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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित जवाहर भवन में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच चुकी हैं और आग पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। जवाहर भवन के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अजीत मिश्रा (खोजी)
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित जवाहर भवन में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच चुकी हैं और आग पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। जवाहर भवन के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
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- उत्तर प्रदेश की मिल्कीपुर विधानसभा को लेकर पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा का एक वक्तव्य सामने आया है। इस विधानसभा क्षेत्र से जुड़े मामले में पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा ने जो कुछ भी बोला है, उसे लोगों से बहुत ही ध्यान से सुनने की अपील की जा रही है।1
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- उत्तर प्रदेश के अम्बेडकर नगर से आगामी 20 जुलाई को जंतर मंतर जाने का कार्यक्रम तय किया गया है।1
- संतकबीरनगर जिले में चर्चित चेक बाउंस और धोखाधड़ी के एक बड़े मामले में जिला एवं सत्र न्यायालय ने आरोपी संतोष कुमार चतुर्वेदी उर्फ 'नटवरलाल' की अपील को खारिज कर दिया है। जिला जज की अदालत ने शनिवार को सुनवाई के बाद एसीजेएम न्यायालय द्वारा सुनाई गई एक वर्ष के साधारण कारावास और ₹1.26 करोड़ के अर्थदंड की सजा को यथावत बरकरार रखा, जिसके बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। यह मामला वर्ष 2021 का है, जब महुली थाना क्षेत्र के भिटहां निवासी संतोष कुमार चतुर्वेदी जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव के बालू भंडारण लाइसेंस के अंतर्गत संविदा पर मैनेजर के रूप में कार्यरत था। बालू कारोबार के वित्तीय लेन-देन की जिम्मेदारी संभालते हुए उसने कथित रूप से 78 लाख रुपये का गबन कर लिया था। जब जिला पंचायत अध्यक्ष ने अपनी धनराशि वापस मांगी, तो आरोपी ने ₹67 लाख का चेक दिया जो बैंक में बाउंस हो गया। जांच और न्यायालय में प्रस्तुत साक्ष्यों के अनुसार, आरोपी ने जिला पंचायत अध्यक्ष के अलावा कई अन्य लोगों से भी बालू कारोबार, सप्लाई और लाइसेंस दिलाने के नाम पर बड़ी रकम वसूली थी। इसमें मझौवा एकडंगा निवासी सुनील मौर्या से ₹24 लाख, निरंजनपुर निवासी प्रत्यूष कुमार से ₹7.50 लाख, नीबा होरिल निवासी गुलाब चंद से ₹1.60 लाख तथा बलही निवासी अभयनन्दन सिंह से ₹4.50 लाख लेने के आरोप सिद्ध हुए हैं। रकम वापस मांगने पर आरोपी ने इन सभी को जो चेक दिए थे, वे भी बैंक में बाउंस हो गए थे। एसीजेएम न्यायालय के फैसले के खिलाफ संतोष चतुर्वेदी ने जिला जज की अदालत में अपील दायर की थी, जिसे जिला जज ने सभी दस्तावेजी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों का परीक्षण करने के बाद निरस्त कर दिया। न्यायालय के आदेश के अनुसार, आरोपी को सभी पांच मामलों में एक-एक वर्ष के साधारण कारावास की सजा साथ-साथ भुगतनी होगी। इसके अतिरिक्त ₹1.26 करोड़ के अर्थदंड की राशि से पीड़ितों को क्षतिपूर्ति दी जाएगी और शेष धनराशि राजकीय कोष में जमा होगी। यदि आरोपी जुर्माना अदा नहीं करता है, तो उसे प्रत्येक मामले में छह-छह माह की अतिरिक्त कारावास की सजा भुगतनी होगी। इस फैसले का जिला पंचायत अध्यक्ष बलिराम यादव सहित सभी पीड़ितों ने स्वागत किया है।1
- उत्तर प्रदेश के संतकबीरनगर जनपद के मगहर में स्थित संत कबीर कताई मिल में बालश्रम की खुलेआम धज्जियां उड़ रही हैं। यहाँ बिना किसी खौफ के नाबालिग बच्चे ईंटों की सफाई का काम कर रहे हैं, जिसके बदले उन्हें नाम मात्र का मेंहनताना दिया जा रहा है। जिन मासूमों के हाथों में इस उम्र में कॉपी-किताबें होनी चाहिए थीं, वे अपने घरों से दूर यहाँ आकर हथौड़े चलाने को मजबूर हैं। दरअसल, मगहर में पांच दशक पहले हथकरघा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए इस कताई मिल की स्थापना की गई थी। लगभग दो दशक तक यह मिल शानदार तरीके से चली और इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला, लेकिन साल 1997 में मजदूर और मिल प्रबंधन के बीच हुए विवाद के बाद यहाँ ताला लग गया। अब प्रदेश सरकार बंद पड़ी मिलों की कीमती जमीनों पर टेक्सटाईल पार्क बनाने का निर्णय ले चुकी है, जिसके तहत मिल के गोदामों व भवनों को तोड़ने और सफाई का काम चल रहा है। इसी सफाई कार्य में बड़े पैमाने पर बाल मजदूरों को काम पर लगाया गया है। मिल में ईंटों की सफाई कर रहे बाल मजदूरों ने बताया कि वे लखीमपुर खीरी से यहाँ मजदूरी करने आए हैं और उनकी संख्या करीब पचास है। इन बच्चों को दो हजार ईंटें साफ करने के बदले मजदूरी के रूप में मात्र छह सौ रुपये मिल रहे हैं। सरकार द्वारा बालश्रम रोकने के लिए तमाम तरह की योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाने के दावों के बीच इस तरह खुलेआम नाबालिगों से काम कराया जाना कई सवाल खड़े करता है। ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि इस बालश्रम का असली जिम्मेदार कौन है?1
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- उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पॉश इलाके में स्थित जवाहर भवन में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंच चुकी हैं और आग पर पूरी तरह काबू पाने की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। जवाहर भवन के अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि, अभी तक आग लगने के कारणों का पता नहीं चल सका है। प्रशासनिक स्तर पर इस पूरी स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।1