रामगढ़ घाटी में एक बड़े हादसे में, लोहे के चक्के लदे एक अनियंत्रित ट्रेलर (नंबर NL 01 AD 7009) ने अचानक ब्रेक फेल होने के कारण सात वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जहां ट्रेलर ने पीछे से आ रही पांच कारों और दो मोटरसाइकिलों को जोरदार टक्कर मारी, जिससे कई वाहनों को भारी नुकसान हुआ। राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, स्थिति को संभाला और क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात व्यवस्था को बहाल किया। कुछ समय के लिए घाटी में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई, लेकिन बाद में दोनों लेन पर परिचालन सामान्य हो गया। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इस दुर्घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने रामगढ़ घाटी में भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की है।
रामगढ़ घाटी में एक बड़े हादसे में, लोहे के चक्के लदे एक अनियंत्रित ट्रेलर (नंबर NL 01 AD 7009) ने अचानक ब्रेक फेल होने के कारण सात वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जहां ट्रेलर ने पीछे से आ रही पांच कारों और दो मोटरसाइकिलों को जोरदार टक्कर मारी, जिससे कई वाहनों को भारी नुकसान हुआ। राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, स्थिति को संभाला और क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात व्यवस्था को बहाल किया। कुछ समय के लिए घाटी में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई, लेकिन बाद में दोनों लेन पर परिचालन सामान्य हो गया। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इस दुर्घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने रामगढ़ घाटी में भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की है।
- हजारीबाग लोकसभा क्षेत्र के सांसद मनीष जायसवाल के कार्यकाल के दो सफल वर्ष पूरे होने पर, एनडीए गठबंधन के विधायकों, नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उन्हें संयुक्त रूप से बधाई दी है। इस अवसर पर पैराडाइज रिसॉर्ट में आयोजित एक विशेष प्रेस-वार्ता के दौरान, नेताओं ने सांसद जायसवाल की उपलब्धियों की जमकर सराहना की। इस कार्यक्रम में सदर विधानसभा क्षेत्र के भाजपा विधायक प्रदीप प्रसाद, मांडू विधानसभा क्षेत्र के आजसू पार्टी के विधायक निर्मल महतो उर्फ़ तिवारी महतो, हजारीबाग भाजपा जिला अध्यक्ष विवेकानंद सिंह, हजारीबाग आजसू पार्टी के जिला अध्यक्ष परमेश्वर महतो और रामगढ़ भाजपा जिला अध्यक्ष संजीव कुमार बबला सहित कई वरिष्ठ एनडीए नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। सभी उपस्थित नेताओं ने सांसद मनीष जायसवाल के जनहित के सेवा कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा करते हुए उनके कार्यकाल को बेमिसाल बताया। उन्होंने कहा कि सांसद मनीष जायसवाल अपने क्षेत्र के लोगों के बीच निरंतर समय व्यतीत करते हैं और उनके हर सुख-दुख में सहभागी बनते हैं। नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उन्होंने क्षेत्र के विकास, उत्थान और जनता की समस्याओं को लेकर सड़क से लेकर देश के सर्वोच्च सदन तक हमेशा पूरी मुखरता के साथ आवाज बुलंद की है, जो उनकी जन-प्रतिबद्धता का स्पष्ट प्रमाण है।1
- हजारीबाग के सांसद मनीष जायसवाल ने अपने दो साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए इसे उपलब्धियों से भरा और 'बेमिसाल' बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को जिले में तेजी से लागू किया जा रहा है, जिससे विकसित भारत के लक्ष्य को धरातल पर उतारने की दिशा में काम हो रहा है। सांसद ने अपनी संसदीय उपस्थिति 96 प्रतिशत बताई और स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, रोजगार, महिला सशक्तिकरण, पेयजल, ऊर्जा, आवास और साइबर सुरक्षा जैसे विभिन्न मुद्दों पर कुल 211 प्रश्न उठाए। उनके अनुसार, प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा, अटल पेंशन, पीएम निधि, कुसुम, प्रधानमंत्री आवास और पीएम ग्राम सड़क योजना जैसी योजनाओं से बड़ी संख्या में लोगों को लाभ मिला है। इसके अतिरिक्त, बरकाकाना स्टेशन का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत विकास और बरकाकाना-कोडरमा रेल लाइन के दोहरीकरण कार्य का भी उल्लेख किया गया। सांसद निधि कोष से केंद्र की योजनाओं के लिए 196 योजनाओं को दिया गया। हालांकि, सांसद ने यह भी कहा कि कुछ योजनाओं के क्रियान्वयन में राज्य सरकार की कार्यप्रणाली के कारण अपेक्षित गति नहीं मिल सकी है।2
- हजारीबाग में 30 जून 2026 को सिद्धू कान्हू मुर्मू चौक पर आदिवासी समाज द्वारा हूल दिवस बड़े धूमधाम, श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। इस कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिला-पुरुष उपस्थित हुए और सभी ने माल्यार्पण कर महान क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस अवसर पर वक्ताओं ने सिद्धू-कान्हू के संघर्ष, स्वाभिमान और अधिकार की मशाल को आज भी प्रज्वलित बताया। दरअसल, 30 जून 1855 भारतीय इतिहास का वह स्वर्णिम अध्याय है, जब वीर क्रांतिकारी सिद्धू-कान्हू मुर्मू ने अंग्रेजी हुकूमत, जमींदारी शोषण और अन्याय के खिलाफ हूल क्रांति का बिगुल फूंका था। यह जल-जंगल-जमीन, स्वाभिमान, अस्मिता और अधिकारों की रक्षा के लिए आदिवासी समाज की एक ऐतिहासिक हुंकार थी। सिद्धू-कान्हू, भाई चांद-भैरव और बहनें फूलो-झानो के अदम्य साहस, त्याग और बलिदान ने आने वाली पीढ़ियों के लिए संघर्ष और स्वाभिमान की अमिट मिसाल कायम की। यह क्रांति 1857 के सिपाही विद्रोह से दो साल पहले 30 जून 1855 को झारखंड के साहिबगंज जिले के भोगनाडीह गांव में शुरू हुई थी। उस दिन लगभग 400 गांवों से 50,000 से अधिक आदिवासी इकट्ठा हुए थे, जहां सिद्धू-कान्हू ने अंग्रेजों के खिलाफ 'हूल' (विद्रोह) का बिगुल फूंका था। इस आंदोलन का प्रसिद्ध नारा "करो या मरो, अंग्रेजों हमारी माटी छोड़ो" इतिहास में अमर है। अंग्रेजों और उनके चाटुकार जमींदारों द्वारा आदिवासियों की जल, जंगल और जमीन पर कब्जे, अत्यधिक लगान, कर्ज के जाल और पुलिस-कचहरी द्वारा शासकों का साथ देने के कारण यह विद्रोह बेहद हिंसक और व्यापक था। इस लड़ाई में पारंपरिक हथियारों से लैस लगभग 20,000 आदिवासियों ने अपनी मातृभूमि के लिए शहादत दी, जिसके परिणामस्वरूप अंग्रेजों को आदिवासियों की शक्ति का एहसास हुआ और उन्हें पीछे हटना पड़ा। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि अपर समाहर्ता (चाईबासा) किस्टो कुमार बेसरा ने कहा कि महापुरुषों के संघर्ष से सीख लेकर समाज को आगे बढ़ाना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक समाज उनके दिखाए मार्ग पर चलकर शिक्षा, अधिकार और एकता के लिए काम नहीं करेगा, तब तक श्रद्धांजलि अधूरी रहेगी, और यह क्रांति अन्याय के खिलाफ खड़े होने तथा अधिकारों के लिए संगठित होकर संघर्ष करने की सीख देती है। आदिवासी सरना समिति के अध्यक्ष महेंद्र बेक ने कहा कि हूल दिवस आत्ममंथन और संकल्प का अवसर है, तथा संगठन, संस्कृति और संघर्ष ही समाज की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने युवाओं से अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित रखने का आह्वान किया। आदिवासी समाज के संयोजक रमेश कुमार हेम्ब्रोम ने बताया कि महापुरुषों का सपना अभी पूरी तरह साकार नहीं हुआ है। उन्होंने सरकार से महापुरुषों के वंशजों को गोद लेने और एस.पी.टी. एवं सी.एन.टी एक्ट को सख्ती से लागू करने की मांग की। पवन तिग्गा ने कहा कि सिद्धू-कान्हू का संघर्ष आज भी प्रासंगिक है, और जल, जंगल, जमीन के संरक्षण के लिए निरंतर संघर्ष तथा एकजुटता, जागरूकता बेहद जरूरी है। इस मौके पर आदिवासी सरना समिति के सचिव सुनिल लकड़ा, सुशील ओड़िया, महालाल हंसदा, मुखिया संझली मुर्मू, पूर्व मुखिया महादेव सोरेन, रवि लिंडा, पाहन बंधन टोप्पो, बंधन एक्का, निरज कुमार बेसरा, शिवजी टुडू, पप्पू एक्का, प्रदीप बेदिया, ललीता सोरेन, प्रतिमा सोरेन, मुखिया दयामनी टोप्पो, संजय टोप्पो, प्रमिला मुर्मू, अम्बिका टोप्पो, प्रदीप मुर्मू, सुधीर बासके, जगन कच्छप, आनन्द बासके, रघु हंसदा, कैलाश किस्कू, सुनील सोरेन, रिना सोरेन, बगुन सोरेन, मनी टोप्पो, सोहन किस्कू, प्रदीप कुमार मांझी, सोनी टोप्पो, अनामिका तिर्की, रीना तिर्की, रीना सोरेन, पप्पू एक्का, वीरेंद्र महली, बसंत सोरेन सहित आदिवासी समाज के हजारों महिला-पुरुष उपस्थित रहे। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह श्रद्धा, गर्व और एकता से ओतप्रोत रहा, जिसने एक बार फिर संदेश दिया कि सिद्धू-कान्हू और अन्य वीर शहीदों का संघर्ष आज भी समाज को अपने अधिकारों, अस्मिता और सम्मान की रक्षा के लिए एकजुट होने को प्रेरित करता है।1
- भारतीय सेना के हवलदार वीर अब्दुल हमीद को उनकी 93वीं जयंती के अवसर पर कोटि-कोटि नमन किया जा रहा है। देश उनकी शहादत को कभी नहीं भूल पाएगा, क्योंकि उन्होंने मात्र 32 साल की उम्र में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। वीर अब्दुल हमीद ने वर्ष 1965 के भारत-पाक युद्ध के समय अद्भुत शौर्य का प्रदर्शन किया था। उन्होंने अमेरिका के पेटेंट टैंकों को जिस कदर उड़ा दिया था, उसकी गाथा सुनकर पूरी दुनिया ने दाँतों तले अपनी उंगलियां दबा ली थीं। दर्जी का यह बेटा, जो सीना जानता था, दुश्मन के टैंकों को फाड़ना भी बखूबी जानता था।1
- रामगढ़ घाटी में एक बड़े हादसे में, लोहे के चक्के लदे एक अनियंत्रित ट्रेलर (नंबर NL 01 AD 7009) ने अचानक ब्रेक फेल होने के कारण सात वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। इस घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई, जहां ट्रेलर ने पीछे से आ रही पांच कारों और दो मोटरसाइकिलों को जोरदार टक्कर मारी, जिससे कई वाहनों को भारी नुकसान हुआ। राहत की बात यह रही कि इस दुर्घटना में किसी के गंभीर रूप से घायल होने की सूचना नहीं है, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं जिन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा गया। सूचना मिलते ही पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, स्थिति को संभाला और क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटाकर यातायात व्यवस्था को बहाल किया। कुछ समय के लिए घाटी में वाहनों की आवाजाही प्रभावित हुई, लेकिन बाद में दोनों लेन पर परिचालन सामान्य हो गया। फिलहाल, पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है ताकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके। इस दुर्घटना के बाद, स्थानीय लोगों ने रामगढ़ घाटी में भारी वाहनों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी अपनी चिंता व्यक्त की है।1