बिहार की राजनीति में सरकारी बंगला विवाद ने अब पूरी तरह से तूल पकड़ लिया है। RJD नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "फोर्स बुलाकर बंगला खाली करवा लो।" राबड़ी का यह बयान सम्राट चौधरी सरकार के लिए एक सीधी चुनौती माना जा रहा है, जिसने पूरे सियासी माहौल को गर्मा दिया है। राबड़ी देवी का यह निडर और आक्रामक रुख दर्शाता है कि वे स्वेच्छा से बंगला खाली करने के मूड में नहीं हैं और सरकार द्वारा किसी भी जबरदस्ती या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है। इस बयान ने सम्राट चौधरी सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है: यदि बल प्रयोग किया जाता है, तो पूर्व मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ महिला नेता के खिलाफ कार्रवाई से सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर छवि खराब होगी, विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार मिलेगा और महिला मतदाताओं में गलत संदेश जाएगा। वहीं, यदि नोटिस वापस लिया जाता है, तो सरकार की कमजोरी उजागर होगी, कानून के राज पर सवाल उठेंगे, और NDA समर्थकों में निराशा फैलेगी। यह बयान RJD की एक सुनियोजित राजनीतिक चाल भी दिखती है, जिसका उद्देश्य महिला नेता के रूप में सहानुभूति हासिल करना, सरकार को उकसाकर कोई गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित करना, राष्ट्रीय मीडिया में बिहार के विपक्ष की आवाज़ बुलंद करना और 2026 के चुनावों से पहले सरकार की नकारात्मक छवि बनाना है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी माँ राबड़ी देवी का समर्थन करते हुए सरकार की इस कार्रवाई को "राजनीतिक द्वेष" से प्रेरित बताया और आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बिहार सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह नियमसम्मत कार्रवाई है, और सरकारी आवास उन्हीं को मिलना चाहिए जो वर्तमान में पात्र हैं, इसमें कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं है। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद बंगला विवाद की घटनाएँ पहले भी देखी गई हैं, जहाँ कई नेताओं को नोटिस मिले और मामले हाईकोर्ट तक भी पहुँचे। लेकिन राबड़ी देवी के इस "फोर्स बुलाकर खाली करवाओ" वाले बयान ने इस विवाद को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया है। आगे तीन मुख्य संभावनाएँ हैं: RJD इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है; सरकार और RJD के बीच पर्दे के पीछे बातचीत से कोई समझौता हो सकता है; या यदि दोनों पक्ष अपनी ज़िद पर अड़े रहे तो यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन सकता है। एक बात तय है कि राबड़ी देवी के इस बयान ने बिहार की सियासत में एक नई आग लगा दी है और 2026 के चुनावों से पहले यह विवाद और भी तेज़ होगा। पूरे बिहार की नज़र अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
बिहार की राजनीति में सरकारी बंगला विवाद ने अब पूरी तरह से तूल पकड़ लिया है। RJD नेता और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को सरकारी आवास खाली करने का नोटिस मिलने के बाद उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, "फोर्स बुलाकर बंगला खाली करवा लो।" राबड़ी का यह बयान सम्राट चौधरी सरकार के लिए एक सीधी चुनौती माना जा रहा है, जिसने पूरे सियासी माहौल को गर्मा दिया है। राबड़ी देवी का यह निडर और आक्रामक रुख दर्शाता है कि वे स्वेच्छा से बंगला खाली करने के मूड में नहीं हैं और सरकार द्वारा किसी भी जबरदस्ती या दबाव के आगे झुकने वाली नहीं हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से की जा रही है। इस बयान ने सम्राट चौधरी सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया है: यदि बल प्रयोग किया जाता है, तो पूर्व मुख्यमंत्री और एक वरिष्ठ महिला नेता के खिलाफ कार्रवाई से सरकार की राष्ट्रीय स्तर पर छवि खराब होगी, विपक्ष को एक बड़ा राजनीतिक हथियार मिलेगा और महिला मतदाताओं में गलत संदेश जाएगा। वहीं, यदि नोटिस वापस लिया जाता है, तो सरकार की कमजोरी उजागर होगी, कानून के राज पर सवाल उठेंगे, और NDA समर्थकों में निराशा फैलेगी। यह बयान RJD की एक सुनियोजित राजनीतिक चाल भी दिखती है, जिसका उद्देश्य महिला नेता के रूप में सहानुभूति हासिल करना, सरकार को उकसाकर कोई गलत कदम उठाने के लिए प्रेरित करना, राष्ट्रीय मीडिया में बिहार के विपक्ष की आवाज़ बुलंद करना और 2026 के चुनावों से पहले सरकार की नकारात्मक छवि बनाना है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने भी अपनी माँ राबड़ी देवी का समर्थन करते हुए सरकार की इस कार्रवाई को "राजनीतिक द्वेष" से प्रेरित बताया और आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष को डराने की कोशिश कर रही है। हालांकि, बिहार सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह नियमसम्मत कार्रवाई है, और सरकारी आवास उन्हीं को मिलना चाहिए जो वर्तमान में पात्र हैं, इसमें कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं है। बिहार में सत्ता परिवर्तन के बाद बंगला विवाद की घटनाएँ पहले भी देखी गई हैं, जहाँ कई नेताओं को नोटिस मिले और मामले हाईकोर्ट तक भी पहुँचे। लेकिन राबड़ी देवी के इस "फोर्स बुलाकर खाली करवाओ" वाले बयान ने इस विवाद को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया है। आगे तीन मुख्य संभावनाएँ हैं: RJD इस मामले को हाईकोर्ट में चुनौती दे सकती है; सरकार और RJD के बीच पर्दे के पीछे बातचीत से कोई समझौता हो सकता है; या यदि दोनों पक्ष अपनी ज़िद पर अड़े रहे तो यह मामला राष्ट्रीय राजनीति का मुद्दा बन सकता है। एक बात तय है कि राबड़ी देवी के इस बयान ने बिहार की सियासत में एक नई आग लगा दी है और 2026 के चुनावों से पहले यह विवाद और भी तेज़ होगा। पूरे बिहार की नज़र अब सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी है।
- सारण जिले के जनता बाजार में पंजाब नेशनल बैंक के सामने स्थित क्लासिक टेलर्स एंड शोरूम, ग्राहकों को बेहतर डिज़ाइन की सुविधाएँ प्रदान करने के लिए एक बार अपनी सेवाएँ आज़माने का अवसर देने का अनुरोध कर रहा है।1
- बिहार के सारण जिले में परसा-सोनपुर रोड पर इस वक्त भारी आंधी और बारिश हो रही है। हवा का झोंका इतना तेज है कि रुकने का नाम नहीं ले रहा, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि गाड़ी भी पलट सकती है। यह वीडियो परसा, सारण के सोनपुर रोड से सामने आया है, जिसमें मौसम की भयावह स्थिति स्पष्ट दिख रही है।3
- मशरख स्थित प्रसिद्ध कौलेश्वर नाथ मंदिर के प्रांगण में 5 बार के विधायक श्री केदार नाथ सिंह पहुंचे हैं। उनकी उपस्थिति में, मंदिर परिसर में 60 फीट के एक घाट का निर्माण कराया जाएगा।1
- भोजपुर जिले के गड़हनी स्थित जन सहकारी डिग्री कॉलेज, बराप को एक स्थायी प्राचार्य मिल गया है। इतिहास विभाग के शिक्षक डॉ. अरविंद कुमार पंकज ने शनिवार को इस पद का कार्यभार संभाला। उनकी नियुक्ति वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय आरा से संबद्ध इस महाविद्यालय की शासी निकाय द्वारा, बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम 1976 (अद्यतन संशोधित 2013) की धारा 57 के प्रावधानों और विश्वविद्यालय चयन समिति की अनुशंसा के आलोक में की गई है। नियुक्ति पत्र मिलने के बाद डॉ. पंकज ने सचिव कार्यालय में अपना योगदान दिया, जहाँ सचिव डॉ. साधना रावत ने योगदान कराया। महाविद्यालय में प्रभारी प्राचार्य जितेंद्र पाण्डेय ने उन्हें पदभार ग्रहण कराया। इस अवसर पर आयोजित योगदान समारोह को प्रभारी प्राचार्य जितेंद्र कुमार पांडेय, रमेश चौबे, डाॅ दिनेश गर्ग, विष्णु शंकर त्रिपाठी, प्रो कौशलेश कुमार, डाॅ ललित सिंह, सज्जाद हैदर, खैरूदीन अंसारी, प्रेम कुमार चौबे सहित महाविद्यालय के अन्य शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों ने संबोधित किया। पदभार ग्रहण करने के उपरांत डॉ. अरविंद कुमार पंकज ने कहा कि महाविद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था को और अधिक मजबूत एवं समृद्ध बनाने के लिए सभी शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों के सहयोग की आवश्यकता होगी। उन्होंने छात्रों के हित में नियमित एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षण व्यवस्था सुनिश्चित करने और सभी शिक्षकों को निर्धारित समय पर कक्षाओं का नियमित संचालन करने का आह्वान किया। इस स्थायी नियुक्ति से महाविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। समारोह में शिक्षक प्रतिनिधि, प्रशासनिक कर्मचारी, छात्र-छात्राएं व अभिभावकगण भी उपस्थित थे।1
- भोजपुर पुलिस को साइबर अपराध के खिलाफ एक बड़ी सफलता मिली है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए साइबर थाना पुलिस ने ऑनलाइन गेमिंग के माध्यम से साइबर फ्रॉड करने वाले एक गिरोह का भंडाफोड़ किया और इस संबंध में 9 अपराधियों को गिरफ्तार किया। पुलिस को सूचना मिली थी कि दक्षिण बिहार ग्रामीण बैंक के कुछ खातों में करोड़ों रुपये का संदिग्ध लेन-देन हो रहा है। जांच के दौरान यह पाया गया कि इन खातों का संबंध विभिन्न राज्यों में दर्ज साइबर फ्रॉड मामलों से है। तकनीकी अनुसंधान और पोर्टल जांच के आधार पर पुलिस टीम ने दानापुर के आर.के. पुरम क्षेत्र में छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान 9 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर भोजपुर साइबर थाना कांड संख्या 40/26 दर्ज कर सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा रहा है। बरामद किए गए सामान में 46 मोबाइल फोन, 7 लैपटॉप, 32 सिम कार्ड, 52 डेबिट/क्रेडिट कार्ड, 19 विभिन्न बैंकों की पासबुक, 1 पेटीएम क्यूआर स्कैनर, 5 आधार कार्ड, 4 पैन कार्ड और 2 वोटर आईडी कार्ड शामिल हैं। गिरफ्तार किए गए प्रमुख आरोपियों में बड़हरा से अभिषेक कुमार उर्फ गोलू कुमार सिंह, उदवंतनगर से विकास कुमार, बिहिया से आकाश सिंह, उदवंतनगर से सत्येन्द्र प्रसाद और उदवंतनगर से प्रमोद कुमार तथा गिरोह के अन्य सदस्य शामिल हैं। भोजपुर पुलिस ने बताया कि साइबर अपराधियों के खिलाफ यह अभियान लगातार जारी रहेगा और आम लोगों से ऑनलाइन लेन-देन के दौरान सतर्क रहने की अपील भी की गई है।1
- भोजपुर जिला प्रशासन ने आज, 30 मई 2026 को जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया के निर्देश पर आरा सदर अंचल में सार्वजनिक भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए एक विशेष अभियान चलाया। यह कार्रवाई आरा सदर अंचल के अंचलाधिकारी के नेतृत्व में की गई। अभियान के दौरान पुलिस लाइन क्षेत्र, जगजीवन कॉलेज परिसर के आसपास और चांदवा मोड़ सहित अन्य सार्वजनिक स्थलों पर किए गए अतिक्रमणों को चिन्हित कर हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान नगर निगम की टीम, प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी उपस्थित रहे। सार्वजनिक स्थलों पर हुए अस्थायी एवं स्थायी अतिक्रमण को जेसीबी मशीन की सहायता से हटाया गया, जिससे सड़क और सार्वजनिक भूमि अतिक्रमण मुक्त हुई। अंचलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक स्थलों पर अतिक्रमण को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, और दोबारा अतिक्रमण करने वालों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का कहना है कि इस अभियान से आमजन के आवागमन में सुविधा सुनिश्चित होगी तथा सड़क जाम एवं दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आएगी। प्रशासन द्वारा आगे भी अतिक्रमण उन्मूलन अभियान लगातार जारी रखा जाएगा।1
- यह तीखी आलोचना की गई है कि मतदाताओं ने मात्र 10 हज़ार रुपये में अपना वोट बेचकर न केवल अपने मतदान के अधिकार का सौदा किया है, बल्कि इसके साथ ही अपने बच्चों के भविष्य को भी अनजाने में बड़े दांव पर लगा दिया है।1
- पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति अत्यंत नाजुक हो चुकी है, जहाँ आज लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी को जान से मारने का प्रयास किया गया।1