बलरामपुर जिले की सरहद पर बसंतपुर पुलिस ने एंड-टू-एंड कार्रवाई करते हुए लगभग 10.5 करोड़ रुपये का अवैध मादक पदार्थ गांजा और इसमें संलिप्त एक टाटा ट्रक जब्त किया है। पुलिस ने ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाए जा रहे कुल 1941.110 किलोग्राम गांजे को बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही, इस तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे टाटा ट्रक (16 चक्का वाहन) को भी जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई है। इस कार्रवाई में दो अंतरराज्यीय तस्करों को भारी मात्रा में गांजे के साथ गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, जो दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी हैं। बलरामपुर पुलिस ने इस अभियान को गांजा तस्करी करने वाले मुख्य सरगना को गिरफ्तार करने में एक बड़ी सफलता बताया है। गिरफ्तार आरोपियों में से लोकेश शर्मा, थाना बसंतपुर में दर्ज एक अन्य मामले (अपराध क्रमांक 93/2026, धारा 20 (बी) एनडीपीएस एक्ट) में भी नामजद आरोपी है। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा दीपक कुमार झा (भा.पु.से.) और पुलिस अधीक्षक बलरामपुर वैभव बैंकर (भा.पु.से.) के कुशल मार्गदर्शन में, बलरामपुर पुलिस उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त और एम.सी.पी. की कार्रवाई कर रही है। पुलिस अधीक्षक बलरामपुर ने जिले के सभी थाना/चौकी प्रभारियों को मादक पदार्थों के अवैध परिवहन पर रोक लगाने और इसमें शामिल आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, दिनांक 29/12/2025 को भी थाना बसंतपुर पुलिस ने एक टाटा ट्रक में नारियल भूसी के भीतर छिपाकर ओडिशा से राजस्थान ले जाए जा रहे 1198.460 किलोग्राम गांजे को बरामद किया था और तीन आरोपियों सहित ट्रक को जब्त किया था। उस मामले में थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 228/2025, धारा 20 (बी) (ii) (सी) एनडीपीएस एक्ट दर्ज किया गया था। इस प्रकरण की विवेचना और एंड-टू-एंड कार्रवाई के दौरान ही पुलिस को मुख्य आरोपियों की तलाश में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की लगातार जानकारी मिल रही थी। इसी तारतम्य में, दिनांक 11/06/2026 की दरमियानी रात निरीक्षक जितेंद्र सोनी, थाना प्रभारी बसंतपुर को तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर सूचना मिली कि आरोपी लोकेश शर्मा आसपास ही है और संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने की फिराक में है। इसके बाद, रात्रि लगभग 02:30-03:00 बजे एक टाटा ट्रक वाहन क्रमांक RJ 14 GU 9078 आते हुए दिखा, जिसे थाना बसंतपुर के पास रोक कर तलाशी ली गई। गिरफ्तार किए गए आरोपी लोकेश शर्मा पिता हरिश्चंद शर्मा (उम्र 46 वर्ष, निवासी जरोधापाड़ा, थाना बड़गांव, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) और आमिष अंसारी पिता कल्लू अंसारी (उम्र 23 वर्ष, निवासी बड़ीकला, थाना छापर, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश) हैं। बलरामपुर पुलिस ने 1941.110 किलोग्राम अवैध गांजा जब्त करने की इस कार्रवाई को अपनी अब तक की सबसे बड़ी सफलता बताया है।
बलरामपुर जिले की सरहद पर बसंतपुर पुलिस ने एंड-टू-एंड कार्रवाई करते हुए लगभग 10.5 करोड़ रुपये का अवैध मादक पदार्थ गांजा और इसमें संलिप्त एक टाटा ट्रक जब्त किया है। पुलिस ने ओडिशा से उत्तर प्रदेश ले जाए जा रहे कुल 1941.110 किलोग्राम गांजे को बरामद किया, जिसकी कीमत करीब 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके साथ ही, इस तस्करी में इस्तेमाल किए जा रहे टाटा ट्रक (16 चक्का वाहन) को भी जब्त किया गया, जिसकी कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई गई है। इस कार्रवाई में दो अंतरराज्यीय तस्करों को भारी मात्रा में गांजे के साथ गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, जो दोनों आरोपी उत्तर
प्रदेश राज्य के निवासी हैं। बलरामपुर पुलिस ने इस अभियान को गांजा तस्करी करने वाले मुख्य सरगना को गिरफ्तार करने में एक बड़ी सफलता बताया है। गिरफ्तार आरोपियों में से लोकेश शर्मा, थाना बसंतपुर में दर्ज एक अन्य मामले (अपराध क्रमांक 93/2026, धारा 20 (बी) एनडीपीएस एक्ट) में भी नामजद आरोपी है। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा दीपक कुमार झा (भा.पु.से.) और पुलिस अधीक्षक बलरामपुर वैभव बैंकर (भा.पु.से.) के कुशल मार्गदर्शन में, बलरामपुर पुलिस उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती इलाकों में लगातार गश्त और एम.सी.पी. की कार्रवाई कर रही है। पुलिस अधीक्षक बलरामपुर ने जिले के सभी थाना/चौकी प्रभारियों को मादक पदार्थों के अवैध परिवहन पर रोक लगाने और इसमें शामिल आरोपियों के
खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले, दिनांक 29/12/2025 को भी थाना बसंतपुर पुलिस ने एक टाटा ट्रक में नारियल भूसी के भीतर छिपाकर ओडिशा से राजस्थान ले जाए जा रहे 1198.460 किलोग्राम गांजे को बरामद किया था और तीन आरोपियों सहित ट्रक को जब्त किया था। उस मामले में थाना बसंतपुर में अपराध क्रमांक 228/2025, धारा 20 (बी) (ii) (सी) एनडीपीएस एक्ट दर्ज किया गया था। इस प्रकरण की विवेचना और एंड-टू-एंड कार्रवाई के दौरान ही पुलिस को मुख्य आरोपियों की तलाश में कुछ संदिग्ध गतिविधियों की लगातार जानकारी मिल रही थी। इसी तारतम्य में, दिनांक 11/06/2026 की दरमियानी रात निरीक्षक जितेंद्र सोनी, थाना प्रभारी बसंतपुर को तकनीकी
साक्ष्यों के आधार पर सूचना मिली कि आरोपी लोकेश शर्मा आसपास ही है और संदिग्ध गतिविधि में शामिल होने की फिराक में है। इसके बाद, रात्रि लगभग 02:30-03:00 बजे एक टाटा ट्रक वाहन क्रमांक RJ 14 GU 9078 आते हुए दिखा, जिसे थाना बसंतपुर के पास रोक कर तलाशी ली गई। गिरफ्तार किए गए आरोपी लोकेश शर्मा पिता हरिश्चंद शर्मा (उम्र 46 वर्ष, निवासी जरोधापाड़ा, थाना बड़गांव, जिला सहारनपुर, उत्तर प्रदेश) और आमिष अंसारी पिता कल्लू अंसारी (उम्र 23 वर्ष, निवासी बड़ीकला, थाना छापर, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश) हैं। बलरामपुर पुलिस ने 1941.110 किलोग्राम अवैध गांजा जब्त करने की इस कार्रवाई को अपनी अब तक की सबसे बड़ी सफलता बताया है।
- बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस पशु तस्करी और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है, इसी क्रम में थाना राजपुर पुलिस ने पशु तस्करी के एक प्रकरण में फरार चल रहे एक और आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। यह मामला 11 जून 2026 का है, जब मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने ग्राम गोपालपुर के पास घेराबंदी कर उत्तर प्रदेश की ओर जा रहे संदिग्ध पिकअप वाहन क्रमांक UP-65 QT-1375 की जांच की थी। उस दौरान वाहन में मवेशियों को अमानवीय और क्रूरतापूर्ण तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा हुआ पाया गया था। पुलिस ने पिकअप चालक अशोक गिरी, निवासी थाना चकिया, जिला चंदौली (उ.प्र.) को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके अन्य सहयोगी साथी फरार हो गए थे। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी मवेशियों को वध हेतु उत्तर प्रदेश ले जाने की तैयारी में थे। विवेचना के दौरान फरार आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम, पिता मुमताज आलम, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम विष्णुपुरा महादेवपुर चौकी डीन्दो, थाना त्रिकुंडा, जिला बलरामपुर रामानुजगंज की लगातार तलाश की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी सलमान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। इस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 147/2026 के तहत पशु परिरक्षण अधिनियम 2024 की धारा 4, 6 और 10, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(डी) तथा धारा 3(5) बीएनएस के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 02 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साथ ही, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 01 नग पिकअप वाहन, 01 नग ब्रेजा कार और कुल 12 नग भैंसों को जब्त किया है, जिन्हें सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है। शेष फरार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। बलरामपुर पुलिस आमजन से अपील करती है कि पशु तस्करी, अवैध पशु परिवहन या पशुओं के प्रति क्रूरता संबंधी किसी भी सूचना को तत्काल निकटतम पुलिस थाना या पुलिस कंट्रोल रूम को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।2
- बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस द्वारा पशु तस्करी और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में, राजपुर पुलिस ने पशु तस्करी के एक मामले में फरार चल रहे एक आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम (उम्र 28 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब 11 जून 2026 को राजपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ व्यक्ति मवेशियों को क्रूरतापूर्वक एक पिकअप वाहन में भरकर उत्तर प्रदेश की ओर ले जा रहे हैं। सूचना के आधार पर, पुलिस टीम ने ग्राम गोपालपुर के पास घेराबंदी कर संदिग्ध पिकअप वाहन क्रमांक UP-65 QT-1375 की जाँच की, जिसमें मवेशियों को अमानवीय और क्रूरतापूर्ण तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा पाया गया। पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान, पिकअप चालक अशोक गिरी (निवासी थाना चकिया, जिला चंदौली, उ.प्र.) को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि उसके अन्य सहयोगी, जिनमें सलमान भी शामिल था, फरार हो गए थे। विवेचना में यह खुलासा हुआ कि आरोपीगण मवेशियों को वध के लिए उत्तर प्रदेश ले जाने की तैयारी में थे। फरार आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम (पिता मुमताज आलम, निवासी ग्राम विष्णुपुरा महा देवपुर चौकी डीन्दो थाना त्रिकुंडा, जिला बलरामपुर रामानुजगंज) की लगातार तलाश की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। इस प्रकरण में अब तक कुल 02 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया 01 पिकअप वाहन, 01 ब्रेजा कार और कुल 12 भैंसें जब्त की गई हैं। जब्त किए गए पशुओं को सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है। आरोपियों के खिलाफ थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 147/2026 के तहत पशु परिरक्षण अधिनियम 2024 की धारा 4, 6 एवं 10, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(डी) तथा धारा 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना जारी है। पुलिस शेष फरार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है, साथ ही आमजन से अपील की गई है कि पशु तस्करी या पशु क्रूरता संबंधी कोई भी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना या पुलिस कंट्रोल रूम को दें।2
- छत्तीसगढ़ में विकास और 24 घंटे बिजली के दावों के बीच, मुलमुला के वार्ड क्रमांक 12 (पटेल पारा) से बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर करती एक तस्वीर सामने आई है। इस इलाके में पिछले दो दिनों से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को भीषण उमस और गर्मी के बीच अंधेरे में रातें बितानी पड़ रही हैं। यह समस्या केवल बिजली गुल होने और अंधेरे तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली न होने के कारण पटेल पारा में पानी का भी एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।1
- कभी एक नक्सल संगठन का हिस्सा रहे सुकालु की जीवनगाथा संघर्ष, भय और बदलाव का एक अनूठा उदाहरण है। घने जंगलों में नक्सली संगठन के साथ कई वर्ष बिताने के बाद, सुकालु ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। उनकी कहानी कई प्रश्न खड़े करती है कि आखिर किन परिस्थितियों में वे संगठन में शामिल हुए और वहां से बाहर निकलने में उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सुकालु स्वयं बताते हैं कि कम उम्र में ही बिगड़ती परिस्थितियों और संगठन के प्रभाव के कारण उनका नक्सलियों से संपर्क हुआ। धीरे-धीरे वे इस संगठन का एक अभिन्न अंग बन गए और कई सालों तक जंगलों में रहकर जीवन यापन किया। इस पूरी अवधि के दौरान, उन्होंने लगातार भय, असुरक्षा और हिंसा के माहौल को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया। समय के साथ, सुकालु को यह गहरा एहसास हुआ कि बंदूक और हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ही ले जाता है। एक बेहतर भविष्य और सामान्य, शांतिपूर्ण जीवन की तीव्र चाह ने उन्हें संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, नक्सल संगठन से बाहर निकलना बिल्कुल भी आसान नहीं था; उन्हें हर कदम पर गंभीर खतरों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने साहस का परिचय देते हुए आखिरकार आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में वापस आने का फैसला लिया। आज, सुकालु समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी उन सभी व्यक्तियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो हिंसा और संघर्ष का रास्ता छोड़कर विकास तथा शांति की राह पर चलना चाहते हैं, यह साबित करते हुए कि परिवर्तन संभव है।1
- छत्तीसगढ़ में 1 जुलाई से बिजली महंगी हो जाएगी, जिससे उपभोक्ताओं को महंगाई का 'करंट' महसूस होगा।1
- राजिम के शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में नवीन शैक्षणिक सत्र के शुभारंभ पर हर्षोल्लास के साथ शाला प्रवेशोत्सव का आयोजन किया गया। इस गरिमामय समारोह में राजिम क्षेत्र के विधायक रोहित साहू मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान विधायक साहू के कर-कमलों द्वारा स्कूल परिसर में नवनिर्मित टीन शेड का लोकार्पण भी किया गया, जिससे अब छात्राओं को धूप और बारिश से राहत मिलेगी। कार्यक्रम की अध्यक्षता नगरपालिका अध्यक्ष महेश यादव ने की, जबकि शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती देवकी साहू, नगरपालिका उपाध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर, शासकीय राजीव लोचन महाविद्यालय राजिम की जनभागीदारी समिति अध्यक्ष सुश्री छाया राही और वार्ड क्रमांक 3 की पार्षद श्रीमती जानकी पटेल विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुईं। शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर विद्यालय की नई और पुरानी छात्राओं का आत्मीय स्वागत किया गया; अतिथियों ने छात्राओं को तिलक लगाया, फूलमाला पहनाया, मिठाई खिलाई और उन्हें निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें वितरित कर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान छात्राओं के मन में अलग ही उत्साह देखने को मिला। समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि विधायक रोहित साहू ने बेटियों की शिक्षा को एक सशक्त समाज की नींव बताया और कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं। उन्होंने शिक्षकों से निष्ठा के साथ बच्चों का भविष्य संवारने और शासन की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम छोर के बच्चों तक पहुँचाने का आह्वान किया। विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार बेटियों की शिक्षा और उनके स्वावलंबन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जिसका परिणाम है कि सुदूर अंचलों तक बेटियों के लिए उत्कृष्ट शिक्षण व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जा रही हैं। उन्होंने निशुल्क सरस्वती साइकिल वितरण, निःशुल्क पुस्तकें और छात्रवृत्ति जैसी योजनाओं का भी जिक्र किया जो छात्राओं के हौसलों को नई उड़ान दे रही हैं। नगरपालिका अध्यक्ष महेश यादव ने कहा कि इस कन्या विद्यालय का विकास उनकी प्राथमिकता है और शिक्षा किताबी ज्ञान से आगे बढ़कर चरित्र निर्माण का माध्यम है। शाला प्रबंधन एवं विकास समिति की अध्यक्ष श्रीमती देवकी साहू ने शिक्षालय के सुचारू संचालन के लिए शिक्षक, पालक और प्रबंधन समिति के त्रिवेणी संगम को आवश्यक बताया और पालकों से बेटियों की पढ़ाई की नियमित निगरानी करने का अनुरोध किया। नगरपालिका उपाध्यक्ष पूर्णिमा चंद्राकर ने छात्राओं को उच्च शिक्षा का संकल्प लेने और खुद को कभी कमजोर न समझने के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि बेटियां आज हर क्षेत्र में पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। इस अवसर पर अन्य अतिथियों ने भी छात्राओं को उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के प्राचार्य द्वारा सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान नगरपालिका के पार्षदगण तुषार कदम, आकाश राजपूत, टंकू सोनकर, अजय पटेल, भारत यादव, बीआरसीसी, शाला परिवार के शिक्षक-शिक्षिकाएं, जनभागीदारी समिति के सदस्य, नवप्रवेशी छात्राएं और भारी संख्या में पालक गण उपस्थित थे।2
- छत्तीसगढ़ के जाने-माने रैप सिंगर एप्पी राजा, जिनका मूल नाम चेतन चांडक था, का मंगलवार को भानुप्रतापपुर में अंतिम संस्कार किया गया। उनका निधन एक दिन पहले रायपुर में इलाज के दौरान हो गया था, जिससे प्रदेश के पूरे संगीत जगत में शोक की लहर फैल गई है। एप्पी राजा की अंतिम यात्रा में उनके परिवार के सदस्य, मित्रगण, प्रशंसक और स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में शामिल हुए। सभी ने नम आँखों के साथ अपने प्रिय कलाकार को अंतिम विदाई दी। एप्पी राजा ने अपने चर्चित गीत 'टूरा भोको लोलो' जैसे गानों के माध्यम से एक विशेष पहचान बनाई थी और छत्तीसगढ़ी रैप संगीत को एक नई दिशा व पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।1
- कभी नक्सल संगठन की मेडिकल टीम का हिस्सा रहीं फगनी की जिंदगी आज पूरी तरह बदल चुकी है। केवल पाँचवीं कक्षा तक पढ़ी फगनी के पास कोई औपचारिक मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी उन्हें संगठन में इलाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जंगलों में रहने के दौरान फगनी मलेरिया से पीड़ित लोगों का उपचार करती थीं और घायल नक्सलियों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करती थीं। उन्होंने सीमित संसाधनों और बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद वर्षों तक यह जिम्मेदारी निभाई। समय के साथ, उन्होंने हिंसा और बंदूक के रास्ते को त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण के बाद फगनी के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है; अब वह नारायणपुर के पंडुम कैफे में काम करते हुए एक सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। उनकी यह कहानी केवल एक व्यक्ति के परिवर्तन की गाथा नहीं है, बल्कि यह बदलते बस्तर, आत्मनिर्भरता और एक नई शुरुआत का भी प्रतीक है। आज फगनी अपने अनुभवों के साथ समाज में एक सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं और कई अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।1