चाईबासा के गोईलकेरा प्रखंड क्षेत्र में गोईलकेरा-मनोहरपुर मुख्य सड़क से आमझरण होते हुए कैरम, मिंडीसोया और गोयरा तक की 7.33 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले आठ वर्षों से अधूरी पड़ी है। लगभग ₹4.56 करोड़ की लागत से बन रही इस सड़क के निर्माण कार्य में संवेदक को लगभग ₹3 करोड़ की राशि का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन सड़क का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है। सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण क्षेत्र के निवासियों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल तक पहुँचाने में भी भारी कठिनाई हो रही है। इस समस्या से जूझ रहे सैकड़ों ग्रामीणों ने अब सड़क निर्माण की माँग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है। इसी क्रम में, ग्रामीणों ने चक्रधरपुर पहुँचकर विरोध मार्च निकाला और ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान, ग्रामीणों ने विभाग के कार्यपालक अभियंता को एक माँगपत्र सौंपते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि सड़क निर्माण पूरा करने पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे। जिला मुखिया संघ, चाईबासा के उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई ने भी आठ साल से अधूरी और जर्जर सड़क के निर्माण की माँग को लेकर ग्रामीणों के इस आंदोलन और कार्यालय घेराव का समर्थन किया है।
चाईबासा के गोईलकेरा प्रखंड क्षेत्र में गोईलकेरा-मनोहरपुर मुख्य सड़क से आमझरण होते हुए कैरम, मिंडीसोया और गोयरा तक की 7.33 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले आठ वर्षों से अधूरी पड़ी है। लगभग ₹4.56 करोड़ की लागत से बन रही इस सड़क के निर्माण कार्य में संवेदक को लगभग ₹3 करोड़ की राशि का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन सड़क का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है। सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण क्षेत्र के निवासियों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल तक पहुँचाने में भी भारी कठिनाई हो रही है। इस समस्या से जूझ रहे सैकड़ों ग्रामीणों ने अब सड़क निर्माण की माँग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है। इसी क्रम में, ग्रामीणों ने चक्रधरपुर पहुँचकर विरोध मार्च निकाला और ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान, ग्रामीणों ने विभाग के कार्यपालक अभियंता को एक माँगपत्र सौंपते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि सड़क निर्माण पूरा करने पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे। जिला मुखिया संघ, चाईबासा के उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई ने भी आठ साल से अधूरी और जर्जर सड़क के निर्माण की माँग को लेकर ग्रामीणों के इस आंदोलन और कार्यालय घेराव का समर्थन किया है।
- जमशेदपुर के चर्चित DD Bar के बाहर हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने आखिरकार न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया है। पुलिस ने इस आरोपी पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था और वह लंबे समय से पुलिस की पकड़ से दूर था। आरोपी ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती देते हुए कोर्ट में आत्मसमर्पण किया। अब पुलिस आरोपी को रिमांड पर लेकर घटना से जुड़े सभी पहलुओं पर गहन पूछताछ करेगी। जांच एजेंसियां हत्या के पीछे की मुख्य वजह, इस साजिश में शामिल अन्य लोगों की भूमिका और पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रिमांड के दौरान होने वाली पूछताछ से इस चर्चित हत्याकांड से जुड़े कई अहम खुलासे होने की संभावना है। मामले की जांच अभी जारी है।2
- पश्चिमी सिंहभूम के उपायुक्त के मार्गदर्शन में संचालित 'प्रोजेक्ट जागृति' के तहत 8 जुलाई, बुधवार को चक्रधरपुर अनुमंडल अस्पताल में एक स्वैच्छिक रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिसके परिणामस्वरूप कुल 67 यूनिट रक्त का संग्रह किया गया। यह रक्तदान अभियान प्रत्येक माह की 8 और 24 तारीख को आयोजित किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराना और आम जनता को स्वैच्छिक रक्तदान के प्रति जागरूक करना है। शिविर के दौरान रक्तदान के महत्व और इसके स्वास्थ्य लाभों को लेकर एक जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया गया, जिसमें लोगों को नियमित रूप से रक्तदान करने के लिए प्रेरित किया गया। शिक्षकों ने भी इस पहल में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, अपनी सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय संवेदनाओं का परिचय दिया। कार्यक्रम के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी और अनुमंडल चिकित्सा पदाधिकारी ने सभी रक्तदाताओं को कॉफी मग और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। अधिकारियों ने रक्तदाताओं के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि रक्तदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन देने का माध्यम है। अनुमंडल पदाधिकारी ने 'रक्तदान महादान है' पर जोर दिया और प्रत्येक स्वस्थ एवं पात्र व्यक्ति से नियमित रक्तदान करने का आह्वान किया, यह बताते हुए कि एक यूनिट रक्त किसी गंभीर मरीज की जान बचाने में सहायक हो सकता है। उन्होंने समाज के सभी वर्गों से प्रोजेक्ट जागृति जैसे जनहितकारी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लेने का भी आग्रह किया। इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक, मीडिया प्रतिनिधि और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। उपस्थित लोगों ने जिला प्रशासन की इस पहल की सराहना की और इसे समाज के हित में एक महत्वपूर्ण एवं प्रेरणादायी कदम बताया।1
- चर्चित डीडी बार हत्याकांड में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में हुए हिमांशु सिंह हत्याकांड के मुख्य आरोपी विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा, जिस पर पूर्वी सिंहभूम द्वारा दो लाख रुपये का इनाम घोषित था, ने बुधवार को जमशेदपुर सिविल कोर्ट स्थित सी.जी.एम. न्यायालय में आत्मसमर्पण कर दिया। विश्वनाथ मंडल उर्फ बोदरा ने बुधवार को पुलिस के सामने गिरफ्तार होने के बजाय सीधे जमशेदपुर सिविल कोर्ट पहुंचकर आत्मसमर्पण किया। आत्मसमर्पण के बाद न्यायालय ने कानूनी प्रक्रिया शुरू करते हुए उसे न्यायिक अभिरक्षा में भेजने की कार्रवाई की है। पुलिस अब आवश्यकता पड़ने पर अदालत से रिमांड की मांग कर आरोपी से पूछताछ कर सकती है।1
- भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशों के तहत चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत विभिन्न राज्यों के विधायकों और जनप्रतिनिधियों ने अपने गणना प्रपत्र भरे हैं। इसी क्रम में, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, उनकी पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना सोरेन, खरसावां विधायक दशरथ गागराई, चक्रधरपुर के विधायक सुखराम उरांव और अन्य क्षेत्रों के कई विधायकों व नेताओं ने स्वयं अपने फॉर्म जमा कर लोकतंत्र को मजबूत करने का संदेश दिया है। इन जनप्रतिनिधियों ने आम जनता से भी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की है। इस अभियान के अंतर्गत, अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर यह गणना प्रपत्र वितरित और एकत्रित कर रहे हैं। जनता से अपील की गई है कि जब अधिकारी उनके घर आएं, तो उन्हें सही जानकारी उपलब्ध कराएं। सभी पात्र मतदाताओं से अनुरोध किया गया है कि वे अपने मताधिकार को सुरक्षित करने के लिए अपना फॉर्म समय पर भरें। यह भी सलाह दी गई है कि प्रपत्र को स्वयं पूरी स्पष्टता और सही विवरण के साथ भरें और उस पर हस्ताक्षर अवश्य करें, अन्यथा नाम शामिल होने में समस्या आ सकती है। अलग-अलग क्षेत्रों में फॉर्म जमा करने की आखिरी तारीखें तय हैं, जैसे कई क्षेत्रों में 29 जुलाई तक अंतिम तिथि निर्धारित है, इसलिए बिना किसी विलंब के इसे जमा करना महत्वपूर्ण है। मतदाताओं से यह भी आग्रह किया गया है कि वे मतदाता सूची को पारदर्शी और मजबूत बनाने के इस अभियान में केवल आधिकारिक जानकारियों पर ही भरोसा करें और किसी भी अफवाह से बचें।1
- मौजूदा समय में टेक्नोलॉजी ने झारखंड की असलियत उजागर की है, जिससे यह साफ होता है कि राज्य किस दिशा में आगे बढ़ रहा है। पोस्ट के अनुसार, झारखंड 'घूसखोरी' में चौथे स्थान पर है, और इस स्थिति का कारण कुछ लालची लोगों को बताया गया है। इसमें कड़े शब्दों में कहा गया है कि इतिहास गवाह है, ऐसे लोगों को कहीं न कहीं अपने कृत्यों का हिसाब देना ही होगा।2
- चाईबासा के गोईलकेरा प्रखंड क्षेत्र में गोईलकेरा-मनोहरपुर मुख्य सड़क से आमझरण होते हुए कैरम, मिंडीसोया और गोयरा तक की 7.33 किलोमीटर लंबी सड़क पिछले आठ वर्षों से अधूरी पड़ी है। लगभग ₹4.56 करोड़ की लागत से बन रही इस सड़क के निर्माण कार्य में संवेदक को लगभग ₹3 करोड़ की राशि का भुगतान भी हो चुका है, लेकिन सड़क का काम अभी भी पूरा नहीं हुआ है। सड़क निर्माण अधूरा होने के कारण क्षेत्र के निवासियों को आवागमन में गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे बच्चों को स्कूल जाने और मरीजों को अस्पताल तक पहुँचाने में भी भारी कठिनाई हो रही है। इस समस्या से जूझ रहे सैकड़ों ग्रामीणों ने अब सड़क निर्माण की माँग को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है। इसी क्रम में, ग्रामीणों ने चक्रधरपुर पहुँचकर विरोध मार्च निकाला और ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय का घेराव किया। इस दौरान, ग्रामीणों ने विभाग के कार्यपालक अभियंता को एक माँगपत्र सौंपते हुए कड़ी चेतावनी दी कि यदि सड़क निर्माण पूरा करने पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं की गई, तो ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ फिर से बड़ा आंदोलन करेंगे। जिला मुखिया संघ, चाईबासा के उपाध्यक्ष डॉ. दिनेश चंद्र बोयपाई ने भी आठ साल से अधूरी और जर्जर सड़क के निर्माण की माँग को लेकर ग्रामीणों के इस आंदोलन और कार्यालय घेराव का समर्थन किया है।1
- सरायकेला अनुमंडल कार्यालय के सभागार कक्ष में आगामी रथ यात्रा 2026 के अवसर पर विधि व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। यह बैठक विशेष रूप से रथ यात्रा के दौरान कानून और शांति व्यवस्था के सुचारु संधारण को सुनिश्चित करने हेतु बुलाई गई थी।4