कन्नौज के सौरिख में मोहर्रम की सात तारीख को हज़रत इमाम हुसैन की याद में अलम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कबीरपुर से शुरू होकर राजापुर पहुंचा, जहां मजलिस का आयोजन हुआ। इसके बाद कबीरपुर, राजापुर और सौरिख की अंजुमनों ने इमामबाड़ा से नौहाख्वानी और मातम करते हुए सी.एस.बी. रोड से सदर बाज़ार होते हुए मोहल्ला ऊंचा सौरिख के दोनों इमामबाड़ों तक यात्रा की। दोनों इमामबाड़ों पर नौहा मातम के बाद, अलम का जुलूस मोहल्ला अधैती, शिखाना और पुजारीवाली गली से होते हुए थाने के सामने से पाल तिराहा पहुंचा, जहाँ फिर से नौहा मातम किया गया। राजापुर और सौरिख के जुलूस अपने-अपने इमामबाड़ों पर पहुँचकर समाप्त हुए। इस अवसर पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य अली अब्बास नकवी ने बताया कि मोहर्रम सिर्फ़ इस्लामी साल का पहला महीना नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार, नाइंसाफ़ी और तमाम बुराइयों के ख़िलाफ़ एक आंदोलन का नाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ दुनिया के अन्य कैलेंडर नए साल में खुशियाँ लाते हैं, वहीं इस्लामी कैलेंडर ग़म का पैग़ाम लेकर आता है। यह ग़म सोए हुए इंसान को झिंझोड़ता है, दिल के ज़ख्मों पर मरहम लगाता है, मजलूमों में उम्मीद जगाता है और ज़ालिम के खिलाफ आवाज़ उठाने का हौसला देता है। नकवी ने बताया कि लगभग चौदह सौ साल पहले, सन इकसठ हिजरी में, कर्बला (इराक) के बियाबान में हज़रत इमाम हुसैन और उनके इकहत्तर साथियों को ज़ालिम यज़ीदी फौजों ने बेदर्दी से शहीद कर दिया था। यज़ीद उस समय का 'सुपर पावर' माना जाता था, जिसकी हुकूमत अरब देशों, इराक, ईरान, सीरिया (शाम राजधानी) और कुछ यूरोपीय देशों के हिस्सों तक फैली थी। यज़ीद जानता था कि इमाम हुसैन का समर्थन मिले बिना वह कामयाब नहीं होगा, इसलिए उसने समर्थन लेने का आदेश दिया। लेकिन इमाम हुसैन अपने इकहत्तर साथियों के साथ उठ खड़े हुए और यज़ीद को उसके नाजायज मकसद में कामयाब नहीं होने दिया। उन्होंने अपनी जान दे दी, पर यज़ीद का समर्थन नहीं किया। आज यज़ीद का नाम कोई लेने वाला नहीं है, जबकि इमाम हुसैन का नाम पूरी दुनिया में लिया जा रहा है, और उन्हीं की याद में यह अलम का जुलूस निकाला जाता है। इस मौके पर मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष अली अब्बास नकवी सहित नाज़िम हुसैन, हुसैन हैदर, रईसुल हसन, दिलदार हुसैन, शब्बर अली, निशात हुसैन, हैदर अब्बास और अनवार हैदर जैसे कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। नगर पंचायत द्वारा साफ-सफाई और जुलूस के रास्तों पर चूना डलवाने की व्यवस्था की गई, जबकि पुलिस प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा इंतज़ाम किए।
कन्नौज के सौरिख में मोहर्रम की सात तारीख को हज़रत इमाम हुसैन की याद में अलम का जुलूस निकाला गया। यह जुलूस कबीरपुर से शुरू होकर राजापुर पहुंचा, जहां मजलिस का आयोजन हुआ। इसके बाद कबीरपुर, राजापुर और सौरिख की अंजुमनों ने इमामबाड़ा से नौहाख्वानी और मातम करते हुए सी.एस.बी. रोड से सदर बाज़ार होते हुए मोहल्ला ऊंचा सौरिख के दोनों इमामबाड़ों तक यात्रा की। दोनों इमामबाड़ों पर नौहा मातम के बाद, अलम का जुलूस मोहल्ला अधैती, शिखाना और पुजारीवाली गली से होते हुए थाने के सामने से पाल तिराहा पहुंचा, जहाँ फिर से नौहा मातम किया गया। राजापुर और सौरिख के जुलूस अपने-अपने इमामबाड़ों पर पहुँचकर समाप्त हुए। इस अवसर पर ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य अली अब्बास नकवी ने बताया कि मोहर्रम सिर्फ़ इस्लामी साल का पहला महीना नहीं है, बल्कि यह भ्रष्टाचार, नाइंसाफ़ी और तमाम बुराइयों के ख़िलाफ़ एक आंदोलन का नाम है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जहाँ दुनिया के अन्य कैलेंडर नए साल में खुशियाँ लाते हैं, वहीं इस्लामी कैलेंडर ग़म का पैग़ाम लेकर आता है। यह ग़म सोए हुए इंसान को झिंझोड़ता है, दिल के ज़ख्मों पर मरहम लगाता है, मजलूमों में उम्मीद जगाता है और ज़ालिम के खिलाफ आवाज़ उठाने का हौसला देता है। नकवी ने
बताया कि लगभग चौदह सौ साल पहले, सन इकसठ हिजरी में, कर्बला (इराक) के बियाबान में हज़रत इमाम हुसैन और उनके इकहत्तर साथियों को ज़ालिम यज़ीदी फौजों ने बेदर्दी से शहीद कर दिया था। यज़ीद उस समय का 'सुपर पावर' माना जाता था, जिसकी हुकूमत अरब देशों, इराक, ईरान, सीरिया (शाम राजधानी) और कुछ यूरोपीय देशों के हिस्सों तक फैली थी। यज़ीद जानता था कि इमाम हुसैन का समर्थन मिले बिना वह कामयाब नहीं होगा, इसलिए उसने समर्थन लेने का आदेश दिया। लेकिन इमाम हुसैन अपने इकहत्तर साथियों के साथ उठ खड़े हुए और यज़ीद को उसके नाजायज मकसद में कामयाब नहीं होने दिया। उन्होंने अपनी जान दे दी, पर यज़ीद का समर्थन नहीं किया। आज यज़ीद का नाम कोई लेने वाला नहीं है, जबकि इमाम हुसैन का नाम पूरी दुनिया में लिया जा रहा है, और उन्हीं की याद में यह अलम का जुलूस निकाला जाता है। इस मौके पर मोहर्रम कमेटी अध्यक्ष अली अब्बास नकवी सहित नाज़िम हुसैन, हुसैन हैदर, रईसुल हसन, दिलदार हुसैन, शब्बर अली, निशात हुसैन, हैदर अब्बास और अनवार हैदर जैसे कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। नगर पंचायत द्वारा साफ-सफाई और जुलूस के रास्तों पर चूना डलवाने की व्यवस्था की गई, जबकि पुलिस प्रशासन ने चाक-चौबंद सुरक्षा इंतज़ाम किए।
- आगरा में बुधवार सुबह से ही आसमान में बादल छाए हुए हैं, जिसके कारण हल्की ठंडी हवा चल रही है।1
- फर्रुखाबाद कोतवाली पुलिस ने चोरी की एक बड़ी घटना का सफलतापूर्वक खुलासा करते हुए एक महिला अभियुक्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने गिरफ्तार महिला के कब्जे से चोरी किए गए दो पीली धातु के कंगन और 6 लाख 36 हजार 150 रुपये नकद बरामद किए हैं। मामले का खुलासा करते हुए क्षेत्राधिकारी नगर ने बताया कि कोतवाली पुलिस द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत हुई जांच और एक मुखबिर की सूचना पर महिला अभियुक्ता को पकड़ा गया था। पूछताछ के दौरान, अभियुक्ता की निशानदेही पर चोरी की गई नकदी और आभूषणों की बरामदगी हुई। बरामदगी के बाद, पुलिस ने आवश्यक विधिक कार्रवाई पूरी करते हुए अभियुक्ता को न्यायालय के समक्ष पेश किया। इस सफल कार्रवाई से पीड़ित पक्ष को बड़ी राहत मिली है, वहीं स्थानीय लोगों ने पुलिस की तत्परता और दक्षता की सराहना की है।1
- मेजर एसडी सिंह इंटर कॉलेज में बालाजी महाराज जी का एक मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर इसी इंटर कॉलेज परिसर के भीतर स्थित है।1
- फर्रुखाबाद में कोतवाली पुलिस ने चोरी के आरोप में एक महिला को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने अभियुक्ता के कब्जे से 02 सोने के कंगन और 6,36,150/- रुपये नकद बरामद किए हैं। इस गिरफ्तारी और बरामदगी के संबंध में क्षेत्राधिकारी नगर ने जानकारी दी।1
- ग्राम पंचायत राजपुरकरना में एक परिवार इन दिनों मोदी सरकार की कॉलोनी के लिए दर-दर भटक रहा है। आवास सुविधा पाने की उम्मीद में यह परिवार लगातार संघर्ष कर रहा है।1
- फर्रुखाबाद के कायमगंज तहसील क्षेत्र में डायरेक्टोरेट जनरल जीएसटी इंटेलिजेंस की टीम ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। टीम ने एक तंबाकू कारोबारी के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की।1
- एक अग्निकांड हादसे के स्थल पर पहुंचे एक कर्मचारी ने फायर डिपार्टमेंट की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसका वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। मौके पर पहुंचकर कर्मचारी ने जो बातें कही हैं, वे आग लगने के बाद भी व्यवस्थाओं में मौजूद भारी कमियों को उजागर करती हैं। इस वायरल वीडियो के सामने आने के बाद लोग लगातार यह सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर इतनी बड़ी घटना के बावजूद व्यवस्थाओं में इतनी कमियां क्यों नजर आईं। अब यह देखना होगा कि क्या जिम्मेदार विभाग इन गंभीर सवालों का जवाब देगा, या यह मामला सिर्फ चर्चा का विषय बनकर रह जाएगा, जैसा कि लोग पूछ रहे हैं।1
- फर्रुखाबाद जिले में यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए चार युवकों ने मंगलवार रात फतेहगढ़ से फर्रुखाबाद मार्ग पर बेहद खतरनाक तरीके से बाइक की सवारी की। इस दौरान एक युवक बाइक के आगे के मडगार्ड पर बैठा था, जबकि तीन अन्य सीट पर सवार थे। युवकों ने करीब 3 किलोमीटर तक यह सफर तय किया, जिसका एक वीडियो भी बनाया जा रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बाइक लगभग 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही थी और मडगार्ड पर बैठे युवक ने कभी एक तो कभी दोनों हाथों से हैंडल पकड़ा हुआ था। बाइक चालक ने हेलमेट भी नहीं पहना था, जिससे सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों और पैदल राहगीरों में दहशत फैल गई। जब स्थानीय लोगों ने मडगार्ड पर बैठे युवक से डर लगने के बारे में पूछा तो बाइक पर सवार एक अन्य युवक ने मज़ाकिया अंदाज़ में जवाब दिया कि वे "माउंटेन ड्यू पीकर आए हैं, डर नहीं लग रहा है।" युवकों ने बताया कि वे फतेहगढ़ स्थित भोलेपुर हनुमान मंदिर में दर्शन करके लौट रहे थे। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि भोलेपुर हनुमान मंदिर से बढ़पुर तक के रास्ते में एक पुलिस चौकी और एक थाना पड़ने के बावजूद युवकों में पुलिस का कोई भय नहीं दिखा और वे बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ते रहे। इस गंभीर मामले पर यातायात प्रभारी सतेंद्र कुमार ने जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सीओ सिटी अभय वर्मा ने भी इसका संज्ञान लेते हुए कहा है कि बाइक सवार युवकों की पहचान की जा रही है और ऐसे यातायात नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी ताकि अन्य युवाओं को भी सबक मिले। यातायात विशेषज्ञों ने इसे सवारों और अन्य सड़क उपयोगकर्ताओं के लिए बड़ा खतरा बताया है, विशेषकर हाईवे और व्यस्त मार्गों पर ऐसी लापरवाही घातक साबित हो सकती है। पुलिस ने स्थानीय लोगों से ऐसी घटनाओं की सूचना तुरंत नियंत्रण कक्ष या नजदीकी थाने में देने की अपील की है और युवाओं से धार्मिक यात्राओं को खतरनाक स्टंट से जोड़कर अपनी और दूसरों की जान को जोखिम में न डालने का आग्रह किया है।2