21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, जिसके तहत मध्य प्रदेश शासन के निर्देश पर जिले-जिले, तहसील-तहसील, नगर-नगर और गांव-गांव में योग कार्यक्रम आयोजित हुए। इन आयोजनों में मंत्री, सांसद, विधायक, स्थानीय निकाय के पदाधिकारी और अधिकारीगण योग मुद्रा में दिखाई दिए, कहीं सूर्य नमस्कार हुआ तो कहीं प्राणायाम के साथ फोटो सेशन भी किए गए। हालांकि, इन कार्यक्रमों के समाप्त होते ही जनता के मन में यह सवाल उठने लगा कि योग से शरीर तो लचीला हुआ, लेकिन सरकारी खर्च का आंकड़ा कितना 'खर्चीला' हो गया। जनता मजाक में पूछ रही है कि योग दिवस पर सबसे कठिन आसन कौन सा था, और कुछ लोगों का जवाब है 'बजटासन' – जिसमें खर्च का आंकड़ा देखकर आम आदमी अपना संतुलन बनाए रखे। जनचर्चाओं के अनुसार, एक घंटे के इन कार्यक्रमों में टेंट, कुर्सी, गद्दे, पानी, कूलर, ध्वनि व्यवस्था, बैनर, नाश्ता और अन्य व्यवस्थाओं पर अच्छा-खासा खर्च हुआ। यदि एक कार्यक्रम पर औसतन एक लाख रुपये का खर्च मान लिया जाए और जिले भर में ऐसे आयोजनों की संख्या जोड़ी जाए, तो कुल खर्च का आंकड़ा रीवा जिले में ही करोड़ों रुपये के आसपास पहुंचता दिखाई देता है। जनता सवाल उठा रही है कि क्या एक घंटे के योग में ज्यादा स्ट्रेचिंग प्रतिभागियों ने की या बजट ने, क्योंकि सरकारी व्यवस्था में ₹100 की वस्तु फाइलों में ₹1000 या उससे कई गुना अधिक मूल्य की हो जाती है। इसमें 18% जीएसटी, निविदा प्रक्रिया, परिवहन, प्रबंधन, समन्वय, निरीक्षण और एक अदृश्य तत्व भी शामिल होता है जिसकी चर्चा हर चौराहे पर होती है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि लोगों ने कैलकुलेटर उठाकर 'खर्च गणना योग' शुरू कर दिया है। जनचर्चा में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि यदि किसी एक जिले में आयोजित विभिन्न योग कार्यक्रमों पर औसतन लगभग 1 करोड़ रुपये तक का खर्च बैठता है, तो मध्य प्रदेश के 55 जिलों का आंकड़ा कितना होगा। गणित के आधार पर यह लगभग 55 करोड़ रुपये तक पहुंचता दिखाई देता है। हालांकि, जनता में यह भी चर्चा है कि वास्तविक भुगतान और बिलिंग की पूरी श्रृंखला को देखा जाए तो यह राशि 55 करोड़ रुपये से कहीं अधिक होकर 100 करोड़ रुपये (एक अरब रुपये) या उससे ऊपर तक पहुंच सकती है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि योग दिवस का वास्तविक संदेश सादगी, स्वास्थ्य और आत्मअनुशासन है, और यदि गांव के स्कूल मैदान या पंचायत भवन में बिना अत्यधिक खर्च के भी कार्यक्रम हो सकते थे, तो इतनी व्यवस्थाओं की आवश्यकता क्यों पड़ी। जनता का सवाल है कि यदि यही राशि खेल मैदानों, अस्पतालों, स्कूलों या स्थायी सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च होती तो उसका लाभ वर्षों तक मिलता। फिलहाल योग दिवस बीत चुका है, फोटो सोशल मीडिया पर आ चुके हैं, प्रमाण पत्र भी मिल गए हैं और समाचार पत्रों में खबरें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। अब जनता अगली बार शायद यह जानना चाहेगी कि योग से कितनी कैलोरी बर्न हुई और आयोजन में कितना बजट खर्च हुआ। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि यदि स्वास्थ्य जागरूकता के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च हुई है, तो क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों के खर्च और परिणामों का सार्वजनिक लेखा-जोखा भी जारी किया जाएगा, क्योंकि योग का एक प्रमुख सिद्धांत 'पारदर्शिता और आत्मनिरीक्षण' भी माना जाता है, और जनता चाहती है कि यह सिद्धांत केवल योग मंच तक सीमित न रहकर खर्च के आंकड़ों में भी दिखाई दे। यह लेख जनचर्चाओं, सार्वजनिक विमर्श और व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग पर उठ रहे सवालों और चर्चाओं को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करना है। किसी भी खर्च या आंकड़े की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक अभिलेखों से ही की जानी चाहिए। जनता पूछ रही है कि 'योग दिवस का महायोग: एक जिले से करोड़, पूरे प्रदेश में कितना हुआ खर्च का प्राणायाम?'
21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पूरे देश में बड़े उत्साह के साथ मनाया गया, जिसके तहत मध्य प्रदेश शासन के निर्देश पर जिले-जिले, तहसील-तहसील, नगर-नगर और गांव-गांव में योग कार्यक्रम आयोजित हुए। इन आयोजनों में मंत्री, सांसद, विधायक, स्थानीय निकाय के पदाधिकारी और अधिकारीगण योग मुद्रा में दिखाई दिए, कहीं सूर्य नमस्कार हुआ तो कहीं प्राणायाम के साथ फोटो सेशन भी किए गए। हालांकि, इन कार्यक्रमों के समाप्त होते ही जनता के मन में यह सवाल उठने लगा कि योग से शरीर तो लचीला हुआ, लेकिन सरकारी खर्च का आंकड़ा कितना 'खर्चीला' हो गया। जनता मजाक में पूछ रही है कि योग दिवस पर सबसे कठिन आसन कौन सा था, और कुछ लोगों का जवाब है 'बजटासन' – जिसमें खर्च का आंकड़ा देखकर आम आदमी अपना संतुलन बनाए रखे। जनचर्चाओं के अनुसार, एक घंटे के इन कार्यक्रमों में टेंट, कुर्सी, गद्दे, पानी, कूलर, ध्वनि व्यवस्था, बैनर, नाश्ता और अन्य व्यवस्थाओं पर अच्छा-खासा खर्च हुआ। यदि एक कार्यक्रम पर औसतन एक लाख रुपये का खर्च मान लिया जाए और जिले भर में ऐसे आयोजनों की संख्या जोड़ी जाए, तो कुल खर्च का आंकड़ा रीवा जिले में ही करोड़ों रुपये के आसपास पहुंचता दिखाई देता है। जनता सवाल उठा रही है कि क्या एक घंटे के योग में ज्यादा स्ट्रेचिंग प्रतिभागियों ने की या बजट ने, क्योंकि सरकारी व्यवस्था में ₹100 की वस्तु फाइलों में ₹1000 या उससे कई गुना अधिक मूल्य की हो जाती है। इसमें 18% जीएसटी, निविदा प्रक्रिया, परिवहन, प्रबंधन, समन्वय, निरीक्षण और एक अदृश्य तत्व भी शामिल होता है जिसकी चर्चा हर चौराहे पर होती है। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के कार्यक्रमों की चर्चा अभी थमी भी नहीं थी कि लोगों ने कैलकुलेटर उठाकर 'खर्च गणना योग' शुरू कर दिया है। जनचर्चा में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि यदि किसी एक जिले में आयोजित विभिन्न योग कार्यक्रमों पर औसतन लगभग 1 करोड़ रुपये तक का खर्च बैठता है, तो मध्य प्रदेश के 55 जिलों का आंकड़ा कितना होगा। गणित के आधार पर यह लगभग 55 करोड़ रुपये तक पहुंचता दिखाई देता है। हालांकि, जनता में यह भी चर्चा है कि वास्तविक भुगतान और बिलिंग की पूरी श्रृंखला को देखा जाए तो यह राशि 55 करोड़ रुपये से कहीं अधिक होकर 100 करोड़ रुपये (एक अरब रुपये) या उससे ऊपर तक पहुंच सकती है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि योग दिवस का वास्तविक संदेश सादगी, स्वास्थ्य और आत्मअनुशासन है, और यदि गांव के स्कूल मैदान या पंचायत भवन में बिना अत्यधिक खर्च के भी कार्यक्रम हो सकते थे, तो इतनी व्यवस्थाओं की आवश्यकता क्यों पड़ी। जनता का सवाल है कि यदि यही राशि खेल मैदानों, अस्पतालों, स्कूलों या स्थायी सार्वजनिक सुविधाओं पर खर्च होती तो उसका लाभ वर्षों तक मिलता। फिलहाल योग दिवस बीत चुका है, फोटो सोशल मीडिया पर आ चुके हैं, प्रमाण पत्र भी मिल गए हैं और समाचार पत्रों में खबरें भी प्रकाशित हो चुकी हैं। अब जनता अगली बार शायद यह जानना चाहेगी कि योग से कितनी कैलोरी बर्न हुई और आयोजन में कितना बजट खर्च हुआ। लोग यह भी जानना चाहते हैं कि यदि स्वास्थ्य जागरूकता के लिए इतनी बड़ी राशि खर्च हुई है, तो क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों के खर्च और परिणामों का सार्वजनिक लेखा-जोखा भी जारी किया जाएगा, क्योंकि योग का एक प्रमुख सिद्धांत 'पारदर्शिता और आत्मनिरीक्षण' भी माना जाता है, और जनता चाहती है कि यह सिद्धांत केवल योग मंच तक सीमित न रहकर खर्च के आंकड़ों में भी दिखाई दे। यह लेख जनचर्चाओं, सार्वजनिक विमर्श और व्यंग्यात्मक अभिव्यक्ति पर आधारित है, जिसका उद्देश्य किसी व्यक्ति, संस्था या विभाग पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग पर उठ रहे सवालों और चर्चाओं को व्यंग्यात्मक शैली में प्रस्तुत करना है। किसी भी खर्च या आंकड़े की पुष्टि संबंधित विभाग के आधिकारिक अभिलेखों से ही की जानी चाहिए। जनता पूछ रही है कि 'योग दिवस का महायोग: एक जिले से करोड़, पूरे प्रदेश में कितना हुआ खर्च का प्राणायाम?'
- उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बेटी को लेकर सोशल मीडिया पर कथित अभद्र टिप्पणी करने के मामले में एक युवक पर कार्रवाई की गई है। इस घटना को लेकर उत्तर प्रदेश एसटीएफ, साइबर क्राइम पुलिस कानपुर कमिश्नरेट और रीवा पुलिस ने संयुक्त अभियान चलाकर आरोपी युवक को गिरफ्तार कर लिया। रीवा जिले के पनवार थाना क्षेत्र के पूर्वा कल्याणपुर गांव निवासी नागेश्वर सिंह बघेल (पिता लालमणि सिंह बघेल) ने अखिलेश यादव की बेटी के संबंध में यह आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। साइबर क्राइम पुलिस कानपुर कमिश्नरेट ने इस मामले का संज्ञान लिया, जिसके बाद उत्तर प्रदेश एसटीएफ की टीम मध्य प्रदेश पहुंची। पनवार थाना प्रभारी प्रवीण उपाध्याय के नेतृत्व में स्थानीय पुलिस ने यूपी एसटीएफ के साथ मिलकर आरोपी नागेश्वर सिंह बघेल को उसके गांव पूर्वा कल्याणपुर से हिरासत में लिया। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद आरोपी को उत्तर प्रदेश एसटीएफ को सौंप दिया गया। आरोपी को आगे की पूछताछ और जांच के लिए उत्तर प्रदेश ले जाया गया है, जहाँ साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच जारी है। पुलिस अधिकारियों ने बताया है कि सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।2
- मध्य प्रदेश के रीवा स्थित पद्मधर कॉलोनी में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लगभग 12 घंटे तक कार्रवाई की। इस कार्रवाई के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं। प्रभावित परिवार ने इस पर गहरी आपत्ति जताते हुए इसे पूरी तरह से एक राजनीतिक साजिश बताया है। खबर में यह भी उल्लेख किया गया है कि कार्रवाई समाप्त होने के बाद जब मीडिया ने टीम से सवाल पूछे, तो ED की टीम ने उन सवालों का कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया और सवालों से बचती नजर आई।1
- रीवा के ईको पार्क में प्रमोद शर्मा और उनके साथ आए लोगों को भीड़ ने दौड़ा दिया, जब वे अपनी नेतागीरी चमकाने वहाँ पहुँचे थे। इस दौरान, जैसे ही नेता जी की नज़र लठ्ठों पर पड़ी, उन्हें तुरंत मौके से भागते हुए देखा गया।1
- महामहिम राष्ट्रपति महोदया जी का जबलपुर प्रवास सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। इस अवसर पर जबलपुर हवाई अड्डे पर उन्हें विदाई दी गई।1
- अमरपाटन के संदीपनी विद्यालय बेला में अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस को पूरे उत्साह और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। इस कार्यक्रम में योगाचार्यों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों और बड़ी संख्या में छात्रों ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान प्राचार्य श्री कुमार बहादुर सिंह, सहयोगी योगाचार्या श्रीमती संगीता दुबे और शैलेंद्र सिंह ने सभी उपस्थित लोगों को योगाभ्यास कराया। मुख्य अतिथि के रूप में जनपद सदस्य प्रजेश द्विवेदी, दादा भाई, सभापति अमरपाटन मंडल अध्यक्ष जितेंद्र मिश्रा और महामंत्री बद्री दहिया मौजूद रहे। विशिष्ट अतिथियों में लक्ष्मण रावत लकी, जिला अध्यक्ष अनुसूचित जनजाति मोर्चा, मानेंद्र सिंह बेला, कौशलेश शुक्ला, विजय पाठक, रश्मि शुक्ला, सीमा वर्मा, रंजन द्विवेदी, सचिन त्रिपाठी, रेणु कुशवाहा, बबलू प्रजापति, प्रशांत मिश्रा, पत्रकार राम प्रसाद साहू, बृजेश सेन, संतोष पाण्डेय और अस्तित्व पब्लिक वेलफेयर सोसाइटी बेला के अध्यक्ष संदीप वर्मा सहित कई अन्य गणमान्य नागरिक और छात्र भी शामिल थे। योग सत्र के दौरान सभी उपस्थित लोगों ने विभिन्न आसन और प्राणायाम का अभ्यास किया। वक्ताओं ने इस अवसर पर योग के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह स्वस्थ जीवन का आधार है और इसे दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना अत्यंत आवश्यक है। यह रिपोर्ट दैनिक तत्काल शंदेस के पत्रकार राम प्रसाद साहू द्वारा प्रस्तुत की गई है।4
- रीवा के ईको पार्क में प्रवेश शुल्क को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में एक आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता ने मारपीट के आरोप लगाए हैं, जिससे यह घटना चर्चा का विषय बन गई है।1
- मध्य प्रदेश के रीवा जिले में एक बस कंडक्टर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायत के अनुसार, एक बस कंडक्टर द्वारा यात्रियों को टिकट नहीं दिया जाता और मनमाना, ज़्यादा किराया वसूला जाता है। आरोप है कि बस में फर्स्ट-एड बॉक्स भी मौजूद नहीं था और कंडक्टर शराब के नशे में था। यात्री द्वारा पूछताछ करने पर कंडक्टर ने कट्टा निकालकर जान से मारने की धमकी दी। कंडक्टर ने यह भी कहा कि रीवा की आरटीओ मनीषा त्रिपाठी हम लोगों से पैसे लेती हैं, और रामपुर नैकिन थाना व समान थाना में भी पैसा लगता है, इसलिए वे ज़्यादा किराया वसूलते हैं। इस घटना के बाद, रीवा आरटीओ मनीषा त्रिपाठी पर बस कंडक्टर द्वारा गंभीर आरोप लगाए गए हैं।1