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बांसखेड़ा में बंद घर से मिला महिला का शव, दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को हुआ शक
MOHD ARIF
बांसखेड़ा में बंद घर से मिला महिला का शव, दुर्गंध आने पर पड़ोसियों को हुआ शक
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- बहगुल-नदी का पुल फिर डूबा, दर्जनों गांवों का रास्ता बंदः भुता-बिथरी मार्ग पर धरने के 15 दिन बाद भी नहीं सुधरा पुल, 4 फीट पानी से आवागमन ठप बरेली के सिंघाई मुराबान और केसरपुर के बीच बहगुल नदी पर बना पुल फिर पानी में डूब गया है। तीन दिन की लगातार बारिश के बाद इस साल दूसरी बार पुल के ऊपर से करीब चार फीट पानी बह रहा है, जिससे सड़क पर आना-जाना बंद हो गया है। रास्ता बंद होने से छात्रों और ग्रामीणों को 20 किलोमीटर ज्यादा चलना पड़ रहा है। करीब 15 दिन पहले ग्रामीणों ने पुल ठीक करने की मांग पर धरना दिया था। सदर तहसीलदार के भरोसे के बाद धरना खत्म हुआ, पर पुल की हालत वैसी ही बनी हुई है। ग्रामीणों ने जल्दी ही पुल में निर्माण कार्य अथवा सुधार कार्य शुरू न होने की दशा में विशाल धरना प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है। ग्रामीणों का आरोप है कि वादे के बाद भी कोई काम नहीं हुआ। ग्राम प्रधान अरुण पटेल, लेखपाल शिव शंकर और बजरंग सेना के जिला अध्यक्ष सत्यवीर पटेल समेत लोगों ने सरकार से पुल को जल्द दोबारा बनाने की मांग की है, ताकि अगली बारिश में रास्ता फिर बंद न हो।1
- लगातार बारिश और बाढ़ के पानी से धान की फसल चौपट, किसानों की सालभर की मेहनत पर फिरा पानी बसेगा मार्ग के आसपास खेतों में जलभराव से धान की फसल गिरी, किसानों ने प्रशासन से मुआवजे की मांग की बरेली। बरेली जनपद के नवाबगंज विकासखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत टाहा प्यारी नवादा में लगातार बारिश और बाढ़ के पानी से किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गांव से बसेगा जाने वाले मार्ग के आसपास खेतों में जलभराव होने से धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। बारिश और बाढ़ के पानी में डूबने से फसल खराब होकर नष्ट हो रही है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। प्रभावित किसानों ने प्रशासन से फसल नुकसान का सर्वे कराकर उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है। ग्राम पंचायत टाहा प्यारी नवादा निवासी रामपाल समेत ग्रामीण किसानों ने बताया कि क्षेत्र में लगातार बारिश होने और बाढ़ का पानी खेतों में पहुंचने से जलभराव की स्थिति बन गई है। खेतों में पानी जमा होने के कारण धान की खड़ी फसल जमीन पर गिर गई है। लगातार पानी भरा रहने से फसल खराब होकर नष्ट हो रही है। कई खेतों में धान की फसल बुरी तरह प्रभावित हुई है। इससे किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। फसल बर्बाद होने से किसानों की बढ़ी चिंता किसानों का कहना है कि धान की फसल तैयार होने के समय लगातार बारिश और बाढ़ के पानी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। फसल की बुवाई से लेकर देखभाल तक किसानों ने काफी मेहनत और खर्च किया था, लेकिन खेतों में पानी भरने से पूरी फसल बर्बाद होने की स्थिति में पहुंच गई है। इससे किसानों को परिवार के भरण-पोषण और अगली फसल की तैयारी की चिंता सताने लगी है। प्रशासन से सर्वे और मुआवजे की मांग ग्रामीण किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित खेतों का मौके पर निरीक्षण कराकर बारिश और बाढ़ से हुए फसल नुकसान का आकलन किया जाए। साथ ही शासन के नियमानुसार प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाया जाए, जिससे उन्हें आर्थिक राहत मिल सके। किसानों ने खेतों से पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था कराने की भी मांग की है, ताकि भविष्य में बारिश और बाढ़ के पानी से फसलों को होने वाले नुकसान से बचाया जा सके।1
- जंगल से लकड़ी बाहर ले जाने का वीडियो वायरल, वन विभाग की निगरानी पत्र सवाल जंगल से लकड़ी बाहर ले जाने का वीडियो वायरल, वन विभाग की निगरानी पत्र सवाल पीलीभीत टाइगर रिजर्व में लगातार वन्यजीवों और इंसानों के बीच संघर्ष की घटनाएं सामने आ रही हैं। इसी बीच दियोरिया रेंज से कथित तौर पर जंगल की लकड़ी साइकिलों पर बाहर ले जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो सामने आने के बाद वन विभाग की निगरानी व्यवस्था और जंगल से लकड़ी की निकासी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। हालांकि वीडियो और इससे जुड़े आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वायरल वीडियो में कुछ लोग साइकिलों पर लकड़ी लादकर जंगल से बाहर आते हुए दिखाई दे रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पीलीभीत टाइगर रिजर्व की दियोरिया रेंज का है। मामला इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि टाइगर रिजर्व क्षेत्र में वन्यजीवों की मौजूदगी के बीच जंगल में लोगों की आवाजाही उनकी सुरक्षा के साथ-साथ वन क्षेत्र की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े करती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगर लकड़ी जंगल से बाहर ले जाने की अनुमति नियमों के तहत दी गई थी, तो क्या इसकी विधिवत एंट्री, रिकॉर्ड और निगरानी की गई? और यदि अनुमति नहीं थी, तो बैरियर और निगरानी व्यवस्था से लकड़ी बाहर कैसे पहुंची? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद स्थानीय स्तर पर वन विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। कुछ लोगों की ओर से अधिकारियों की मिलीभगत के आरोप लगाए जा रहे हैं, लेकिन इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब देखने वाली बात होगी कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर पीलीभीत टाइगर रिजर्व और वन विभाग के अधिकारी मौके की जांच कराते हैं या नहीं, लकड़ी ले जाने वालों की पहचान होती है या नहीं और यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है। फिलहाल वायरल वीडियो ने पीलीभीत टाइगर रिजर्व की निगरानी व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब जांच के बाद ही साफ होगा कि जंगल से लकड़ी बाहर ले जाने की अनुमति थी या नियमों का उल्लंघन कर लकड़ी निकाली जा रही थी।3
- बिन्दुखत्ता को राजस्व गाँव बनाने की मांग हुई तेज लालकुआं में जबरदस्त प्रदर्शन1
- मीरगंज के धनेली गांव में पानी की निकासी न होने से हुआ जलभराव, ग्रामीण ने वीडियो सोशल मीडिया पर किया वायरल। बरेली:मीरगंज के धनेली गांव में पानी की निकासी न होने से हुआ जलभराव, ग्रामीण ने वीडियो सोशल मीडिया पर किया वायरल।1
- लगातार बारिश से दो मकानों के हिस्से गिरे पीपल का पेड़ गिरने से रास्ता बाधित। *लगातार बारिश से दो मकानों के हिस्से गिरे* *पीपल का पेड़ गिरने से रास्ता बाधित, खेतों में जलभराव* बीसलपुर। बीसलपुर तहसील क्षेत्र समेत पूरे पीलीभीत जनपद में लगातार हो रही बारिश से जनजीवन प्रभावित होने लगा है। शनिवार को ग्राम हाफिज नगर बन्नाही में बारिश के चलते दो पुराने मकानों के हिस्से गिर गए। गनीमत रही कि दोनों घटनाओं में कोई जनहानि नहीं हुई। गांव निवासी नाथू कश्यप का मकान काफी समय से बंद पड़ा है। नाथू कश्यप गांव से बाहर रहकर काम करते हैं। लगातार बारिश के कारण मकान का करीब आधा हिस्सा और एक दीवार ढह गई। वहीं पड़ोस में गिरजा शंकर के पुश्तैनी मकान का जीना भी बारिश के चलते गिर गया। पुराने कच्चे मकान के बाहर बने हिस्से में एक कमरे की छत का कुछ हिस्सा भी क्षतिग्रस्त होकर गिर गया। मकान में वर्तमान में कोई नहीं रहता था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। उधर, गांव के बाहर मुख्य रास्ते पर बारिश के बीच पीपल का पेड़ गिरने से आवागमन बाधित हो गया। ग्रामीणों ने इसकी सूचना ग्राम प्रधान को दी। लगातार बारिश से गांव के आसपास खेतों में भी पानी भर गया है। इससे धान और गन्ने की फसलों को नुकसान की आशंका बनी हुई है। किसानों ने प्रशासन से जलभराव का जायजा लेकर फसलों को हुए नुकसान का आकलन कराने और आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।2
- बारिश में ढहा कच्चा मकान, परिवार के सिर से छिनी छत गांव फैजनगर भुता। क्षेत्र के गांव फैजनगर में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश के चलते हसन मोहम्मद का कच्चा मकान भरभराकर गिर गया। हादसे के दौरान परिवार के सदस्य बाल-बाल बच गए। मकान गिरने से परिवार के सामने रहने की समस्या खड़ी हो गई है। पीड़ित हसन मोहम्मद के अनुसार, मकान गिरने की सूचना गांव के लेखपाल को दी गई थी। आरोप है कि सूचना के बाद भी लेखपाल मौके पर पहुंचकर नुकसान का जायजा लेने नहीं आए। मकान गिरने से घरेलू सामान के साथ परिवार को आर्थिक नुकसान हुआ है। पीड़ित परिवार ने प्रशासन से मौके पर जांच कराकर नुकसान का आकलन कराने तथा राहत और सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। लगातार बारिश के बीच कच्चे मकान के गिरने से ग्रामीणों में भी चिंता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से क्षेत्र में जर्जर और कच्चे मकानों का सर्वे कराने की मांग की है।... #Bareilly #news..1
- असद नगर में 48 घंटे की लगातार बारिश से सड़कें बदहाल, राहगीरों को हो रही परेशानी असद नगर में लगातार करीब 48 घंटे से हो रही बारिश के बाद सड़क और रास्तों की हालत बेहद खराब हो गई है। कई जगहों पर पानी भरने और कीचड़ जमा होने से राहगीरों को आने-जाने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। दोपहिया वाहन चालकों को भी फिसलन भरे रास्तों से गुजरने में परेशानी हो रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लगातार बारिश के कारण सड़क पर जलभराव और कीचड़ की समस्या बढ़ गई है। लोगों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से सड़क की स्थिति का निरीक्षण कर जलनिकासी एवं रास्ते की व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की है।संवाददाता — आयुष मिश्रा1
- बारिश के बाद सड़क की हालत बदहाल, बुजुर्ग ताऊ गिरकर हुए घायल संवाददाता रवि यादव बारिश के बाद रोड पर कीचड़ और गंदगी भरी पड़ी है, जिससे लोगों को आने-जाने में काफी परेशानी हो रही है। इसी रास्ते पर एक बुजुर्ग ताऊ गिर गए, जिससे उन्हें काफी चोट आई है। ग्रामीणों ने प्रधान से रोड डलवाने की मांग की थी, लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने अधिकारियों से जल्द सड़क की समस्या का समाधान कराने की मांग की है।1