राजस्थान के छोटे ट्रक और बस बॉडी निर्माताओं के प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं जनसंसद में सुनकर, उनके साथ केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात की। लंबे समय से ये निर्माता टाटा जैसी कंपनियों के लिए बॉडी बनाते रहे हैं, लेकिन अब कॉन्ट्रैक्ट बाहर की बड़ी कंपनियों को देने की बात हो रही है। सरकार के नए नियम और भारी शुल्क उन्हें कारोबार बंद करने पर मजबूर कर सकते हैं, जिससे लाखों परिवारों की रोज़ी रोटी पर खतरा है। सिर्फ राजस्थान में 1000+ यूनिट्स हैं, जो 40-50 हजार लोगों को रोजगार देती हैं। देशभर में 10,000+ यूनिट्स हैं जो बंद हुई तो लाखों नौकरियां खत्म। हमेशा से मोदी सरकार की नीति यही रही है: बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा, छोटे उद्योगों पर वार। यह ‘quid pro quo’ का खेल है - एक हाथ कॉन्ट्रैक्ट ले, दूसरे हाथ फंडिंग दे, जिसमें छोटे व्यापार सक्षम नहीं हैं। MSME को न वित्तीय मदद, न तकनीकी सहारा जबकि असली रोजगार यही पैदा करते हैं। गडकरी जी ने ये समस्याएं सुन कर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया: * नियम सरल किए जाएंगे * बैंकों से वित्तीय सहायता दिलाई जाएगी * शेड और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित होंगे * देरी और भ्रष्टाचार कम किया जाएगा उनका द्विपक्षीय नजरिये से समाधान का प्रयास सराहनीय है। राजस्थान के छोटे ट्रक और बस बॉडी निर्माताओं के प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं जनसंसद में सुनकर, उनके साथ केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात की। लंबे समय से ये निर्माता टाटा जैसी कंपनियों के लिए बॉडी बनाते रहे हैं, लेकिन अब कॉन्ट्रैक्ट बाहर की बड़ी कंपनियों को देने की बात हो रही है। सरकार के नए नियम और भारी शुल्क उन्हें कारोबार बंद करने पर मजबूर कर सकते हैं, जिससे लाखों परिवारों की रोज़ी रोटी पर खतरा है। सिर्फ राजस्थान में 1000+ यूनिट्स हैं, जो 40-50 हजार लोगों को रोजगार देती हैं। देशभर में 10,000+ यूनिट्स हैं जो बंद हुई तो लाखों नौकरियां खत्म। हमेशा से मोदी सरकार की नीति यही रही है: बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा, छोटे उद्योगों पर वार। यह ‘quid pro quo’ का खेल है - एक हाथ कॉन्ट्रैक्ट ले, दूसरे हाथ फंडिंग दे, जिसमें छोटे व्यापार सक्षम नहीं हैं। MSME को न वित्तीय मदद, न तकनीकी सहारा जबकि असली रोजगार यही पैदा करते हैं। गडकरी जी ने ये समस्याएं सुन कर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया: * नियम सरल किए जाएंगे * बैंकों से वित्तीय सहायता दिलाई जाएगी * शेड और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित होंगे * देरी और भ्रष्टाचार कम किया जाएगा उनका द्विपक्षीय नजरिये से समाधान का प्रयास सराहनीय है।
राजस्थान के छोटे ट्रक और बस बॉडी निर्माताओं के प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं जनसंसद में सुनकर, उनके साथ केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात की। लंबे समय से ये निर्माता टाटा जैसी कंपनियों के लिए बॉडी बनाते रहे हैं, लेकिन अब कॉन्ट्रैक्ट बाहर की बड़ी कंपनियों को देने की बात हो रही है। सरकार के नए नियम और भारी शुल्क उन्हें कारोबार बंद करने पर मजबूर कर सकते हैं, जिससे लाखों परिवारों की रोज़ी रोटी पर खतरा है। सिर्फ राजस्थान में 1000+ यूनिट्स हैं, जो 40-50 हजार लोगों को रोजगार देती हैं। देशभर में 10,000+ यूनिट्स हैं जो बंद हुई तो लाखों नौकरियां खत्म। हमेशा से मोदी सरकार की नीति यही रही है: बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा, छोटे उद्योगों पर वार। यह ‘quid pro quo’ का खेल है - एक हाथ कॉन्ट्रैक्ट ले, दूसरे हाथ फंडिंग दे, जिसमें छोटे व्यापार सक्षम नहीं हैं। MSME को न वित्तीय मदद, न तकनीकी सहारा जबकि असली रोजगार यही पैदा करते हैं। गडकरी जी ने ये समस्याएं सुन कर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया: * नियम सरल किए जाएंगे * बैंकों से वित्तीय सहायता दिलाई जाएगी * शेड और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित होंगे * देरी और भ्रष्टाचार कम किया जाएगा उनका द्विपक्षीय नजरिये से समाधान का प्रयास सराहनीय है। राजस्थान के छोटे ट्रक और बस बॉडी निर्माताओं के प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं जनसंसद में सुनकर, उनके साथ केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात की। लंबे समय से ये निर्माता टाटा जैसी कंपनियों के लिए बॉडी बनाते रहे हैं, लेकिन अब कॉन्ट्रैक्ट बाहर की बड़ी कंपनियों को देने की बात हो रही है। सरकार के नए नियम और भारी शुल्क उन्हें कारोबार बंद करने पर मजबूर कर सकते हैं, जिससे लाखों परिवारों की रोज़ी रोटी पर खतरा है। सिर्फ राजस्थान में 1000+ यूनिट्स हैं, जो 40-50 हजार लोगों को रोजगार देती हैं। देशभर में 10,000+ यूनिट्स हैं जो बंद हुई तो लाखों नौकरियां खत्म। हमेशा से मोदी सरकार की नीति यही रही है: बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा, छोटे उद्योगों पर वार। यह ‘quid pro quo’ का खेल है - एक हाथ कॉन्ट्रैक्ट ले, दूसरे हाथ फंडिंग दे, जिसमें छोटे व्यापार सक्षम नहीं हैं। MSME को न वित्तीय मदद, न तकनीकी सहारा जबकि असली रोजगार यही पैदा करते हैं। गडकरी जी ने ये समस्याएं सुन कर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया: * नियम सरल किए जाएंगे * बैंकों से वित्तीय सहायता दिलाई जाएगी * शेड और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित होंगे * देरी और भ्रष्टाचार कम किया जाएगा उनका द्विपक्षीय नजरिये से समाधान का प्रयास सराहनीय है।
- राजस्थान के छोटे ट्रक और बस बॉडी निर्माताओं के प्रतिनिधिमंडल की समस्याएं जनसंसद में सुनकर, उनके साथ केंद्रीय परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी जी से मुलाकात की। लंबे समय से ये निर्माता टाटा जैसी कंपनियों के लिए बॉडी बनाते रहे हैं, लेकिन अब कॉन्ट्रैक्ट बाहर की बड़ी कंपनियों को देने की बात हो रही है। सरकार के नए नियम और भारी शुल्क उन्हें कारोबार बंद करने पर मजबूर कर सकते हैं, जिससे लाखों परिवारों की रोज़ी रोटी पर खतरा है। सिर्फ राजस्थान में 1000+ यूनिट्स हैं, जो 40-50 हजार लोगों को रोजगार देती हैं। देशभर में 10,000+ यूनिट्स हैं जो बंद हुई तो लाखों नौकरियां खत्म। हमेशा से मोदी सरकार की नीति यही रही है: बड़े कॉरपोरेट्स को फायदा, छोटे उद्योगों पर वार। यह ‘quid pro quo’ का खेल है - एक हाथ कॉन्ट्रैक्ट ले, दूसरे हाथ फंडिंग दे, जिसमें छोटे व्यापार सक्षम नहीं हैं। MSME को न वित्तीय मदद, न तकनीकी सहारा जबकि असली रोजगार यही पैदा करते हैं। गडकरी जी ने ये समस्याएं सुन कर सकारात्मक रुख दिखाते हुए आश्वासन दिया: * नियम सरल किए जाएंगे * बैंकों से वित्तीय सहायता दिलाई जाएगी * शेड और बिजली कनेक्शन सुनिश्चित होंगे * देरी और भ्रष्टाचार कम किया जाएगा उनका द्विपक्षीय नजरिये से समाधान का प्रयास सराहनीय है।1
- सांसद और विधायक की अनदेखी जनता की परेशानी की वजह क्या यही है विकास का नाम बिजली, पानी, सड़क की मांग, पर सुनता कौन है पुस्ता की जनता अब जाग चुकी है, अब नहीं होगी अनदेखी क्या आपको यह मैटर पसंद आया या कुछ बदलाव चाहिए?2
- ग्रेटर नोएडा (सेक्टर चाई-4): शहर के सेक्टर चाई-4 स्थित आदर्श विहार सोसायटी में इन दिनों निवासियों का जीना दूभर हो गया है। सोसायटी की मुख्य समस्या जल निकासी की है, जिसका कारण कुछ लोगों द्वारा निजी स्वार्थ के लिए नालियों के ऊपर बनाए गए अवैध रैम्प हैं। *क्या है मुख्य समस्या?* सोसायटी के कई घरों के बाहर लोगों ने अपनी सुविधा के लिए नालियों को पूरी तरह से पक्के रैम्प बनाकर ढक दिया है। *इसके कारण:* सफाई में बाधा: नालियों की नियमित सफाई नहीं हो पा रही है। जलभराव और गंदगी: पानी का निकास रुकने से नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं, जिससे सड़कों पर कीचड़ और गंदगी का अंबार लगा है। *घरों में सीलन:* नालियों के जाम होने से गंदा पानी जमीन के अंदर रिस रहा है, जिससे नीचे (Ground Floor) के फ्लैटों की दीवारों में भारी रिसाव (seepage) हो रहा है। इससे इमारतों की मजबूती को भी खतरा पैदा हो गया है। RWA और अथॉरिटी की भूमिका आदर्श विहार सोसायटी के RWA अध्यक्ष प्रमोद प्रधान ने बताया कि इस समस्या को लेकर निवासियों में काफी रोष है। उन्होंने कहा: "हमने इस गंभीर विषय पर ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी को कई बार लिखित शिकायत दी है और अधिकारियों को अवगत कराया है। लेकिन विडंबना यह है कि अभी तक प्रशासन की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। अधिकारियों की अनदेखी के कारण लोग नरकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।" *बीमारियों का खतरा* स्थानीय निवासियों का कहना है कि रुके हुए गंदे पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है, जिससे डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा मंडरा रहा है। लोगों ने मांग की है कि ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी तत्काल संज्ञान ले और इन अवैध रैम्पों को हटाकर नालियों को सुचारू रूप से साफ कराए।2
- * बुलंदशहर जिले की सिकंदराबाद तहसील के ग्राम नगला बड़ौदा में सड़क निर्माण कार्य रुकने से नाराज ग्रामीणों का धरना पिछले दो दिनों से लगातार जारी है। बृहस्पतिवार को हुई लगातार बारिश के बावजूद भी ग्रामीण धरना प्रदर्शन पर डटे रहे और उनका हौसला जरा भी कम नहीं हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले तीन महीनों से हरिराम सिंह के मकान से रजवाहे तक बन रही इंटरलॉकिंग सड़क का निर्माण कार्य दबंगों द्वारा रुकवा रखा है जो अधूरा पड़ा है, जिससे गांव के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत के बावजूद भी समस्या का समाधान नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार, प्रशासनिक अधिकारियों—एसडीएम, नायब तहसीलदार और लेखपाल द्वारा मौके का निरीक्षण कर कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन इसके बाद भी काम दोबारा बंद हो गया, जिससे ग्रामीणों में रोष व्याप्त है। वहीं ग्राम प्रधान देवी सिंह ने बताया कि पहले दिन मीडिया में मामला आने पर एसडीएम सिकंदराबाद द्वारा मौके पर नायब तहसीलदार दो लेखपाल की टीम भेजी जिसके बाद राजस्व विभाग की टीम के द्वारा मौके पर निरीक्षण के किया गया है। उन्होंने बताया कि नायब तहसीलदार द्वारा नक्शे के आधार पर रास्ते की माप तोल की जा रही है। नक्शे के अनुसार यदि किसी ग्रामीण का मकान भी रास्ते में आता है तो उनको हटाने के लिए सरकारी प्रकिया के अनुसार नोटिश दिए जाएंगे। धरने पर बैठे ग्रामीणों में सरवन सिंह, हरेराम सिंह, हरपाल सिंह, पीतमपाल सिंह, नरेंद्र सिंह, यशपाल सिंह, बंटी सिंह, मांगे सिंह, मोंटी सिंह, महेश सिंह, जग्गू सिंह, मुन्नी सिंह, नरेश सिंह, सुरेश सिंह, राधेश्याम सिंह, कुमारी सिंह, लाल सिंह, और रब्बू सिंह सहित कई लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही सड़क निर्माण कार्य दोबारा शुरू नहीं कराया गया, तो वे जिला अधिकारी बुलंदशहर को ज्ञापन सौंपेंगे और आंदोलन को और तेज करेंगे। ग्राम प्रधान देवी सिंह ने कहा कि जब तक उनकी रास्ते की समस्या पूरी नहीं होंगी, तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा।2
- Post by Praveen Kumar1
- Post by Lokendra Raj Singh1
- बुलंदशहर (थाना अहमदगढ़): उत्तर प्रदेश में 'जीरो टॉलरेंस' और 'अपराध मुक्त' प्रदेश के दावों के बीच बुलंदशहर के थाना अहमदगढ़ क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक पीड़ित तार चोरी की शिकायत लेकर दर-दर भटक रहा है, लेकिन पुलिस मुकदमा दर्ज करने को तैयार नहीं है। पीड़ित द्वारा चोरी के संबंध में कई बार लिखित प्रार्थना पत्र दिए जा चुके हैं, लेकिन अहमदगढ़ थाना पुलिस मामले को लगातार अनसुना कर रही है। पीड़ित का दावा है कि उसके पास चोरी की घटना के पुख्ता सबूत और साक्ष्य मौजूद हैं। वहीं, दूसरी ओर अहमदगढ़ थाना प्रभारी का कहना है कि चोरी का यह मामला पूरी तरह 'फर्जी' है। जब पीड़ित के पास सबूत मौजूद हैं, तो पुलिस आखिर किस आधार पर जांच से पहले ही इसे फर्जी करार दे रही है? आखिर क्यों साक्ष्य होने के बावजूद पुलिस मुकदमा दर्ज करने से कतरा रही है? पीड़ित अब उच्चाधिकारियों से न्याय की गुहार लगा रहा है ताकि उसकी मेहनत की कमाई (तार) चोरी करने वालों पर कार्रवाई हो सके। क्या पुलिस प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर निष्पक्ष जांच कराएगा? रिपोर्ट: मनोज गिरी, बुलन्दशहर टाइम्स न्यूज1
- यह एक गंभीर मुद्दा है नोएडा में शासन प्रशासन की नाकामियों के कारण आम जनता को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। बिजली, पानी, सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी से लोग परेशान हैं2