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पांकी रतनपुर के बिहारा में पिछले तीन माह से एक पेड़ सड़क पर गिरा हुआ है, जिसके कारण आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति इतनी लंबी अवधि से बनी हुई है, लेकिन किसी भी संबंधित अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस पर ध्यान नहीं दिया है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने जैसे आंखों पर पट्टी बांध रखी है और यह लापरवाही साफ तौर पर दिख रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसकी कमी के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है। पोस्ट में सीधे तौर पर मुखिया, उपमुखिया, सरपंच और समिति को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह भी कहा गया है कि भविष्य में अगर इस कारण कोई घटना होती है, तो इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ही कमी मानी जाएगी।
W SINGH
पांकी रतनपुर के बिहारा में पिछले तीन माह से एक पेड़ सड़क पर गिरा हुआ है, जिसके कारण आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति इतनी लंबी अवधि से बनी हुई है, लेकिन किसी भी संबंधित अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस पर ध्यान नहीं दिया है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने जैसे आंखों पर पट्टी बांध रखी है और यह लापरवाही साफ तौर पर दिख रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसकी कमी के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है। पोस्ट में सीधे तौर पर मुखिया, उपमुखिया, सरपंच और समिति को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह भी कहा गया है कि भविष्य में अगर इस कारण कोई घटना होती है, तो इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ही कमी मानी जाएगी।
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- पांकी रतनपुर के बिहारा में पिछले तीन माह से एक पेड़ सड़क पर गिरा हुआ है, जिसके कारण आने-जाने वाले लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह स्थिति इतनी लंबी अवधि से बनी हुई है, लेकिन किसी भी संबंधित अधिकारी या जनप्रतिनिधि ने इस पर ध्यान नहीं दिया है, जिससे लोगों में काफी आक्रोश है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने जैसे आंखों पर पट्टी बांध रखी है और यह लापरवाही साफ तौर पर दिख रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसकी कमी के कारण यह समस्या जस की तस बनी हुई है। पोस्ट में सीधे तौर पर मुखिया, उपमुखिया, सरपंच और समिति को इस स्थिति के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है। यह भी कहा गया है कि भविष्य में अगर इस कारण कोई घटना होती है, तो इन स्थानीय जनप्रतिनिधियों की ही कमी मानी जाएगी।1
- झारखंड के लातेहार जिले के मनिका अंतर्गत बंदुआ में रात्रि के समय अचानक एक विशाल पेड़ एक गरीब मकान मालिक के घर पर गिर गया। इस घटना के कारण मकान मालिक का घर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिससे उन्हें लाखों रुपए का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।1
- लातेहार के मनिका प्रखंड क्षेत्र में आजसू सुप्रीमो श्री सुदेश महतो का भव्य स्वागत किया गया। आजसू प्रखंड अध्यक्ष श्री नंदन कुमार के आवास पर श्री महतो के आगमन पर महिला मोर्चा की जिला अध्यक्ष रीमा देवी की अध्यक्षता में महिला कार्यकर्ताओं की एक बैठक हुई। इस दौरान प्रखंड अध्यक्ष नंदन कुमार ने आजसू सुप्रीमो श्री सुदेश महतो को शॉल भेंट कर सम्मानित किया। श्री महतो ने उपस्थित महिला कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए संगठन को मजबूत करने का निर्देश दिया। अपने संबोधन में, श्री सुदेश महतो ने आजसू सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के उत्थान के लिए किए गए कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार के समय स्वयं सहायता समूह (SHG) का गठन करवाया गया था, जिससे वे महिलाएं जो पहले घर की दहलीज से बाहर नहीं निकलती थीं और समाज के बारे में नहीं सोचती थीं, वे अब समाज का नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रेरित किया और पंचायत चुनाव में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु 50% आरक्षण का प्रावधान किया, जिसके परिणामस्वरूप महिलाओं ने 57% सीटों पर अपनी पकड़ बनाई। श्री महतो ने हेमंत सोरेन की सरकार पर तंज कसते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार 'मैया सम्मान योजना' के नाम पर महिलाओं को ठगने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पहले जितनी महिलाओं को इस योजना से जोड़ा गया था, तब यह नहीं देखा गया था कि वे सईया हैं, सेविका हैं या कोई अन्य, लेकिन आज सरकार 'मैया योजना' के सत्यापन के नाम पर कितनी ही महिलाओं के नाम सूची से हटवा चुकी है, जिससे अब केवल 53 लाख महिलाएं ही इस योजना में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय सरकार को अपनी मानसिकता पूरी करनी थी, इसलिए बिना विचार किए पैसे डाले गए, लेकिन आज एक भी अतिरिक्त महिला को 'मैया सम्मान योजना' से नहीं जोड़ा जा रहा है। इसके अतिरिक्त, श्री सुदेश महतो ने कहा कि आजसू पलामू प्रमंडल से पलायन, बेरोजगारी और शोषण को समाप्त करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। इस अवसर पर आजसू के प्रमुख प्रवक्ता डॉ. देवशरण भगत ने कहा कि आजसू केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि 'झारखंडी अस्मिता का प्रचारक' है। उन्होंने जोर देकर कहा कि झारखंड का युवा अब अपने भविष्य और अधिकारों के प्रति जागरूक हो चुका है। इस कार्यक्रम में केंद्रीय महासचिव संजय, मेहता उमेश सिंह भोक्ता, केंद्रीय उपाध्यक्ष प्रवीण प्रभाकर, जिला अध्यक्ष अमित पांडे, जिला कोषाध्यक्ष सद्दाम अंसारी, नगर अध्यक्ष विकास साहू, युवा जिला प्रभारी मुकेश यादव, लातेहार प्रखंड अध्यक्ष उमेश उरांव, गारू प्रखंड अध्यक्ष आशीष सिंह, चंदवा प्रखंड से राजा दुबे, बालूमाथ प्रखंड अध्यक्ष शंकर उरांव, मनिका से नागेंद्र सिंह, शांति देवी, मंजू देवी, सुनील ठाकुर, पिंकी देवी, सचिन कुमार, धनंजय तिवारी और विनय यादव समेत सैकड़ों की संख्या में महिलाएं शामिल हुईं।3
- झारखंड के लातेहार जिले के कैमा क्षेत्र में ग्रामीण, विशेषकर आदिवासी, अपने जल, जंगल और जमीन पर किसी भी तरह के कब्जे को रोकने के लिए एकजुट हो गए हैं। उनकी आवाज बुलंद हो गई है और उन्होंने अपने हक की लड़ाई को तेज कर दिया है। ग्रामीण स्पष्ट रूप से पुकार कर रहे हैं: "जंगल-जमीन बचाओ"। यह लड़ाई उनके प्राकृतिक संसाधनों पर अतिक्रमण के खिलाफ है, जिसमें ग्रामीण और आदिवासी दृढ़ता से खड़े हैं। वे यह सुनिश्चित करने पर आमादा हैं कि उनके पारंपरिक जल, जंगल और जमीन पर कोई भी बाहरी शक्ति कब्जा न कर सके। उनकी एकजुटता और संघर्ष से यह संदेश दिया जा रहा है कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं।1
- लातेहार में युवा राष्ट्रीय जनता दल (राजद) द्वारा बाइपास रोड स्थित होटल हिल में "युवा संवाद चौपाल यात्रा" का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार ने किया, जिसकी अध्यक्षता जिलाध्यक्ष दीपक यादव ने की और संचालन दामोदर यादव ने किया। चौपाल यात्रा का मुख्य उद्देश्य युवाओं को संगठन से जोड़ना, आपसी सौहार्द बढ़ाना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना बताया गया। कार्यक्रम के अतिथियों को अंगवस्त्र और बुके देकर सम्मानित किया गया। प्रदेश युवा राजद अध्यक्ष रंजन कुमार ने कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को नए अनुभव प्राप्त करने और अपनी क्षमता पहचानने का अवसर प्रदान करते हैं। इसी दौरान उन्होंने केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब सत्ता निरंकुश हो जाती है तो युवाओं को सड़कों पर उतरना पड़ता है। उन्होंने विशेष रूप से नीट परीक्षा पेपर लीक के मुद्दे को उठाते हुए केंद्र सरकार को विफल करार दिया। प्रदेश सचिव रंजीत यादव ने भी चौपाल को सीखने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और नए रिश्ते स्थापित करने का एक बेहतर मंच बताया। इस युवा संवाद चौपाल यात्रा में मोहर यादव, संतोष यादव, बल्ली यादव, सुरेश पासवान, भोला सिंह, निजाम अंसारी, कमलेश यादव, दीक्षित कुमार समेत कई युवा राजद कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- महुआडार प्रखंड के अकसी ग्राम पंचायत में रविवार दोपहर 3:00 बजे जनजातीय समाज की एक महत्वपूर्ण बैठक हुई। इस बैठक का मुख्य विषय जाति जनगणना में अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे से कथित छेड़छाड़ का मुद्दा था। उपस्थित लोगों में राज्य सरकार के प्रति गहरा आक्रोश देखा गया, जो एसटी दर्जे से छेड़छाड़ की आशंका को लेकर था। इस बैठक में जनजातीय समाज ने सर्वसम्मति से एक बड़ा निर्णय लिया। उन्होंने एसटी दर्जे में छेड़छाड़ के विरोध में महुआडार प्रखंड विकास पदाधिकारी और अंचल पदाधिकारी का घेराव करने का संकल्प लिया।1
- आज 34 डिग्री सेल्सियस गर्मी के कारण लोगों को सांस लेने में भारी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इस भीषण गर्मी को देखते हुए, हर जगह पानी की सुविधा उपलब्ध कराने की अपील की जा रही है।1
- चतरा जिले में सड़कों पर आम लोगों की जान को खतरे में डालने वाले कोयला वाहनों के खतरनाक स्टंट और ओवरटेक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर अश्लील गानों के साथ वायरल हो रहा है। वीडियो में कथित तौर पर कोयला ढोने वाले हाइवा वाहन बेलगाम रफ्तार से दौड़ते और खतरनाक स्टंट करते हुए ओवरटेक करते दिख रहे हैं, जहाँ एक वाहन अनियंत्रित होकर पलटने से बाल-बाल बचा। इस वायरल वीडियो की पुष्टि हालांकि खबर नहीं करती, लेकिन इसे चतरा जिले के टंडवा-सिमरिया रोड का बताया जा रहा है, जिससे ट्रैफिक नियमों की घोर अनदेखी और लोगों की जान से खिलवाड़ का मामला सामने आ रहा है। वायरल वीडियो पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में भारी वाहन चालक सड़कों को रेसिंग ट्रैक समझकर दौड़ रहे हैं, और क्या कुछ चालक जानबूझकर सोशल मीडिया पर रील व वीडियो वायरल करने के लिए लोगों की जान खतरे में डाल रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारों लोगों की मौत होने के बावजूद भी आखिर सिस्टम क्यों चुप है, और शाम होते ही कई मार्गों पर भारी वाहनों का ऐसा दबदबा हो जाता है कि आम लोग डर के साये में सफर करने को मजबूर हो जाते हैं। जिले में आए दिन सड़क हादसों में लोगों की जानें जा रही हैं, फिर भी तेज रफ्तार और खतरनाक ओवरटेकिंग पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही है। जिले के जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभागों से लोग सवाल कर रहे हैं कि और कितनी जानें जाने के बाद सड़कों पर गति नियंत्रण, निगरानी और सख्त कार्रवाई की व्यवस्था होगी। लोगों की मांग है कि भारी वाहनों की गति पर निगरानी के लिए स्पीड कैमरे लगाए जाएं, नियम तोड़ने वालों पर कठोर कार्रवाई हो, और सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, क्योंकि सड़कें हर नागरिक की सुरक्षा और आवाजाही के लिए होती हैं।1