बदलेगा मौसमअब छः महीने बरसेगा पानी और छः रहेगा सूखा? ? अब छः महीने बरसेगा पानी और छः रहेगा सूखा? आजकल हर मन में यही खयाल है कि जाड़े का पानी क्यों गर्मी में बरस रहा है। इसकी वजह जलवायु का अपना अंदाज है, जो कुदरत ने नहीं, बल्कि हमने उसे दिया है। सभी जानते है कि जलवायु अब बदलने लगी है, जिस कारण पश्चिमी विक्षोभ ने भी अपनी जगह बदलनी शुरू करदी है। पिछले दो सालों से यह बदलाव आया है और इस बार मार्च के शुरुवाती दिनों ने पारे की चादर ओढ़ ली थी और तापमान 40 पार जा पहुंचा था, बस यहीं से पश्चिमी विक्षोभों ने अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक आते चले गए और बरसते चले गए और अप्रैल में तो जैसे ठंड लौट आई। बंद बख्शों से गर्म कपड़े बाहर निकल आए। नैनीताल, मसूरी, शिमला और कश्मीर में बर्फ ने बर्फ की सफेद चादर बिछानी शुरू कर दी। बर्फ के लिए तरसते हिमालय की मुराद पूरी हो गई। अब 20 अप्रैल से फिर एक बार शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सिर उठाने जा रहा है। इसका मतलब गर्म प्रदेशों के लोगों को एसी की जगह पंखे से काम चल जाएगा। यह विक्षोभ तीन दिन सक्रिय रहने जा रहा है। लिहाजा कूलिंग कमसेकम हफ्ते भर बनी रहने वाली है। अब मौसम बदलने की थोड़ा गंभीर बात करें तो जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी विक्षोभों का समय अब शिफ्ट होने लगा है। अब भविष्य में लगातार बारिश और निरंतर सूखा पड़ने के आसार बने रहेंगे। मौसम का यह बदला स्वरूप एक्सट्रीम वेदर है। जिसकी चपेट में भारत आ चुका है। वर्ष 2025 पूरी तरह इसकी गिरफ्त में रहा था और 2026 के शुरुवात के चार महीने इसके 4गिरफ्त में रहे हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वायु मंडलीय वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह के अनुसार मौसम में निरंतर बदलाव जारी रहेंगे। जलवायु परिवर्तन इसका बड़ा प्रभाव है। जिस कारण विंटर में बरसने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब गर्मियों में भी बरसने लगे है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ बेहद कमजोर रहे और अब जब गर्मी के दिन आए हैं तो प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने लगे हैं। जिस कारण मार्च में बारिश ख्वाब हुई तो अप्रैल में भी बारिश निरंतर जारी है। आने वाले दिनों में भी पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव जारी रहेगा। इस बार प्री मानसून में भी पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय रहने की संभावना बनी रहेगी। जिस कारण मानसून से पहले की बारिश जमकर पानी बरसाएंगे। इधर ला नीना अब कमजोर पड़ चुका है तो अल नीनो सिर उठाने लगा है। जिसके शक्तिशाली होने के आसार बने हुए है। माना जा रहा है कि इस बार अल नीनो मानसून को प्रभावित करेगा। वास्तव में अल नीनो प्रभावशाली रहा तो मानसून की बारिश कम होगी। भारत पर इसका अधिक असर अगस्त में देखा जा सकता है। लिहाजा अगस्त में बारिश कम होगी। अगस्त से सूखे की स्थिति लंबे समय तक रहने की संभावना रहेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण एक्सट्रीम वेदर ने जन्म लिया है। एक्सट्रीम वेदर का अर्थ लगातार सूखा या फिर लगातार बारिश होना है। इस बार शीतकाल सूखे की चपेट में रहा तो पिछले करीब एक महीने से आए दिन वर्षा हो रही हैं। यह एक्सट्रीम वेदर का रूप है, जो भविष्य में भी जारी रहेगा। श्रोत: IMD , WMD and Dr Narendra Singh (Aries) फोटो: Nexisnowspace
बदलेगा मौसमअब छः महीने बरसेगा पानी और छः रहेगा सूखा? ? अब छः महीने बरसेगा पानी और छः रहेगा सूखा? आजकल हर मन में यही खयाल है कि जाड़े का पानी क्यों गर्मी में बरस रहा है। इसकी वजह जलवायु का अपना अंदाज है, जो कुदरत ने नहीं, बल्कि हमने उसे दिया है। सभी जानते है कि जलवायु अब बदलने लगी है, जिस कारण पश्चिमी विक्षोभ ने भी अपनी जगह बदलनी शुरू करदी है। पिछले दो सालों से यह बदलाव आया है और इस बार मार्च के शुरुवाती दिनों ने पारे की चादर ओढ़ ली थी और तापमान 40 पार जा पहुंचा था, बस यहीं से पश्चिमी विक्षोभों ने अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक आते चले गए और बरसते चले गए और अप्रैल में तो जैसे ठंड लौट आई। बंद बख्शों से गर्म कपड़े बाहर निकल आए। नैनीताल, मसूरी, शिमला और कश्मीर में बर्फ ने बर्फ की सफेद चादर बिछानी शुरू कर दी। बर्फ के लिए तरसते हिमालय की मुराद पूरी हो गई। अब 20 अप्रैल से फिर एक बार शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सिर उठाने जा
रहा है। इसका मतलब गर्म प्रदेशों के लोगों को एसी की जगह पंखे से काम चल जाएगा। यह विक्षोभ तीन दिन सक्रिय रहने जा रहा है। लिहाजा कूलिंग कमसेकम हफ्ते भर बनी रहने वाली है। अब मौसम बदलने की थोड़ा गंभीर बात करें तो जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी विक्षोभों का समय अब शिफ्ट होने लगा है। अब भविष्य में लगातार बारिश और निरंतर सूखा पड़ने के आसार बने रहेंगे। मौसम का यह बदला स्वरूप एक्सट्रीम वेदर है। जिसकी चपेट में भारत आ चुका है। वर्ष 2025 पूरी तरह इसकी गिरफ्त में रहा था और 2026 के शुरुवात के चार महीने इसके 4गिरफ्त में रहे हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वायु मंडलीय वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह के अनुसार मौसम में निरंतर बदलाव जारी रहेंगे। जलवायु परिवर्तन इसका बड़ा प्रभाव है। जिस कारण विंटर में बरसने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब गर्मियों में भी बरसने लगे है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ बेहद कमजोर रहे और अब जब गर्मी के दिन आए हैं तो प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने लगे हैं। जिस कारण मार्च में बारिश ख्वाब हुई तो अप्रैल में
भी बारिश निरंतर जारी है। आने वाले दिनों में भी पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव जारी रहेगा। इस बार प्री मानसून में भी पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय रहने की संभावना बनी रहेगी। जिस कारण मानसून से पहले की बारिश जमकर पानी बरसाएंगे। इधर ला नीना अब कमजोर पड़ चुका है तो अल नीनो सिर उठाने लगा है। जिसके शक्तिशाली होने के आसार बने हुए है। माना जा रहा है कि इस बार अल नीनो मानसून को प्रभावित करेगा। वास्तव में अल नीनो प्रभावशाली रहा तो मानसून की बारिश कम होगी। भारत पर इसका अधिक असर अगस्त में देखा जा सकता है। लिहाजा अगस्त में बारिश कम होगी। अगस्त से सूखे की स्थिति लंबे समय तक रहने की संभावना रहेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण एक्सट्रीम वेदर ने जन्म लिया है। एक्सट्रीम वेदर का अर्थ लगातार सूखा या फिर लगातार बारिश होना है। इस बार शीतकाल सूखे की चपेट में रहा तो पिछले करीब एक महीने से आए दिन वर्षा हो रही हैं। यह एक्सट्रीम वेदर का रूप है, जो भविष्य में भी जारी रहेगा। श्रोत: IMD , WMD and Dr Narendra Singh (Aries) फोटो: Nexisnowspace
- अब छः महीने बरसेगा पानी और छः रहेगा सूखा? आजकल हर मन में यही खयाल है कि जाड़े का पानी क्यों गर्मी में बरस रहा है। इसकी वजह जलवायु का अपना अंदाज है, जो कुदरत ने नहीं, बल्कि हमने उसे दिया है। सभी जानते है कि जलवायु अब बदलने लगी है, जिस कारण पश्चिमी विक्षोभ ने भी अपनी जगह बदलनी शुरू करदी है। पिछले दो सालों से यह बदलाव आया है और इस बार मार्च के शुरुवाती दिनों ने पारे की चादर ओढ़ ली थी और तापमान 40 पार जा पहुंचा था, बस यहीं से पश्चिमी विक्षोभों ने अपना जलवा दिखाना शुरू कर दिया और एक के बाद एक आते चले गए और बरसते चले गए और अप्रैल में तो जैसे ठंड लौट आई। बंद बख्शों से गर्म कपड़े बाहर निकल आए। नैनीताल, मसूरी, शिमला और कश्मीर में बर्फ ने बर्फ की सफेद चादर बिछानी शुरू कर दी। बर्फ के लिए तरसते हिमालय की मुराद पूरी हो गई। अब 20 अप्रैल से फिर एक बार शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ सिर उठाने जा रहा है। इसका मतलब गर्म प्रदेशों के लोगों को एसी की जगह पंखे से काम चल जाएगा। यह विक्षोभ तीन दिन सक्रिय रहने जा रहा है। लिहाजा कूलिंग कमसेकम हफ्ते भर बनी रहने वाली है। अब मौसम बदलने की थोड़ा गंभीर बात करें तो जलवायु परिवर्तन के कारण पश्चिमी विक्षोभों का समय अब शिफ्ट होने लगा है। अब भविष्य में लगातार बारिश और निरंतर सूखा पड़ने के आसार बने रहेंगे। मौसम का यह बदला स्वरूप एक्सट्रीम वेदर है। जिसकी चपेट में भारत आ चुका है। वर्ष 2025 पूरी तरह इसकी गिरफ्त में रहा था और 2026 के शुरुवात के चार महीने इसके 4गिरफ्त में रहे हैं। आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वायु मंडलीय वैज्ञानिक डा नरेंद्र सिंह के अनुसार मौसम में निरंतर बदलाव जारी रहेंगे। जलवायु परिवर्तन इसका बड़ा प्रभाव है। जिस कारण विंटर में बरसने वाले पश्चिमी विक्षोभ अब गर्मियों में भी बरसने लगे है। सर्दियों में पश्चिमी विक्षोभ बेहद कमजोर रहे और अब जब गर्मी के दिन आए हैं तो प्रभावशाली पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने लगे हैं। जिस कारण मार्च में बारिश ख्वाब हुई तो अप्रैल में भी बारिश निरंतर जारी है। आने वाले दिनों में भी पश्चिमी विक्षोभों का प्रभाव जारी रहेगा। इस बार प्री मानसून में भी पश्चिमी विक्षोभों के सक्रिय रहने की संभावना बनी रहेगी। जिस कारण मानसून से पहले की बारिश जमकर पानी बरसाएंगे। इधर ला नीना अब कमजोर पड़ चुका है तो अल नीनो सिर उठाने लगा है। जिसके शक्तिशाली होने के आसार बने हुए है। माना जा रहा है कि इस बार अल नीनो मानसून को प्रभावित करेगा। वास्तव में अल नीनो प्रभावशाली रहा तो मानसून की बारिश कम होगी। भारत पर इसका अधिक असर अगस्त में देखा जा सकता है। लिहाजा अगस्त में बारिश कम होगी। अगस्त से सूखे की स्थिति लंबे समय तक रहने की संभावना रहेगी। जलवायु परिवर्तन के कारण एक्सट्रीम वेदर ने जन्म लिया है। एक्सट्रीम वेदर का अर्थ लगातार सूखा या फिर लगातार बारिश होना है। इस बार शीतकाल सूखे की चपेट में रहा तो पिछले करीब एक महीने से आए दिन वर्षा हो रही हैं। यह एक्सट्रीम वेदर का रूप है, जो भविष्य में भी जारी रहेगा। श्रोत: IMD , WMD and Dr Narendra Singh (Aries) फोटो: Nexisnowspace3
- वायरल वीडियो से यह ज्ञात होता है की जिला प्रशासन का डर ना तो स्कूल प्रशासन को है और ना ही उक्त दुकानदारों को जो कि अपनी मनमानी करने पर अमादा है।1
- कालाढूंगी से एक दर्दनाक सड़क हादसे की खबर सामने आई है। भाखड़ा पुल के पास पिकअप और स्कूटी की जोरदार भिड़ंत हो गई, जिसमें एक 20 वर्षीय युवती की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरी युवती गंभीर रूप से घायल बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि मृतक युवती चकलुवा नीरपानी की रहने वाली थी। हादसा उस समय हुआ जब वह अपनी सहेली को लामाचौड़ छोड़ने जा रही थी। अचानक सामने से आ रही पिकअप से टक्कर हो गई, जिससे यह हादसा हो गया। इस दुखद घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया है और पूरे इलाके में शोक की लहर है। घायल युवती का इलाज जारी है।1
- Post by 7News Live Uk1
- Post by Jagdish Ballabh Sharma1
- Post by Suraj Chauhan1
- योगी बाबा की बेलगाम हुई पुलिस,युवक के हाथ-पैर तोड़ने के आरोप, मामले की जांच में जुटे अधिकारी, उत्तर प्रदेश उत्तराखंड बॉर्डर का मामला रूद्रविलास चौकी का मामला #BreakingNews #UttarakhandNews #rudrapur #UPBORDER #UPPolice #YogiAdityanath #PoliceBrutality #HumanRights #Justice #ViralNews #IndiaNews #LawAndOrder #Shocking #PoliceBrutality #BreakingNews #UttarPradesh #LawAndOrder #ViralNews1
- इस बार मौसम का मिजाज निराला हो चला है। गर्मी से राहत देने को पश्चिमी विक्षोभ बेताब हैं। मार्च में भी बारिश जमकर हुई है तो अप्रैल भी शांत नहीं है। अब 20 अप्रैल से बारिश होने के उम्मीद, आ रहे पश्चिमी विक्षोभ ने जगा दी है। इसका असर तीन दिन रहेगा। यानी बारिश होगी और हिमालय की चोटियों में बर्फ गिरेगी।1