कभी एक नक्सल संगठन का हिस्सा रहे सुकालु की जीवनगाथा संघर्ष, भय और बदलाव का एक अनूठा उदाहरण है। घने जंगलों में नक्सली संगठन के साथ कई वर्ष बिताने के बाद, सुकालु ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। उनकी कहानी कई प्रश्न खड़े करती है कि आखिर किन परिस्थितियों में वे संगठन में शामिल हुए और वहां से बाहर निकलने में उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सुकालु स्वयं बताते हैं कि कम उम्र में ही बिगड़ती परिस्थितियों और संगठन के प्रभाव के कारण उनका नक्सलियों से संपर्क हुआ। धीरे-धीरे वे इस संगठन का एक अभिन्न अंग बन गए और कई सालों तक जंगलों में रहकर जीवन यापन किया। इस पूरी अवधि के दौरान, उन्होंने लगातार भय, असुरक्षा और हिंसा के माहौल को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया। समय के साथ, सुकालु को यह गहरा एहसास हुआ कि बंदूक और हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ही ले जाता है। एक बेहतर भविष्य और सामान्य, शांतिपूर्ण जीवन की तीव्र चाह ने उन्हें संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, नक्सल संगठन से बाहर निकलना बिल्कुल भी आसान नहीं था; उन्हें हर कदम पर गंभीर खतरों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने साहस का परिचय देते हुए आखिरकार आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में वापस आने का फैसला लिया। आज, सुकालु समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी उन सभी व्यक्तियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो हिंसा और संघर्ष का रास्ता छोड़कर विकास तथा शांति की राह पर चलना चाहते हैं, यह साबित करते हुए कि परिवर्तन संभव है।
कभी एक नक्सल संगठन का हिस्सा रहे सुकालु की जीवनगाथा संघर्ष, भय और बदलाव का एक अनूठा उदाहरण है। घने जंगलों में नक्सली संगठन के साथ कई वर्ष बिताने के बाद, सुकालु ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। उनकी कहानी कई प्रश्न खड़े करती है कि आखिर किन परिस्थितियों में वे संगठन में शामिल हुए और वहां से बाहर निकलने में उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सुकालु स्वयं बताते हैं कि कम उम्र में ही बिगड़ती परिस्थितियों और संगठन के प्रभाव के कारण उनका नक्सलियों से संपर्क हुआ। धीरे-धीरे वे इस संगठन का एक अभिन्न अंग बन गए और कई सालों तक जंगलों में रहकर जीवन यापन किया। इस पूरी अवधि के दौरान, उन्होंने लगातार भय, असुरक्षा और हिंसा के माहौल को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया। समय के साथ, सुकालु को यह गहरा एहसास हुआ कि बंदूक और हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ही ले जाता है। एक बेहतर भविष्य और सामान्य, शांतिपूर्ण जीवन की तीव्र चाह ने उन्हें संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, नक्सल संगठन से बाहर निकलना बिल्कुल भी आसान नहीं था; उन्हें हर कदम पर गंभीर खतरों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने साहस का परिचय देते हुए आखिरकार आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में वापस आने का फैसला लिया। आज, सुकालु समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी उन सभी व्यक्तियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो हिंसा और संघर्ष का रास्ता छोड़कर विकास तथा शांति की राह पर चलना चाहते हैं, यह साबित करते हुए कि परिवर्तन संभव है।
- कभी एक नक्सल संगठन का हिस्सा रहे सुकालु की जीवनगाथा संघर्ष, भय और बदलाव का एक अनूठा उदाहरण है। घने जंगलों में नक्सली संगठन के साथ कई वर्ष बिताने के बाद, सुकालु ने एक साहसिक निर्णय लेते हुए समाज की मुख्यधारा में लौटने का रास्ता चुना। उनकी कहानी कई प्रश्न खड़े करती है कि आखिर किन परिस्थितियों में वे संगठन में शामिल हुए और वहां से बाहर निकलने में उन्हें किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। सुकालु स्वयं बताते हैं कि कम उम्र में ही बिगड़ती परिस्थितियों और संगठन के प्रभाव के कारण उनका नक्सलियों से संपर्क हुआ। धीरे-धीरे वे इस संगठन का एक अभिन्न अंग बन गए और कई सालों तक जंगलों में रहकर जीवन यापन किया। इस पूरी अवधि के दौरान, उन्होंने लगातार भय, असुरक्षा और हिंसा के माहौल को बहुत करीब से देखा और अनुभव किया। समय के साथ, सुकालु को यह गहरा एहसास हुआ कि बंदूक और हिंसा का मार्ग केवल विनाश की ओर ही ले जाता है। एक बेहतर भविष्य और सामान्य, शांतिपूर्ण जीवन की तीव्र चाह ने उन्हें संगठन छोड़ने के लिए प्रेरित किया। हालांकि, नक्सल संगठन से बाहर निकलना बिल्कुल भी आसान नहीं था; उन्हें हर कदम पर गंभीर खतरों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने साहस का परिचय देते हुए आखिरकार आत्मसमर्पण किया और समाज की मुख्यधारा में वापस आने का फैसला लिया। आज, सुकालु समाज की मुख्यधारा में लौटकर एक सम्मानजनक और सामान्य जीवन जी रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी उन सभी व्यक्तियों के लिए एक उम्मीद की किरण है, जो हिंसा और संघर्ष का रास्ता छोड़कर विकास तथा शांति की राह पर चलना चाहते हैं, यह साबित करते हुए कि परिवर्तन संभव है।1
- छत्तीसगढ़ में विकास और 24 घंटे बिजली के दावों के बीच, मुलमुला के वार्ड क्रमांक 12 (पटेल पारा) से बिजली विभाग की बड़ी लापरवाही उजागर करती एक तस्वीर सामने आई है। इस इलाके में पिछले दो दिनों से बिजली की आपूर्ति पूरी तरह ठप है, जिसके कारण स्थानीय निवासियों को भीषण उमस और गर्मी के बीच अंधेरे में रातें बितानी पड़ रही हैं। यह समस्या केवल बिजली गुल होने और अंधेरे तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली न होने के कारण पटेल पारा में पानी का भी एक गंभीर संकट खड़ा हो गया है।1
- एक व्यक्ति ने अपनी सशक्त और निडर भावना व्यक्त करते हुए कहा कि उसे किसी के पिता से कोई डर नहीं लगता। हालांकि, उसने तुरंत स्पष्ट किया कि उसके अपने पिता के मामले में स्थिति कुछ और है, जो एक विशेष और अद्वितीय संबंध की ओर इशारा करता है।1
- बलरामपुर जिले में सीएम हेल्पलाइन शिकायतों के गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध निराकरण को सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी लगातार समीक्षा कर रही हैं। कलेक्टर स्वयं विभिन्न मामलों की स्थिति का जायजा लेकर उनके प्रभावी समाधान पर विशेष जोर दे रही हैं, जिसका मुख्य फोकस शिकायतकर्ता की संतुष्टि पर है। इसी कड़ी में, कलेक्टर ने विकासखंड राजपुर की ग्राम पंचायत सेवारी से संबंधित एक सीएम हेल्पलाइन शिकायत की जानकारी ली, जिसमें खाद्यान्न वितरण में देरी का मुद्दा उठाया गया था। शिकायत में कहा गया था कि उचित मूल्य दुकानों पर खाद्यान्न का आवंटन और आपूर्ति विलंब से पहुँचने के कारण वितरण कार्य प्रभावित हो रहा था, जिससे हितग्राहियों को असुविधा हो रही थी। मामले की वास्तविक स्थिति जानने के लिए, कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी ने स्वयं दूरभाष पर शिकायतकर्ता, जो एक उचित मूल्य दुकान संचालक थे, से बात की और समस्या के संबंध में जानकारी प्राप्त की। खाद्यान्न आपूर्ति में विलंब की जानकारी मिलने पर, कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को शीघ्र समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए। कलेक्टर ने जोर देकर कहा कि सार्वजनिक वितरण प्रणाली और खाद्यान्न वितरण व्यवस्था जनहित से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है, जो बड़ी संख्या में पात्र हितग्राहियों और जरूरतमंद परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि खाद्यान्न वितरण से संबंधित शिकायतों को सर्वोच्च प्राथमिकता पर निपटाया जाए और पात्र हितग्राहियों को समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो। सभी जिला अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायतों का निराकरण केवल औपचारिकता न हो, बल्कि समस्याओं का प्रभावी और स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए। कलेक्टर द्वारा सीएम हेल्पलाइन के लंबित और असंतोषजनक निराकरण वाले मामलों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, और विभागों द्वारा शिकायतकर्ताओं से सीधे संवाद कर यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि उनकी समस्याओं का वास्तविक और संतोषजनक निराकरण हुआ है या नहीं। जिला प्रशासन का प्रयास आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित करना है।1
- बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस पशु तस्करी और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ लगातार प्रभावी कार्रवाई कर रही है, इसी क्रम में थाना राजपुर पुलिस ने पशु तस्करी के एक प्रकरण में फरार चल रहे एक और आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम को गिरफ्तार करने में सफलता पाई है। यह मामला 11 जून 2026 का है, जब मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने ग्राम गोपालपुर के पास घेराबंदी कर उत्तर प्रदेश की ओर जा रहे संदिग्ध पिकअप वाहन क्रमांक UP-65 QT-1375 की जांच की थी। उस दौरान वाहन में मवेशियों को अमानवीय और क्रूरतापूर्ण तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा हुआ पाया गया था। पुलिस ने पिकअप चालक अशोक गिरी, निवासी थाना चकिया, जिला चंदौली (उ.प्र.) को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके अन्य सहयोगी साथी फरार हो गए थे। विवेचना के दौरान यह तथ्य सामने आया कि आरोपी मवेशियों को वध हेतु उत्तर प्रदेश ले जाने की तैयारी में थे। विवेचना के दौरान फरार आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम, पिता मुमताज आलम, उम्र 28 वर्ष, निवासी ग्राम विष्णुपुरा महादेवपुर चौकी डीन्दो, थाना त्रिकुंडा, जिला बलरामपुर रामानुजगंज की लगातार तलाश की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर सूचना के आधार पर आरोपी सलमान को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड के लिए न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। इस प्रकरण में आरोपियों के खिलाफ थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 147/2026 के तहत पशु परिरक्षण अधिनियम 2024 की धारा 4, 6 और 10, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(डी) तथा धारा 3(5) बीएनएस के अंतर्गत मामला पंजीबद्ध किया गया है। अब तक इस मामले में कुल 02 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। साथ ही, पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से घटना में प्रयुक्त 01 नग पिकअप वाहन, 01 नग ब्रेजा कार और कुल 12 नग भैंसों को जब्त किया है, जिन्हें सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है। शेष फरार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। बलरामपुर पुलिस आमजन से अपील करती है कि पशु तस्करी, अवैध पशु परिवहन या पशुओं के प्रति क्रूरता संबंधी किसी भी सूचना को तत्काल निकटतम पुलिस थाना या पुलिस कंट्रोल रूम को दें, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके।2
- बलरामपुर-रामानुजगंज पुलिस द्वारा पशु तस्करी और अवैध पशु परिवहन के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में, राजपुर पुलिस ने पशु तस्करी के एक मामले में फरार चल रहे एक आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम (उम्र 28 वर्ष) को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है। यह कार्रवाई तब शुरू हुई जब 11 जून 2026 को राजपुर पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि कुछ व्यक्ति मवेशियों को क्रूरतापूर्वक एक पिकअप वाहन में भरकर उत्तर प्रदेश की ओर ले जा रहे हैं। सूचना के आधार पर, पुलिस टीम ने ग्राम गोपालपुर के पास घेराबंदी कर संदिग्ध पिकअप वाहन क्रमांक UP-65 QT-1375 की जाँच की, जिसमें मवेशियों को अमानवीय और क्रूरतापूर्ण तरीके से ठूंस-ठूंसकर भरा पाया गया। पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई के दौरान, पिकअप चालक अशोक गिरी (निवासी थाना चकिया, जिला चंदौली, उ.प्र.) को मौके से गिरफ्तार कर लिया गया था, जबकि उसके अन्य सहयोगी, जिनमें सलमान भी शामिल था, फरार हो गए थे। विवेचना में यह खुलासा हुआ कि आरोपीगण मवेशियों को वध के लिए उत्तर प्रदेश ले जाने की तैयारी में थे। फरार आरोपी सलमान उर्फ सहजाद आलम (पिता मुमताज आलम, निवासी ग्राम विष्णुपुरा महा देवपुर चौकी डीन्दो थाना त्रिकुंडा, जिला बलरामपुर रामानुजगंज) की लगातार तलाश की जा रही थी। तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना के आधार पर उसे गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहाँ से उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजा गया। इस प्रकरण में अब तक कुल 02 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है। आरोपियों के कब्जे से घटना में इस्तेमाल किया गया 01 पिकअप वाहन, 01 ब्रेजा कार और कुल 12 भैंसें जब्त की गई हैं। जब्त किए गए पशुओं को सुरक्षित संरक्षण में रखा गया है। आरोपियों के खिलाफ थाना राजपुर में अपराध क्रमांक 147/2026 के तहत पशु परिरक्षण अधिनियम 2024 की धारा 4, 6 एवं 10, पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 की धारा 11(डी) तथा धारा 3(5) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर विवेचना जारी है। पुलिस शेष फरार आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास कर रही है, साथ ही आमजन से अपील की गई है कि पशु तस्करी या पशु क्रूरता संबंधी कोई भी सूचना तत्काल निकटतम पुलिस थाना या पुलिस कंट्रोल रूम को दें।2
- हंगरी में एक चौंकाने वाली राजनीतिक घटना सामने आई है, जहाँ 16 साल से स्थापित अटूट सत्ता मात्र एक वोट के अंतर से ध्वस्त हो गई। इस परिणाम को केवल एक चुनावी नतीजा नहीं बताया गया है, बल्कि इसे उन सभी सत्ताधीशों के लिए एक निर्णायक सबक माना जा रहा है जो जनता की शक्ति को कम आंकने की भूल करते हैं। इस घटना के माध्यम से एक महत्वपूर्ण संदेश दिया जा रहा है कि इतिहास गवाह है कि कोई भी देश अपने दुश्मनों से कम, बल्कि अपनी जनता की चुप्पी और उदासीनता से ज़्यादा हारता है। दर्शकों से आग्रह किया गया है कि वे इस विषय पर बने वीडियो को देखें, जिसका अंत उन्हें गहन चिंतन पर मजबूर करने का दावा किया गया है।1
- कभी नक्सल संगठन की मेडिकल टीम का हिस्सा रहीं फगनी की जिंदगी आज पूरी तरह बदल चुकी है। केवल पाँचवीं कक्षा तक पढ़ी फगनी के पास कोई औपचारिक मेडिकल डिग्री नहीं थी, फिर भी उन्हें संगठन में इलाज की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जंगलों में रहने के दौरान फगनी मलेरिया से पीड़ित लोगों का उपचार करती थीं और घायल नक्सलियों को प्राथमिक चिकित्सा प्रदान करती थीं। उन्होंने सीमित संसाधनों और बेहद कठिन परिस्थितियों के बावजूद वर्षों तक यह जिम्मेदारी निभाई। समय के साथ, उन्होंने हिंसा और बंदूक के रास्ते को त्यागकर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। आत्मसमर्पण के बाद फगनी के जीवन में एक बड़ा बदलाव आया है; अब वह नारायणपुर के पंडुम कैफे में काम करते हुए एक सम्मानजनक जीवन जी रही हैं। उनकी यह कहानी केवल एक व्यक्ति के परिवर्तन की गाथा नहीं है, बल्कि यह बदलते बस्तर, आत्मनिर्भरता और एक नई शुरुआत का भी प्रतीक है। आज फगनी अपने अनुभवों के साथ समाज में एक सकारात्मक भूमिका निभा रही हैं और कई अन्य लोगों के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं।1