सिमडेगा में सर्व धर्म सम्मेलन भव्यता के साथ हुआ संपन्न सिमडेगा:- जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल, सिमडेगा के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन का भव्य आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि धर्मगुरुओं, शिक्षकगणों एवं विद्वद्जनों ने मानव जीवन में धर्म के सैद्धांतिक तथा प्रायोगिक पक्षों के महत्व पर सारगर्भित प्रकाश डाला। सभी अतिथियों द्वारा समवेत रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विद्यालय के प्रतिभाशाली बच्चों ने “दीपो ज्योति परम् ज्योति” गाकर मंगलाचरण प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। उपायुक्त महोदया कंचन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सभी धर्मग्रंथों में अहिंसा, सत्य, समन्वय एवं भाईचारे का ही संदेश निहित है। यदि हम इन शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार लें, तो समाज में शांति और सौहार्द स्थापित हो सकता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति “पर हित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई” को आत्मसात करने का संदेश दिया। विद्यालय के प्रबंधक राहुल प्रसाद जी ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों का अभिनंदन किया और कहा कि पूजा-पद्धतियों में भिन्नता हो सकती है, किन्तु धर्म का मूल भाव एक ही है। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि धर्म पंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। वैदिक परंपरा के प्रतिनिधि नारायण दास जी, इस्लाम परंपरा से मौलाना शाकिब अहमद, जैन परंपरा से गुरुमा वसुंधरा जी, शिक्षाविद् शंभू जी, गायत्री परिवार से प्रज्ञा कुमारी, आनंदमार्ग के प्रतिनिधि तथा अन्य वक्ताओं ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रभा केरकेट्टा ने मानसिक एवं भावनात्मक विकास के लिए योग, प्रभु भक्ति एवं सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अध्यक्ष आचार्य पद्मराज स्वामी जी महाराज ने अपने समन्वयात्मक उद्बोधन में कहा कि धर्म एक मंजिल है और विभिन्न धर्म उसके मार्ग हैं। उन्होंने प्रेम, अहिंसा एवं अनेकांतवाद की व्याख्या करते हुए समाज में समरसता का संदेश दिया। इस अवसर पर विद्यालय की स्मारिका “स्वर्णिम पथ” तथा आचार्य पद्मराज स्वामी जी द्वारा लिखित ग्रंथ “प्राकृत व्याकरण” का लोकार्पण किया गया। साथ ही गुरुमा वसुंधरा जी के नवीन भजन “रामह स्तुति” का विमोचन एवं मंचन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज में विशिष्ट योगदान देने वाले प्रेरक व्यक्तित्वों को चादर एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सफल आयोजन में विद्यालय के SMC सदस्यों, विद्या वनस्थली शिक्षा समिति के सदस्यों, समस्त शिक्षकगणों एवं सहयोगी कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन प्रिंस जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अध्यापिका लक्ष्मी जी द्वारा प्रस्तुत किया गया। मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। “धर्म का सार मानवता है” — इसी संदेश के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ।
सिमडेगा में सर्व धर्म सम्मेलन भव्यता के साथ हुआ संपन्न सिमडेगा:- जूनियर कैम्ब्रिज स्कूल, सिमडेगा के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित सर्व धर्म सम्मेलन का भव्य आयोजन सफलता पूर्वक सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम में विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि धर्मगुरुओं, शिक्षकगणों एवं विद्वद्जनों ने मानव जीवन में धर्म के सैद्धांतिक तथा प्रायोगिक पक्षों के महत्व पर सारगर्भित प्रकाश डाला। सभी अतिथियों द्वारा समवेत रूप से दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। विद्यालय के प्रतिभाशाली बच्चों ने “दीपो ज्योति परम् ज्योति” गाकर मंगलाचरण प्रस्तुत किया, जिससे पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो उठा। उपायुक्त महोदया कंचन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि सभी धर्मग्रंथों में अहिंसा, सत्य, समन्वय एवं भाईचारे का ही संदेश निहित है। यदि हम इन शिक्षाओं को अपने जीवन में उतार लें, तो समाज में शांति और सौहार्द स्थापित हो सकता है। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की पंक्ति “पर हित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधमाई” को आत्मसात करने का संदेश दिया। विद्यालय के प्रबंधक राहुल प्रसाद जी ने स्वागत भाषण देते हुए सभी अतिथियों का अभिनंदन किया और कहा कि पूजा-पद्धतियों में भिन्नता हो सकती है, किन्तु धर्म का मूल भाव एक ही है। विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि धर्म पंथ नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला है। वैदिक परंपरा के प्रतिनिधि नारायण दास जी, इस्लाम परंपरा से मौलाना शाकिब अहमद, जैन परंपरा से गुरुमा वसुंधरा जी, शिक्षाविद् शंभू जी, गायत्री परिवार से प्रज्ञा कुमारी, आनंदमार्ग के प्रतिनिधि तथा अन्य वक्ताओं ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किए। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका प्रभा केरकेट्टा ने मानसिक एवं भावनात्मक विकास के लिए योग, प्रभु भक्ति एवं सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के मुख्य अध्यक्ष आचार्य पद्मराज स्वामी जी महाराज ने अपने समन्वयात्मक उद्बोधन में कहा कि धर्म एक मंजिल है और विभिन्न धर्म उसके मार्ग हैं। उन्होंने प्रेम, अहिंसा एवं अनेकांतवाद की व्याख्या करते हुए समाज में समरसता का संदेश दिया। इस अवसर पर विद्यालय की स्मारिका “स्वर्णिम पथ” तथा आचार्य पद्मराज स्वामी जी द्वारा लिखित ग्रंथ “प्राकृत व्याकरण” का लोकार्पण किया गया। साथ ही गुरुमा वसुंधरा जी के नवीन भजन “रामह स्तुति” का विमोचन एवं मंचन भी किया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज में विशिष्ट योगदान देने वाले प्रेरक व्यक्तित्वों को चादर एवं प्रतीक चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस सफल आयोजन में विद्यालय के SMC सदस्यों, विद्या वनस्थली शिक्षा समिति के सदस्यों, समस्त शिक्षकगणों एवं सहयोगी कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा। कार्यक्रम का सफल मंच संचालन प्रिंस जी ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन अध्यापिका लक्ष्मी जी द्वारा प्रस्तुत किया गया। मंगलपाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। “धर्म का सार मानवता है” — इसी संदेश के साथ सम्मेलन संपन्न हुआ।
- जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा का ओजस्वी संबोधन: "परमेश्वर की सेवा और समाज का उत्थान ही तुम्हारा लक्ष्य हो" इस ऐतिहासिक अवसर पर विशिष्ट अतिथि जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने मंच से जब हजारों बच्चों को संबोधित किया, तो उनकी आवाज में एक अलग ही जोश और प्रेरणा थी। उन्होंने विस्तार से अपनी बात रखते हुए कहा: "मेरे प्यारे क्रूसवीरों, आज आप सबको यहाँ एक साथ, एक मन और एक विश्वास में देखकर मेरा हृदय गौरव से भर गया है। आप केवल छात्र नहीं हैं, बल्कि आप मसीह के सैनिक हैं। क्रूसवीर होने का अर्थ है—त्याग, सेवा और अटूट विश्वास। आज के इस दौर में जब दुनिया भौतिकता की चकाचौंध में खो रही है, तब आपको अपने नैतिक मूल्यों और मसीही शिक्षाओं को मजबूती से थामे रखना है।1
- शक्ति का संचार (भाव आना): धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान जब भक्ति और मंत्रोच्चार अपने चरम पर होते हैं, तो भक्त के शरीर में देवी की दिव्य ऊर्जा या 'शक्ति' का प्रवेश होता है। इस अवस्था को 'भाव आना' कहा जाता है, जिसमें व्यक्ति अनियंत्रित रूप से झूमने या डोलने लगता है। आध्यात्मिक तल्लीनता: भजन और कीर्तन की लय पर पंडा पूरी तरह से देवी की भक्ति में लीन हो जाते हैं। यह शारीरिक हलचल उनके गहरे ध्यान और समर्पण की अभिव्यक्ति होती है, जहाँ वे बाहरी दुनिया को भूलकर ईश्वर से जुड़ जाते हैं। सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव: नवरात्रि में वातावरण मंत्रों और धूप-दीप से अत्यंत ऊर्जावान होता है। पंडा, जो नौ दिनों तक कड़ा उपवास और साधना करते हैं, इस ऊर्जा के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं, जिससे उनके शरीर में कंपन या झूपना शुरू हो जाता है।1
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- रायगढ़। जिले का ग्राम गेजामुड़ा आज एक 'पुलिस छावनी' में तब्दील हो गया है। जिस जमीन पर किसान कल तक हल चला रहे थे, आज वहां भारी मशीनों का शोर और बूटों की धमक है। प्रशासन और अडानी प्रबंधन ने मिलकर किसानों के कड़े विरोध को दरकिनार करते हुए रेलवे लाइन का काम 'जबरन' शुरू करा दिया है। युवा किसान ऋषि पटेल की गिरफ्तारी महज एक 'बड़े ऑपरेशन' की पहली सीढ़ी थी, जिसकी परिणति आज गांव में भारी पुलिसिया कार्रवाई के रूप में देखने को मिली। कोतरा रोड थाने में वार्ता विफल : 'न्याय' बनाम 'अड़ियल' रवैया - रविवार दोपहर को गेजामुड़ा के हालातों पर चर्चा के लिए एसडीएम, एडिशनल एसपी और पुलिस के आला अधिकारियों ने किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ कोतरा रोड थाने में बैठक की। बंद कमरे में हुई इस वार्ता में किसानों ने दो टूक शब्दों में अपनी मांगें रखीं: उनकी अधिग्रहित जमीन का 100% मुआवजा तत्काल दिया जाए। कल 'सरकारी काम में बाधा' डालने के कथित झूठे आरोप में जेल भेजे गए युवा किसान ऋषि पटेल को ससम्मान रिहा किया जाए। विवाद की जड़ : अडानी प्रबंधन केवल 50% मुआवजा देने की अपनी पुरानी शर्त पर अड़ा रहा। कंपनी के इसी अड़ियल रुख के कारण वार्ता पूरी तरह विफल हो गई। आक्रोशित ग्रामीणों ने बैठक से बाहर निकलते ही साफ कह दिया - "हम मर जाएंगे, लेकिन अपनी पुश्तैनी जमीन कौड़ियों के दाम पर नहीं देंगे।" बाउंसरों की 'प्राइवेट आर्मी' और सरकारी तंत्र का गठबंधन - जैसे ही वार्ता विफल होने की खबर गांव पहुंची, प्रशासन और कंपनी ने अपना असली रंग दिखा दिया। गांव में गाड़ियों में भरकर अडानी के 'निजी बाउंसरों' की फौज उतारी गई। यह दृश्य हैरान करने वाला था - एक तरफ राज्य का संवैधानिक पुलिस बल था, तो दूसरी तरफ एक निजी कंपनी के बाउंसर, जो ग्रामीणों को डराने-धमकाने के लिए तैनात किए गए थे। रायगढ़ प्रशासनिक सहयोग के साथ, भारी मशीनों को खेतों में उतारा गया और रेल लाइन का काम सख्ती से शुरू कर दिया गया। अपने ही गांव में किसान बेबस नजर आए, जबकि कंपनी को 'खुली छूट' दे दी गई। महिलाओं और बुजुर्गों पर बरसी 'सख्ती', दर्जन भर हिरासत में - अपनी आंखों के सामने पुश्तैनी जमीन को छिनते और खेतों को खुदे देख जब ग्रामीण महिलाएं और बुजुर्ग विरोध करने के लिए मशीनों के आगे आए, तो पुलिस ने भारी सख्ती दिखाई। जबरन कार्रवाई : अपना हक मांग रहे दर्जन भर से अधिक ग्रामीणों (जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं) को पुलिस ने घसीटकर गाड़ियों में भरा और हिरासत में ले लिया। दहशत का माहौल : पिछले दो दिनों के घटनाक्रम ने साफ कर दिया है कि जो भी कंपनी के काम में 'दीवार' बनेगा, उसका हश्र ऋषि पटेल जैसा ही होगा। गांव के गली-मोहल्लों में अब केवल पुलिस का पहरा और सन्नाटा है। विकास की कीमत पर अन्नदाता की बलि? - गेजामुड़ा की यह तस्वीर लोकतंत्र के लिए कई गंभीर सवाल छोड़ती है। क्या विकास का रास्ता केवल किसानों की बेबसी से होकर गुजरता है? क्या प्रशासन का दायित्व केवल कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट्स को सुरक्षा देना है, न कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना? फिलहाल, गेजामुड़ा में मशीनों का काम तो शुरू हो गया है, लेकिन ग्रामीणों के मन में पनप रहा यह आक्रोश आने वाले समय में एक बड़े जन-आंदोलन की आहट दे रहा है।2
- सिमडेगा:- जिले के बिंधाईनटोली पारिस में रविवार को बीरू भिखारियेट कैथोलिक सभा का नौवां वार्षिक अधिवेशन धार्मिक वातावरण में संपन्न हुआ।कार्यक्रम की शुरुआत मिस्सा पूजा के साथ हुई, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। अधिवेशन में मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस महिला मोर्चा जिला अध्यक्ष सह जिप सदस्य जोसिमा खाखा उपस्थित रहीं। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस तरह के सम्मेलन समाज को नई दिशा देने का कार्य करते हैं और कैथोलिक सभा में समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की क्षमता है।उन्होंने पुरुषों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि पुरुष केवल परिवार का कमाने वाला सदस्य नहीं, बल्कि संस्कारों का पहला शिक्षक होता है। परिवार की मजबूती से ही समाज मजबूत बनता है। उन्होंने लोगों से आत्ममंथन करते हुए समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने और निभाने की अपील की।जोसिमा खाखा ने शिक्षा, सेवा और जरूरतमंदों की सहायता में आगे आने का आह्वान किया। साथ ही कैथोलिक समाज के लोगों से राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाने की भी बात कही, ताकि समाज की आवाज हर स्तर तक पहुंच सके। कार्यक्रम में डीन फा. हरमन खलखो सहित कई धर्मगुरु एवं गणमान्य लोग उपस्थित रहे। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।1
- जानकारी के अनुसार नाबालिक बालिका 24 फरवरी कि सुबह तक़रीबन 8 बजे अपने घर से दसवीं कि परीक्षा देने के लिए निकली थी,लेकिन आधे रास्ते में क्या होने वाला ये उसे भी नहीं पता था,पूछताछ में पीड़िता ने बताया कि इष्टा राणा नाम के एक व्यक्ति से उसकी दोस्ती फोन के माध्यम से हुई थी। इष्टा राणा ने शादी का झांसा देकर बहला-फुसलाकर अपने साथ ओडिशा भगा कर ले गया, जहां उसने नाबालिग के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाए।पुलिस अधीक्षक के निर्देशन पर गठित टीम ने तकनीकी विश्लेषण और मुखबिरों की सूचना पर पाया कि छात्रा ओडिशा के एक गांव में इष्टा राणा के साथ है। पुलिस की टीम ने तत्काल दबिश देकर पीड़िता को ओड़िसा से बरामद किया और सुपुर्द को सौंप दिया और आरोपी को हिरासत में लेकर जेल भेज दिया है। आरोपी इष्टा राणा के विरुद्ध थाना पत्थलगांव में BNS की धारा 137(2),64(2)(M),65(1) व 4,6 पॉस्को एक्ट के तहत अपराध पंजीबद्ध किया गया है। 🚨जशपुर पुलिस द्वारा शक्त सन्देश महिलाओं एवं नाबालिको के साथ छेड़ छाड़ करने वाले व्यक्ति को बक्सा नहीं जायेगा सूचना मिलते ही तत्काल कड़ी कार्यवाही कि जाएगी।1
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