प्रेस विज्ञप्ति *MP का बासमती बेहतर फिर भी GI टैग से वंचित, दूसरे राज्यों के व्यापारी उठा रहे फायदा: दिग्विजय सिंह* *मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग, उदयपुरा में गैर-दलीय बासमती उत्पादक किसान संवाद में किसानों ने रखीं समस्याएं* दिनांक: 15 सितंबर, 2026 उदयपुरा, रायसेन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को GI टैग (Geographical Indication) दिए जाने की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। पूर्व सीएम ने मंगलवार को रायसेन के उदयपुरा स्थित उदय पैलेस में गैर-दलीय पूसा बासमती धान उत्पादक किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना। साथ ही मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग देने की मांग दोहराई। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। यहां का बासमती चावल अन्य राज्यों से बेहतर किस्म का है। लेकिन GI टैग न मिलने के कारण पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश के बासमती चावल में अपने राज्यों का GI टैग लगाकर निर्यात करने का लाभ कमा रहे हैं। इससे मध्य प्रदेश के किसान अपने हक से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खुद के उगाए चावल का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि GI टैग के अभाव में प्रदेश के किसान अपने ही उगाए बासमती चावल का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग की। सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल का GI टैग स्वीकृत करवाया था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2016 में इसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आज देश के केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, इसके बावजूद प्रदेश को बासमती चावल के लिए GI टैग नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश को बासमती चावल का GI टैग मिल जाता है तो राज्य से करीब 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है। इससे प्रदेश के किसानों को अपनी उपज की बेहतर पहचान और उसका उचित लाभ मिल सकेगा। श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के पास 77 GI टैग हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर एक ही दिन में 21 GI टैग दिए गए। वहीं मध्य प्रदेश को उसके बासमती चावल के लिए GI टैग से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, लेकिन उन्होंने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के हित में इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र में उत्पादित होता है, जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री चुनाव जीतकर आते हैं। किसान संवाद के दौरान रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर, मंदसौर सहित विभिन्न जिलों से आए बासमती धान उत्पादक किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। किसानों ने पूसा बासमती धान की पहचान, उत्पादन, उचित मूल्य और निर्यात से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। किसान नेता केदार सिरोही, प्रतीक शर्मा (गाडरवारा), परमजीत सिंह, मुकेश शर्मा सहित अन्य किसान प्रतिनिधियों ने दिग्विजय सिंह के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखे। संवाद का उद्देश्य बासमती उत्पादक किसानों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को साझा मंच पर उठाना रहा। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, सिलवानी विधायक देवेंद्र पटेल, पूर्व विधायक सुनीता पटेल, गाडरवारा के पूर्व विधायक भगवान सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में बासमती उत्पादक किसान उपस्थित रहे। प्रति, माननीय संपादक महोदय, सादर प्रकाशनार्थ। द्वारा समस्त बासमती उत्पादक किसान नर्मदांचल, मध्यप्रदेश
प्रेस विज्ञप्ति *MP का बासमती बेहतर फिर भी GI टैग से वंचित, दूसरे राज्यों के व्यापारी उठा रहे फायदा: दिग्विजय सिंह* *मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग, उदयपुरा में गैर-दलीय बासमती उत्पादक किसान संवाद में किसानों ने रखीं समस्याएं* दिनांक: 15 सितंबर, 2026 उदयपुरा, रायसेन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को GI टैग (Geographical Indication) दिए जाने की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। पूर्व सीएम ने मंगलवार को रायसेन के उदयपुरा स्थित उदय पैलेस में गैर-दलीय पूसा बासमती धान उत्पादक किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना। साथ ही मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग देने की मांग दोहराई। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। यहां का बासमती चावल अन्य राज्यों से बेहतर किस्म का है। लेकिन GI टैग न मिलने के कारण पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश के बासमती चावल में अपने राज्यों का GI टैग लगाकर निर्यात करने का लाभ कमा रहे हैं। इससे मध्य प्रदेश के किसान अपने हक से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खुद के उगाए चावल का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि GI टैग के अभाव में प्रदेश के किसान अपने ही उगाए बासमती चावल का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग की। सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल का GI टैग स्वीकृत करवाया था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2016 में इसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आज देश के केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, इसके बावजूद प्रदेश को बासमती चावल के लिए GI टैग नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश को बासमती चावल का GI टैग मिल जाता है तो राज्य से करीब 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है। इससे प्रदेश के किसानों को अपनी उपज की बेहतर पहचान और उसका उचित लाभ मिल सकेगा। श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के पास 77 GI टैग हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर एक ही दिन में 21 GI टैग दिए गए। वहीं मध्य प्रदेश को उसके बासमती चावल के लिए GI टैग से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, लेकिन उन्होंने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के हित में इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र में उत्पादित होता है, जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री चुनाव जीतकर आते हैं। किसान संवाद के दौरान रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर, मंदसौर सहित विभिन्न जिलों से आए बासमती धान उत्पादक किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। किसानों ने पूसा बासमती धान की पहचान, उत्पादन, उचित मूल्य और निर्यात से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। किसान नेता केदार सिरोही, प्रतीक शर्मा (गाडरवारा), परमजीत सिंह, मुकेश शर्मा सहित अन्य किसान प्रतिनिधियों ने दिग्विजय सिंह के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखे। संवाद का उद्देश्य बासमती उत्पादक किसानों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को साझा मंच पर उठाना रहा। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, सिलवानी विधायक देवेंद्र पटेल, पूर्व विधायक सुनीता पटेल, गाडरवारा के पूर्व विधायक भगवान सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में बासमती उत्पादक किसान उपस्थित रहे। प्रति, माननीय संपादक महोदय, सादर प्रकाशनार्थ। द्वारा समस्त बासमती उत्पादक किसान नर्मदांचल, मध्यप्रदेश
- विधायक रामेश्वर शर्मा ने औवेसी को दिया कड़ा जवाब,ओवैसी बैरिस्टर हो तो बदतमीज़ी की भाषा छोड़ दो *विधायक रामेश्वर शर्मा ने औवेसी को दिया कड़ा जवाब* *विधायक रामेश्वर शर्मा का औवेसी पर तीखा पलटवार* रामेश्वर शर्मा बोले - ओवैसी बैरिस्टर हो तो बदतमीज़ी की भाषा छोड़ दो। मैं तो भारत मैं रहने वाले हिजड़ों का सम्मान करता हूँ, उनका भी सम्मान है हमारी नजरों में तुम बदतमीजी की भाषा बोलोगे तो मैं पूछता हूँ कि औवेसी क्या तुम हिजड़े की संतान हो हमारे वैज्ञानिकों ने जो मिसाइल तैयार की, उसे भारत की सेना ने ऑपरेशन सिंदूर में तुम्हारे अब्बा के घर गिराकर बता दी जब मिसाइल इस्लामाबाद में गिरी तो वहां आतंकवादी और इस्लामिक कट्टरपंथी रो रहे थे और यहां तुम जैसे नए-नए जिन्ना रो रहे हैं, छाती पीट रहे हैं। मिसाइल चलती थी, मिसाइल चलती रहेगी। जहाँ-जहाँ आतंकवाद के कैंप रहेंगे, जहाँ-जहाँ भारत विरोधी कैंप रहेंगे, वहाँ भारत की मिसाइल तैयार है। मैं कल भी अपने बयान पर कायम था, आज भी हूँ। ओवैसी, तुम पूरा भाषण सुनो और तुम तो वकील हो, कोर्ट ले जाओ। *UCC पर बोले रामेश्वर शर्मा -* हर दल हिंदुओं की वोट लेना चाहता है तो फिर हिंदू कानून क्या बुरा है? हिंदू कानून क्या बुरा है? ये 5 बीवी, 25 बच्चे की फैक्ट्री बंद होगी। भारत के गृह मंत्री अमित शाह जी की घोषणा है, 2029 तक 21 प्रांतों में UCC लागू हो जाएगा। मध्य प्रदेश में लागू हो गया है। अब तुम छाती पीटो या इस्लामाबाद से अपने तार जोड़ो, UCC लागू होगा और बाबा साहेब अंबेडकर की भावना के अनुसार ही होगा।3
- प्रेस विज्ञप्ति *MP का बासमती बेहतर फिर भी GI टैग से वंचित, दूसरे राज्यों के व्यापारी उठा रहे फायदा: दिग्विजय सिंह* *मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग, उदयपुरा में गैर-दलीय बासमती उत्पादक किसान संवाद में किसानों ने रखीं समस्याएं* दिनांक: 15 सितंबर, 2026 उदयपुरा, रायसेन। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह प्रदेश में उत्पादित बासमती चावल को GI टैग (Geographical Indication) दिए जाने की मांग को लेकर लगातार आवाज उठा रहे हैं। पूर्व सीएम ने मंगलवार को रायसेन के उदयपुरा स्थित उदय पैलेस में गैर-दलीय पूसा बासमती धान उत्पादक किसानों से संवाद किया और उनकी समस्याओं एवं सुझावों को सुना। साथ ही मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग देने की मांग दोहराई। दिग्विजय सिंह ने इस दौरान कहा कि मध्य प्रदेश में हर साल करीब 27 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा बासमती चावल का उत्पादन होता है। यहां का बासमती चावल अन्य राज्यों से बेहतर किस्म का है। लेकिन GI टैग न मिलने के कारण पंजाब और अन्य राज्यों के व्यापारी मध्य प्रदेश के बासमती चावल में अपने राज्यों का GI टैग लगाकर निर्यात करने का लाभ कमा रहे हैं। इससे मध्य प्रदेश के किसान अपने हक से वंचित हो रहे हैं और उन्हें खुद के उगाए चावल का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। सिंह ने केंद्र सरकार पर मध्य प्रदेश के किसानों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाते हुए कहा कि GI टैग के अभाव में प्रदेश के किसान अपने ही उगाए बासमती चावल का पूरा लाभ नहीं ले पा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से मध्य प्रदेश के बासमती चावल को तत्काल GI टैग देने की मांग की। सिंह ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2013 में तत्कालीन कृषि मंत्री शरद पवार से मुलाकात कर मध्य प्रदेश के बासमती चावल का GI टैग स्वीकृत करवाया था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद वर्ष 2016 में इसे निरस्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आज देश के केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, इसके बावजूद प्रदेश को बासमती चावल के लिए GI टैग नहीं दिया गया। उन्होंने कहा कि यदि मध्य प्रदेश को बासमती चावल का GI टैग मिल जाता है तो राज्य से करीब 40 फीसदी बासमती चावल का निर्यात किया जा सकता है। इससे प्रदेश के किसानों को अपनी उपज की बेहतर पहचान और उसका उचित लाभ मिल सकेगा। श्री सिंह ने कहा कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश जैसे राज्य के पास 77 GI टैग हैं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर एक ही दिन में 21 GI टैग दिए गए। वहीं मध्य प्रदेश को उसके बासमती चावल के लिए GI टैग से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने बताया कि इस संबंध में वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भी लिख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि यह भी दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्रीय कृषि मंत्री मध्य प्रदेश से हैं, लेकिन उन्होंने प्रदेश के बासमती उत्पादक किसानों के हित में इस दिशा में कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश के बासमती चावल का बड़ा हिस्सा उसी क्षेत्र में उत्पादित होता है, जहां से केंद्रीय कृषि मंत्री चुनाव जीतकर आते हैं। किसान संवाद के दौरान रायसेन, नर्मदापुरम, सीहोर, नरसिंहपुर, मंदसौर सहित विभिन्न जिलों से आए बासमती धान उत्पादक किसानों ने अपनी समस्याएं और सुझाव रखे। किसानों ने पूसा बासमती धान की पहचान, उत्पादन, उचित मूल्य और निर्यात से जुड़े विषयों पर चर्चा की तथा मध्य प्रदेश के बासमती चावल को GI टैग दिलाने की मांग को प्रमुखता से उठाया। किसान नेता केदार सिरोही, प्रतीक शर्मा (गाडरवारा), परमजीत सिंह, मुकेश शर्मा सहित अन्य किसान प्रतिनिधियों ने दिग्विजय सिंह के समक्ष अपने विचार और सुझाव रखे। संवाद का उद्देश्य बासमती उत्पादक किसानों की समस्याओं और उनके हितों से जुड़े मुद्दों को साझा मंच पर उठाना रहा। कार्यक्रम में पूर्व सांसद रामेश्वर नीखरा, सिलवानी विधायक देवेंद्र पटेल, पूर्व विधायक सुनीता पटेल, गाडरवारा के पूर्व विधायक भगवान सिंह राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में बासमती उत्पादक किसान उपस्थित रहे। प्रति, माननीय संपादक महोदय, सादर प्रकाशनार्थ। द्वारा समस्त बासमती उत्पादक किसान नर्मदांचल, मध्यप्रदेश1
- डॉ कोमल शर्मा साईं कृति ने अपना जन्मदिवस गौ माताओं की सेवा करके मनाया4
- हमारी सरकार सदैव नवाचारी विचारों और कार्यों को आगे बढ़ाने में साथ है... प्रदेश में अब फ्लाई-ऐश आधारित सीमेंट से सड़कें बनाई जाएंगी। इसके लिए अभियंता दिवस पर आज भोपाल में आयोजित कार्यक्रम में लोक निर्माण विभाग और CSIR-AMPRI के मध्य महत्वपूर्ण MoU हुआ। प्रदेश में बनने वाले सरकारी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग टेक्नोलॉजी पर आधारित होंगे। सड़क निर्माण में आधुनिक तकनीक एवं रोड सेफ्टी के लिए विशेषज्ञों के सुझाव भी लिए जा रहे हैं। इस अवसर पर PWD के अभियंताओं को विभिन्न श्रेणियों में पुरस्कार1
- भोपाल में UCC विरोध सभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप और मिसाइल वाले बयान पर तीखा पलटवार किया। भोपाल में UCC विरोध सभा के दौरान असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप और मिसाइल वाले बयान पर तीखा पलटवार किया। ओवैसी ने मंच से रामेश्वर शर्मा को चुनौती देते हुए कहा कि अगर हिम्मत है तो काजी कैंप आकर मिसाइल लॉन्च करके दिखाएं। #AsaduddinOwaisi #Owaisi #UCC #Bhopal #RameshwarSharma #QaziCamp #MPNews #BhopalNews #ViralNews1
- भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में भोपाल में कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में प्रदेश के परिवहन, शिक्षा, युवाओं, किसानों और भू-स्वामियों से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के फैसलों की जानकारी स्वास्थ्य राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने दी। 25 सितंबर से मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा शुरू करने का फैसला लिया गया है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर 25 सितंबर से इंदौर में इसकी शुरुआत होगी। योजना के तहत प्रदेश में 150 सिटी और 436 अंतरनगरीय रूट विकसित किए जाएंगे। आगे इस सेवा का विस्तार विकासखंड स्तर तक किया जाएगा। 7,500 से ज्यादा मेधावी छात्रों को ई-स्कूटी मेधावी विद्यार्थियों को भी सरकार की ओर से बड़ी सौगात दी जाएगी। 19 सितंबर को भोपाल के सुभाष उत्कृष्ट विद्यालय से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 7,500 से अधिक विद्यार्थियों को ई-स्कूटी वितरित करेंगे। योजना का लाभ 12वीं कक्षा में प्रथम प्रयास में 70 प्रतिशत अंक प्राप्त कर अपने स्कूल में प्रथम स्थान हासिल करने वाले नियमित विद्यार्थियों को मिलेगा। 17 सितंबर से स्वामित्व योजना का आगाज प्रदेश में स्वामित्व योजना की शुरुआत भी 17 सितंबर से इंदौर से होगी। इसके लिए करीब 68 लाख अभिलेख तैयार किए जा चुके हैं। निजी समितियों का पंजीयन निःशुल्क किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे संपत्ति विवादों में कमी आएगी और लोगों को संपत्ति के आधार पर बैंक से ऋण लेने में भी आसानी होगी। चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना को मंजूरी कैबिनेट ने चंदेरी माइक्रो सिंचाई परियोजना को जारी रखने की अनुमति भी दी है। वहीं स्कूल शिक्षा विभाग के तहत अनूपपुर और शहडोल में नए पदों के सृजन को भी मंजूरी दी गई है। दुबई दौरे से 53 हजार करोड़ के निवेश प्रस्ताव बैठक में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के हालिया दुबई दौरे से प्रदेश को मिले 53 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों की भी जानकारी दी गई। सरकार का कहना है कि इन निवेश प्रस्तावों से प्रदेश में रोजगार और औद्योगिक विकास को गति मिलेगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकसेवक के रूप में 25 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी शामिल होंगे। बाइट- नरेंद्र शिवाजी पटेल, स्वास्थ्य राज्य मंत्री, मध्य प्रदेश4
- kahan se milaunga Resham ki Sadi yah motor yah Banna nahin le sakunga welcome to Mohabbat Ras Na Aayi Shayar Gangadhar Malajpure1
- institute of industries में अभियंता दिवस धूमधाम से मनाया गया एवं सम्मान समारोह और किताब का विवेचन किया गया4