बिलासपुर जिले में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही खरीफ सीजन में धान की बोनी और रोपाई का काम तेजी से चल रहा है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। केंद्र ने किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्म के धान के बीजों का उपयोग करने, बीजोपचार अपनाने तथा संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सिफारिश की है। कृषि विज्ञान केंद्र ने विशेष रूप से इंद्रावती धान, एमटीयू-1153, विक्रम टीसीआर और छत्तीसगढ़ धान-1919 जैसी उन्नत एवं प्रमाणित किस्मों के बीजों के इस्तेमाल की सलाह दी है। सीधी बोनी करने वाले किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 50 किलोग्राम बीज का उपयोग करने, 20 सेंटीमीटर की कतार दूरी रखने और 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बुवाई करने की अनुशंसा की गई है, जिससे पौधों का समान विकास होता है और फसल प्रबंधन आसान हो जाता है। रोपाई विधि अपनाने वाले किसानों को 20 से 21 दिन की स्वस्थ पौध का उपयोग करने तथा 20x10 सेंटीमीटर की दूरी पर प्रति स्थान 2 से 3 पौधे लगाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नर्सरी की उचित देखभाल, समय पर रोपाई पूरी करने और खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र ने किसानों को बुवाई से पहले बीजोपचार अनिवार्य रूप से करने, समय पर खरपतवार नियंत्रण करने और अनुशंसित मात्रा में नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश का संतुलित उपयोग करने की भी सलाह दी है ताकि फसल की अच्छी बढ़वार सुनिश्चित हो सके और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में जिले में घने बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में किसानों को इस अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर धान की बोनी एवं रोपाई का कार्य समय पर पूरा करने की सलाह दी गई है। साथ ही, कीटनाशकों का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही करने और खेतों की नियमित निगरानी रखने की अपील भी की गई है।
बिलासपुर जिले में बारिश की गतिविधियां बढ़ने के साथ ही खरीफ सीजन में धान की बोनी और रोपाई का काम तेजी से चल रहा है। इस स्थिति को देखते हुए कृषि विज्ञान केंद्र, बिलासपुर ने किसानों के लिए मौसम आधारित कृषि सलाह जारी की है। केंद्र ने किसानों को प्रमाणित और उन्नत किस्म के धान के बीजों का उपयोग करने, बीजोपचार अपनाने तथा संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करते हुए वैज्ञानिक तरीके से खेती करने की सिफारिश की है। कृषि विज्ञान केंद्र ने विशेष रूप से इंद्रावती धान, एमटीयू-1153, विक्रम टीसीआर और छत्तीसगढ़ धान-1919 जैसी उन्नत एवं प्रमाणित किस्मों के बीजों के इस्तेमाल की सलाह दी है। सीधी बोनी करने वाले किसानों के लिए प्रति हेक्टेयर 50 किलोग्राम बीज का उपयोग करने, 20 सेंटीमीटर की कतार दूरी रखने और 3 से 4 सेंटीमीटर की गहराई पर बुवाई करने की अनुशंसा की गई है, जिससे पौधों का समान विकास होता है और फसल प्रबंधन आसान हो जाता है। रोपाई विधि अपनाने वाले किसानों को 20 से 21 दिन की स्वस्थ पौध का उपयोग करने तथा 20x10 सेंटीमीटर की दूरी पर प्रति स्थान 2 से 3 पौधे लगाने का सुझाव दिया गया है। इसके अतिरिक्त, नर्सरी की उचित देखभाल, समय पर रोपाई पूरी करने और खेत में जल निकासी की समुचित व्यवस्था बनाए रखने पर भी जोर दिया गया है। केंद्र ने किसानों को बुवाई से पहले बीजोपचार अनिवार्य रूप से करने, समय पर खरपतवार नियंत्रण करने और अनुशंसित मात्रा में नत्रजन, स्फुर एवं पोटाश का संतुलित उपयोग करने की भी सलाह दी है ताकि फसल की अच्छी बढ़वार सुनिश्चित हो सके और अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सके। मौसम पूर्वानुमान के अनुसार, आने वाले दिनों में जिले में घने बादल छाए रहने और हल्की से मध्यम वर्षा होने की संभावना है। ऐसे में किसानों को इस अनुकूल मौसम का लाभ उठाकर धान की बोनी एवं रोपाई का कार्य समय पर पूरा करने की सलाह दी गई है। साथ ही, कीटनाशकों का छिड़काव केवल मौसम साफ रहने पर ही करने और खेतों की नियमित निगरानी रखने की अपील भी की गई है।
- कोरबा जिले में किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने के उद्देश्य से एक एचपीवी (HPV) टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है।1
- जांजगीर जिले के नैला स्थित एक खाद भंडार से कृषि विभाग की टीम ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 1013 बोरी खाद जब्त की है। इस कार्रवाई के तहत खाद की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। दुकान के निरीक्षण के दौरान खाद भंडार में कई अन्य कमियां भी पाई गईं।1
- घाटबर्रा और आसपास के हसदेव अरण्य क्षेत्र में कॉर्पोरेट कोयला खनन कार्यों तथा स्वदेशी गोंड आदिवासी आबादी के बीच एक गहरा संघर्ष चल रहा है। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने हाल ही में ग्रामीणों की याचिकाओं को खारिज करते हुए उनके सामुदायिक वन अधिकारों को रद्द करने के फैसले को बरकरार रखा है, जिसे स्थानीय प्रतिरोध के लिए एक महत्वपूर्ण झटके के रूप में देखा जा रहा है। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि 2013 का अनुदान त्रुटिपूर्ण था। हसदेव अरंद कोयला क्षेत्र मध्य भारत के सबसे बड़े अखंडित वनों में से एक है, जिसमें कोयले का विशाल भंडार मौजूद है। परसा ईस्ट और केटे बेसेन (पीईकेबी) कोयला ब्लॉक घाटबारा के निकटवर्ती क्षेत्रों से सटा हुआ है। इस क्षेत्र में खनन राज्य की बिजली उत्पादन के लिए कोयले की आपूर्ति से जुड़ा है और इसका संचालन अदानी एंटरप्राइजेज सहित कई संस्थाओं द्वारा किया जाता है। वर्ष 2013 में, घाटबारा गांव के ग्रामीणों को वन अधिकार अधिनियम (एफआरए) के तहत सामुदायिक वन अधिकार (सीएफआर) प्रदान किए गए थे। हालांकि, 2016 में यह कहते हुए कि इस भूमि का उपयोग 2012 में खनन के लिए किया गया था, इन अधिकारों को रद्द कर दिया गया था। इस बीच, स्थानीय आदिवासी समुदाय और हसदेव अरण्य बचाओ संघर्ष समिति जैसे पर्यावरण समूह लगातार खनन और वनों की कटाई का विरोध कर रहे हैं। वे मानवाधिकार संबंधी चिंताओं, ग्राम सभा की उचित सहमति के अभाव और हसदेव नदी के जलग्रहण क्षेत्र को हुए महत्वपूर्ण पारिस्थितिक नुकसान का हवाला देते हुए अपनी आवाज उठा रहे हैं।1
- बिलासपुर के अग्रसेन चौक स्थित एक निजी परिसर में कथित धर्मांतरण का मामला सामने आने के बाद इलाके का माहौल गरमा गया। इस घटना की जानकारी मिलते ही हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता तारबहार थाने पहुंचे और परिसर का घेराव कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। संगठन के पदाधिकारी थाने में डटे रहे, जबकि बाहर जुटे कार्यकर्ताओं ने 'जय श्री राम' के नारे लगाकर अपना विरोध जताया। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।1
- बिलासपुर जिले के तोरवा थाना क्षेत्र में एक महिला के साथ अभद्र व्यवहार और छेड़छाड़ के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। प्रार्थिया ने 4 जुलाई 2026 को थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उसके मोहल्ले का रहने वाला धरम यादव, जिसकी उम्र 40 वर्ष है और जो हेमूनगर, तोरवा, बिलासपुर का निवासी है, लंबे समय से उस पर बुरी नीयत रख रहा था और अभद्र व्यवहार करता था। शिकायत के अनुसार, 4 जुलाई की शाम करीब 3:30 बजे आरोपी धरम यादव ने गाली-गलौज करते हुए महिला के साथ छेड़छाड़ की और बुरी नीयत से उसके सीने को छुआ। इस मामले में थाना तोरवा में अपराध क्रमांक 370/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 74, 296, 115(2) और 351(3) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए, थाना प्रभारी रजनीश सिंह के निर्देश पर पुलिस टीम ने तत्काल कार्रवाई की। आरोपी धरम यादव को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया और उसे 5 जुलाई 2026 को न्यायालय में पेश किया गया, जहाँ से आगे की वैधानिक कार्रवाई की गई। तोरवा पुलिस ने स्पष्ट किया है कि महिलाओं से जुड़े अपराधों में तत्काल और सख्त कार्रवाई की जा रही है और ऐसे मामलों में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।1
- कटघोरा थाना क्षेत्र में आपराधिक घटनाओं का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। पहले एक सराफा दुकान में लूट की वारदात हुई थी, इसके बाद तहसील परिसर से एसी की चोरी कर ली गई थी। अब इसी क्रम में एक किसान के 25 बकरे भी चोरी हो गए हैं, जिसने क्षेत्र में बढ़ती चोरी और लूट की वारदातों को एक बार फिर उजागर किया है।1
- शहर में दिनदहाड़े 60 हजार रुपए की उठाईगिरी का एक मामला सामने आया है। यह पूरी वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है।1
- जैजैपुर पुलिस ने महिला संबंधी अपराध पर त्वरित कार्रवाई करते हुए, बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म करने वाले आरोपियों को मात्र चार घंटे के भीतर गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। पुलिस की इस फुर्तीली कार्यवाही की जानकारी मिली है।1
- बिलासपुर शहर के नेहरू नगर स्थित पौष्टिकम के सामने शनिवार देर रात करीब 11 बजे शराब के नशे में एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि कार का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया और वह घूमते हुए सड़क के बीचों-बीच आ गई, जिससे कुछ समय के लिए इलाके में अफरा-तफरी मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार चालक नशे की हालत में वाहन चला रहा था। हादसे में कार का एयरबैग आंशिक रूप से खुला, लेकिन टक्कर की तीव्रता इतनी अधिक थी कि चालक का सिर सीधे सामने के शीशे से टकरा गया, जिससे उसकी नाक पर गंभीर चोट आई। बताया गया कि चालक की अधिक लंबाई भी चोट की गंभीरता का एक कारण रही। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, यह चालक राजेंद्र नगर स्थित बाजपेई चैंबर के पीछे रहने वाला पाण्डेय उपनाम का निवासी है। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय सड़क पर ज्यादा आवाजाही नहीं थी, अन्यथा यदि कोई अन्य वाहन या राहगीर मौजूद होता तो यह दुर्घटना कई लोगों की जान ले सकती थी; चंद सेकंड का अंतर एक बड़ी त्रासदी में बदल सकता था। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय नागरिक राजेंद्र अरोरा और अन्य लोग मौके पर पहुंचे और तत्काल डायल-112 को सूचना दी। पुलिस ने आकर क्षतिग्रस्त कार को सड़क किनारे हटवाया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका। इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि शराब के नशे में वाहन चलाना न केवल चालक के लिए, बल्कि सड़क पर चल रहे प्रत्येक व्यक्ति के जीवन के लिए खतरा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि नशे में वाहन चलाने वालों के खिलाफ विशेष अभियान चलाकर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही से कोई बड़ी त्रासदी न हो।1