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डीएम के नाम पर फर्जी आईडी बनाकर ठगी करने का मामला आया सामने.
Aakash Srivastava
डीएम के नाम पर फर्जी आईडी बनाकर ठगी करने का मामला आया सामने.
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- ब्रेकिंग न्यूज : गोपालगंज में चल रही सिरिसिया भावना कप के विजेता बनी ईशान 11 मीरगंज हरपुर खेल मैदान पर सिरिसिया भावना कप सीजन–14 का फाइनल मुकाबला ईशान 11 मीरगंज और शोएब 11 महुअवां के बीच खेला गया। टॉस हारकर बैटिंग करने उतरी ईशान 11 कि टीम ने सलामी बल्लेबाज फहीम अनवर के 34 गेंद पर 80 रन और तारिक के 31 गेंद पर 87 रन के शानदार बल्लेबाजी के बल पर 8 विकेट पर 237 रनों का विशाल स्कोर खड़ा कर शोएब 11 को कठिन लक्ष्य दिया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी शोएब 11 महुअवां की टीम ने तरुण के 18 गेंद पर 50 रन और रेहान के 27 गेंदो पर 81 रनों की बदौलत लक्ष्य के करीब पहुंचकर 9 रनों से हार गई। टूर्नामेंट में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए फहीम अनवर को " प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट" और "आइकॉन प्लेयर" का पुरस्कार दिया गया, जबकि शानदार बल्लेबाजी के लिए रेहान गोल्डेन को "मैन ऑफ द मैच" का पुरस्कार दिया गया। मुख्य अतिथि देवी राम दुबे, स्थानीय मुखिया अजय सिंह और जदयू के प्रखंड अध्यक्ष तौहीद आलम उपस्थित रहे। मैच के अंपायर शाहिद जमाल सैफी और ई.परवेज आलम, कमेंट्री फारूक अहमद एवं सरवर खान ने किया।स्कोरिंग की जिम्मेदारी ई. विनय शर्मा एवं अशरफ अली ने निभाई। मौके पर अध्यक्ष कृष्ण कुमार पंडित, सचिव बब्लू सिंह, कोषाध्यक्ष मुस्ताक अहमद,सदस्य मन्नू सिंह, सतीश गुप्ता, देव जी गुप्ता, मो. अतिउल्लाह, विनय सोनी, सतीश सिंह एवं डब्लू आदि उपस्थित रहे...1
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- *मै हूँ हवा* मै तो हवा हूँ, तुम कैसे रोक पाओगे, मेरे रास्ते में पहरा लगाओगे, मेहसुस करोगे, छु न पाओगे। मैं हवा हूँ, जो हर जगह हूँ, नहीं है मेरा कोई आकार, नहीं है मेरा कोई रूप, लेकिन मैं हूँ, हर जगह मौजूद। मैं हवा हूँ, जो तुम्हारे बालों को छूती हूँ, तुम्हारे चेहरे पर मुस्कान लाती हूँ, मैं हवा हूँ, जो तुम्हारे दिल की आवाज़ हूँ, तुम्हारे सपनों को पूरा करती हूँ। मैं हवा हूँ, जो पहाड़ों से निकलती हूँ, समुद्रों से गुजरती हूँ, नदियों में बहती हूँ, मैं हवा हूँ, जो तुम्हारे पास आती हूँ, तुम्हारे दिल की बातें सुनती हूँ। मैं हवा हूँ, जो तुम्हारे साथ हूँ, तुम्हारे खुशियों में, तुम्हारे गम में, मैं हवा हूँ, जो तुम्हारे दिल की आवाज़ हूँ, तुम्हारे सपनों को पूरा करती हूँ। मै तो हवा हूँ, तुम कैसे रोक पाओगे, मेरे रास्ते में पहरा लगाओगे, मेहसुस करोगे, छु न पाओगे। मैं हवा हूँ, जो स्वतंत्र हूँ, नहीं है मेरा कोई बंधन, मैं हवा हूँ, जो हर जगह हूँ, नहीं है मेरा कोई आकार, नहीं है मेरा कोई रूप। *जय सियाराम जय हिंद जय भारत* *सर्वाधिकार सुरक्षित एवं अप्रकाशित मौलिक रचनाएँ* *अंतर्राष्ट्रीय* *हास्य कवि व्यंग्यकार* *अमन रंगेला "अमन" सनातनी* *सावनेर नागपुर (महाराष्ट्र)*4