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31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव. 31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव. मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला। आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।

9 hrs ago
user_Ranjeet Gupta
Ranjeet Gupta
City Star Katihar, Bihar•
9 hrs ago

31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव. 31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव. मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला। आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।

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  • बेनी पंचायत में बड़ी धूमधाम से हुआ मा गयात्री परव का अनुष्ठान इस दौरान घर परिवार में अच्छे ढंग से चलिए समाज में शांति बनी रहे आपसी मतभेद को मिटाए अपने आप को स्वच्छ और स्वस्थ रखें की बात सुनकर भक्तगण काफी खुश
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    बेनी पंचायत में बड़ी धूमधाम से हुआ मा गयात्री परव का अनुष्ठान इस दौरान घर परिवार में अच्छे ढंग से चलिए समाज में शांति बनी रहे आपसी मतभेद को मिटाए अपने आप को स्वच्छ और स्वस्थ रखें की बात सुनकर भक्तगण काफी खुश
    user_इंडिया पब्लिक न्यूज आज की आवाज
    इंडिया पब्लिक न्यूज आज की आवाज
    Advertising Photographer Kadwa, Katihar•
    5 hrs ago
  • 31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला। आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।
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    31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना
8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव

कटिहार के मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं।
दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला।
आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान
घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।
    user_Asadur Rahman
    Asadur Rahman
    कटिहार, कटिहार, बिहार•
    6 hrs ago
  • 31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव. 31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना 8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव. मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई। परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं। दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला। आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।
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    31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना
8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव.
31 साल बाद घर लौटा बेटा, मां ने आंख के ऊपर कट के निशान से पहचाना
8 साल की उम्र में ट्रेन में सो जाने से बिछड़ गया था परिवार, पिंटू यादव अब्दुल जब्बार बनकर पहुंचा पैतृक गांव.
मनिहारी प्रखंड के कांटाकोष गांव में 31 साल बाद परिवार से बिछड़ा बेटा अपने घर लौट आया। बचपन में पिंटू यादव के नाम से पहचाना जाने वाला युवक अब्दुल जब्बार बनकर अपने पैतृक गांव पहुंचा। बेटे को सामने देखकर मां मीणा देवी की आंखें भर आईं। पिता मोतीलाल यादव और भाई ने भी उसे गले लगा लिया। इस भावुक मिलन की खबर फैलते ही घर पर ग्रामीणों की भीड़ जुट गई।
परिजनों के अनुसार, पिंटू करीब आठ साल की उम्र में दोस्तों के साथ ट्रेन में चढ़ गया था। सफर के दौरान उसे नींद आ गई और उसके दोस्त उतर गए, लेकिन वह ट्रेन में सोता रह गया। नींद खुलने पर उसने खुद को पश्चिम बंगाल के राधिकापुर इलाके में पाया। अनजान जगह पर भटक रहे बच्चे को हरिकृष्णपुरी निवासी अब्दुल रहीम ने सहारा दिया और अपने घर ले जाकर उसका पालन-पोषण किया। समय के साथ उसकी पहचान अब्दुल जब्बार के रूप में हो गई। बाद में उसकी शादी मुतैना खातून से हुई। उसके दो बेटे और एक बेटी हैं।
दिल्ली में काम करने के दौरान एक दोस्त की मदद से उसने अपने परिवार की तलाश शुरू की। पिता का नाम मोतीलाल यादव और गंगा किनारे बसे गांव की धुंधली यादों के सहारे वह मनिहारी पहुंचा। काफी पूछताछ के बाद उसे कांटाकोष में अपने घर का पता मिला।
आंख के ऊपर निशान से हुई पहचान
घर पहुंचने पर मां ने उसकी आंख के ऊपर कट का निशान देखा और उसे अपना बेटा पहचान लिया। पिंटू ने बचपन की कुछ ऐसी बातें भी बताईं, जिनसे परिजनों का विश्वास मजबूत हुआ। हालांकि, इतने वर्षों बाद बदली पहचान और पारिवारिक संबंधों से जुड़े सभी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
घटना की जानकारी मिलने पर स्वामी सत्यप्रकाश बाबा भी परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने कहा कि अब्दुल जब्बार को अपनी इच्छा के अनुसार जन्मस्थान या पश्चिम बंगाल में अपने परिवार के साथ रहने का निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। परिवार को भी उसके फैसले का सम्मान करना चाहिए।
    user_Ranjeet Gupta
    Ranjeet Gupta
    City Star Katihar, Bihar•
    9 hrs ago
  • स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदाताओं से न निवेदन है कि एनडीए प्रत्याशी को अपना बहुमूल्य वोट देकर उनको विजय बनाएं जय जदयू जय NDA जय नीतीश कुमार तय निशांत कुमार
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    स्नातक निर्वाचन क्षेत्र और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के सभी मतदाताओं से न निवेदन है कि एनडीए प्रत्याशी को अपना बहुमूल्य वोट देकर उनको विजय बनाएं 
जय जदयू 
जय NDA 
जय नीतीश कुमार 
तय निशांत कुमार
    user_Imtiyaz haider
    Imtiyaz haider
    Katihar, Bihar•
    10 hrs ago
  • कोढ़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 5 में बच्चों ने किया रावण दहन, परंपरा के साथ मनाया दशहरा,नन्हे हाथों ने बनाया रावण का पुतला, बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश कोढ़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 5 में दशहरा के शुभ अवसर पर बच्चों द्वारा रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया गया, जिसमें स्थानीय बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने स्वयं रावण का पुतला तैयार किया और शांतिपूर्ण माहौल में पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार उसका दहन किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। नन्हे-मुन्ने बच्चों की इस पहल ने दशहरा पर्व की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी दिया। बच्चों ने मिल-जुलकर रावण का पुतला बनाने से लेकर दहन तक की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्व के उत्साह को और बढ़ा दिया। इस अवसर पर वार्ड पार्षद प्रतिनिधि धर्मा शर्मा, वार्ड पार्षद सोनी देवी, सरदार कुंदन सिंह और मिठु सरदार सहित कई लोग मौजूद रहे। वहीं, रमन, गोलू, साहिल, इन्दर समेत बड़ी संख्या में बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया।स्थानीय बच्चों की इस पहल से दशहरा की पारंपरिक संस्कृति और आपसी सहभागिता की भावना को बढ़ावा मिला। लगातार दूसरे वर्ष आयोजित रावण दहन कार्यक्रम वार्ड संख्या 5 में आकर्षण का केंद्र रहा।
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    कोढ़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 5 में बच्चों ने किया रावण दहन, परंपरा के साथ मनाया दशहरा,नन्हे हाथों ने बनाया रावण का पुतला, बुराई पर अच्छाई की जीत का दिया संदेश
कोढ़ा नगर पंचायत के वार्ड संख्या 5 में दशहरा के शुभ अवसर पर बच्चों द्वारा रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष किया गया, जिसमें स्थानीय बच्चों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने स्वयं रावण का पुतला तैयार किया और शांतिपूर्ण माहौल में पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार उसका दहन किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों में खासा उत्साह देखने को मिला। नन्हे-मुन्ने बच्चों की इस पहल ने दशहरा पर्व की परंपरा को आगे बढ़ाने के साथ-साथ बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश भी दिया। बच्चों ने मिल-जुलकर रावण का पुतला बनाने से लेकर दहन तक की तैयारियों में सक्रिय भूमिका निभाई। स्थानीय स्तर पर आयोजित इस कार्यक्रम ने पर्व के उत्साह को और बढ़ा दिया।
इस अवसर पर वार्ड पार्षद प्रतिनिधि धर्मा शर्मा, वार्ड पार्षद सोनी देवी, सरदार कुंदन सिंह और मिठु सरदार सहित कई लोग मौजूद रहे। वहीं, रमन, गोलू, साहिल, इन्दर समेत बड़ी संख्या में बच्चों ने कार्यक्रम में भाग लिया।स्थानीय बच्चों की इस पहल से दशहरा की पारंपरिक संस्कृति और आपसी सहभागिता की भावना को बढ़ावा मिला। लगातार दूसरे वर्ष आयोजित रावण दहन कार्यक्रम वार्ड संख्या 5 में आकर्षण का केंद्र रहा।
    user_NARAYAN JHA
    NARAYAN JHA
    कोढ़ा, कटिहार, बिहार•
    15 hrs ago
  • दुकानदार पढ़ता रहा नमाज, मौका पाकर कंबल और तकिए चुरा ले गया चोर; घटना CCTV में कैद. जमुई (बिहार): नगर थाना क्षेत्र के महाराजगंज स्थित एक कपड़े की दुकान से चोरी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसकी पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई। घटना के समय दुकानदार दुकान के भीतर नमाज अदा कर रहा था, जिसका फायदा उठाकर एक अज्ञात युवक दुकान के बाहर रखे सामान पर हाथ साफ कर फरार हो गया। नमाज के दौरान दिया वारदात को अंजाम पीड़ित दुकानदार खुर्शीद आलम के अनुसार, वे शनिवार शाम को दुकान के अंदर पूरी तल्लीनता से नमाज पढ़ रहे थे। उसी दौरान एक अज्ञात युवक दुकान के पास पहुंचा। उसने पहले आसपास देखा और फिर जैसे ही दुकानदार सजदे में गया, युवक ने दुकान के बाहर रखे सामान में से एक कंबल का पैकेट और दो गोल तकिए उठाए और वहां से चंपत हो गया। सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा नमाज पूरी करने के बाद जब दुकानदार ने बाहर सामान गायब देखा, तो उन्होंने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की। फुटेज देखने पर चोरी की पूरी करतूत सामने आ गई। दुकानदार के मुताबिक, चुराए गए कंबल की कीमत लगभग 1,500 रुपये और तकियों की कीमत करीब 600 रुपये है, यानी कुल 2,100 रुपये के सामान की चोरी हुई है। फिलहाल इस फुटेज के आधार पर स्थानीय स्तर पर आरोपी युवक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
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    दुकानदार पढ़ता रहा नमाज, मौका पाकर कंबल और तकिए चुरा ले गया चोर; घटना CCTV में कैद.
जमुई (बिहार): नगर थाना क्षेत्र के महाराजगंज स्थित एक कपड़े की दुकान से चोरी का एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसकी पूरी वारदात दुकान में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई। घटना के समय दुकानदार दुकान के भीतर नमाज अदा कर रहा था, जिसका फायदा उठाकर एक अज्ञात युवक दुकान के बाहर रखे सामान पर हाथ साफ कर फरार हो गया।
नमाज के दौरान दिया वारदात को अंजाम
पीड़ित दुकानदार खुर्शीद आलम के अनुसार, वे शनिवार शाम को दुकान के अंदर पूरी तल्लीनता से नमाज पढ़ रहे थे। उसी दौरान एक अज्ञात युवक दुकान के पास पहुंचा। उसने पहले आसपास देखा और फिर जैसे ही दुकानदार सजदे में गया, युवक ने दुकान के बाहर रखे सामान में से एक कंबल का पैकेट और दो गोल तकिए उठाए और वहां से चंपत हो गया।
सीसीटीवी फुटेज से हुआ खुलासा
नमाज पूरी करने के बाद जब दुकानदार ने बाहर सामान गायब देखा, तो उन्होंने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे की जांच की। फुटेज देखने पर चोरी की पूरी करतूत सामने आ गई। दुकानदार के मुताबिक, चुराए गए कंबल की कीमत लगभग 1,500 रुपये और तकियों की कीमत करीब 600 रुपये है, यानी कुल 2,100 रुपये के सामान की चोरी हुई है।
फिलहाल इस फुटेज के आधार पर स्थानीय स्तर पर आरोपी युवक की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
    user_Seemanchal Bytes
    Seemanchal Bytes
    Media company Purnia East, Bihar•
    20 hrs ago
  • कोशी स्नातक निर्वाचन को लेकर तैयारी पूरी, कटिहार में 20 मतदान केंद्रों पर 10,977 मतदाता करेंगे मतदान कोशी स्नातक निर्वाचन को लेकर तैयारी पूरी, कटिहार में 20 मतदान केंद्रों पर 10,977 मतदाता करेंगे मतदान
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    कोशी स्नातक निर्वाचन को लेकर तैयारी पूरी, कटिहार में 20 मतदान केंद्रों पर 10,977 मतदाता करेंगे मतदान

कोशी स्नातक निर्वाचन को लेकर तैयारी पूरी, कटिहार में 20 मतदान केंद्रों पर 10,977 मतदाता करेंगे मतदान
    user_Asadur Rahman
    Asadur Rahman
    कटिहार, कटिहार, बिहार•
    6 hrs ago
  • कटिहार- सालमारी थाना क्षेत्र अंतर्गत कमलाबाड़ी वार्ड संख्या आठ में मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बाइक लेकर लौटने में थोड़ी देर होने से नाराज एक उन्मादी युवक ने 30 वर्षीय युवक के कंठ (गले) पर बड़े पेचकस से ताबड़तोड़ वार कर उसकी निर्मम हत्या कर दी। मृतक की पहचान कमलाबाड़ी निवासी हथीराम सिंह के 30 वर्षीय पुत्र डीजन कुमार सिंह के रूप में हुई है। शाम के समय घटी इस रूह कंपा देने वाली वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही सालमारी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
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    कटिहार-  सालमारी थाना क्षेत्र अंतर्गत कमलाबाड़ी वार्ड संख्या आठ में मामूली विवाद ने खूनी रूप ले लिया। बाइक लेकर लौटने में थोड़ी देर होने से नाराज एक उन्मादी युवक ने 30 वर्षीय युवक के कंठ (गले) पर बड़े पेचकस से ताबड़तोड़ वार कर उसकी निर्मम हत्या कर दी।

मृतक की पहचान कमलाबाड़ी निवासी हथीराम सिंह के 30 वर्षीय पुत्र डीजन कुमार सिंह के रूप में हुई है। शाम के समय घटी इस रूह कंपा देने वाली वारदात से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। घटना की सूचना मिलते ही सालमारी थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।
    user_Mukesh Kumar
    Mukesh Kumar
    हसनगंज, कटिहार, बिहार•
    15 hrs ago
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