एक करोड़ का सफेद हाथी बना स्टेडियम, आठ साल से ताला बंद महेश्वर :- झिरनिया (पिपल्या बुजुर्ग)। तहसील स्तर का खेल स्टेडियम बनाया गया एक करोड़ रुपये खर्च करके। मकसद था क्षेत्र के युवाओं को खेल का मंच देना। लेकिन आठ साल बीत गए और मैदान पर अभी भी सिर्फ पत्थर, गोबर और दरारें दिखती हैं। खेल का कोई निशान नहीं। 2016-17 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग महेश्वर ने यह स्टेडियम तैयार करवाया था। तब उम्मीद थी कि यहां नियमित टूर्नामेंट, अभ्यास और प्रतियोगिताएं होंगी। आज हकीकत यह है कि भवन के हॉल में बाहर के लोग चादर-टीन लगाकर रहने लगे हैं। दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, पेवेलियन में दरारें फैल गई हैं और क्रिकेट पिच पर बड़े-बड़े पत्थर बिखरे पड़े हैं। मैदान में मवेशी घूमते हैं। ग्रामीण महेंद्र शुक्ला, धर्मेंद्र जायसवाल और संतोष भजीत कहते हैं, “इतनी बड़ी रकम खर्च हुई, लेकिन किसी अधिकारी ने कभी नियमित निरीक्षण नहीं किया। न मरम्मत हुई, न खेल शुरू हुए। युवाओं को दूसरे गांव जाना पड़ता है।” जगदीश मुकाती बताते हैं कि छत्तसील स्तर का यह मैदान आज पूरी तरह बेकार पड़ा है। निर्माण के बाद विभाग ने इसकी सुध ही नहीं ली। देखरेख न होने से भवन और मैदान दोनों दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। यह सिर्फ एक इमारत की कहानी नहीं है। यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की उस हकीकत को दर्शाती है, जहां निर्माण तो हो जाता है, लेकिन रखरखाव और उपयोग की कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाती। क्षेत्र के सैकड़ों युवा खेलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास न मैदान है, न सुविधा। अब सवाल सिर्फ इतना है — क्या प्रशासन इस एक करोड़ के स्टेडियम को फिर से जिंदा करेगा, या यह हमेशा के लिए वीरान पड़ा रहेगा?
एक करोड़ का सफेद हाथी बना स्टेडियम, आठ साल से ताला बंद महेश्वर :- झिरनिया (पिपल्या बुजुर्ग)। तहसील स्तर का खेल स्टेडियम बनाया गया एक करोड़ रुपये खर्च करके। मकसद था क्षेत्र के युवाओं को खेल का मंच देना। लेकिन आठ साल बीत गए और मैदान पर अभी भी सिर्फ पत्थर, गोबर और दरारें दिखती हैं। खेल का कोई निशान नहीं। 2016-17 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग महेश्वर ने यह स्टेडियम तैयार करवाया था। तब उम्मीद थी कि यहां नियमित टूर्नामेंट, अभ्यास और प्रतियोगिताएं होंगी। आज हकीकत यह है कि भवन के हॉल में बाहर के लोग चादर-टीन लगाकर रहने लगे हैं। दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, पेवेलियन में दरारें फैल गई हैं और क्रिकेट पिच पर बड़े-बड़े पत्थर बिखरे पड़े हैं। मैदान में मवेशी घूमते हैं। ग्रामीण महेंद्र शुक्ला, धर्मेंद्र जायसवाल और संतोष भजीत कहते हैं, “इतनी बड़ी रकम खर्च हुई, लेकिन किसी अधिकारी ने कभी नियमित निरीक्षण नहीं किया। न मरम्मत हुई, न खेल शुरू हुए। युवाओं को दूसरे गांव जाना पड़ता है।” जगदीश मुकाती बताते हैं कि छत्तसील स्तर का यह मैदान आज पूरी तरह बेकार पड़ा है। निर्माण के बाद विभाग ने इसकी सुध ही नहीं ली। देखरेख न होने से भवन और मैदान दोनों दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। यह सिर्फ एक इमारत की कहानी नहीं है। यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की उस हकीकत को दर्शाती है, जहां निर्माण तो हो जाता है, लेकिन रखरखाव और उपयोग की कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाती। क्षेत्र के सैकड़ों युवा खेलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास न मैदान है, न सुविधा। अब सवाल सिर्फ इतना है — क्या प्रशासन इस एक करोड़ के स्टेडियम को फिर से जिंदा करेगा, या यह हमेशा के लिए वीरान पड़ा रहेगा?
- एक करोड़ का सफेद हाथी बना स्टेडियम, आठ साल से ताला बंद महेश्वर :- झिरनिया (पिपल्या बुजुर्ग)। तहसील स्तर का खेल स्टेडियम बनाया गया एक करोड़ रुपये खर्च करके। मकसद था क्षेत्र के युवाओं को खेल का मंच देना। लेकिन आठ साल बीत गए और मैदान पर अभी भी सिर्फ पत्थर, गोबर और दरारें दिखती हैं। खेल का कोई निशान नहीं। 2016-17 में ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग महेश्वर ने यह स्टेडियम तैयार करवाया था। तब उम्मीद थी कि यहां नियमित टूर्नामेंट, अभ्यास और प्रतियोगिताएं होंगी। आज हकीकत यह है कि भवन के हॉल में बाहर के लोग चादर-टीन लगाकर रहने लगे हैं। दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है, पेवेलियन में दरारें फैल गई हैं और क्रिकेट पिच पर बड़े-बड़े पत्थर बिखरे पड़े हैं। मैदान में मवेशी घूमते हैं। ग्रामीण महेंद्र शुक्ला, धर्मेंद्र जायसवाल और संतोष भजीत कहते हैं, “इतनी बड़ी रकम खर्च हुई, लेकिन किसी अधिकारी ने कभी नियमित निरीक्षण नहीं किया। न मरम्मत हुई, न खेल शुरू हुए। युवाओं को दूसरे गांव जाना पड़ता है।” जगदीश मुकाती बताते हैं कि छत्तसील स्तर का यह मैदान आज पूरी तरह बेकार पड़ा है। निर्माण के बाद विभाग ने इसकी सुध ही नहीं ली। देखरेख न होने से भवन और मैदान दोनों दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं। यह सिर्फ एक इमारत की कहानी नहीं है। यह सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की उस हकीकत को दर्शाती है, जहां निर्माण तो हो जाता है, लेकिन रखरखाव और उपयोग की कोई जिम्मेदारी नहीं ली जाती। क्षेत्र के सैकड़ों युवा खेलना चाहते हैं, लेकिन उनके पास न मैदान है, न सुविधा। अब सवाल सिर्फ इतना है — क्या प्रशासन इस एक करोड़ के स्टेडियम को फिर से जिंदा करेगा, या यह हमेशा के लिए वीरान पड़ा रहेगा?1
- धामनोद जय भीम नगर में स्कूली बच्चों को जान जोखिम में डाल गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ागंदे पानी की समस्या से रहवासी परेशान नगर के वार्ड जिम्मेदार बेखबर (जे.एन.यादव धामनोद ) 14 जय भीम नगर में जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होने से प्रतिवर्ष की तरह रहवासियों को परेशानी का सामना उठाना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि नगर की विभिन्न गंदी नालियों का पानी बहकर उनके वार्ड में पहुंच रहा है, जिससे वर्षा के दिनों में स्थिति और गंभीर हो जाती है। मंगलवार को स्थिति उस समय भयावह नजर आई, जब स्कूली बच्चों को इसी गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ा। इसका वीडियो भी इंटरनेट मीडिया पर बहुप्रसारित हुआ। रहवासियों ने समस्या को लेकर विरोध जताते हुए जिम्मेदारों का ध्यान आकर्षित किया, लेकिन उनका आरोप है कि इसके बावजूद समस्या के निराकरण के लिए अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। गंदे बहते पानी से गुजरते स्कूली बच्चे। समस्या से नाराज वार्डवासी नगर परिषद पहुंचे और मुख्य नगर पालिका अधिकारी के नाम ज्ञापन सौंपकर जल निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की है। मांग की। रहवासियों ने बताया कि वर्षा के दौरान गंदा पानी सड़कों पर जमा हो जाता है, जिससे आवागमन प्रभावित होने के साथ ही बच्चों, बुजुर्गों और आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ती बीमारियों का भी बना रहता है खतरा रहवासियों ने कहा कि लंबे समय तक सड़कों पर गंदा पानी जमा रहने से दुर्गंध और गंदगी के साथ बीमारियां फैलने का खतरा भी बना रहता है। विशेष रूप से स्कूली बच्चों को गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है, स्कुल ड्रेस बेग गीले होने के साथ ही बच्चो के स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों में चिंता है। उल्लेखनीय है कि वर्षा के दौरान नगर में कई स्थानों पर निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव की स्थिति बन रही है। रहवासियों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा समय रहते निकासी व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किए जाने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। अब वार्डवासियों का विरोध खुलकर सामने आया है और उन्होंने समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।3
- महू मेनिजी मोबाइल कंपनी का कार्यक्रम सड़क पर लोग परेशान महू l कनॉट रोड पर मंगलवार को निजी मोबाइल दुकान के उद्घाटन कार्यक्रम के चलते क्षेत्र के लोग और राहगीर परेशान नजर आए। सुबह से ही तेज आवाज में साउंड सिस्टम बजने से आसपास के रहवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान सड़क पर लोगों की भीड़ और वाहनों की आवाजाही के चलते बीच सड़क पर बार-बार जाम की स्थिति बनती रही। इससे राहगीरों और वाहन चालकों को निकलने में परेशानी हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि व्यावसायिक आयोजन सड़क के यातायात को प्रभावित किए बिना किए जाने चाहिए। तेज आवाज में साउंड और सड़क पर भीड़ के कारण आम लोगों को परेशानी हो रही है। प्रशासन से मामले में ध्यान देने की मांग की गई है।1
- *सावित्री ठाकुर के प्रयासों से धार लोकसभा क्षेत्र में रेल क्रांति का नया अध्याय* *प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया टांडा रोड से वडोदरा तक पहली मेमू ट्रेन का शुभारंभ* *हजारों की संख्या में पहुंचे क्षेत्रीय आदिवासी ग्रामीणजन* *सावित्री ठाकुर के प्रयासों से धार लोकसभा क्षेत्र में रेल क्रांति का नया अध्याय* *प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने किया टांडा रोड से वडोदरा तक पहली मेमू ट्रेन का शुभारंभ* *हजारों की संख्या में पहुंचे क्षेत्रीय आदिवासी ग्रामीणजन* राहुल सेन मांडव मो 9669141814 *धार न्यूज* , धार लोकसभा क्षेत्र के लिए आज का दिन ऐतिहासिक और गौरवपूर्ण है। क्षेत्र की लोकप्रिय सांसद एवं महिला - बाल विकास राज्यमंत्री भारत सरकार के निरंतर प्रयासों से आज आजादी के बाद पहली बार धार लोकसभा क्षेत्र में रेल परिचालन आरम्भ हुआ है। इसके अंतर्गत गंधवानी क्षेत्र के टांडा रोड रेलवे स्टेशन से वडोदरा (प्रतापनगर) के लिए मेमू ट्रेन सेवा का शुभारंभ हुआ है। यह केवल रेल सेवा का आरंभ नहीं, बल्कि आदिवासी अंचल के विकास, आकांक्षाओं और वर्षों पुराने सपने के साकार होने का ऐतिहासिक अवसर है। धार लोकसभा क्षेत्र को लंबे समय तक रेल कनेक्टिविटी से वंचित रखा गया, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इस दिशा में अभूतपूर्व पहल की है। प्रधानमंत्री जी के प्रयासों, केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव जी के मार्गदर्शन तथा धार लोकसभा क्षेत्र की लोकप्रिय सांसद एवं केंद्रीय मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर जी के निरंतर प्रयासों से आज टांडा रोड तक रेल पहुंचने का सपना वास्तविकता में बदल गया है। विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करते हुए टांडा रोड–वडोदरा नई रेल सेवा से गुजरात और मध्य प्रदेश के बीच रेल कनेक्टिविटी और मजबूत होगी। इससे वडोदरा, छोटा उदयपुर और अलीराजपुर सहित आसपास के क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा। विद्यार्थियों को शिक्षा के बेहतर अवसर, व्यापारियों को नए बाजार, किसानों को परिवहन की सुविधा, युवाओं को रोजगार के नए अवसर तथा क्षेत्र में पर्यटन को नई गति मिलेगी। आवागमन सुगम होने से आदिवासी अंचल में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और विकास की नई संभावनाएं जन्म लेंगी। आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर जोबट–टांडा रोड नई रेल लाइन के उद्घाटन, वडोदरा–रतलाम तीसरी एवं चौथी रेल लाइन, मियागाम–करजन–चोरंदा–मालसर गेज परिवर्तन तथा विश्वामित्री–डभोई दोहरीकरण जैसी महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं के शिलान्यास से पश्चिमी भारत की रेल अधोसंरचना को भी नई मजबूती मिली है। साथ ही 30700 करोड़ की लागत से निर्मित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को राष्ट्र को समर्पित किए जाने तथा टांडा रोड–वडोदरा ट्रेन सेवा और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर चार नई फ्रेट ट्रेनों के शुभारंभ से क्षेत्र की कनेक्टिविटी एवं व्यापारिक क्षमता और मजबूत होगी। श्रीमती सावित्री ठाकुर जी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में आदिवासी अंचल में विकास की नई गंगा बह रही है। रेल केवल पटरियों और ट्रेनों का विस्तार नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, रोजगार, व्यापार, पर्यटन और समृद्धि के नए द्वार खोलने का माध्यम है। उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जी का भी विशेष रूप से आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जनजातीय समाज के उत्थान और प्रदेश के सर्वांगीण विकास के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। आज टांडा रोड से चली पहली मेमू ट्रेन धार लोकसभा क्षेत्र के विकास की नई यात्रा का शुभारंभ है—यह रेल सेवा विकसित, आत्मनिर्भर और समृद्ध आदिवासी अंचल की नई पहचान बनेगी। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री नागर सिंह चौहान जी, धार विधायक श्रीमती नीना विक्रम वर्मा जी, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री सरदार मेडा जी, जिला अध्यक्ष श्री चंचल पाटीदार जी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधिगण एवं ग्रामवासी उपस्थित रहे।4
- 🚨 ब्रेकिंग न्यूज | इंदौर राऊ में सील बैटरी फैक्ट्री 15 दिन में फिर खुली! राऊ केट रोड स्थित संजय नगर के इंडस्ट्रियल एरिया में नई दुनिया प्रेस के समीप बैटरी फैक्ट्री का मामला 🔴 कलेक्टर के निर्देशन में राऊ एसडीएम ने की थी कार्रवाई 🔴 प्रशासन ने बैटरी फैक्ट्री को किया था सील 🔴 पहली सील तोड़ने की बात सामने आने के बाद अगले दिन तहसीलदार ने जंजीर डालकर दोबारा की थी सीलिंग 🔴 करीब 15 दिन बाद फैक्ट्री को दोबारा संचालन की अनुमति मिलने की बात से उठे सवाल 🔴 फैक्ट्री के पास आवश्यक अनुमति और प्रदूषण प्रमाण-पत्र की स्थिति पर सवाल 🔴 सील तोड़ने वाले के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? अब तक स्पष्ट नहीं 🔴 किस आधार पर दोबारा संचालन की अनुमति दी गई, विभाग ने नहीं किया स्पष्ट 🔴 कार्रवाई करने वाले अधिकारी भी मामले में बयान देने से बचते नजर आ रहे 🔴 आगे की कार्रवाई औद्योगिक विभाग द्वारा किए जाने की बात 🔴 अगर फैक्ट्री नियम विरुद्ध थी तो इतनी जल्दी अनुमति कैसे मिली? 🔴 पूरे मामले में प्रशासनिक कार्रवाई और अनुमति प्रक्रिया पर उठ रहे गंभीर सवाल अब बड़ा सवाल—कार्रवाई वास्तव में हुई या महज औपचारिकता? राऊ-रंगवासा औद्योगिक क्षेत्र में बैटरी फैक्ट्री को लेकर प्रशासन कब करेगा पूरे मामले का खुलासा?1
- मोदी जी को मारने की थी प्लानिंग भाग्यवश सफल नहीं हो पाये1
- पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों से जुड़े 10 बैंक खातों में साइबर ठगी से संबंधित 10 करोड रुपए से अधिक की रकम पहुंची है ।। वहीं जांच के दौरान खाते में 5 करोड रुपए से अधिक का संदिग्ध लेनदेन भी सामने आया है।। पुलिस के मुताबिक आरोपी कोर राठौर साइबर ठगी के जरिए प्राप्त रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाने का काम करता था ।। बताया जा रहा है की ठगी की रकम को दीपक राव के बैंक खातों में फर्जी तरीके से ट्रांसफर करवाया जाता था ।।1
- वायरल वीडियो में 1955 से 1980 में जन्मे पीढ़ी के बारे खास ओर सत्य बात बताई1