बाराबंकी के फतेहपुर में एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कटघरा निवासी पीड़ित पिता ने बताया कि उनकी पुत्री नंदनी (काल्पनिक नाम) 23 मई 2026 की रात करीब 3 बजे घर से अचानक गायब हो गई। सुबह परिवार को उसके लापता होने का पता चला, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई। परिजनों ने सीतापुर के सिधौली निवासी अमन पुत्र राकेश पर आरोप लगाया है कि वह किशोरी को अपने साथ ले गया है। अमन रिश्तेदारी के कारण उनके घर आता-जाता था। घटना के बाद जब परिवार ने अमन से संपर्क करने की कोशिश की तो उसका मोबाइल फोन बंद मिला। ग्रामीणों ने भी घटना वाली रात अमन को गांव के आसपास देखा था। पीड़ित परिवार जब अमन के घर जानकारी लेने पहुंचा, तो आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने सहयोग करने के बजाय उनके साथ अभद्रता की और धमकी देकर भगा दिया। तहरीर में यह भी कहा गया है कि अमन के साथ राकेश पुत्र मैकू, उनकी पत्नी मुनायन और उपासना ने भी किशोरी को भगाने में मदद की है। पीड़ित ने पुलिस से अपनी बेटी की जल्द बरामदगी और सभी आरोपितों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अमित प्रताप सिंह ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस टीम किशोरी की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच की जा रही है, जल्द ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
बाराबंकी के फतेहपुर में एक 16 वर्षीय नाबालिग किशोरी को बहला-फुसलाकर भगा ले जाने का गंभीर आरोप सामने आया है। पीड़ित पिता की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कटघरा निवासी पीड़ित पिता ने बताया कि उनकी पुत्री नंदनी (काल्पनिक नाम) 23 मई 2026 की रात करीब 3 बजे घर से अचानक गायब हो गई। सुबह परिवार को उसके लापता होने का पता चला, जिसके बाद उसकी तलाश शुरू की गई। परिजनों ने सीतापुर के सिधौली निवासी अमन पुत्र राकेश पर आरोप लगाया है कि वह किशोरी को अपने साथ ले गया है। अमन रिश्तेदारी के कारण उनके घर आता-जाता था। घटना के बाद जब परिवार ने अमन से संपर्क करने की कोशिश की तो उसका मोबाइल फोन बंद मिला। ग्रामीणों ने भी घटना वाली रात अमन को गांव के आसपास देखा था। पीड़ित परिवार जब अमन के घर जानकारी लेने पहुंचा, तो आरोप है कि वहां मौजूद लोगों ने सहयोग करने के बजाय उनके साथ अभद्रता की और धमकी देकर भगा दिया। तहरीर में यह भी कहा गया है कि अमन के साथ राकेश पुत्र मैकू, उनकी पत्नी मुनायन और उपासना ने भी किशोरी को भगाने में मदद की है। पीड़ित ने पुलिस से अपनी बेटी की जल्द बरामदगी और सभी आरोपितों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक अमित प्रताप सिंह ने बताया कि प्राप्त तहरीर के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। उन्होंने आश्वासन दिया कि पुलिस टीम किशोरी की तलाश में जुटी है और मामले की गहन जांच की जा रही है, जल्द ही आवश्यक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
- जनपद बाराबंकी के नवाबगंज तहसील के बंकी ब्लॉक की ग्राम पंचायत सुरसंन्डा में जल जीवन मिशन योजना के तहत कराए जा रहे कार्यों में भारी लापरवाही सामने आई है, जिससे ग्रामीणों में गहरा रोष है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की सड़कें बेहद जर्जर हो चुकी हैं और लोगों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। आरोप है कि जेसीबी मशीन से सड़क को बीचों-बीच खोदकर काम अधूरा छोड़ दिया गया, जिससे मार्ग पूरी तरह खराब हो गया। यह जल मिशन कार्य वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, लेकिन वर्ष 2026 तक भी पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। इस स्थिति के कारण ग्रामीणों में जल मिशन अधिकारियों और संबंधित विभाग के प्रति काफी नाराजगी है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि यह कार्य जल मिशन अधिकारी लखन शिंदे और ठेकेदार पुनीत कुमार सिंह की देखरेख में कराया जा रहा था। वहीं, गांव में बनाई जा रही पानी की टंकी का निर्माण भी वर्षों से अधूरा पड़ा है; ग्रामीणों के अनुसार, लगभग 5 से 6 साल बीत जाने के बावजूद टंकी तैयार नहीं हुई है। निर्माण स्थल पर पड़ी सरिया में जंग लग चुकी है और मौरंग-गिट्टी जैसी सामग्री भी खराब हो रही है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि क्षेत्र के विधायक और सांसद भी आज तक मौके का निरीक्षण करने नहीं पहुंचे, जिससे लोगों में जनप्रतिनिधियों के प्रति भी रोष व्याप्त है। उनका कहना है कि सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात बदतर बने हुए हैं। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और जल्द से जल्द सड़क व अधूरे पड़े कार्यों को पूरा कराने की मांग की है।4
- एक संदेश में आगामी कल के लिए एक विशेष वीडियो देखने का आग्रह किया गया है, जिसका संबंध ‘सूरत मोदी’ से बताया गया है। इसके अतिरिक्त, उपयोगकर्ताओं से ‘करेन’ नामक किसी व्यक्ति को फॉलो करने की भी अपील की गई है।1
- बाराबंकी जनपद की नवाबगंज तहसील के खजूरगांव में प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए अवैध रूप से विकसित की जा रही प्लॉटिंग को ध्वस्त कर दिया है। यह अभियान अनधिकृत निर्माण के खिलाफ चलाया गया, जिसके तहत जॉइंट मजिस्ट्रेट और एसडीएम गुंजिता अग्रवाल के निर्देशों पर बुलडोजर का उपयोग कर कई गाटाओं पर विकसित अनधिकृत संरचनाओं को हटाया गया। यह अवैध प्लॉटिंग समर्थ इंफ्रा और गोल्डमार इंफ्रा नामक कंपनियों द्वारा तैयार की जा रही थी, जिन्होंने ग्राम खजूरगांव क्षेत्र में बिना किसी वैधानिक अनुमति के भूखंडों का विकास किया था। प्रशासन ने पहले इन विकासकर्ताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया था और नियत प्राधिकारी न्यायालय में मामले की सुनवाई के बाद ध्वस्तीकरण का आदेश पारित किया गया था। न्यायालय के आदेश के बावजूद, विकासकर्ताओं ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर अवैध प्लॉटिंग को नहीं हटाया। इसी अनुपालन में गुरुवार को यह ध्वस्तीकरण अभियान चलाया गया, जिसके तहत प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए अवैध निर्माण को हटा दिया।2
- बाराबंकी स्थित जिला महिला चिकित्सालय में कथित अवैध वसूली के आरोपों ने अब एक नया मोड़ ले लिया है। एक आशा कार्यकर्ता ने अस्पताल में प्रसव सेवाओं, जन्म प्रमाण पत्र और अन्य सुविधाओं के नाम पर धन उगाही के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं दूसरी ओर कई अन्य आशा कार्यकर्ताओं ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। फिलहाल यह पूरा मामला स्वास्थ्य विभाग की जांच प्रक्रिया के अधीन है और जांच रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार किया जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पूर्व एक आशा कार्यकर्ता ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रार्थना पत्र देकर यह शिकायत की थी कि जिला महिला चिकित्सालय में गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों से विभिन्न कार्यों के लिए पैसों की मांग की जाती है, जबकि अधिकांश सेवाएं सरकार द्वारा निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। इस शिकायत के सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और तुरंत जांच के आदेश दिए गए। इसके बाद गुरुवार को कई आशा कार्यकर्ता चिकित्सालय पहुंचीं और मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) कार्यालय में अपना पक्ष रखा। अधिकांश आशा कार्यकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी भी किसी प्रकार की अवैध वसूली या अनियमितता नहीं देखी है और न ही उन्हें ऐसी किसी घटना की जानकारी है। उनका कहना था कि वे लंबे समय से अस्पताल से जुड़ी सेवाएं दे रही हैं। चर्चा के दौरान, कुछ आशा कार्यकर्ताओं ने शिकायत करने वाली आशा कार्यकर्ता पर मरीजों को निजी अस्पतालों और क्लीनिकों की ओर भेजने में संलिप्त होने का आरोप भी लगाया, हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रदीप कुमार सिंह ने बताया कि लगाए गए आरोपों की गंभीरता को देखते हुए जांच कराई जा रही है। उन्होंने आश्वस्त किया कि जांच के दौरान यदि किसी व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है, तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी। डॉ. सिंह ने यह भी स्पष्ट किया कि अस्पताल में अल्ट्रासाउंड विशेषज्ञ की कमी के कारण कभी-कभी अतिरिक्त कार्यभार की स्थिति उत्पन्न होती है, लेकिन अस्पताल परिसर के भीतर किसी भी प्रकार की अवैध वसूली की जानकारी उनके संज्ञान में नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि बाहर किसी व्यक्ति द्वारा दलाली या धन उगाही की गतिविधि पाई जाती है, तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। यह मामला फिलहाल जांचाधीन है और स्वास्थ्य विभाग पूरे प्रकरण की गहनता से जांच कर रहा है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं, जिससे इस पूरे विवाद की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।3
- जनपद बाराबंकी की तहसील नवाबगंज के ब्लॉक बंकी की ग्राम पंचायत सुरसंन्डा में जल मिशन योजना के तहत चल रहे कार्यों में गंभीर लापरवाही सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव की सड़कें बेहद जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है। आरोप है कि जेसीबी मशीन से सड़कों को बीचों-बीच खोदकर काम अधूरा छोड़ दिया गया है, जिससे मार्ग पूरी तरह खराब हो गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जल मिशन का काम वर्ष 2022 में शुरू हुआ था, लेकिन वर्ष 2026 तक भी यह पूरा नहीं हो सका है। खराब रास्तों के कारण कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं। इस स्थिति से जल मिशन के अधिकारियों और संबंधित विभाग के प्रति ग्रामीणों में काफी नाराजगी है। लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि क्षेत्र के विधायक और सांसद ने आज तक मौके का निरीक्षण नहीं किया, जिससे जनप्रतिनिधियों के प्रति भी रोष व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के बड़े-बड़े दावों के बावजूद जमीनी हकीकत बदतर बनी हुई है। इसके अलावा, गांव में बनाई जा रही पानी की टंकी का निर्माण भी पिछले लगभग 5 से 6 सालों से अधूरा पड़ा है। ग्रामीणों का आरोप है कि इतने साल बीत जाने के बाद भी टंकी तैयार नहीं हो सकी है। निर्माण स्थल पर पड़ी सरिया में जंग लग चुकी है और मौरंग-गिट्टी जैसी सामग्री भी खराब हो रही है, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह कार्य जल मिशन के अधिकारी लखन शिंदे और ठेकेदार पुनीत कुमार सिंह की देखरेख में कराया जा रहा था। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और जल्द से जल्द सड़कों व अन्य अधूरे कार्यों को पूरा कराने की मांग की है।1
- बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे की एक महिला ने अपने बेटे के सऊदी अरब में कथित तौर पर लापता होने के मामले में स्थानीय सांसद से हस्तक्षेप की मांग की है। महिला का कहना है कि उनके बेटे को सऊदी अरब की सीआईडी पुलिस पूछताछ के लिए ले गई थी, जिसके बाद से उसका कोई संपर्क नहीं हो पाया है। मोहल्ला नालापार दक्षिणी-1, फतेहपुर निवासी सिराजुल खातून पत्नी मोहम्मद युसूफ ने इस संबंध में लोकसभा क्षेत्र बाराबंकी के सांसद तनुज पुनिया को एक प्रार्थना पत्र सौंपा है। सिराजुल खातून ने बताया कि उनका पुत्र इमामुद्दीन उर्फ इमाम लगभग तीन वर्ष पूर्व ड्राइवर के वर्क वीजा पर सऊदी अरब के मदीना क्षेत्र में रोजगार के लिए गया था। वर्क वीजा की अवधि समाप्त होने पर इमामुद्दीन तीन माह की छुट्टी पर भारत आया था और फिर 17 अक्टूबर 2025 को दोबारा सऊदी अरब लौटकर काम करने लगा था। परिजनों के अनुसार, 25 अप्रैल 2026 की सुबह करीब चार बजे सऊदी अरब से फोन पर उन्हें सूचना मिली कि इमामुद्दीन को वहां की सीआईडी पुलिस उसके कमरे से पूछताछ के लिए अपने साथ ले गई है। इस घटना के बाद से परिवार का उससे कोई संपर्क नहीं हो सका है। परिवार ने सऊदी अरब में मौजूद परिचितों और युवक के कफील (नियोक्ता) से भी संपर्क साधा, लेकिन लगभग 40 दिन बीत जाने के बाद भी इमामुद्दीन के संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई है। पुत्र के बारे में कोई खबर न मिलने से परिवार गहरे सदमे और चिंता में है, जिसके चलते मां ने सांसद से बेटे को वापस लाने की गुहार लगाई है।1
- बाराबंकी जनपद के स्वास्थ्य विभाग को अब डॉ. रंजन गौतम के रूप में नया नेतृत्व मिला है, जिन्होंने हाल ही में जिले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का कार्यभार ग्रहण कर लिया है। पदभार संभालने के तुरंत बाद, डॉ. गौतम ने जिले की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सुदृढ़, पारदर्शी और जनहितैषी बनाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। अपनी सर्वोच्च प्राथमिकताओं को स्पष्ट करते हुए डॉ. रंजन गौतम ने बताया कि जिले के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुनिश्चित करना, विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं का प्रभावी ढंग से क्रियान्वयन करना और मरीजों को समयबद्ध तथा गुणवत्तापूर्ण उपचार प्रदान करना उनके एजेंडे में सबसे ऊपर रहेगा। इससे पहले, डॉ. गौतम फर्रुखाबाद में अपर मुख्य चिकित्साधिकारी के पद पर तैनात थे, और उनके प्रशासनिक एवं स्वास्थ्य सेवा अनुभव को देखते हुए जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। कार्यभार संभालने के बाद, डॉ. रंजन गौतम ने तत्काल विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ एक परिचयात्मक बैठक की। इस दौरान उन्होंने जिले की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं की स्थिति, अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों, मरीजों को मिल रही सुविधाओं और स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। उन्होंने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सेवाओं में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आमजन को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने के लिए सभी को अपनी जिम्मेदारी के साथ कार्य करना होगा। नवागत सीएमओ ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि सरकार की जनकल्याणकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है। इसके लिए, अस्पतालों में दवाओं की पर्याप्त उपलब्धता, चिकित्सकों की नियमित उपस्थिति, बेहतर साफ-सफाई, जांच सुविधाओं का सुचारु संचालन और मरीजों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार तभी संभव है जब अधिकारी और कर्मचारी आपसी समन्वय और टीम भावना के साथ काम करें, और उन्होंने जनता को बेहतर सेवाएं प्रदान करने के लिए संवेदनशीलता और जवाबदेही के साथ कार्य करने पर जोर दिया। डॉ. गौतम ने अस्पतालों में आने वाले मरीजों के प्रति सकारात्मक व्यवहार अपनाने और उनकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के लिए भी निर्देशित किया। उनके पदभार ग्रहण करने से जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में नई ऊर्जा और गति आने की उम्मीद है।2
- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जनपद में पिछले साल सनसनीखेज महिला कांस्टेबल विमलेश पाल हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने मामले के मुख्य आरोपी, हरदोई में तैनात सिपाही इंद्रेश मौर्य की जमानत याचिका मंजूर कर ली है। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद बाराबंकी पुलिस की विवेचना और शव की पहचान प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। यह पूरा मामला जुलाई 2025 का है, जब बाराबंकी के सुबेहा थाने में तैनात महिला कांस्टेबल विमलेश पाल अचानक लापता हो गई थीं; उनकी ड्यूटी महादेवा मेले में लगी थी। लापता होने के कुछ दिनों बाद मसौली थाना क्षेत्र के बिंदौरा पुल के पास एक खेत की झाड़ियों से एक महिला का शव बरामद हुआ था, जिसकी पहचान विमलेश पाल के रूप में की गई थी। पुलिस ने दावा किया था कि विमलेश और सिपाही इंद्रेश मौर्य के बीच साल 2017 से प्रेम संबंध थे। विमलेश द्वारा बलात्कार का मुकदमा दर्ज कराने के बाद दोनों ने आर्य समाज मंदिर में कोर्ट मैरिज कर ली थी। हालांकि, पुलिस के अनुसार, शादी के बाद भी इंद्रेश उसे पत्नी का सामाजिक दर्जा देने और साथ रखने से बच रहा था। पुलिस की थ्योरी के मुताबिक, इसी विवाद और पैसों के लेन-देन से छुटकारा पाने के लिए इंद्रेश ने समीक्षा अधिकारी (RO) की परीक्षा का बहाना बनाकर लखनऊ से बाराबंकी आकर विमलेश के सिर पर वार कर उसकी बेरहमी से हत्या कर दी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष और अभियोजन के बीच तीखी बहस हुई, जिसमें ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पुलिस की पूरी थ्योरी को कमजोर कर दिया। सुनवाई में यह उजागर हुआ कि बरामद शव की पहचान और पुलिस द्वारा जुटाए गए साक्ष्यों में कुछ तकनीकी और फॉरेंसिक खामियां थीं, जिससे यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रहा था कि शव वास्तव में विमलेश पाल का ही था। इसके अलावा, पुलिस जिस तेजी से इसे 'ब्लाइंड मर्डर' बताते हुए खुलासा कर रही थी, अदालत में कड़ी से कड़ी जोड़ने में वह असमर्थ नजर आई। हाईकोर्ट ने हालांकि मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम टिप्पणी नहीं की है और स्पष्ट किया है कि निचली अदालत में इस मामले का विचारण जारी रहेगा। लेकिन प्रारंभिक साक्ष्यों की कमी और पहचान पर उठे सवालों को देखते हुए आरोपी को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया गया। एक पुलिसकर्मी की हत्या के मामले में दूसरे पुलिसकर्मी (पति) को इतनी जल्दी जमानत मिल जाना बाराबंकी पुलिस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। कानूनी जानकारों का कहना है कि पुलिस को ट्रायल कोर्ट में अपनी चार्जशीट और फॉरेंसिक सबूतों को बेहद मजबूती से पेश करना होगा, अन्यथा यह केस कमजोर पड़ सकता है। फिलहाल, इस आदेश के बाद यह मामला क्षेत्र में दोबारा चर्चा का विषय बन गया है।1
- उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के मसौली थाना क्षेत्र के बांसा में मंगलवार शाम उस समय हड़कंप मच गया, जब एक 22 वर्षीय युवक अचानक करीब 50 फीट ऊंचे हाईड्रो ट्रांसमिशन इलेक्ट्रिक टावर पर चढ़ गया। युवक को टावर पर चढ़ा देख आसपास के ग्रामीणों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिसके बाद घटना की सूचना तत्काल पुलिस को दी गई। करीब एक घंटे तक चले इस ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामे के दौरान पुलिस और स्थानीय लोगों ने युवक को लगातार समझाने का प्रयास किया। मसौली थाना क्षेत्र के ग्राम बांसा निवासी विशाल गौतम (22) पुत्र चंद्रिका प्रसाद, मंगलवार देर शाम मसौली-बांसा मार्ग पर स्थित एक तालाब के निकट लगे हाईड्रो ट्रांसमिशन इलेक्ट्रिक टावर पर चढ़ा था। प्राप्त जानकारी के अनुसार, विशाल गांव की ही एक युवती से प्रेम प्रसंग में था और हाल ही में इस संबंध को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद भी हुआ था। बताया जा रहा है कि युवक प्रेमिका से मिलने और बाइक चलाने पर लगाए गए प्रतिबंधों से काफी नाराज था। ग्रामीणों का कहना है कि युवती के परिजनों से कहासुनी के बाद से ही युवक मानसिक तनाव में दिख रहा था। स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि युवक को शराब पीने की आदत है और घटना के समय भी उसके नशे में होने की आशंका जताई जा रही है। काफी मान-मनौव्वल और समझाइश के बाद युवक किसी तरह टावर से नीचे उतरने को तैयार हुआ। युवक के सुरक्षित नीचे उतरते ही पुलिस ने उसे तत्काल हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी। इस घटना को बांसा गांव में प्रेम प्रसंग से जुड़ा एक ‘हाई वोल्टेज’ ड्रामा बताया जा रहा है, जिसने क्षेत्र में चिंता का माहौल पैदा कर दिया।1