सागर जिले में करणी सेना ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर खिमलासा थाना क्षेत्र के 16 गौ रक्षकों पर दर्ज एफआईआर का कड़ा विरोध जताया है। करणी सेना के अनुसार, 30 जून 2026 को गौ रक्षकों ने गोचर भूमि को मुक्त कराने के संबंध में पुलिस प्रशासन को सूचना दी थी, इसके बावजूद रोड पर प्रदर्शन करने पर सभी 11 व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ सेवक हरकिशन सेन को रातभर थाने में बिठाकर जेल की कार्यवाही करना कहीं से भी उचित नहीं है। करणी सेना ने बताया कि पिछले तीन सालों में इन गौ सेवकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन को 164 ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। करणी सेना ने सवाल उठाया कि एक देश में दो कानून कैसे हो सकते हैं और गौ सेवा की बात करना गुनाह कैसे हो सकता है। उन्होंने मांग की कि यदि रोड जाम करने या समाज सेवा के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति रखने पर एफआईआर दर्ज होती है, तो यही सजा दूसरे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा किए गए ऐसे ही कृत्यों पर भी मिलनी चाहिए। इस संदर्भ में, करणी सेना ने तीन दिन पहले बीएमसी के डॉक्टरों द्वारा बिना सूचना के टिली अस्पताल का रोड जाम करने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह अति संवेदनशील रोड था, जहां कई मरीज आवागमन में फंसे रहे और चिकित्सा के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। करणी सेना परिवार, जिला सागर ने निवेदन किया है कि जिन डॉक्टरों के वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं, उन पर भी वही एफआईआर और वही धाराएं लगनी चाहिए, जो खिमलासा थाना अंतर्गत ग्राम गाडौली के जवाहर पुल के पास रोड जाम कर रहे गौ रक्षकों पर लगी हैं। वैकल्पिक रूप से, गौ रक्षकों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाना चाहिए। करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र अति शीघ्र नहीं माना गया, तो वे पूरे जिले में उग्र प्रदर्शन करेंगे और संविधान की रक्षा के लिए "एक कानून, एक सजा" के संबंध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
सागर जिले में करणी सेना ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर खिमलासा थाना क्षेत्र के 16 गौ रक्षकों पर दर्ज एफआईआर का कड़ा विरोध जताया है। करणी सेना के अनुसार, 30 जून 2026 को गौ रक्षकों ने गोचर भूमि को मुक्त कराने के संबंध में पुलिस प्रशासन को सूचना दी थी, इसके बावजूद रोड पर प्रदर्शन करने पर सभी 11 व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ सेवक हरकिशन सेन को रातभर थाने में बिठाकर जेल की कार्यवाही करना कहीं से भी उचित
नहीं है। करणी सेना ने बताया कि पिछले तीन सालों में इन गौ सेवकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन को 164 ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। करणी सेना ने सवाल उठाया कि एक देश में दो कानून कैसे हो सकते हैं और गौ सेवा की बात करना गुनाह कैसे हो सकता है। उन्होंने मांग की कि यदि रोड जाम करने या समाज सेवा के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति रखने पर एफआईआर दर्ज होती
है, तो यही सजा दूसरे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा किए गए ऐसे ही कृत्यों पर भी मिलनी चाहिए। इस संदर्भ में, करणी सेना ने तीन दिन पहले बीएमसी के डॉक्टरों द्वारा बिना सूचना के टिली अस्पताल का रोड जाम करने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह अति संवेदनशील रोड था, जहां कई मरीज आवागमन में फंसे रहे और चिकित्सा के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। करणी सेना परिवार, जिला सागर ने निवेदन किया है कि जिन डॉक्टरों के वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं,
उन पर भी वही एफआईआर और वही धाराएं लगनी चाहिए, जो खिमलासा थाना अंतर्गत ग्राम गाडौली के जवाहर पुल के पास रोड जाम कर रहे गौ रक्षकों पर लगी हैं। वैकल्पिक रूप से, गौ रक्षकों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाना चाहिए। करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र अति शीघ्र नहीं माना गया, तो वे पूरे जिले में उग्र प्रदर्शन करेंगे और संविधान की रक्षा के लिए "एक कानून, एक सजा" के संबंध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।
- सागर जिले में करणी सेना ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर खिमलासा थाना क्षेत्र के 16 गौ रक्षकों पर दर्ज एफआईआर का कड़ा विरोध जताया है। करणी सेना के अनुसार, 30 जून 2026 को गौ रक्षकों ने गोचर भूमि को मुक्त कराने के संबंध में पुलिस प्रशासन को सूचना दी थी, इसके बावजूद रोड पर प्रदर्शन करने पर सभी 11 व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि गौ सेवक हरकिशन सेन को रातभर थाने में बिठाकर जेल की कार्यवाही करना कहीं से भी उचित नहीं है। करणी सेना ने बताया कि पिछले तीन सालों में इन गौ सेवकों द्वारा अपनी मांगों को लेकर शासन-प्रशासन को 164 ज्ञापन दिए जा चुके हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला, जिससे परेशान होकर उन्हें यह कदम उठाना पड़ा। करणी सेना ने सवाल उठाया कि एक देश में दो कानून कैसे हो सकते हैं और गौ सेवा की बात करना गुनाह कैसे हो सकता है। उन्होंने मांग की कि यदि रोड जाम करने या समाज सेवा के माध्यम से अपनी अभिव्यक्ति रखने पर एफआईआर दर्ज होती है, तो यही सजा दूसरे संगठनों या व्यक्तियों द्वारा किए गए ऐसे ही कृत्यों पर भी मिलनी चाहिए। इस संदर्भ में, करणी सेना ने तीन दिन पहले बीएमसी के डॉक्टरों द्वारा बिना सूचना के टिली अस्पताल का रोड जाम करने का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि यह अति संवेदनशील रोड था, जहां कई मरीज आवागमन में फंसे रहे और चिकित्सा के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी एक न सुनी। करणी सेना परिवार, जिला सागर ने निवेदन किया है कि जिन डॉक्टरों के वीडियो फुटेज उपलब्ध हैं, उन पर भी वही एफआईआर और वही धाराएं लगनी चाहिए, जो खिमलासा थाना अंतर्गत ग्राम गाडौली के जवाहर पुल के पास रोड जाम कर रहे गौ रक्षकों पर लगी हैं। वैकल्पिक रूप से, गौ रक्षकों पर दर्ज एफआईआर को निरस्त किया जाना चाहिए। करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को शीघ्र अति शीघ्र नहीं माना गया, तो वे पूरे जिले में उग्र प्रदर्शन करेंगे और संविधान की रक्षा के लिए "एक कानून, एक सजा" के संबंध में बड़े स्तर पर प्रदर्शन करेंगे।4
- डीएसपी संतोष पटेल ने 'सेफ क्लिक अभियान 2.0' के तहत साइबर सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपायों पर जानकारी साझा की। इस पहल के अंतर्गत, उन्होंने लोगों को ऑनलाइन सुरक्षा बनाए रखने और साइबर खतरों से बचने के विभिन्न तरीकों से अवगत कराया।1
- मध्य प्रदेश के सागर जिले के गढ़ाकोटा क्षेत्र में निवासियों को सड़क की गंभीर बदहाली के कारण भारी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार, उनके 'कॉमेडी के रास्ते' की स्थिति इतनी खराब है कि इसके चलते स्कूली बच्चे भी स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने इस समस्या के समाधान के लिए सरपंच-सचिव से कई बार संपर्क कर सड़क का निर्माण करवाने या मुरम डलवाने का आग्रह किया है। हालांकि, उनकी शिकायतों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है और सरपंच-सचिव उनकी समस्याओं को सुनने से मना कर रहे हैं।1
- आम आदमी पार्टी (आप) की सागर जिला इकाई ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर में महिला डॉक्टरों के साथ हुई अभद्रता और दुर्व्यवहार के मामले में कड़ा विरोध दर्ज कराया है। शहर में लगातार भारी बारिश के बावजूद, आप कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने सागर जिलाध्यक्ष इंजीनियर डी.के. सिंह के नेतृत्व में जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। पार्टी ने मांग की है कि दोषियों के खिलाफ केवल खानापूर्ति न की जाए, बल्कि सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। मीडिया से बात करते हुए, इंजी. डी.के. सिंह ने कहा कि कार्यस्थलों पर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा 'भगवान भरोसे' है। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि जो डॉक्टर दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, वे आज अपने कार्यस्थल पर ही सुरक्षित नहीं हैं। बीएमसी जैसी प्रतिष्ठित संस्था में महिला डॉक्टर के साथ हुई अभद्रता को उन्होंने बेहद शर्मनाक और निंदनीय बताया। सिंह ने शासन-प्रशासन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषकर महिला स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षित माहौल नहीं मिलेगा, तो वे भयमुक्त होकर अपनी सेवाएं कैसे दे पाएंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी इस मामले में मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगी और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उन पर सख्त धाराएं लगाने की मांग की। आप के संगठन मंत्री पुष्पेन्द्र राजपूत ने कुछ प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें महिला डॉक्टर के साथ अभद्रता करने वाले असामाजिक तत्वों की तत्काल गिरफ्तारी शामिल है, वह भी बिना किसी राजनीतिक दबाव के और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कड़ी कार्रवाई के साथ। इसके अतिरिक्त, बीएमसी परिसर और संवेदनशील वार्डों में सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता ऑडिट करने, सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने और सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सख्त करने की मांग की गई। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय दिलाने के लिए फास्ट-ट्रैक जांच की भी वकालत की। इस दौरान ज्ञापन सौंपते समय जिलाध्यक्ष इंजी. डी.के. सिंह के साथ जिला संगठन मंत्री पुष्पेंद्र राजपूत, जिला उपाध्यक्ष आशुतोष कुर्मी, आरटीआई विंग जिला अध्यक्ष प्रदीप जैन, मीडिया प्रभारी संजेश कश्यप, जिला संयुक्त सचिव लक्ष्मीकांत राज, ज्योतिष सोनी, मयंक खरे और कई अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। सभी पदाधिकारियों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस मामले में जल्द और ठोस कदम नहीं उठाए, तो आम आदमी पार्टी जिलाध्यक्ष इंजीनियर डी.के. सिंह के नेतृत्व में सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।3
- आम आदमी पार्टी (आप) की सागर जिला इकाई ने बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज (बीएमसी) सागर में महिला डॉक्टरों के साथ हुई अभद्रता और दुर्व्यवहार के मामले को लेकर भारी बारिश के बावजूद कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। ‘आप’ सागर जिलाध्यक्ष इंजीनियर डी.के. सिंह के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें दोषियों के खिलाफ केवल खानापूर्ति न कर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। मीडिया से बात करते हुए इंजी. डी.के. सिंह ने बताया कि कार्यस्थलों पर महिला डॉक्टरों की सुरक्षा भगवान भरोसे है। उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर दिन-रात मरीजों की सेवा में लगे रहते हैं, वे आज अपने कार्यस्थल पर सुरक्षित नहीं हैं। बीएमसी जैसी प्रतिष्ठित संस्था में महिला डॉक्टर के साथ हुई अभद्रता को बेहद शर्मनाक और निंदनीय बताते हुए उन्होंने शासन-प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि अस्पतालों में डॉक्टरों, विशेषकर महिला स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षित माहौल नहीं मिलेगा, तो वे भयमुक्त होकर अपनी सेवाएं कैसे दे पाएंगी? उन्होंने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी इस मामले में मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगी और आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर उन पर सख्त धाराएं लगाने की मांग की। पार्टी के संगठन मंत्री पुष्पेंद्र राजपूत ने प्रमुख मांगें रखीं, जिनमें महिला डॉक्टर के साथ अभद्रता करने वाले असामाजिक तत्वों की बिना किसी राजनीतिक दबाव के तत्काल गिरफ्तारी और सीसी टीवी फुटेज के आधार पर कड़ी कार्रवाई शामिल है। इसके अतिरिक्त, बीएमसी परिसर और संवेदनशील वार्डों में सुरक्षा गार्डों की संख्या बढ़ाने तथा सीसीटीवी कैमरों की निगरानी सख्त करने के लिए सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता ऑडिट कराने की मांग भी की गई। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच कर पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय दिलाने की बात भी कही। ज्ञापन सौंपने के दौरान जिलाध्यक्ष इंजी. डी.के. सिंह के साथ संगठन मंत्री पुष्पेंद्र राजपूत, जिला उपाध्यक्ष आशुतोष कुर्मी, आरटीआई विंग जिला अध्यक्ष प्रदीप जैन, मीडिया प्रभारी संजेश कश्यप, जिला संयुक्त सचिव लक्ष्मीकांत राज, ज्योतिष सोनी, मयंक खरे सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी पदाधिकारियों ने एक सुर में चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने इस मामले में जल्द और ठोस कदम नहीं उठाए, तो आम आदमी पार्टी इंजीनियर डीके सिंह के नेतृत्व में सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।1
- शाहगढ़ पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। इस कार्रवाई के तहत पुलिस ने अवैध शराब बनाने वाले ठिकानों पर दबिश दी।1
- ललितपुर जनपद के थाना तालबेहट क्षेत्र स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) के मैटरनिटी सेंटर के पास एक अज्ञात अधेड़ महिला का शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई। सूचना मिलते ही थाना तालबेहट पुलिस मौके पर पहुँची और फील्ड यूनिट की मदद से घटनास्थल का निरीक्षण कर आवश्यक जाँच-पड़ताल की। प्रारंभिक तौर पर मृतका की आयु लगभग 35 से 40 वर्ष प्रतीत हो रही है और उसका कद औसत है। शव काफी सड़-गल चुका था, जिससे अनुमान है कि महिला की मृत्यु करीब 4 से 5 दिन पहले हुई थी। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर पंचायतनामा की कार्यवाही के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मृतका की शिनाख्त के लिए आसपास के थानों से संपर्क साधा जा रहा है और अन्य सभी संभावित प्रयास किए जा रहे हैं। इस प्रकरण में अन्य आवश्यक कानूनी कार्यवाही प्रचलित है। मौके पर शांति और कानून-व्यवस्था की स्थिति सामान्य है, जिसकी जानकारी क्षेत्राधिकारी तालबेहट श्री आशीष मिश्र द्वारा दी गई।1
- बीना-खिमलासा मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण कार्य के बीच आम जनता की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं, क्योंकि भारी वाहन नियमों की अनदेखी कर नो-एंट्री वाले अस्थायी मार्ग से लगातार गुजर रहे हैं। इस मार्ग को विशेष रूप से छोटे वाहनों के लिए बनाया गया था, लेकिन डंपरों सहित अन्य भारी वाहनों की आवाजाही के कारण यह क्षतिग्रस्त हो रहा है। दरअसल, ओवरब्रिज निर्माण के चलते रेलवे फाटक को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। न्यायालय, तहसील कार्यालय और कई स्कूल इसी मार्ग पर होने के कारण लोगों की सुविधा के लिए अंडरब्रिज के नीचे छोटे वाहनों के लिए एक वैकल्पिक मार्ग तैयार किया गया था, जिस पर भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित था। प्रशासन ने भारी वाहनों को रोकने के लिए हार्ड गेट भी लगाया था, लेकिन स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ डंपर संचालकों ने कथित तौर पर अपने डंपरों के ऊपरी हिस्से में बदलाव कर लिया है, जिससे वे हार्ड गेट के नीचे से भी आसानी से निकल रहे हैं और प्रतिबंधित मार्ग पर आवाजाही जारी है। भारी वाहनों के निरंतर गुजरने से यह अस्थायी सड़क जगह-जगह से टूट रही है। बारिश के दौरान सड़क पर कीचड़ और गड्ढों के कारण स्कूली बच्चों, अधिवक्ताओं, न्यायालय और तहसील आने वाले लोगों सहित स्थानीय नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति के कारण कई बार जाम की स्थिति बन जाती है, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित होता है। स्थानीय नागरिकों ने आशंका जताई है कि यदि प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही पर सख्ती से रोक नहीं लगाई गई, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई कर क्षतिग्रस्त सड़क की मरम्मत कराने और यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाने की मांग की है। विशेष सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कुछ डंपर कथित तौर पर निर्माण सामग्री लेकर भी इसी प्रतिबंधित मार्ग से गुजरते देखे गए हैं।3