सचिवालय जर्जर, सवाल गंभीर—अब मैदान में उतरकर जवाब देंगे IG, DIG, SP या जिलाधिकारी? सचिवालय जर्जर, सवाल गंभीर—अब मैदान में उतरकर जवाब देंगे IG, DIG, SP या जिलाधिकारी? लखीमपुर खीरी | धौरहरा धौरहरा ब्लॉक में सरकारी धन से बने ग्राम सचिवालयों की कथित बदहाली ने विकास की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जनता पूछ रही है—लाखों रुपये की लागत के बाद महज दो साल में सचिवालय जर्जर क्यों हुए? निर्माण की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और सरकारी धन के एक-एक रुपये की जवाबदेही कौन तय करेगा? अब सवाल सिर्फ सचिवालय की दीवारों का नहीं, जवाबदेही की दीवार का है। जिलाधिकारी से सीधा सवाल—क्या आप स्वयं टीम गठित कर सचिवालयों की भौतिक एवं तकनीकी जांच कराएंगे? क्या जांच रिपोर्ट जनता के सामने सार्वजनिक होगी? एसपी/कप्तान से सवाल—जनहित के मुद्दों की कवरेज करने वाले पत्रकार की सुरक्षा और स्वतंत्र कवरेज की जिम्मेदारी किसकी है? डीआईजी से सवाल—यदि किसी पत्रकार के साथ कथित तौर पर अभद्रता, धक्का-मुक्की, मोबाइल छीने जाने या उंगली तक उठने की स्थिति आती है, तो जवाबदेही किस अधिकारी की होगी? आईजी से सीधा सवाल—क्या पुलिस व्यवस्था में ऐसा तंत्र है जो पत्रकार और आम नागरिक की आवाज को सुरक्षित रख सके? यदि शिकायत सामने आएगी तो निष्पक्ष जांच और कार्रवाई कौन सुनिश्चित करेगा? अब सवाल फाइलों से नहीं, मैदान से है जनता का कहना है कि अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर रिपोर्ट न देखें। सचिवालयों की वास्तविक स्थिति देखने मैदान में उतरें, गुणवत्ता की जांच कराएं और रिपोर्ट सार्वजनिक करें। हक की आवाज़ न्यूज़ चैनल के माध्यम से जनता का खुला सवाल है—उत्तर प्रदेश का कौन-सा जिम्मेदार अधिकारी मैदान में उतरकर इन सवालों का सार्वजनिक जवाब देने के लिए तैयार है? यह किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ फैसला नहीं, बल्कि जनता के पैसे, सरकारी निर्माण की गुणवत्ता और पत्रकार की सुरक्षा पर जवाब मांगने का सवाल है। अगर निर्माण सही है—जांच से डर कैसा? अगर व्यवस्था सही है—सवालों के जवाब से परहेज कैसा? और अगर शिकायत गलत है—निष्पक्ष जांच के बाद सच सामने क्यों न आए? अब धौरहरा की जनता जांच चाहती है, रिपोर्ट चाहती है और जवाबदेही चाहती है। हक की आवाज़ न्यूज़ चैनल—सवाल जनता के, जवाब जिम्मेदार अधिकारियों के।
सचिवालय जर्जर, सवाल गंभीर—अब मैदान में उतरकर जवाब देंगे IG, DIG, SP या जिलाधिकारी? सचिवालय जर्जर, सवाल गंभीर—अब मैदान में उतरकर जवाब देंगे IG, DIG, SP या जिलाधिकारी? लखीमपुर खीरी | धौरहरा धौरहरा ब्लॉक में सरकारी धन से बने ग्राम सचिवालयों की कथित बदहाली ने विकास की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जनता पूछ रही है—लाखों रुपये की लागत के बाद महज दो साल में सचिवालय जर्जर क्यों हुए? निर्माण की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और सरकारी धन के एक-एक रुपये की जवाबदेही कौन तय करेगा? अब सवाल सिर्फ सचिवालय की दीवारों का नहीं, जवाबदेही की दीवार का है। जिलाधिकारी से सीधा सवाल—क्या आप स्वयं टीम गठित कर सचिवालयों की भौतिक एवं तकनीकी जांच कराएंगे? क्या जांच रिपोर्ट जनता के सामने सार्वजनिक होगी? एसपी/कप्तान से सवाल—जनहित के मुद्दों की कवरेज करने वाले पत्रकार की सुरक्षा और स्वतंत्र कवरेज की जिम्मेदारी किसकी है? डीआईजी से सवाल—यदि किसी पत्रकार के साथ कथित तौर पर अभद्रता, धक्का-मुक्की, मोबाइल छीने जाने या उंगली तक उठने की स्थिति आती है, तो जवाबदेही किस अधिकारी की होगी? आईजी से सीधा सवाल—क्या पुलिस व्यवस्था में ऐसा तंत्र है जो पत्रकार और आम नागरिक की आवाज को सुरक्षित रख सके? यदि शिकायत सामने आएगी तो निष्पक्ष जांच और कार्रवाई कौन सुनिश्चित करेगा? अब सवाल फाइलों से नहीं, मैदान से है जनता का कहना है कि अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर रिपोर्ट न देखें। सचिवालयों की वास्तविक स्थिति देखने मैदान में उतरें, गुणवत्ता की जांच कराएं और रिपोर्ट सार्वजनिक करें। हक की आवाज़ न्यूज़ चैनल के माध्यम से जनता का खुला सवाल है—उत्तर प्रदेश का कौन-सा जिम्मेदार अधिकारी मैदान में उतरकर इन सवालों का सार्वजनिक जवाब देने के लिए तैयार है? यह किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ फैसला नहीं, बल्कि जनता के पैसे, सरकारी निर्माण की गुणवत्ता और पत्रकार की सुरक्षा पर जवाब मांगने का सवाल है। अगर निर्माण सही है—जांच से डर कैसा? अगर व्यवस्था सही है—सवालों के जवाब से परहेज कैसा? और अगर शिकायत गलत है—निष्पक्ष जांच के बाद सच सामने क्यों न आए? अब धौरहरा की जनता जांच चाहती है, रिपोर्ट चाहती है और जवाबदेही चाहती है। हक की आवाज़ न्यूज़ चैनल—सवाल जनता के, जवाब जिम्मेदार अधिकारियों के।
- सचिवालय जर्जर, सवाल गंभीर—अब मैदान में उतरकर जवाब देंगे IG, DIG, SP या जिलाधिकारी? सचिवालय जर्जर, सवाल गंभीर—अब मैदान में उतरकर जवाब देंगे IG, DIG, SP या जिलाधिकारी? लखीमपुर खीरी | धौरहरा धौरहरा ब्लॉक में सरकारी धन से बने ग्राम सचिवालयों की कथित बदहाली ने विकास की गुणवत्ता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जनता पूछ रही है—लाखों रुपये की लागत के बाद महज दो साल में सचिवालय जर्जर क्यों हुए? निर्माण की गुणवत्ता की जांच कौन करेगा और सरकारी धन के एक-एक रुपये की जवाबदेही कौन तय करेगा? अब सवाल सिर्फ सचिवालय की दीवारों का नहीं, जवाबदेही की दीवार का है। जिलाधिकारी से सीधा सवाल—क्या आप स्वयं टीम गठित कर सचिवालयों की भौतिक एवं तकनीकी जांच कराएंगे? क्या जांच रिपोर्ट जनता के सामने सार्वजनिक होगी? एसपी/कप्तान से सवाल—जनहित के मुद्दों की कवरेज करने वाले पत्रकार की सुरक्षा और स्वतंत्र कवरेज की जिम्मेदारी किसकी है? डीआईजी से सवाल—यदि किसी पत्रकार के साथ कथित तौर पर अभद्रता, धक्का-मुक्की, मोबाइल छीने जाने या उंगली तक उठने की स्थिति आती है, तो जवाबदेही किस अधिकारी की होगी? आईजी से सीधा सवाल—क्या पुलिस व्यवस्था में ऐसा तंत्र है जो पत्रकार और आम नागरिक की आवाज को सुरक्षित रख सके? यदि शिकायत सामने आएगी तो निष्पक्ष जांच और कार्रवाई कौन सुनिश्चित करेगा? अब सवाल फाइलों से नहीं, मैदान से है जनता का कहना है कि अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर रिपोर्ट न देखें। सचिवालयों की वास्तविक स्थिति देखने मैदान में उतरें, गुणवत्ता की जांच कराएं और रिपोर्ट सार्वजनिक करें। हक की आवाज़ न्यूज़ चैनल के माध्यम से जनता का खुला सवाल है—उत्तर प्रदेश का कौन-सा जिम्मेदार अधिकारी मैदान में उतरकर इन सवालों का सार्वजनिक जवाब देने के लिए तैयार है? यह किसी व्यक्ति या अधिकारी के खिलाफ फैसला नहीं, बल्कि जनता के पैसे, सरकारी निर्माण की गुणवत्ता और पत्रकार की सुरक्षा पर जवाब मांगने का सवाल है। अगर निर्माण सही है—जांच से डर कैसा? अगर व्यवस्था सही है—सवालों के जवाब से परहेज कैसा? और अगर शिकायत गलत है—निष्पक्ष जांच के बाद सच सामने क्यों न आए? अब धौरहरा की जनता जांच चाहती है, रिपोर्ट चाहती है और जवाबदेही चाहती है। हक की आवाज़ न्यूज़ चैनल—सवाल जनता के, जवाब जिम्मेदार अधिकारियों के।1
- मटेरा बाजार में अवैध मेडिकल स्टोर का वीडियो वायरल, स्थानीय लोगों में रोष; सूत्रों से आई बड़ी खबर स्थानीय मटेरा बाजार में संचालित गुप्ता मेडिकल स्टोर का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर जमकर सुर्खियां बटोर रहा है। इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में कथित तौर पर उक्त मेडिकल स्टोर के अवैध रूप से संचालित होने और मानकों की अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वीडियो के सामने आने के बाद क्षेत्र के नागरिकों में हड़कंप मच गया है और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच इस मामले से जुड़ी सूत्रों के हवाले से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। सूत्रों की मानें तो सोशल मीडिया पर वीडियो के व्यापक रूप से वायरल होने के बाद जिला औषधि विभाग (ड्रग डिपार्टमेंट) पूरी तरह से अलर्ट मोड पर आ गया है। बताया जा रहा है कि ड्रग इंस्पेक्टर और स्वास्थ्य विभाग की एक संयुक्त टीम बेहद गोपनीय तरीके से इस मेडिकल स्टोर के दस्तावेजों और बैकग्राउंड की जांच कर रही है। सूत्रों का यह भी दावा है कि विभाग किसी भी वक्त गुप्ता मेडिकल स्टोर पर औचक छापेमारी कर सकता है और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर दुकान को तुरंत सील करने के साथ-साथ भारी जुर्माना और एफआईआर (FIR) दर्ज कराने की तैयारी में है। वीडियो वायरल होने के बाद मटेरा और आसपास के ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस मामले में तुरंत संज्ञान लेने की अपील की है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र में बिना रजिस्ट्रेशन और बिना कागजात के चल रही ऐसी अवैध दुकानें मरीजों की जान जोखिम में डाल रही हैं। ग्रामीणों ने मांग की है कि:दुकान के लाइसेंस और स्टॉक की गहनता से भौतिक जांच की जाए।अवैध दवाओं की बिक्री करने वालों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।फिलहाल, औषधि निरीक्षक कार्यालय से किसी आधिकारिक बयान का इंतजार है, लेकिन सूत्रों के मुताबिक आने वाले 24 से 48 घंटों के भीतर इस मामले में प्रशासन का बड़ा डंडा चल सकता है। रिपोर्ट-: प्रीतम सिंह,बहराइच1
- थाना धौरहरा पुलिस द्वारा ग्राम सिसैया खुर्द में हुई मारपीट की घटना करने वाले 03 अभियुक्त गिरफ्तार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक खीरी, डॉ0 ख्याति गर्ग के निर्देशन में वांछित/वारण्टी व अपराधियों के विरूद्ध चलाये जा रहे अभियान के क्रम में, अपर पुलिस अधीक्षक खीरी (पूर्वी) के संनिकट पर्यवेक्षण, क्षेत्राधिकारी धौरहरा के कुशल मार्गदर्शन तथा प्रभारी निरीक्षक कोतवाली धौरहरा के नेतृत्व में थाना धौरहरा पुलिस टीम द्वारा त्वरित व प्रभावी कार्यवाही करते हुए थाना धौरहरा क्षेत्र के ग्राम सिसैया खुर्द में विगत 14 सितंबर को हुई मारपीट की घटना के संदर्भ में कार्यवाही करते हुए आज दिनांक 17.09.2026 को समय दोपहर 01:50 बजे ग्राम सिसैयाकलां से मु0अ0सं0 433/2026 धारा 115(2)/352/351(2)/333 बीएनएस से संबंधित 03 अभियुक्तों को गिरफ्तार कर विधिक कार्यवाही हेतु माननीय न्यायालय के समक्ष भेजा गया है। *गिरफ्तार अभियुक्तगण का विवरण* • फुरकान (उम्र करीब 37 वर्ष) पुत्र कल्लू खाँ, निवासी ग्राम सिसैयाकलां, थाना धौरहरा, जिला खीरी • भग्गू (उम्र करीब 41 वर्ष) पुत्र हेकड़ खाँ, निवासी ग्राम सिसैयाकलां, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मन्ना खाँ (उम्र करीब 39 वर्ष) पुत्र गफ्फार खाँ, निवासी ग्राम सिसैयाकलां, थाना धौरहरा, जिला खीरी *अभियुक्तगण का आपराधिक इतिहास* *1. भग्गू पुत्र हेकड़ खाँ:* • मु0अ0सं0 501/2012: धारा 302/307 भादवि0, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 402/2005: धारा 307/427/504 भादवि0, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 557/2012: धारा 3/25 आर्म्स एक्ट, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 172/2020: धारा 147/148/149/323/506 भादवि0, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 805/2010: धारा 110(जी) दं०प्र०सं०, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 433/2026: धारा 115(2)/352/351(2)/333 बीएनएस, थाना धौरहरा, जिला खीरी *2. फुरकान पुत्र कल्लू खाँ:* • मु0अ0सं0 603/2019: धारा 323/504 भादवि0 व 3(1)ध SC/ST Act, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 433/2026: धारा 115(2)/352/351(2)/333 बीएनएस, थाना धौरहरा, जिला खीरी *3. मन्ना खाँ पुत्र गफ्फार खाँ:* • मु0अ0सं0 369/2024: धारा 115(2)/191(2)/351(2)/352 बीएनएस, थाना धौरहरा, जिला खीरी • मु0अ0सं0 433/2026: धारा 115(2)/352/351(2)/333 बीएनएस, थाना धौरहरा, जिला खीरी *गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम* • प्रभारी निरीक्षक दिनेश कुमार शर्मा • उ0नि0 विलियम कौशिक • हे0का0 राशिद चौधरी • का0 शोभित • रि0का0 रानू1
- ट्रेन की चपेट में आने से युवक की मौत, खीरी टाउन हाल्ट पर हुआ हादसा खीरी टाउन। बुधवार की रात लखीमपुर से गोरखपुर की ओर जा रही ट्रेन संख्या 15010 गोरखपुर एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक युवक की मौत हो गई। हादसा खीरी टाउन हाल्ट के पास हुआ। मृतक की पहचान नूर अली पुत्र महबूब अली, निवासी सय्यदवाड़ा, खीरी टाउन के रूप में हुई है। जानकारी के मुताबिक, ट्रेन बुधवार रात करीब 7 बजकर 47 मिनट पर लखीमपुर से रवाना हुई थी। ट्रेन जब खीरी टाउन हाल्ट के पास पहुंची, उसी दौरान युवक उसकी चपेट में आ गया और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हो सका है कि नूर अली किस परिस्थिति में ट्रेन की चपेट में आया। क्या वह ट्रेन से यात्रा कर रहा था और खीरी टाउन हाल्ट पर गिर गया, या फिर पहले से हाल्ट पर मौजूद था और ट्रेन की चपेट में आ गया—इसको लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। हादसे के वास्तविक कारण का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची और जीआरपी को मामले की सूचना दी गई। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए जिला मुख्यालय भेज दिया। पोस्टमार्टम के बाद जब मृतक नूर अली का शव उसके घर पहुंचा, तो परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। अचानक हुई इस दर्दनाक घटना से परिवार के साथ-साथ मोहल्ले में भी गम का माहौल है। वहीं, हमारे पास मौजूद विजुअल में आप देख सकते हैं कि नूर अली का शव घर पहुंचने के बाद बड़ी संख्या में कस्बे और आसपास के लोग उसके घर पहुंच रहे हैं। लोग परिवार के दुख में शरीक होकर परिजनों को सांत्वना दे रहे हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और हादसा किन परिस्थितियों में हुआ, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है।1
- "कोई गाय अगर नाले में गिर जाए तो उसको हम निकालते हैं, भंगी बन जाते हैं" अलीगढ़, यूपी में 2 दिन पहले सवर्ण पंचायत में हिंदूवादी नेता सुंदर सिंह राघव ने ये टिप्पणी की थी जो वाल्मीकि/दलित समाज को नागवार गुजरी जिसके बाद कल सुंदर राघव के भाई सचिन राघव की जमकर पिटाई कर दी गई।1
- प्रधानमंत्री के 76 वें जन्मदिन पर प्रदेश के अलग अलग हिस्सों में हुए तमाम कार्यक्रम काशी विश्वनाथ में योगी व राजनाथ ने बांटा केक1
- 5 बच्चों की सास का 20 साल छोटे दामाद पर दिल आ गया रातभर पंचायत चली, लेकिन दोनों को अलग नहीं कर पाई अब दोनों ने एकसाथ रहने का ऐलान कर दिया है मामला मैनपुरी, उत्तर प्रदेश का है।1
- आवारा कुत्तों के आतंक पर भड़के शिवसेना UBT नेता, नगर पंचायत में छोड़ दिए कुत्ते नासिक। महाराष्ट्र के नासिक जिले के निफाड शहर में आवारा कुत्तों के बढ़ते आतंक और प्रशासन की कथित लापरवाही को लेकर शिवसेना UBT के पदाधिकारियों ने नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया। बताया जा रहा है कि शहर में लगातार बढ़ रही आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर स्थानीय स्तर पर कई शिकायतें की गई थीं। आरोप है कि शिकायतों के बावजूद नगर पंचायत प्रशासन की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसी से नाराज शिवसेना UBT के पदाधिकारी नगर पंचायत के मुख्याधिकारी के केबिन में पहुंच गए। विरोध के दौरान वे अपने साथ कई आवारा कुत्ते भी लेकर आए और उन्हें अधिकारियों के केबिन में छोड़ दिया। अचानक कुत्तों के केबिन में पहुंचने से नगर पंचायत कार्यालय में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विरोध कर रहे पदाधिकारियों ने अधिकारियों की कथित निष्क्रियता पर नाराजगी जताई। इसी दौरान उन्होंने मुख्याधिकारी को नोटों की माला पहनाने की कोशिश भी की। घटना के बाद सरकारी कार्यालय में काफी देर तक हंगामे की स्थिति बनी रही। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शहर में आवारा कुत्तों की समस्या आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन रही है और प्रशासन को इस मामले में तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद यह मामला चर्चा में है। हालांकि, पूरे घटनाक्रम को लेकर नगर पंचायत प्रशासन का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।1