे वह जल्द सार्वजनिक करेंगे। चिकू के अनुसार, योगेश कुमार सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक कार्यालय में नहीं बैठते हैं, बल्कि अपने आवास से काम करते हैं और कर्मचारियों को वहीं बुलाते हैं, साथ ही छुट्टी की फर्जी एप्लीकेशन देकर रखते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि करीब ढाई महीने पहले योगेश कुमार ने जिला पंचायत की गाड़ी को जिले से बाहर मेरठ टोल तक उपयोग किया था। लकड़ी के टेंडर में पारदर्शिता भंग करते हुए अपना 'कोड' डालने का आरोप भी लगा है, और चिकू ने टेंडर की विज्ञप्ति वाले अख़बारों की संख्या पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अधिकारी पर ठेकेदारों और जमीन की प्लॉटिंग से कमीशन व रुपए वसूलने के लिए एक 'प्राइवेट अटैटेक' रखने का भी आरोप लगाया। मीडिया और सीडीओ को पत्र देने के बावजूद टेंडर निरस्त न होने को उन्होंने पैसों का लालच बताया, और कहा कि पहले का टेंडर मान्य अध्यक्ष जी ने निष्पक्ष तरीके से कराया था। अमरकांत चिकू ने चेतावनी दी है कि यदि योगेश कुमार 23 तारीख से स्थायी रूप से कार्यालय में नहीं बैठेंगे, तो वह अनशन और भूख हड़ताल करेंगे, और यदि इसके बाद भी स्थिति नहीं सुधरी और जनता के टैक्स के पैसे से वेतन पाने वाला अधिकारी अपनी ड्यूटी नहीं करेगा व जनता की पीड़ा नहीं सुनेगा, तो वह आत्मदाह करने का भी काम करेंगे। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से योगेश कुमार की संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की, ताकि उनके पास इतना धन कहां से आता है, इसका पता चल सके। चिकू ने टेंडर को तुरंत निरस्त कर खुली बोली के माध्यम से पारदर्शी प्रक्रिया से कराने की भी मांग की है। उन्होंने दो-तीन दिन के भीतर कुछ अन्य कर्मचारियों की भी पोल खोलने की बात कही, जिनके खिलाफ उनके पास जांच और सबूत मौजूद हैं।4
- जनपद में कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने तथा सर्राफा व्यापारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से मुजफ्फरनगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री संजय कुमार वर्मा ने सर्राफा व्यापारियों के साथ एक महत्वपूर्ण गोष्ठी आयोजित की। इस बैठक के दौरान, व्यापारियों से संवाद कर उनकी समस्याओं को सुना गया और सुरक्षा संबंधी आवश्यक सुझावों का आदान-प्रदान किया गया। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने व्यापारियों को अपनी दुकानों एवं प्रतिष्ठानों पर उच्च गुणवत्ता वाले सीसीटीवी कैमरे, अलार्म सिस्टम तथा अन्य सुरक्षा उपकरण लगाने के निर्देश दिए। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति अथवा गतिविधि की सूचना तत्काल पुलिस को दें, जिससे समय रहते आवश्यक कार्रवाई की जा सके। गोष्ठी में साइबर अपराधों के बढ़ते मामलों को देखते हुए, व्यापारियों को ऑनलाइन ठगी, फर्जी कॉल, संदिग्ध लिंक और ओटीपी साझा करने जैसी साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने के लिए जागरूक किया गया। साथ ही, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 सहित अन्य पुलिस हेल्पलाइन की जानकारी भी उन्हें प्रदान की गई। एसएसपी ने व्यापारियों को भरोसा दिलाया कि जनपद पुलिस उनकी सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।1