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- गुलखेड़ी में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन छीपाबड़ौद - राजस्थान की तहसील छीपाबड़ौद गुलखेड़ी में चल रही सप्त दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन व्यासपीठ से बोलते हुए अयोध्या से पधारे पूज्य जगतगुरु ओम प्रपन्नाचार्य मानस किंकर जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति को सब प्रकार का आचरण भगवान के आश्रित होकर करना चाहिए। कथा के प्रसंग में महाराज जी ने भक्त ध्रुव का आदर्श चरित्र प्रहलाद जी का चरित्र और इसी के साथ महाराज जडभरत के द्वारा सिंधुवीर राजा रहूगण को दिए गए उपदेश का व्याख्यान महाराज श्री के द्वारा विस्तृत रूप से किया गया। महाराज जी ने बोलते हुए कहा कि जब व्यक्ति अधर्म के मार्ग पर चलता है तो उच्च पद पर होने के बाद भी उसका पतन निश्चित हो जाता है। कथा मे यह भी प्रसंग आया की राजा रहूगण जो अपने अहंकार के वशीभूत होकर संत भरत को अपनी पालकी में जोड़ दिया था जिसके कारण उसका पतन हुआ और भरत जी के उपदेश को पाकर को पुनः अपने उसी आदर्श पद को प्राप्त हुआ। आज के प्रसंग में महत्वपूर्ण पशु योनि में जन्म लेने वाला हाथी और ग्राह जो पूर्व जन्म के हुहू नाम के गंधर्व और पांडव नाम के राजा थे यह दोनों श्राप के कारण पशु योनि में आए, जिस समय सरोवर के जल में ग्राह के रूप में पांडु नाम के राजा के हाथी को पकड़ा तो हाथी की पुकार सुनकर भगवान श्री नारायण गरुड़ छोड़कर भक्त की पुकार पर दौड़ते हुए आए और ग्राह को समाप्त कर गज के प्राण बचाए । इससे यह स्पष्ट होता है कि जब भी व्यक्ति आर्त पुकार से भगवान को पुकारता है तो भगवान स्वयं आकर उसकी सब प्रकार से रक्षा करते हैं। कल की कथा जो चतुर्थ दिवस की होगी इसमें श्री राम जी का जन्म और श्री कृष्ण जी के जन्म पर प्रवचन किया जाएगा और राम कथा का प्रवचन भी होगा।3