पटना में पुलिस विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित करने की परंपरा के तहत, वरीय पुलिस अधीक्षक ने परि० पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) विनय कुमार रंजन को एक प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें करीब दो वर्षों से फरार चल रहे नामजद अभियुक्तों की सफल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरीचक थाना से संबंधित कांड संख्या 629/23, 628/23 और 631/23 के नामजद अभियुक्त पिछले लगभग दो साल से पुलिस की पकड़ से बाहर थे। उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट, इश्तेहार और कुर्की जैसी विभिन्न कानूनी कार्रवाई भी की गई थीं, लेकिन वे लगातार फरार चल रहे थे। वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया गया है कि डीएसपी विनय कुमार रंजन के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने लगातार छापेमारी, तकनीकी विश्लेषण और सतत प्रयासों के माध्यम से इन फरार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पुलिस टीम की इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप एक अभियुक्त को आत्मसमर्पण करने के लिए भी बाध्य किया गया, जिससे वर्ष 2023 से लंबित तीनों कांडों का सफल निष्पादन संभव हो सका। डीएसपी विनय कुमार रंजन की इस उल्लेखनीय उपलब्धि और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए, पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा (आईपीएस) ने उन्हें यह प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। प्रशस्ति पत्र में यह आशा भी व्यक्त की गई है कि अधिकारी भविष्य में भी अपनी मेहनत, साहस, प्रशासनिक दक्षता और सूझबूझ के बल पर आम जनता तथा पुलिस के प्रति विश्वसनीयता बनाए रखते हुए सराहनीय कार्य करते रहेंगे। इस सम्मान को न केवल डीएसपी विनय कुमार रंजन की कार्यकुशलता का प्रमाण, बल्कि पूरी पुलिस टीम के मनोबल को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पटना में पुलिस विभाग में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अधिकारियों को सम्मानित करने की परंपरा के तहत, वरीय पुलिस अधीक्षक ने परि० पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) विनय कुमार रंजन को एक प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया है। यह सम्मान उन्हें करीब दो वर्षों से फरार चल रहे नामजद अभियुक्तों की सफल गिरफ्तारी सुनिश्चित करने के लिए दिया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, गौरीचक थाना से संबंधित कांड संख्या 629/23, 628/23 और 631/23 के नामजद अभियुक्त पिछले लगभग दो साल से पुलिस की पकड़ से बाहर थे। उनकी गिरफ्तारी के लिए वारंट, इश्तेहार और कुर्की जैसी विभिन्न कानूनी कार्रवाई भी की गई थीं, लेकिन वे लगातार फरार चल रहे थे। वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा जारी प्रशस्ति पत्र में उल्लेख किया गया है कि डीएसपी विनय कुमार रंजन के नेतृत्व में गठित पुलिस टीम ने लगातार छापेमारी, तकनीकी विश्लेषण और सतत प्रयासों के माध्यम से इन फरार अभियुक्तों को गिरफ्तार किया। पुलिस टीम की इस कार्रवाई के परिणामस्वरूप एक अभियुक्त को आत्मसमर्पण करने के लिए भी बाध्य किया गया, जिससे वर्ष 2023 से लंबित तीनों कांडों का सफल निष्पादन संभव हो सका। डीएसपी विनय कुमार रंजन की इस उल्लेखनीय उपलब्धि और कर्तव्यनिष्ठा को देखते हुए, पटना के वरीय पुलिस अधीक्षक कार्तिकेय के. शर्मा (आईपीएस) ने उन्हें यह प्रशस्ति पत्र प्रदान किया। प्रशस्ति पत्र में यह आशा भी व्यक्त की गई है कि अधिकारी भविष्य में भी अपनी मेहनत, साहस, प्रशासनिक दक्षता और सूझबूझ के बल पर आम जनता तथा पुलिस के प्रति विश्वसनीयता बनाए रखते हुए सराहनीय कार्य करते रहेंगे। इस सम्मान को न केवल डीएसपी विनय कुमार रंजन की कार्यकुशलता का प्रमाण, बल्कि पूरी पुलिस टीम के मनोबल को बढ़ाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
- बाँका जिले में एक मनरेगा भवन पिछले पाँच वर्षों से बंद पड़ा है। इस निष्क्रिय भवन का उपयोग अब असामाजिक तत्वों द्वारा अपने अड्डे के रूप में किया जा रहा है, जिससे इलाके में चिंता का माहौल है। स्थानीय लोगों द्वारा इस पूरे मामले की तत्काल जाँच की माँग की जा रही है।1
- बांका जिले के कटोरिया प्रखंड स्थित रेफरल अस्पताल कटोरिया में शनिवार को उस वक्त हंगामा खड़ा हो गया, जब मरीज के परिजनों ने अस्पताल कर्मियों पर अवैध वसूली का गंभीर आरोप लगाते हुए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान अस्पताल परिसर में तोड़फोड़ की घटना भी सामने आई है, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मरीज के परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में तैनात कुछ स्वास्थ्यकर्मी मनमाने ढंग से काम कर रहे हैं और मरीजों से लगातार अवैध वसूली की शिकायतें मिल रही हैं। इन्हीं आरोपों से आक्रोशित होकर परिजनों ने अस्पताल परिसर में विरोध शुरू कर दिया। हालांकि, अवैध वसूली के इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और पूरे मामले की विस्तृत जांच होनी बाकी है। घटना की जानकारी मिलते ही अस्पताल प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग तुरंत हरकत में आ गया है। रेफरल अस्पताल कटोरिया के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. विनोद कुमार ने बताया कि मामले की पूरी जांच कराई जाएगी और यदि जांच में किसी भी स्वास्थ्यकर्मी की संलिप्तता या लापरवाही पाई जाती है, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल, इस घटना को लेकर पूरे क्षेत्र में जमकर चर्चा हो रही है। सभी की निगाहें अब जांच रिपोर्ट और अस्पताल प्रशासन द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर टिकी हुई हैं।1
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- बांका जिले के बाराहाट प्रखंड की सनडीहा दक्षिणी पंचायत में महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के तहत बनाया गया एक सरकारी भवन अपने निर्माण के समय से ही बंद पड़ा है। यह भवन मुखिया कुमारी दीपमाला के कार्यकाल में बनाया गया था, लेकिन उसके बाद से इस पर कभी ताला नहीं खुला। इस प्रकार, यह सरकारी भवन लगातार अनुपयोगी पड़ा है और इसका सीधा दुरुपयोग हो रहा है।4
- तारापुर नगर पंचायत के वार्ड संख्या 13 में हुई हल्की बारिश के बाद सड़कों की हालत बेहद खराब हो गई है, जहाँ जगह-जगह जलजमाव और कीचड़ के कारण लोगों का घर से बाहर निकलना दूभर हो गया है। इस स्थिति से स्कूली बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने शनिवार सुबह करीब 11 बजे बताया कि थोड़ी सी बारिश होते ही सड़कें कीचड़ में तब्दील हो जाती हैं। जल निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी लंबे समय तक सड़कों पर जमा रहता है, जिससे आवागमन बुरी तरह बाधित होता है। कई जगहों पर पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है, वहीं दोपहिया वाहन चालकों को फिसलने का डर बना रहता है। वार्ड निवासियों का कहना है कि यह समस्या कोई नई नहीं है, लेकिन अब यह गंभीर रूप ले चुकी है। उन्होंने नगर पंचायत प्रशासन से तुरंत जल निकासी की व्यवस्था सुधारने और क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत कराने की मांग की है। लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो मानसून के दौरान हालात और भी बदतर हो सकते हैं।1
- AIMIM गोड्डा जिला अध्यक्ष ने झारखंड के गोड्डा जिले के महागामा में यह महत्वपूर्ण संदेश दिया कि 'आपका विश्वास, हमारी जिम्मेदारी' है।1
- बांका पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों को गिरफ्तार किया है। ये युवक अपराध की योजना बना रहे थे, और उनके पास से हथियार के साथ-साथ जिंदा कारतूस भी बरामद हुए हैं।1
- चांदन (बांका) के बिरनिया पंचायत स्थित उच्च विद्यालय बांक से मिड डे मील (MDM) का चावल एक ऑटो में ले जाते हुए ग्रामीणों ने पकड़ लिया और जमकर हंगामा किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रधानाध्यापक की मिलीभगत से यह चावल बिक्री के लिए कहीं ले जाया जा रहा था। इस घटना के कारण मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों, जिनमें भूपेन्द्र पंडित, मुन्ना कुमार पंडित, प्रेम पंडित, दशरथ पंडित, भागलदेव पंडित, विनोद पंडित और मंटू पंडित शामिल थे, ने बताया कि सुबह करीब 10 बजे स्कूल से चावल लेकर ऑटो बाहर निकला था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इसी ऑटो से पहले भी चावल थानू दास के घर ले जाकर रखा गया था। दूसरी बार जब ऑटो स्कूल से निकला तो कुछ ही दूरी पर ग्रामीणों ने उसे घेर लिया और प्रदर्शन करने लगे। जोरदार बारिश के बीच, कुछ स्थानीय नेताओं की पहल पर स्कूल प्रबंधन ने चावल को वापस स्कूल में रखवा दिया। हालांकि, ग्रामीणों का आक्रोश कम नहीं हुआ है। उनका आरोप है कि पूर्व रसोईया, जो अब अवकाश प्राप्त कर चुका है लेकिन उसे स्कूल की देखरेख का जिम्मा दिया गया है, नियमित रूप से स्कूल का चावल बेचता है। इस संबंध में प्रधानाध्यापक संजय कुमार सिंह ने बताया कि चावल को होलरिंग (मिलिंग) के लिए मील ले जाया जा रहा था। उन्होंने कहा कि होलरिंग कराकर विद्यालय लौटते समय बारिश होने के कारण चावल को गीला होने से बचाने के लिए एक मकान में सुरक्षित रख दिया गया था।1