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सेंधवा दिव्यांग क्या हुआ चयन भारत के लिए खेलेंगे क्रिकेट अलग-अलग स्थान पर होगा
Allrounder Rahul Gupta
सेंधवा दिव्यांग क्या हुआ चयन भारत के लिए खेलेंगे क्रिकेट अलग-अलग स्थान पर होगा
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- Post by NIMAD DASTAK NEWS1
- बड़वानी। देश में स्मार्ट गांव और बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन बड़वानी जिला के पाटी ब्लॉक की ग्राम पंचायत पीपरकुंड की तस्वीर इन दावों की हकीकत उजागर कर रही है। यहां आज भी बीमारों को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस नहीं, बल्कि इंसानों के कंधों का सहारा लेना पड़ता है। 8 हजार की है आबादी करीब 55 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव की आबादी लगभग 8 हजार है, जबकि कुंडिया फलिया में 100 से ज्यादा परिवार निवास करते हैं। हैरानी की बात यह है कि आज तक यहां पक्की सड़क नहीं पहुंच सकी। गांव तक पहुंचने के लिए करीब 7 किलोमीटर का रास्ता पूरी तरह कच्चा, उबड़-खाबड़ और खतरनाक है, जहां चार पहिया वाहन तो दूर, एम्बुलेंस का पहुंचना भी नामुमकिन है। इसी मजबूरी के चलते ग्रामीण मरीजों को कपड़े की झोली में डालकर कंधों पर उठाकर पक्के रास्ते तक ले जाते हैं। यह दृश्य केवल दर्दनाक नहीं, बल्कि व्यवस्था की गंभीर नाकामी को भी उजागर करता है। हर बार यही स्थिति बनती है। गांव के निवासी प्रदीप, जो खुद एक मरीज को कंधे पर ढोते नजर आए, बताते हैं कि हर बार यही स्थिति बनती है। थकान और बेबसी के बीच वे कहते हैं, “हर बार इसी तरह मरीजों को ले जाना पड़ता है।” रात के समय हालात और भी भयावह हो जाते हैं। जंगल का इलाका, घना अंधेरा और जंगली जानवरों का डर ग्रामीणों की मुश्किलें और बढ़ा देता है। गांव के ही फतिया बताते हैं कि बारिश के दिनों में यह रास्ता और भी जानलेवा हो जाता है। नाले उफान पर होते हैं और पथरीले रास्तों पर चलना बेहद मुश्किल हो जाता है। कई बार तो लोग मरीज को ले जाने के लिए सुबह होने का इंतजार करते हैं, और कई बार यही इंतजार जिंदगी पर भारी पड़ जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार जनसुनवाई में आवेदन दिए और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगाई, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला। उनका सीधा सवाल है—जब हम भी वोट देते हैं और सरकार बनाने में भागीदारी करते हैं, तो हमें बुनियादी सुविधाएं क्यों नहीं मिलतीं यह कहानी सिर्फ एक गांव की नहीं, बल्कि उन तमाम इलाकों की है जहां आज भी सड़क नहीं है और इसी कारण जिंदगी कंधों पर ढोई जा रही है। अब सवाल यही है कि आखिर ये 7 किलोमीटर की सड़क कब बनेगी, क्योंकि जब तक सड़क नहीं पहुंचेगी, तब तक यहां जिंदगी इसी तरह कंधों पर चलती रहेगी। मामले में क्या बोले अधिकारी एसडीएम भूपेंद्र रावत के अनुसार, धरती आभा योजना के अंतर्गत ऐसे गांवों को चिह्नित किया गया है जहां 100 से अधिक आबादी है। इन गांवों को सड़क से जोड़ने के लिए निर्माण कार्य प्रस्तावित है। हालांकि, ग्रामीणों को अब भी इंतजार है कि ये योजनाएं जमीन पर कब उतरेंगी।1
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- Post by Surendra prasad Dubey1
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- Post by Allrounder Rahul Gupta1
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- Post by NIMAD DASTAK NEWS1