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मैं तो बस छोटा सा, ईश्वर का दास हूँ॥ आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🏻 *सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !* *“मैं न होता, तो क्या होता?”* “अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा* तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सिर काट लेना चाहिये! किन्तु, अगले ही क्षण, उन्होंने देखा *"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !* यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बढ़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि *यदि मैं न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?* बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, *मैं न होता तो क्या होता* ? परन्तु ये क्या हुआ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये, *कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!* आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!" *तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है* और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, *एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा!* जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े, *तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की* और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो *हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है!* आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि *बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ में कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये* तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी, *वरना लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता?* पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो *मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !* इसलिये *सदैव याद रखें,* कि *संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान* है! हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं! इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें* कि... मैं न होता, तो क्या होता ?* ना मैं श्रेष्ठ हूँ, ना ही मैं ख़ास हूँ, मैं तो बस छोटा सा, ईश्वर का दास हूँ॥ आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🏻

5 hrs ago
user_डॉ. उमेश कुमार
डॉ. उमेश कुमार
Doctor गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
5 hrs ago
95db1297-c66b-4c28-8e1f-0f52e0790602

मैं तो बस छोटा सा, ईश्वर का दास हूँ॥ आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🏻 *सुंदरकांड में एक प्रसंग अवश्य पढ़ें !* *“मैं न होता, तो क्या होता?”* “अशोक वाटिका" में *जिस समय रावण क्रोध में भरकर, तलवार लेकर, सीता माँ को मारने के लिए दौड़ पड़ा* तब हनुमान जी को लगा कि इसकी तलवार छीन कर, इसका सिर काट लेना चाहिये! किन्तु, अगले ही क्षण, उन्होंने देखा *"मंदोदरी" ने रावण का हाथ पकड़ लिया !* यह देखकर वे गदगद हो गये! वे सोचने लगे, यदि मैं आगे बढ़ता तो मुझे भ्रम हो जाता कि *यदि मैं न होता, तो सीता जी को कौन बचाता?* बहुधा हमको ऐसा ही भ्रम हो जाता है, *मैं न होता तो क्या होता* ? परन्तु ये क्या हुआ? सीताजी को बचाने का कार्य प्रभु ने रावण की पत्नी को ही सौंप दिया! तब हनुमान जी समझ गये, *कि प्रभु जिससे जो कार्य लेना चाहते हैं, वह उसी से लेते हैं!* आगे चलकर जब "त्रिजटा" ने कहा कि "लंका में बंदर आया हुआ है, और वह लंका जलायेगा!" *तो हनुमान जी बड़ी चिंता मे पड़ गये, कि प्रभु ने तो लंका जलाने के लिए कहा ही नहीं है* और त्रिजटा कह रही है कि उन्होंने स्वप्न में देखा है, *एक वानर ने लंका जलाई है! अब उन्हें क्या करना चाहिए? जो प्रभु इच्छा!* जब रावण के सैनिक तलवार लेकर हनुमान जी को मारने के लिये दौड़े, *तो हनुमान ने अपने को बचाने के लिए तनिक भी चेष्टा नहीं की* और जब "विभीषण" ने आकर कहा कि दूत को मारना अनीति है, तो *हनुमान जी समझ गये कि मुझे बचाने के लिये प्रभु ने यह उपाय कर दिया है!* आश्चर्य की पराकाष्ठा तो तब हुई, जब रावण ने कहा कि *बंदर को मारा नहीं जायेगा, पर पूंछ में कपड़ा लपेट कर, घी डालकर, आग लगाई जाये* तो हनुमान जी सोचने लगे कि लंका वाली त्रिजटा की बात सच थी, *वरना लंका को जलाने के लिए मैं कहां से घी, तेल, कपड़ा लाता, और कहां आग ढूंढता?* पर वह प्रबन्ध भी आपने रावण से करा दिया! जब आप रावण से भी अपना काम करा लेते हैं, तो *मुझसे करा लेने में आश्चर्य की क्या बात है !* इसलिये *सदैव याद रखें,* कि *संसार में जो हो रहा है, वह सब ईश्वरीय विधान* है! हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं! इसीलिये कभी भी ये भ्रम न पालें* कि... मैं न होता, तो क्या होता ?* ना मैं श्रेष्ठ हूँ, ना ही मैं ख़ास हूँ, मैं तो बस छोटा सा, ईश्वर का दास हूँ॥ आप सभी को हनुमान जन्मोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।🙏🏻

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  • *दोस्तों कांग्रेस के इन्हीं नेताओं के कारण जेहादियों का मनोबल बढ़ा हुआ है इतना सब कुछ जानने के बाद भी ये नेता अपने बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं अब ऐसे नेताओं को जूते 🥿से स्वागत करना शुरू करना चाहिए!*
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    *दोस्तों कांग्रेस के इन्हीं नेताओं के कारण जेहादियों का मनोबल बढ़ा हुआ है इतना सब कुछ जानने के बाद भी ये नेता अपने बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं अब ऐसे नेताओं को जूते 🥿से स्वागत करना शुरू करना चाहिए!*
    user_डॉ. उमेश कुमार
    डॉ. उमेश कुमार
    Doctor गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    22 hrs ago
  • चांडिल कंदर्वेद से सटे बॉर्डर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कपाली ओपी अंतर्गत डोबो रोड स्थित पुटीसिल्ली इलाके में ट्रक और हाइवा के बीच जोरदार टक्कर हो गई। हादसा इतना भीषण था कि हाइवा का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर में हाइवा चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ट्रक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना सुबह करीब 5:30 बजे के आसपास हुई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई और राहत-बचाव का काम शुरू किया गया। प्राथमिक तौर पर हादसे की वजह तेज रफ्तार मानी जा रही है, हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है। अपील: प्रशासन ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने और ओवरस्पीडिंग से बचने की अपील की है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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    चांडिल कंदर्वेद से सटे बॉर्डर क्षेत्र में बुधवार सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। कपाली ओपी अंतर्गत डोबो रोड स्थित पुटीसिल्ली इलाके में ट्रक और हाइवा के बीच जोरदार टक्कर हो गई।
हादसा इतना भीषण था कि हाइवा का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। टक्कर में हाइवा चालक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि ट्रक चालक गंभीर रूप से घायल हो गया है। घायल को स्थानीय लोगों की मदद से इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया।
बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना सुबह करीब 5:30 बजे के आसपास हुई। घटना के बाद मौके पर लोगों की भारी भीड़ जुट गई और राहत-बचाव का काम शुरू किया गया।
प्राथमिक तौर पर हादसे की वजह तेज रफ्तार मानी जा रही है, हालांकि पुलिस मामले की जांच कर रही है।
अपील:
प्रशासन ने वाहन चालकों से सावधानी बरतने और ओवरस्पीडिंग से बचने की अपील की है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
    user_DALMA NEWS live
    DALMA NEWS live
    आदित्यपुर (गमहरिया), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    29 min ago
  • Post by Ravi Gupta
    2
    Post by Ravi Gupta
    user_Ravi Gupta
    Ravi Gupta
    सरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    5 hrs ago
  • चक्रधरपुर का ऐतिहासिक मां केरा मंदिर , 400 वर्षों की आस्था , अग्निपथ पर चलकर निभाते हैं श्रद्धा। झारखंड के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत केरा गांव स्थित मां केरा मंदिर आस्था , परंपरा और इतिहास का अद्भुत संगम है। करीब 400 वर्षों से अधिक पुराना यह सिद्ध पीठ हर साल अप्रैल माह में आयोजित होने वाले भव्य मेले और अनोखी धार्मिक परंपराओं के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है । चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान होते हैं। जिसमें झारखंड ही नहीं बल्कि उड़ीसा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति में माहौल से सराबोर रहता है। इतिहास और मान्यता :-केरा राज परिवार के अनुसार सदियों पहले कामाख्या मंदिर (कामरूप) से एक सिद्ध साधु मां भगवती की दिव्या प्रतिमा लेकर केरा पहुंचे थे। उन्होंने नदी किनारे एक वृक्ष के नीचे तपस्या की उनके ब्रह्मलीन होने के बाद केरा रियासत के राजा को स्वप्न में देवी ने दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया। इसके बाद इस पवित्र स्थल पर मां केरा मंदिर का निर्माण कराया गया। जहां आज भी पूजा अर्चना जारी है। अग्निपथ और कठोर भक्ति की परंपरा :- मां केरा मंदिर की सबसे खास पहचान है। श्रद्धालुओं द्वारा नंगे पांव जलते अंगारों पर चलना और कांटों पर लेटकर अपनी आस्था प्रकट करना। मान्यता है की मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त इस कठिन तपस्या के माध्यम से देवी के प्रति कृतज्ञता जताते हैं। छऊ नृत्य और सांस्कृतिक विरासत :- मंदिर परिसर में हर वर्ष भव्य छऊ नृत्य का आयोजन भी किया जाता है। जो इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति पहचान को दर्शाता है। लोक मान्यता है कि स्वयं देवी एक बार छऊ देखने आई थी,जिसके बाद यह परंपरा और भी मजबूत हो गई। मेले का कार्यक्रम अप्रैल 2026 : -1 अप्रैल शुभ घट स्थापना 10 अप्रैल यात्रा घट ,11 अप्रैल वृंदावन यात्रा , 12 अप्रैल गरियाभार यात्रा व छऊ राज परिवार , 13 अप्रैल जलाभिषेक , 14 अप्रैल कालिका घाट एवं हठ भक्ति , मां तेरा मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है , बल्कि यह आस्था , इतिहास और लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, यहां हर साल लाखों लोग अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुंचते हैं।
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    चक्रधरपुर का ऐतिहासिक मां केरा  मंदिर , 400 वर्षों की आस्था , अग्निपथ पर चलकर निभाते हैं श्रद्धा।
झारखंड के चक्रधरपुर प्रखंड अंतर्गत केरा गांव स्थित मां केरा मंदिर आस्था , परंपरा और इतिहास का अद्भुत संगम है। करीब 400 वर्षों से अधिक पुराना यह सिद्ध पीठ हर साल अप्रैल माह में आयोजित होने वाले भव्य मेले और अनोखी धार्मिक परंपराओं के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है ।
चैत्र नवरात्रि के अवसर पर यहां नौ दिनों तक विशेष अनुष्ठान होते हैं। जिसमें झारखंड ही नहीं बल्कि उड़ीसा और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर परिसर भक्ति में माहौल से सराबोर रहता है।
इतिहास और मान्यता :-केरा राज परिवार के अनुसार सदियों पहले कामाख्या मंदिर (कामरूप) से एक सिद्ध साधु मां भगवती की दिव्या प्रतिमा लेकर केरा पहुंचे थे। उन्होंने नदी किनारे एक वृक्ष के नीचे तपस्या की उनके ब्रह्मलीन होने के बाद केरा रियासत के राजा को स्वप्न में देवी ने दर्शन देकर मंदिर निर्माण का आदेश दिया। इसके बाद इस पवित्र स्थल पर मां केरा मंदिर का निर्माण कराया गया। जहां आज भी पूजा अर्चना जारी है।
अग्निपथ और कठोर भक्ति की परंपरा :- मां केरा मंदिर की सबसे खास पहचान है। श्रद्धालुओं द्वारा नंगे पांव जलते अंगारों पर चलना और कांटों पर लेटकर अपनी आस्था प्रकट करना। मान्यता है की मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त इस कठिन तपस्या के माध्यम से देवी के प्रति कृतज्ञता जताते हैं।
छऊ नृत्य और सांस्कृतिक विरासत :- मंदिर परिसर में हर वर्ष भव्य छऊ नृत्य का आयोजन भी किया जाता है। जो इस क्षेत्र की समृद्ध संस्कृति पहचान को दर्शाता है। लोक मान्यता है कि स्वयं देवी एक बार छऊ देखने आई थी,जिसके बाद यह परंपरा और भी मजबूत हो गई।
मेले का कार्यक्रम अप्रैल 2026 : -1 अप्रैल शुभ घट स्थापना  10 अप्रैल यात्रा घट ,11 अप्रैल वृंदावन यात्रा , 12 अप्रैल गरियाभार यात्रा व छऊ राज परिवार , 13 अप्रैल जलाभिषेक , 14 अप्रैल कालिका घाट एवं हठ भक्ति ,
मां तेरा मंदिर न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है , बल्कि यह आस्था , इतिहास और लोक संस्कृति का जीवंत प्रतीक है, यहां हर साल लाखों लोग अपनी श्रद्धा और विश्वास के साथ पहुंचते हैं।
    user_NUNU RAM MAHATO
    NUNU RAM MAHATO
    Local News Reporter गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    7 hrs ago
  • राजनगर के रेनबो स्मार्ट स्कूल बड़ा कूनाबेड़ा में वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुल 110 में से 107 छात्रों ने 80% से अधिक अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। प्री-नर्सरी की वेदंशी महतो 98.56% के साथ टॉपर रहीं, जबकि एलकेजी की इशिता महतो 98.25% के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। इस अवसर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त छात्रों को सम्मानित किया गया। साथ ही वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मेडल व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। प्रधानाचार्य साधन ज्योतिषी ने छात्रों को मेहनत, नैतिकता और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ खेलकूद भी व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं व अभिभावकों का सराहनीय सहयोग रहा। विद्यालय द्वारा निःशुल्क नामांकन व “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत विशेष सुविधा भी दी जा रही है।
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    राजनगर के रेनबो स्मार्ट स्कूल बड़ा कूनाबेड़ा में वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुल 110 में से 107 छात्रों ने 80% से अधिक अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। प्री-नर्सरी की वेदंशी महतो 98.56% के साथ टॉपर रहीं, जबकि एलकेजी की इशिता महतो 98.25% के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
इस अवसर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त छात्रों को सम्मानित किया गया। साथ ही वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मेडल व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
प्रधानाचार्य साधन ज्योतिषी ने छात्रों को मेहनत, नैतिकता और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ खेलकूद भी व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं व अभिभावकों का सराहनीय सहयोग रहा। विद्यालय द्वारा निःशुल्क नामांकन व “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत विशेष सुविधा भी दी जा रही है।
    user_Ravi repoter Rajnagar
    Ravi repoter Rajnagar
    Reporting गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    20 hrs ago
  • टोंटो में पड़ोसी ने कुल्हाड़ी से हमला कर किया जख्मी, इलाज के अभाव में हुई मौत टोंटो थाना के सेरेंगसिया गांव के पदमपुर टोला निवासी 50 वर्षीय दामु सिंकू को पड़ोसी के साथ हुए विवाद में सर पर कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दिया  है। बुधवार की शाम शरेंगसिया गांव में बागवानी विवाद में पड़ोस में रहने वाले परगना सिंकू ने उस पर कुल्हाड़ी से सर पर हमला कर जख्मी कर दिया था ।  रात 6 बजे उसे मूर्छित अवस्था में टोंटो स्वास्थ केंद्र ले जाया गया जहां कोई सहयोग नहीं मिलने पर परिवार वाले किराए की छोटा हाथी वाहन में लेकर कर जख्मी रटी 10 बजे सदर अस्पताल पहुंचे। सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच कर सर पर लगी गंभीर चोट के कारण परिवार वालों को उसे रांची रिम्स ले जाने की सलाह दी है। यहां सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण जख्मी व्यक्ति के साथ आई पत्नी और दो छोटे बच्चे असहाय महसूस कर रहे थे। परिवार वालों के अनुसार उनके पास प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करने के लिए इतने पैसे नहीं है कि वे ईलाज करवाने उसे रांची ले जा सके। उसके साथ आए गांव के मुंडा आदि सदर अस्पताल पहुंचा कर गांव लौट गये। जख्मी व्यक्ति के पुत्र ने बताया शाम चार बजे बागवानी के विवाद में पड़ोस में रहने वाले परगना सिंकू ने उसके पिता पर कुल्हाड़ी से सर पर हमला कर दिया। घटना स्थल पर दामु सिंकू लहूलुहान हो कर गिर गया । परिवार वालों और गांव के मुंडा को जानकारी मिलने पर जख्मी व्यक्ति को सदर अस्पताल लाया गया लेकिन रांची ले जाने की बात पर सभी असमंजस में पड़ गए और रात भर में उसकी मौत हो गई । इस मामले में परिवार वाले डोबरो सिंकू, किशनू सिंकू , पेलंग सिंकू पर आरोप लगाया गया है। #चाईबासासमाचार #कोल्हानखबर #पसिंहभूमसमाचार  #chaibasacrime  #पसिंहभूमअपराध #JharkhandNews  #BreakingNews   #SadarHospital  #kolhannews  #chaibasanews #Tontoझींकपानी #AxAttack #HospitalNegligence
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    टोंटो में पड़ोसी ने कुल्हाड़ी से हमला कर किया जख्मी, इलाज के अभाव में हुई मौत
टोंटो थाना के सेरेंगसिया गांव के पदमपुर टोला निवासी 50 वर्षीय दामु सिंकू को पड़ोसी के साथ हुए विवाद में सर पर कुल्हाड़ी से वार कर हत्या कर दिया  है।
बुधवार की शाम शरेंगसिया गांव में बागवानी विवाद में पड़ोस में रहने वाले परगना सिंकू ने उस पर कुल्हाड़ी से सर पर हमला कर जख्मी कर दिया था ।  रात 6 बजे उसे मूर्छित अवस्था में टोंटो स्वास्थ केंद्र ले जाया गया जहां कोई सहयोग नहीं मिलने पर परिवार वाले किराए की छोटा हाथी वाहन में लेकर कर जख्मी रटी 10 बजे सदर अस्पताल पहुंचे। सदर अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच कर सर पर लगी गंभीर चोट के कारण परिवार वालों को उसे रांची रिम्स ले जाने की सलाह दी है। यहां सरकारी एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण जख्मी व्यक्ति के साथ आई पत्नी और दो छोटे बच्चे असहाय महसूस कर रहे थे। परिवार वालों के अनुसार उनके पास प्राइवेट वाहन की व्यवस्था करने के लिए इतने पैसे नहीं है कि वे ईलाज करवाने उसे रांची ले जा सके। उसके साथ आए गांव के मुंडा आदि सदर अस्पताल पहुंचा कर गांव लौट गये। जख्मी व्यक्ति के पुत्र ने बताया शाम चार बजे बागवानी के विवाद में पड़ोस में रहने वाले परगना सिंकू ने उसके पिता पर कुल्हाड़ी से सर पर हमला कर दिया। घटना स्थल पर दामु सिंकू लहूलुहान हो कर गिर गया । परिवार वालों और गांव के मुंडा को जानकारी मिलने पर जख्मी व्यक्ति को सदर अस्पताल लाया गया लेकिन रांची ले जाने की बात पर सभी असमंजस में पड़ गए और रात भर में उसकी मौत हो गई । इस मामले में परिवार वाले डोबरो सिंकू, किशनू सिंकू , पेलंग सिंकू पर आरोप लगाया गया है।
#चाईबासासमाचार
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#पसिंहभूमसमाचार 
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    user_कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    कोल्हान ब्रेकिंग न्यूज
    Local News Reporter चाईबासा, पश्चिम सिंहभूम, झारखंड•
    1 hr ago
  • Post by Gautam Raftaar media
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    Post by Gautam Raftaar media
    user_Gautam Raftaar media
    Gautam Raftaar media
    बुंडू, रांची, झारखंड•
    4 hrs ago
  • मजदूर को मिले मुआवजा स्थाई नौकरी भारतीय कारंत्तिकारी मजदूर संघ ने उठाई आवाज। आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के Garg Engineering Unit 2 में 8 सितंबर को को विष्णुदेव कुम्हार का कंपनी में काम करने के दौरान मशीन से हाथ कट गया था। जिसके बाद कंपनी ने विष्णुदेव का प्राथमिक उपचार कराया था लेकिन उसको उचित मुआवजा नहीं मिला और न ही स्थाई नौकरी मिला। पीड़ित मजदूर ने इस पूरी घटना की जानकारी भारतीय कारंत्तिकारी मजदूर संघ कोल्हान प्रभारी संजय गोराई को दी जिसके बाद श्री संजय ने मजदूर हित की मांग को लेकर कंपनी प्रबंधन को पीड़िता के परिवार के साथ मिलकर ज्ञापन सौंपा, और जानकारी दी गई की मजदुर को लेकर प्रबंधन विचार विमर्श करें और मजदूर को उचित मुआवजा एवं जीवन यापन के लिए स्थाई नौकरी दी जाए अन्यथा मजदूर संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। बताया जा रहा है कंपनी के अंदर सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है न ही न्यूनतम मजदूरी मिलता है जिसको लेकर कंपनी प्रबंधन अक्सर विवादों में रहता है।
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    मजदूर को मिले मुआवजा स्थाई नौकरी भारतीय कारंत्तिकारी मजदूर संघ ने उठाई आवाज। 
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के Garg Engineering Unit 2 में 8 सितंबर को को विष्णुदेव कुम्हार का कंपनी में काम करने के दौरान मशीन से हाथ कट गया था। 
जिसके बाद कंपनी ने विष्णुदेव का प्राथमिक उपचार कराया था लेकिन उसको उचित मुआवजा नहीं मिला और न ही स्थाई नौकरी मिला। 
पीड़ित मजदूर ने इस पूरी घटना की जानकारी भारतीय कारंत्तिकारी मजदूर संघ कोल्हान प्रभारी संजय गोराई को दी जिसके बाद श्री संजय ने मजदूर हित की मांग को लेकर कंपनी प्रबंधन को पीड़िता के परिवार के साथ मिलकर ज्ञापन सौंपा, और जानकारी दी गई की मजदुर को लेकर प्रबंधन विचार विमर्श करें और मजदूर को उचित मुआवजा एवं जीवन यापन के लिए स्थाई नौकरी दी जाए अन्यथा मजदूर संघ उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
बताया जा रहा है कंपनी के अंदर सुरक्षा पर कोई ध्यान नहीं दिया जाता है न ही न्यूनतम मजदूरी मिलता है जिसको लेकर कंपनी प्रबंधन अक्सर विवादों में रहता है।
    user_DALMA NEWS live
    DALMA NEWS live
    आदित्यपुर (गमहरिया), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    5 hrs ago
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