भीलवाड़ा नगर निगम के वार्ड नंबर 27 में, विशेष रूप से कच्ची बस्ती कांवाखेड़ा क्षेत्र में, पिछले पाँच सालों से छोटे नालों की सफाई नहीं की गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण अब चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बरसात का दौर शुरू हो चुका है और कभी भी तेज़ बारिश होने पर ये नाले उफ़ान पर आ सकते हैं, जिससे सड़कों पर तमाम गंदगी जमा होने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी इन नालों की सफाई करने से यह कहकर मना कर देते हैं कि यह काम ठेके पर रखे कर्मचारियों का है। चूंकि इन छोटे नालों में जेसीबी मशीनें भी नहीं जा सकतीं और कर्मचारी भी काम करने से कतरा रहे हैं, ऐसे में नगर निगम प्रशासन अपनी इस महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी से भागता नज़र आ रहा है। नालों की मौजूदा स्थिति देखकर हर कोई इस बात का अंदाज़ा लगा सकता है कि उनकी सफाई पाँच सालों से नहीं हुई है। जनता ने प्रशासन और नगर निगम से पुरज़ोर मांग की है कि बारिश के मौसम से पहले एक विशेष टीम का गठन किया जाए और कच्ची बस्तियों के सभी छोटे व बड़े नालों की प्राथमिकता के आधार पर सफाई करवाई जाए। जनता सवाल पूछ रही है कि उनकी इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान आखिर कब होगा।
भीलवाड़ा नगर निगम के वार्ड नंबर 27 में, विशेष रूप से कच्ची बस्ती कांवाखेड़ा क्षेत्र में, पिछले पाँच सालों से छोटे नालों की सफाई नहीं की गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण अब चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बरसात का दौर शुरू हो चुका है और कभी भी तेज़ बारिश होने पर ये नाले उफ़ान पर आ सकते हैं, जिससे सड़कों पर तमाम गंदगी जमा होने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी इन नालों की सफाई करने से यह कहकर मना कर देते हैं कि यह काम ठेके पर रखे कर्मचारियों का है। चूंकि इन छोटे नालों में जेसीबी मशीनें भी नहीं जा सकतीं और कर्मचारी भी काम करने से कतरा रहे हैं, ऐसे में नगर निगम प्रशासन अपनी इस महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी से भागता नज़र आ रहा है। नालों की मौजूदा स्थिति देखकर हर कोई इस बात का अंदाज़ा लगा सकता है कि उनकी सफाई पाँच सालों से नहीं हुई है। जनता ने प्रशासन और नगर निगम से पुरज़ोर मांग की है कि बारिश के मौसम से पहले एक विशेष टीम का गठन किया जाए और कच्ची बस्तियों के सभी छोटे व बड़े नालों की प्राथमिकता के आधार पर सफाई करवाई जाए। जनता सवाल पूछ रही है कि उनकी इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान आखिर कब होगा।
- भीलवाड़ा के कांवाखेड़ा कच्ची बस्ती के वार्ड 27 में पानी की पाइपलाइन कई जगहों से टूटी हुई है। यह समस्या पुलिस चौकी से मात्र 100 कदम की दूरी पर है। उसी 60 फीट मुख्य सड़क पर एक जगह नहीं, बल्कि चार से पांच स्थानों पर पाइपलाइन क्षतिग्रस्त है, जिसके कारण प्रतिदिन हजारों लीटर पीने का पानी बर्बाद हो रहा है। पाइपलाइन के टूटने से जैसे ही पानी की सप्लाई चालू होती है, हजारों लीटर पेयजल बेकार बह जाता है। इसके चलते लोगों के घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता और निर्धारित समय से पहले ही आपूर्ति बंद हो जाती है। स्थानीय निवासी राकेश देसाई के अनुसार, इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार जलदाय विभाग में शिकायत की गई है। यहां तक कि सोशल मीडिया और विभिन्न अखबारों में भी इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, लेकिन इसके बावजूद भी भीलवाड़ा चम्बल परियोजना और स्थानीय जलदाय विभाग इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। प्रशासन भी इस मामले पर मौन है। राकेश देसाई ने शुरू ऐप के माध्यम से इस समस्या के तत्काल समाधान की मांग की है।1
- भीलवाड़ा के उपनगर पुर में तालाब की पाल पर स्थित डूंगरी के बालाजी मंदिर के ट्रस्ट का विधिवत गठन किया गया है। इस नवगठित मंदिर ट्रस्ट में मुकेश पलौड़ को अध्यक्ष, छोटू लाल सेन को मंत्री और सीए आलोक पलौड़ को कोषाध्यक्ष का पदभार सौंपा गया है। संरक्षक मंडल में गणपत लाल सेन, सत्यनारायण पलौड़, पंडित अशोक कुमार व्यास, श्रवण कुमार सेन और पूरण मल छिपा को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त, निर्मल जोशी को वरिष्ठ उपाध्यक्ष, पंकज कुमार पलौड़ को उपाध्यक्ष, मुकेश कुमार सोनी (पुर गणेश मंडल अध्यक्ष) को संगठन मंत्री और रमेश चंद्र सेन पुर को सह सचिव नियुक्त किया गया है। सभी नवनियुक्त पदाधिकारियों का स्वागत भी किया गया। इस अवसर पर सुरेश सेन हठीला ने संगठन में और सदस्य जोड़ने का प्रस्ताव रखा, जिसके लिए प्रत्येक सदस्य से ग्यारसों रुपए का शुल्क निर्धारित किया गया। बैठक में सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार व्यक्त किए। मंदिर के रखरखाव के साथ-साथ भोजन धर्मशाला और सड़क के निर्माण का प्रस्ताव रखा गया। बुजुर्गों के लिए मंदिर में चढ़ने-उतरने हेतु विशेष लिफ्ट लगाने का भी प्रस्ताव सामने आया। ट्रस्ट ने यह भी निर्णय लिया कि वर्ष में हिंदू धर्म के सभी आयोजनों को मंदिर परिसर में किया जाएगा। इसके तहत, दोनों नवरात्रि में सुचारु रूप से रामायण पाठ और शनिवार व मंगलवार को सुंदरकांड का पाठ आयोजित किया जाएगा। साथ ही, बच्चों को संस्कृति और धार्मिक पुस्तकें पढ़ाने का भी महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है।1
- भीलवाड़ा शहर के एक पुराने क्षेत्र, जुनावास कॉलोनी के निवासी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में जूझ रहे हैं। यहां की प्रमुख समस्या सड़कों की बदहाली है, जिन्हें केवल खानापूर्ति के तौर पर बनाया गया है। इसके अतिरिक्त, कॉलोनी में न तो समय पर पानी की आपूर्ति होती है और न ही नालियों की नियमित रूप से सफाई की जाती है। इन समस्याओं के कारण स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जर्जर सड़कें जहाँ हादसों को न्योता दे रही हैं, वहीं बारिश का पानी सीधा घरों में घुस जाता है। निवासियों ने इन मुद्दों को लेकर कई बार शिकायतें दर्ज कराई हैं, परंतु तमाम शिकायतों के बावजूद अभी तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है और न ही कोई समाधान निकल पाया है।1
- भीलवाड़ा की छोटी हरणी स्थित हनुमान टेकरी आश्रम में 8 जून से 14 जून तक सात दिवसीय 11 कुण्डीय विष्णु लक्ष्मी महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा। इस आयोजन के संबंध में, महंत बनवारीशरण काठियाबाबा ने बागेश्वर धाम पहुंचकर बागेश्वरधाम सरकार पंडित धीरेन्द्रकृष्ण शास्त्री से मुलाकात की और उन्हें इस महायज्ञ में शिरकत करने के लिए निमंत्रण दिया है। पंडित शास्त्री ने महायज्ञ की सफलता के लिए अपनी शुभकामनाएं व्यक्त की हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने भीलवाड़ा में शीघ्र ही एक भव्य कार्यक्रम आयोजित करने के लिए अपनी सहमति भी प्रदान की। गौरतलब है कि पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने वर्ष 2024 में भी भीलवाड़ा में एक विशाल हनुमंत कथा का आयोजन किया था।1
- साड़ास मंडल के युवा नेता और भाजपा के ऊर्जावान श्री मोनू सोमानी को उनके जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ दी गई हैं। उन्हें हंसमुख स्वभाव, सरल व्यक्तित्व और मिलनसार व्यवहार के धनी व्यक्ति के रूप में सराहा गया है। शुभकामना देने वालों ने ईश्वर से उनके सदैव स्वस्थ, प्रसन्न और यशस्वी रहने की प्रार्थना की है। उनके जीवन में निरंतर सुख, समृद्धि, सम्मान और खुशियों के वास की कामना की गई है। साथ ही, यह भी प्रार्थना की गई है कि श्री सांवलिया सेठ जी की असीम कृपा उन पर और उनके परिवार पर सदैव बनी रहे, और उनके जीवन का प्रत्येक क्षण आनंद, सफलता तथा मंगलमय उपलब्धियों से परिपूर्ण हो।1
- पेपर लीक की घटनाओं के बीच, जिनके प्रति निरंतर समर्थन व्यक्त किया जा रहा है, NEET पेपर लीक के बाद परीक्षा व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव होने वाला है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, NTA एक ऐसे नए सिस्टम पर काम कर रही है, जिसके तहत सवाल तैयार करने वाले विशेषज्ञों को भी यह पता नहीं होगा कि उनके द्वारा तैयार किए गए प्रश्न किस विशिष्ट परीक्षा में उपयोग किए जाएंगे। यदि यह व्यवस्था सफल होती है, तो पेपर लीक करने वाले माफियाओं की कमर टूट सकती है और मेहनती छात्रों को उनका वास्तविक हक मिल पाएगा। इस बदलाव के साथ ही, छात्रों को किताबों पर भरोसा करने और 'जुगाड़' की बजाय अपनी मेहनत पर निर्भर रहने का संदेश दिया गया है, ताकि सफलता का रास्ता अब लीक से नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत से तय हो। यह दिन-रात पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए उम्मीद की खबर है, क्योंकि इसका उद्देश्य ईमानदार तैयारी करने वालों के भविष्य को सुरक्षित करना और परीक्षा प्रणाली पर जनता का भरोसा बहाल करना है।1
- भीलवाड़ा नगर निगम के वार्ड नंबर 27 में, विशेष रूप से कच्ची बस्ती कांवाखेड़ा क्षेत्र में, पिछले पाँच सालों से छोटे नालों की सफाई नहीं की गई है। इस गंभीर स्थिति के कारण अब चिंता बढ़ गई है, क्योंकि बरसात का दौर शुरू हो चुका है और कभी भी तेज़ बारिश होने पर ये नाले उफ़ान पर आ सकते हैं, जिससे सड़कों पर तमाम गंदगी जमा होने का खतरा मंडरा रहा है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सफाई कर्मचारी इन नालों की सफाई करने से यह कहकर मना कर देते हैं कि यह काम ठेके पर रखे कर्मचारियों का है। चूंकि इन छोटे नालों में जेसीबी मशीनें भी नहीं जा सकतीं और कर्मचारी भी काम करने से कतरा रहे हैं, ऐसे में नगर निगम प्रशासन अपनी इस महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी से भागता नज़र आ रहा है। नालों की मौजूदा स्थिति देखकर हर कोई इस बात का अंदाज़ा लगा सकता है कि उनकी सफाई पाँच सालों से नहीं हुई है। जनता ने प्रशासन और नगर निगम से पुरज़ोर मांग की है कि बारिश के मौसम से पहले एक विशेष टीम का गठन किया जाए और कच्ची बस्तियों के सभी छोटे व बड़े नालों की प्राथमिकता के आधार पर सफाई करवाई जाए। जनता सवाल पूछ रही है कि उनकी इन ज्वलंत समस्याओं का समाधान आखिर कब होगा।1
- किसानों के साथ हुए अनुचित व्यवहार को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया गया है। यह मांग उठाई गई है कि यदि किसान अपने तय समय पर आते हैं और उनके साथ 'ऐसी हरकत' की जाती है, तो ऐसे कर्मचारियों को तुरंत नौकरी से बर्खास्त कर देना चाहिए। इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है।1