हेडलाइन– गौशाला में गौवंश की बदहाल स्थिति, समाजसेवियों ने कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग। एंकर– पन्ना। नगर पालिका गौशाला में गौवंश की कथित बदहाल स्थिति को लेकर शहर के समाजसेवियों, गौप्रेमियों और गौसेवकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में गौशाला की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन के अनुसार पिछले 10 से 12 दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण गौशाला में कई गौवंश खुले आसमान के नीचे कीचड़ और असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं। आरोप है कि गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, सूखी जगह, शेड और वर्षा से बचाव की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे उनके बीमार होने और मृत्यु का खतरा बना हुआ है। समाजसेवियों का कहना है कि गौशाला के संचालन एवं गौवंश के रखरखाव के लिए शासन द्वारा संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में गौशाला की वर्तमान व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों और उनके उपयोग की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई है कि गौशाला का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, सभी गौवंश की संख्या एवं स्वास्थ्य का सत्यापन किया जाए तथा बीमार और घायल गौवंश का पशु चिकित्सकों से उपचार कराया जाए। साथ ही पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, शेड, सूखी भूमि और जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि गौशाला में किसी गौवंश की मृत्यु हुई है तो उसकी पशु चिकित्सकीय जांच एवं आवश्यकतानुसार पोस्टमार्टम कराया जाए। इसके अलावा गौशाला को प्राप्त शासकीय राशि, चारा एवं अन्य संसाधनों के उपयोग का लेखा परीक्षण कराया जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। समाजसेवियों ने नगर में घूम रहे पालतू गौवंश के संबंध में गौपालकों की जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित प्रशासनिक और पशु चिकित्सा निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। ज्ञापन के अंत में समाजसेवियों ने कहा कि "गौवंश की सेवा केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि हमारी मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी भी है।" उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की है।
हेडलाइन– गौशाला में गौवंश की बदहाल स्थिति, समाजसेवियों ने कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग। एंकर– पन्ना। नगर पालिका गौशाला में गौवंश की कथित बदहाल स्थिति को लेकर शहर के समाजसेवियों, गौप्रेमियों और गौसेवकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में गौशाला की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन के अनुसार पिछले 10 से 12 दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण गौशाला में कई गौवंश खुले आसमान के नीचे कीचड़ और असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं। आरोप है कि गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, सूखी जगह, शेड और वर्षा से बचाव की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे उनके बीमार होने और मृत्यु का खतरा बना हुआ है। समाजसेवियों का कहना है कि गौशाला के संचालन एवं गौवंश के रखरखाव के लिए शासन द्वारा संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में गौशाला की वर्तमान व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों और उनके उपयोग की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई है कि गौशाला का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, सभी गौवंश की संख्या एवं स्वास्थ्य का सत्यापन किया जाए तथा बीमार और घायल गौवंश का पशु चिकित्सकों से उपचार कराया जाए। साथ ही पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, शेड, सूखी भूमि और जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि गौशाला में किसी गौवंश की मृत्यु हुई है तो उसकी पशु चिकित्सकीय जांच एवं आवश्यकतानुसार पोस्टमार्टम कराया जाए। इसके अलावा गौशाला को प्राप्त शासकीय राशि, चारा एवं अन्य संसाधनों के उपयोग का लेखा परीक्षण कराया जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। समाजसेवियों ने नगर में घूम रहे पालतू गौवंश के संबंध में गौपालकों की जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित प्रशासनिक और पशु चिकित्सा निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। ज्ञापन के अंत में समाजसेवियों ने कहा कि "गौवंश की सेवा केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि हमारी मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी भी है।" उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की है।
- रिपोर्ट भागीरथ विश्वकर्मा गुनौर जिला पन्ना मध्यप्रदेश। हेडलाइन — आजादी के 80 साल बाद भी सड़क को तरस रहा रतगवा, 4 किलोमीटर कच्चे रास्ते से गुजरने को मजबूर ग्रामीण। एंकर — पन्ना जिले में विकास के दावों के बीच एक गांव ऐसा भी है, जहां आज भी पक्की सड़क ग्रामीणों के लिए सपना बनी हुई है। देवेंद्रनगर तहसील की ग्राम पंचायत गुखोर के मजरा ग्राम रतगवा में करीब 100 परिवार रहते हैं, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए आज भी करीब चार किलोमीटर का कच्चा रास्ता तय करना पड़ता है। बारिश होते ही यही रास्ता कीचड़ और दलदल में तब्दील हो जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और बीमार मरीजों को उठानी पड़ती है। नेशनल हाईवे-39 से महज चार किलोमीटर की दूरी पर बसे रतगवा गांव के ग्रामीण लंबे समय से पक्की सड़क की मांग कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बारिश के मौसम में गांव का कच्चा रास्ता इतना खराब हो जाता है कि पैदल चलना तक मुश्किल हो जाता है। स्कूली बच्चों को कीचड़ भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ता है। वहीं किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर उसे अस्पताल तक पहुंचाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार गंभीर मरीजों को चारपाई पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल से होकर गुजरने वाले इस कच्चे रास्ते पर बारिश के दिनों में जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। सड़क के साथ गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा का भी अभाव है, जिससे छोटी-बड़ी स्वास्थ्य जरूरतों के लिए ग्रामीणों को दूसरे स्थानों पर निर्भर रहना पड़ता है। ग्रामीणों के अनुसार सड़क निर्माण की मांग कई बार जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश वर्मा के समक्ष रखी जा चुकी है, लेकिन अभी तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सका है। “बारिश में रास्ता पूरी तरह खराब हो जाता है। बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल है और मरीजों को अस्पताल ले जाने में सबसे ज्यादा परेशानी होती है। हमारी मांग है कि गांव तक पक्की सड़क बनाई जाए और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए।” इसी समस्या को लेकर आवेदनकर्ता विकास रजक, ग्रामीण कंछेदी लाल सहित अन्य ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर को आवेदन सौंपकर रतगवा तक पक्की सड़क और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि देश आधुनिक विकास और डिजिटल इंडिया की ओर तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन रतगवा आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन पर है। सवाल यह है कि मुख्य सड़क से महज चार किलोमीटर दूर बसे रतगवा गांव को पक्की सड़क के लिए आखिर और कितना इंतजार करना पड़ेगा? ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी समस्या को गंभीरता से लेते हुए जल्द सड़क निर्माण की दिशा में ठोस कदम उठाएगा।1
- धूम धाम से मनाई गुनौर में 🌙✨ ईद-ए-मिलाद-उन-नबी ﷺ की दिली मुबारकबाद ✨🌙1
- पवई में ईद-ए-मिलादुन्नबी पर निकला जुलूस-ए-मोहम्मदी, नबी की शान में गूंजा नगर पवई। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब के यौमे पैदाइश के मुबारक मौके पर ईद-ए-मिलादुन्नबी का पर्व पवई नगर में अकीदत और एहतराम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर नन्हीं मस्जिद पवई से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला गया। जुलूस में बड़ी संख्या में अकीदतमंद शामिल हुए। हाथों में इस्लामी परचम लिए लोग नात-ए-पाक पढ़ते हुए आगे बढ़ रहे थे। जुलूस करही तिराहा, मिलौनीगंज और झंडा बाजार होते हुए गांधी चौक पहुंचा। इसके बाद इमाम चौक पर करीब आधे घंटे तक आतिशबाजी हुई। जुलूस बस स्टैंड मार्ग से होते हुए वापस नन्हीं मस्जिद पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। इस दौरान “सरकार की आमद मरहबा” के नारों से नगर गूंज उठा। जुलूस के शांतिपूर्ण समापन के बाद चादरपोशी की गई और अमन-चैन एवं देश में खुशहाली की दुआ मांगी गई। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस एवं प्रशासन के अधिकारी-कर्मचारी पूरे समय मुस्तैद रहे2
- 108 जननी एक्सप्रेस बनी शोपीस: दो-दो एंबुलेंस खराब, 6 घंटे इंतजार करने को मजबूर गर्भवती महिलाएं 108 जननी एक्सप्रेस बनी शोपीस: दो-दो एंबुलेंस खराब, 6 घंटे इंतजार करने को मजबूर गर्भवती महिलाएं1
- आजादी के 80 साल बाद भी विकास से दूर रतगवा, 4 किलोमीटर सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मजबूरी आजादी के 80 साल बाद भी विकास से दूर रतगवा, 4 किलोमीटर सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मजबूरी *एंकर:-* पन्ना जिले में विकास के दावों के बीच एक ऐसा गांव भी है, जहां आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। देवेंद्रनगर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गुखोर के माजरा ग्राम रतगवा में करीब 100 घरों की बस्ती है, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है और बच्चों से लेकर मरीजों तक को इसी मुश्किल रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने अब जनसुनवाई में कलेक्टर से सड़क और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। *वीओ-1:* नेशनल हाईवे-39 से महज करीब 4 किलोमीटर अंदर बसा ग्राम रतगवा आज भी विकास की राह देख रहा है। गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही स्वास्थ्य केंद्र। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। *वीओ-2:* सबसे ज्यादा परेशानी तब सामने आती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक सामान्य स्थिति में मरीज को किसी तरह चार किलोमीटर का रास्ता तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, जबकि गंभीर मरीज को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। *वीओ-3:* ग्रामीणों ने बताया कि कई बार उन्होंने क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश वर्मा का भी ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया, लेकिन सड़क निर्माण की समस्या का अब तक समाधान नहीं हो सका। जंगल और कच्चे रास्ते से पैदल आवाजाही के दौरान जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। “कई सालों से सड़क की मांग कर रहे हैं। बारिश में रास्ता पूरी तरह खराब हो जाता है। बच्चों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। शासन-प्रशासन से हमारी मांग है कि गांव तक पक्की सड़क और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए।” *वीओ-4:* एक तरफ देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पन्ना का यह गांव आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर से जल्द सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। *बाइट:-कंछेदी लाल (ग्रामीण)* *बाइट:-विकास रजक (आवेदन करता)*4
- ककरहटी में बड़ी धूमधाम से मनाया गया जश्न ए ईद मिलादुन्नबी ककरहटी में बड़ी धूमधाम से मनाया गया जश्न ए ईद मिलादुन्नबी नगर परिषद ककरहटी में आज दिनांक जश्न ए ईद मिलादुन्नबी बड़े उत्साह पूर्वक मनाया गया यह जश्न पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब की पैदाइश पर मनाया जाता है ककरहटी मस्जिद में जश्न ए ईद मिलादुन्नबी पर विशेष तैयारियां की गई साथ ही मुस्लिम भाईयो के द्वारा एक दूसरे को पर्व की मुबारकबाद दी जिसमें नगर जुलुस निकाला गया जुलूस में धार्मिक नारों एवं भाईचारे एकता के साथ जुलूस का समापन किया गया जुलूस में ककरहटीनगर समीपस्थ एवं दूरस्थ क्षेत्रों के मुस्लिम भाई शामिल रहे जश्न ए ईद जुलुस में ककरहटी चौकी प्रभारी एवं पुलिस बल की सराहनीय भूमिका रही1
- *आजादी के 80 साल बाद भी विकास से दूर रतगवा, 4 किलोमीटर सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मजबूरी* *लोकेशन : देवेंद्रनगर* *रिपोर्टर : अशोक विश्वकर्मा* ------------------------------------- *आजादी के 80 साल बाद भी विकास से दूर रतगवा, 4 किलोमीटर सड़क बनी ग्रामीणों की सबसे बड़ी मजबूरी* *एंकर:-* पन्ना जिले में विकास के दावों के बीच एक ऐसा गांव भी है, जहां आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। देवेंद्रनगर तहसील अंतर्गत ग्राम पंचायत गुखोर के मजरा ग्राम रतगवा में करीब 100 घरों की बस्ती है, लेकिन गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है। बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता दलदल में तब्दील हो जाता है और बच्चों से लेकर मरीजों तक को इसी मुश्किल रास्ते से गुजरना पड़ता है। ग्रामीणों ने अब जनसुनवाई में कलेक्टर से सड़क और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। *वीओ-1:* नेशनल हाईवे-39 से महज करीब 4 किलोमीटर अंदर बसा ग्राम रतगवा आज भी विकास की राह देख रहा है। गांव में न तो पक्की सड़क है और न ही स्वास्थ्य केंद्र। बारिश के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। कच्चा रास्ता कीचड़ और दलदल में बदल जाता है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। *वीओ-2:* सबसे ज्यादा परेशानी तब सामने आती है, जब गांव में कोई बीमार पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक सामान्य स्थिति में मरीज को किसी तरह चार किलोमीटर का रास्ता तय कर मुख्य सड़क तक पहुंचाना पड़ता है, जबकि गंभीर मरीज को चारपाई पर ले जाने की मजबूरी रहती है। ग्रामीणों का कहना है कि आपात स्थिति में समय पर अस्पताल पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। *वीओ-3:* ग्रामीणों ने बताया कि कई बार उन्होंने क्षेत्रीय विधायक डॉ. राजेश वर्मा का भी ध्यान इस समस्या की ओर आकर्षित कराया, लेकिन सड़क निर्माण की समस्या का अब तक समाधान नहीं हो सका। जंगल और कच्चे रास्ते से पैदल आवाजाही के दौरान जहरीले जीव-जंतुओं का खतरा भी बना रहता है। “कई सालों से सड़क की मांग कर रहे हैं। बारिश में रास्ता पूरी तरह खराब हो जाता है। बच्चों और मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। शासन-प्रशासन से हमारी मांग है कि गांव तक पक्की सड़क और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराई जाए।” *वीओ-4:* एक तरफ देश डिजिटल इंडिया और आधुनिक विकास की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर पन्ना का यह गांव आज भी सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के इंतजार में है। ग्रामीणों ने जनसुनवाई में कलेक्टर से जल्द सड़क निर्माण और स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। *बाइट:-कंछेदी लाल (ग्रामीण)* *बाइट:-विकास रजक (आवेदन करता)*4
- हेडलाइन– गौशाला में गौवंश की बदहाल स्थिति, समाजसेवियों ने कलेक्टर से जांच और कार्रवाई की मांग। एंकर– पन्ना। नगर पालिका गौशाला में गौवंश की कथित बदहाल स्थिति को लेकर शहर के समाजसेवियों, गौप्रेमियों और गौसेवकों ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में गौशाला की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष जांच और आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई की मांग की गई है। ज्ञापन के अनुसार पिछले 10 से 12 दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण गौशाला में कई गौवंश खुले आसमान के नीचे कीचड़ और असुरक्षित परिस्थितियों में रहने को मजबूर बताए जा रहे हैं। आरोप है कि गौवंश के लिए पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, सूखी जगह, शेड और वर्षा से बचाव की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिससे उनके बीमार होने और मृत्यु का खतरा बना हुआ है। समाजसेवियों का कहना है कि गौशाला के संचालन एवं गौवंश के रखरखाव के लिए शासन द्वारा संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं। ऐसे में गौशाला की वर्तमान व्यवस्था, उपलब्ध संसाधनों और उनके उपयोग की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। ज्ञापन में मांग की गई है कि गौशाला का तत्काल स्थलीय निरीक्षण कराया जाए, सभी गौवंश की संख्या एवं स्वास्थ्य का सत्यापन किया जाए तथा बीमार और घायल गौवंश का पशु चिकित्सकों से उपचार कराया जाए। साथ ही पर्याप्त चारा, स्वच्छ पेयजल, शेड, सूखी भूमि और जल निकासी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। ज्ञापन में यह भी मांग की गई है कि यदि गौशाला में किसी गौवंश की मृत्यु हुई है तो उसकी पशु चिकित्सकीय जांच एवं आवश्यकतानुसार पोस्टमार्टम कराया जाए। इसके अलावा गौशाला को प्राप्त शासकीय राशि, चारा एवं अन्य संसाधनों के उपयोग का लेखा परीक्षण कराया जाए और यदि जांच में किसी अधिकारी, कर्मचारी, ठेकेदार या अन्य जिम्मेदार व्यक्ति की लापरवाही सामने आती है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए। समाजसेवियों ने नगर में घूम रहे पालतू गौवंश के संबंध में गौपालकों की जिम्मेदारी तय करने तथा भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए नियमित प्रशासनिक और पशु चिकित्सा निरीक्षण की प्रभावी व्यवस्था लागू करने की भी मांग की है। ज्ञापन के अंत में समाजसेवियों ने कहा कि "गौवंश की सेवा केवल धार्मिक भावना नहीं, बल्कि हमारी मानवीय संवेदना और सामाजिक जिम्मेदारी भी है।" उन्होंने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र कार्रवाई करने की अपील की है।1