हिन्दी भाषा को समर्पित काव्य गोष्ठी आयोजित हिन्दी की समृद्धि समावेशी लोक के द्वंद्वों के समाधान में है": प्रो. अमर सिंह अपनी भाषा को खोना खुद के वजूद को खो देना है ": अवधेश तिवारी छिंदवाड़ा: म. प्र. आंचलिक साहित्यकार परिषद छिंदवाड़ा की हिन्दी भाषा को समर्पित संकट मोचन हनुमान मंदिर नरसिंहपुर रोड छिंदवाड़ा में आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि रतनाकर रतन ने कविता को क्रांतिकारी संवेदनाओं से अभूतपूर्व बदलाव का एक जरिया बताया। पूर्व आकाशवाणी उद्घोषक अवधेश तिवारी ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपनी भाषा को खोना खुद के वजूद को खोकर पहचान के संकट को निमंत्रण देने जैसा है। प्रो. अमर सिंह ने हिन्दी भाषा की भावी समृद्धि को सर्वहारा वर्ग के द्वंद्वों के वैचारिक समाधान में निहित बताया। वरिष्ठ कवि राजेंद्र चौबे ने "मुंह लगे कौन हवाओं के इसलिए, ओट में जलता है मिट्टी का दीया", कहकर काव्य अभिव्यक्ति का अनूठा उदाहरण पेश किया। सौंसर से पधारी कवयित्री श्रीमती अन्नू कामोने ने "अपनी आँखों से अश्क बहाया न करो, मैं आ नहीं सकता, अपने को सताया न करो", ग़ज़ल पढ़कर हिन्दी भाषा को नमन किया। वरिष्ठ समीक्षक अशोक जैन ने "सांसें चलने तक जीना है, सच है तेरा, मेरा भी है, सांझ ढले पक्षी उड़ जाना, अंतिम यही कहानी बाबा", कविता से आध्यात्मिक होने पर बल दिया। श्रीमती ज्योति गुप्ता ने "तुमने हमको कांटे सौंपे, हमने तुमको गुल सौंपा था, तुमने दरिया मोड़ दिए थे, हमने फिर से पुल सौंपा था", काव्य पंक्तियों से विषम हालातों में भी फर्ज निर्वहन को रेखांकित किया। उम्दा कवि ओमप्रकाश नयन ने अपनी रचना "अलसाई पलकों पर, वीणा का पहरा देता हूं, अनुभूति के उद्गारों से वाल्मीकि रामायण रच जाता है", रचना सौंदर्य का अनूठा नमूना प्रस्तुत किया। श्रीमती मोहिता मुकेश कमलेंदु ने अपनी कविता"विचार हैं गहने मेरे, उमंग है मेरा श्रृगांर, बोली है झुमकी मेरी, बिंदी में है भाषा हिंदी", पढ़कर हिन्दी के प्रति अंतर्निहित प्रेम को उजागर किया। युवा कवयित्री हिना खान ने अपनी काव्य रचना "बेखौफ जिंदगी की परेशानियों से था, एक सिक्के में सारी खुशियां थी, क्या हुआ हजारा बचपन गरीब था", से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वात्सल्य कवि प्रभूदयाल श्रीवास्तव ने "पूजा के कमरे में घंटी की टुन टुन, दादा दादी का कंचन सा मन, उनसे जाकर दुआएं पाओ, अरे भाई थोड़ा हँसो, मुस्कराओ", ध्वनि अलंकार की एक अद्भुत बानगी प्रस्तुत की। सविता श्रीवास्तव ने "रिम झिम फुहारों का, झिलमिल सितारों का अद्भुत संसार", नंद कुमार दीक्षित ने "हमने खाई है कसम, एक दीया जलाने की" और रामलाल सराठे ने अपनी रचना "जय हिंद लिखो, जय गान लिखो, युग जननी का यश गान लिखो, अभिमान करें सब जनम जनम, कवि ऐसा हिंदुस्तान लिखो", पढ़कर सभी श्रोताओं में देशभक्ति का रस उड़ेल दिया। राजेंद्र यादव ने अपनी कविता यों पढ़ी: "होती आई, ज़िन्दगी में, भूल देखें, फिर किताबों में दबे, वो फूल देखें।, पुष्प हमने भी बिछाए, अक्सर उनकी राह में,पाँव में मेरे चुभोने, जिनके कर में, शूल देखे"। वरिष्ठ कवि नेमीचंद व्योम ने अपनी संस्कृत भाषा में और हैदर अली ने विरह की अभिव्यक्ति से सराबोर अपनी कविता पढ़ी। गोष्ठी का मंच संचालन हिना खान ने अपने अनूठे अंदाज में किया।
हिन्दी भाषा को समर्पित काव्य गोष्ठी आयोजित हिन्दी की समृद्धि समावेशी लोक के द्वंद्वों के समाधान में है": प्रो. अमर सिंह अपनी भाषा को खोना खुद के वजूद को खो देना है ": अवधेश तिवारी छिंदवाड़ा: म. प्र. आंचलिक साहित्यकार परिषद छिंदवाड़ा की हिन्दी भाषा को समर्पित संकट मोचन हनुमान मंदिर नरसिंहपुर रोड छिंदवाड़ा में आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि रतनाकर रतन ने कविता को क्रांतिकारी संवेदनाओं से अभूतपूर्व बदलाव का एक जरिया बताया। पूर्व आकाशवाणी उद्घोषक अवधेश तिवारी ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपनी भाषा को खोना खुद के वजूद को खोकर पहचान के संकट को निमंत्रण देने जैसा है। प्रो. अमर सिंह ने हिन्दी भाषा की भावी समृद्धि को सर्वहारा वर्ग के द्वंद्वों के वैचारिक समाधान में निहित बताया। वरिष्ठ
कवि राजेंद्र चौबे ने "मुंह लगे कौन हवाओं के इसलिए, ओट में जलता है मिट्टी का दीया", कहकर काव्य अभिव्यक्ति का अनूठा उदाहरण पेश किया। सौंसर से पधारी कवयित्री श्रीमती अन्नू कामोने ने "अपनी आँखों से अश्क बहाया न करो, मैं आ नहीं सकता, अपने को सताया न करो", ग़ज़ल पढ़कर हिन्दी भाषा को नमन किया। वरिष्ठ समीक्षक अशोक जैन ने "सांसें चलने तक जीना है, सच है तेरा, मेरा भी है, सांझ ढले पक्षी उड़ जाना, अंतिम यही कहानी बाबा", कविता से आध्यात्मिक होने पर बल दिया। श्रीमती ज्योति गुप्ता ने "तुमने हमको कांटे सौंपे, हमने तुमको गुल सौंपा था, तुमने दरिया मोड़ दिए थे, हमने फिर से पुल सौंपा था", काव्य पंक्तियों से विषम हालातों में भी फर्ज निर्वहन को रेखांकित किया। उम्दा कवि ओमप्रकाश नयन
ने अपनी रचना "अलसाई पलकों पर, वीणा का पहरा देता हूं, अनुभूति के उद्गारों से वाल्मीकि रामायण रच जाता है", रचना सौंदर्य का अनूठा नमूना प्रस्तुत किया। श्रीमती मोहिता मुकेश कमलेंदु ने अपनी कविता"विचार हैं गहने मेरे, उमंग है मेरा श्रृगांर, बोली है झुमकी मेरी, बिंदी में है भाषा हिंदी", पढ़कर हिन्दी के प्रति अंतर्निहित प्रेम को उजागर किया। युवा कवयित्री हिना खान ने अपनी काव्य रचना "बेखौफ जिंदगी की परेशानियों से था, एक सिक्के में सारी खुशियां थी, क्या हुआ हजारा बचपन गरीब था", से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वात्सल्य कवि प्रभूदयाल श्रीवास्तव ने "पूजा के कमरे में घंटी की टुन टुन, दादा दादी का कंचन सा मन, उनसे जाकर दुआएं पाओ, अरे भाई थोड़ा हँसो, मुस्कराओ", ध्वनि अलंकार की एक अद्भुत बानगी प्रस्तुत की। सविता श्रीवास्तव
ने "रिम झिम फुहारों का, झिलमिल सितारों का अद्भुत संसार", नंद कुमार दीक्षित ने "हमने खाई है कसम, एक दीया जलाने की" और रामलाल सराठे ने अपनी रचना "जय हिंद लिखो, जय गान लिखो, युग जननी का यश गान लिखो, अभिमान करें सब जनम जनम, कवि ऐसा हिंदुस्तान लिखो", पढ़कर सभी श्रोताओं में देशभक्ति का रस उड़ेल दिया। राजेंद्र यादव ने अपनी कविता यों पढ़ी: "होती आई, ज़िन्दगी में, भूल देखें, फिर किताबों में दबे, वो फूल देखें।, पुष्प हमने भी बिछाए, अक्सर उनकी राह में,पाँव में मेरे चुभोने, जिनके कर में, शूल देखे"। वरिष्ठ कवि नेमीचंद व्योम ने अपनी संस्कृत भाषा में और हैदर अली ने विरह की अभिव्यक्ति से सराबोर अपनी कविता पढ़ी। गोष्ठी का मंच संचालन हिना खान ने अपने अनूठे अंदाज में किया।
- पिंडरई डबीर में सजा कुश्ती का महासंग्राम, नामी पहलवानों ने दिखाया दमखम मुख्य ईनामी कुश्ती में 15,001 रुपए का पुरस्कार, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के पहलवानों ने लिया हिस्सा सिंगोड़ी /पिंडरई डबीर:- अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिंडरई डबीर में सोमवार को बजरंग मंदिर हाईवे मेन रोड पर पारंपरिक भारतीय कुश्ती का भव्य विशाल ईनामी दंगल संपन्न हुआ। सार्वजनिक दंगल समिति ग्राम पिंडरई डबीर के तत्वावधान में आयोजित इस दंगल में देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नामी पहलवानों ने मिट्टी के अखाड़े में अपने दमखम और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन किया। रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और ग्रामीणजन पहुंचे। दोपहर 1 बजे से शुरू हुए दंगल में महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के देवास, इंदौर, जबलपुर, सिवनी, बैतूल, नरसिंहपुर और सागर सहित विभिन्न जिलों से आए पहलवानों ने जोर-आजमाइश की। पहलवानों के दांव-पेंच, चित-पट और शानदार कुश्ती कौशल ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। अखाड़े में पहलवानों की हुंकार के साथ दर्शकों ने तालियों और उत्साहवर्धन से मुकाबलों का आनंद लिया। रेफरी के रूप में बंटी पांडे और रमेश पहलवान ने कुश्ती लड़ाई। 15,001 रुपए की मुख्य ईनामी कुश्ती बनी आकर्षण का केंद्र दंगल का मुख्य आकर्षण 201 रुपए से लेकर 15,001 रुपए तक की ईनामी कुश्तियां रहीं। मुख्य ईनामी कुश्ती में पहलवानों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इसके अलावा अन्य मुकाबलों में भी आकर्षक पुरस्कार रखे गए, जिससे पहलवानों का उत्साह बढ़ा। दर्शकों ने रोमांचक कुश्तियों का जमकर आनंद लिया। गणमान्य अतिथियों ने बढ़ाया पहलवानों का उत्साह आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता एवं पूर्व अमरवाड़ा विधानसभा प्रभारी उत्तम सिंह ठाकुर, विशिष्ट अतिथि धीरन शाह इवनाती एवं जिला पंचायत सदस्य चम्पालाल कुर्चे तथा विशेष अतिथि धन्नू धुर्वे , सरपंच विजय पटेल , विजय डेहरिया, महेश धुर्वे, संतोष धुर्वे, नरेंद्र धुर्वे,रवि काकोड़िया सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक गण और समिति के समस्त सदस्यगण मुख्य रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए भारतीय कुश्ती की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ऐसे आयोजनों की सराहना की। पारंपरिक खेल को जीवंत रखने का प्रयास सार्वजनिक दंगल समिति पिंडरई डबीर द्वारा प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित किया जाने वाला यह दंगल क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। आयोजन समिति का उद्देश्य ग्रामीण अंचल में पारंपरिक भारतीय कुश्ती को बढ़ावा देना और युवा पहलवानों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर उपलब्ध कराना है। दंगल के सफल आयोजन पर समिति ने सभी पहलवानों, अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया है। पिंडरई डबीर में सजा कुश्ती का महासंग्राम, नामी पहलवानों ने दिखाया दमखम मुख्य ईनामी कुश्ती में 15,001 रुपए का पुरस्कार, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के पहलवानों ने लिया हिस्सा सिंगोड़ी /पिंडरई डबीर:- अमरवाड़ा विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पिंडरई डबीर में सोमवार को बजरंग मंदिर हाईवे मेन रोड पर पारंपरिक भारतीय कुश्ती का भव्य विशाल ईनामी दंगल संपन्न हुआ। सार्वजनिक दंगल समिति ग्राम पिंडरई डबीर के तत्वावधान में आयोजित इस दंगल में देश-प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नामी पहलवानों ने मिट्टी के अखाड़े में अपने दमखम और कुश्ती कौशल का प्रदर्शन किया। रोमांचक मुकाबलों को देखने के लिए बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और ग्रामीणजन पहुंचे। दोपहर 1 बजे से शुरू हुए दंगल में महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के देवास, इंदौर, जबलपुर, सिवनी, बैतूल, नरसिंहपुर और सागर सहित विभिन्न जिलों से आए पहलवानों ने जोर-आजमाइश की। पहलवानों के दांव-पेंच, चित-पट और शानदार कुश्ती कौशल ने दर्शकों में उत्साह भर दिया। अखाड़े में पहलवानों की हुंकार के साथ दर्शकों ने तालियों और उत्साहवर्धन से मुकाबलों का आनंद लिया। रेफरी के रूप में बंटी पांडे और रमेश पहलवान ने कुश्ती लड़ाई। 15,001 रुपए की मुख्य ईनामी कुश्ती बनी आकर्षण का केंद्र दंगल का मुख्य आकर्षण 201 रुपए से लेकर 15,001 रुपए तक की ईनामी कुश्तियां रहीं। मुख्य ईनामी कुश्ती में पहलवानों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। इसके अलावा अन्य मुकाबलों में भी आकर्षक पुरस्कार रखे गए, जिससे पहलवानों का उत्साह बढ़ा। दर्शकों ने रोमांचक कुश्तियों का जमकर आनंद लिया। गणमान्य अतिथियों ने बढ़ाया पहलवानों का उत्साह आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा नेता एवं पूर्व अमरवाड़ा विधानसभा प्रभारी उत्तम सिंह ठाकुर, विशिष्ट अतिथि धीरन शाह इवनाती एवं जिला पंचायत सदस्य चम्पालाल कुर्चे तथा विशेष अतिथि धन्नू धुर्वे , सरपंच विजय पटेल , विजय डेहरिया, महेश धुर्वे, संतोष धुर्वे, नरेंद्र धुर्वे,रवि काकोड़िया सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिक गण और समिति के समस्त सदस्यगण मुख्य रूप से उपस्थित रहे। अतिथियों ने पहलवानों का उत्साहवर्धन करते हुए भारतीय कुश्ती की परंपरा को आगे बढ़ाने वाले ऐसे आयोजनों की सराहना की। पारंपरिक खेल को जीवंत रखने का प्रयास सार्वजनिक दंगल समिति पिंडरई डबीर द्वारा प्रतिवर्ष गणेश चतुर्थी के अवसर पर आयोजित किया जाने वाला यह दंगल क्षेत्र में विशेष पहचान रखता है। आयोजन समिति का उद्देश्य ग्रामीण अंचल में पारंपरिक भारतीय कुश्ती को बढ़ावा देना और युवा पहलवानों को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर उपलब्ध कराना है। दंगल के सफल आयोजन पर समिति ने सभी पहलवानों, अतिथियों और दर्शकों का आभार व्यक्त किया है।1
- हिन्दी भाषा को समर्पित काव्य गोष्ठी आयोजित हिन्दी की समृद्धि समावेशी लोक के द्वंद्वों के समाधान में है": प्रो. अमर सिंह अपनी भाषा को खोना खुद के वजूद को खो देना है ": अवधेश तिवारी छिंदवाड़ा: म. प्र. आंचलिक साहित्यकार परिषद छिंदवाड़ा की हिन्दी भाषा को समर्पित संकट मोचन हनुमान मंदिर नरसिंहपुर रोड छिंदवाड़ा में आयोजित काव्य गोष्ठी में वरिष्ठ कवि रतनाकर रतन ने कविता को क्रांतिकारी संवेदनाओं से अभूतपूर्व बदलाव का एक जरिया बताया। पूर्व आकाशवाणी उद्घोषक अवधेश तिवारी ने हिन्दी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अपनी भाषा को खोना खुद के वजूद को खोकर पहचान के संकट को निमंत्रण देने जैसा है। प्रो. अमर सिंह ने हिन्दी भाषा की भावी समृद्धि को सर्वहारा वर्ग के द्वंद्वों के वैचारिक समाधान में निहित बताया। वरिष्ठ कवि राजेंद्र चौबे ने "मुंह लगे कौन हवाओं के इसलिए, ओट में जलता है मिट्टी का दीया", कहकर काव्य अभिव्यक्ति का अनूठा उदाहरण पेश किया। सौंसर से पधारी कवयित्री श्रीमती अन्नू कामोने ने "अपनी आँखों से अश्क बहाया न करो, मैं आ नहीं सकता, अपने को सताया न करो", ग़ज़ल पढ़कर हिन्दी भाषा को नमन किया। वरिष्ठ समीक्षक अशोक जैन ने "सांसें चलने तक जीना है, सच है तेरा, मेरा भी है, सांझ ढले पक्षी उड़ जाना, अंतिम यही कहानी बाबा", कविता से आध्यात्मिक होने पर बल दिया। श्रीमती ज्योति गुप्ता ने "तुमने हमको कांटे सौंपे, हमने तुमको गुल सौंपा था, तुमने दरिया मोड़ दिए थे, हमने फिर से पुल सौंपा था", काव्य पंक्तियों से विषम हालातों में भी फर्ज निर्वहन को रेखांकित किया। उम्दा कवि ओमप्रकाश नयन ने अपनी रचना "अलसाई पलकों पर, वीणा का पहरा देता हूं, अनुभूति के उद्गारों से वाल्मीकि रामायण रच जाता है", रचना सौंदर्य का अनूठा नमूना प्रस्तुत किया। श्रीमती मोहिता मुकेश कमलेंदु ने अपनी कविता"विचार हैं गहने मेरे, उमंग है मेरा श्रृगांर, बोली है झुमकी मेरी, बिंदी में है भाषा हिंदी", पढ़कर हिन्दी के प्रति अंतर्निहित प्रेम को उजागर किया। युवा कवयित्री हिना खान ने अपनी काव्य रचना "बेखौफ जिंदगी की परेशानियों से था, एक सिक्के में सारी खुशियां थी, क्या हुआ हजारा बचपन गरीब था", से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। वात्सल्य कवि प्रभूदयाल श्रीवास्तव ने "पूजा के कमरे में घंटी की टुन टुन, दादा दादी का कंचन सा मन, उनसे जाकर दुआएं पाओ, अरे भाई थोड़ा हँसो, मुस्कराओ", ध्वनि अलंकार की एक अद्भुत बानगी प्रस्तुत की। सविता श्रीवास्तव ने "रिम झिम फुहारों का, झिलमिल सितारों का अद्भुत संसार", नंद कुमार दीक्षित ने "हमने खाई है कसम, एक दीया जलाने की" और रामलाल सराठे ने अपनी रचना "जय हिंद लिखो, जय गान लिखो, युग जननी का यश गान लिखो, अभिमान करें सब जनम जनम, कवि ऐसा हिंदुस्तान लिखो", पढ़कर सभी श्रोताओं में देशभक्ति का रस उड़ेल दिया। राजेंद्र यादव ने अपनी कविता यों पढ़ी: "होती आई, ज़िन्दगी में, भूल देखें, फिर किताबों में दबे, वो फूल देखें।, पुष्प हमने भी बिछाए, अक्सर उनकी राह में,पाँव में मेरे चुभोने, जिनके कर में, शूल देखे"। वरिष्ठ कवि नेमीचंद व्योम ने अपनी संस्कृत भाषा में और हैदर अली ने विरह की अभिव्यक्ति से सराबोर अपनी कविता पढ़ी। गोष्ठी का मंच संचालन हिना खान ने अपने अनूठे अंदाज में किया।4
- हिंदी दिवस विशेष भारत के अलावा विदेशों में भी में पाठ्यक्रम कोर्स कराए जा रहे हैं हिंदी दिवस विशेष में आप सभी के लिए लाए हैं एक संकलन जिसमें की विदेश की धरती में भी हमारे देश की मूल भाषा हिंदी को अपनाया जा रहा है लेकिन भारत में ही कई राज्य ऐसे हैं जो हिंदी भाषा का विरोध करते हैं दक्षिण प्रांत तरफ जाते हैं तो वहां हिंदी भाषा वालों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है तथा राज्य हिंदी भाषा को भी मानने से इनकार करता है जबकि विदेश तकलीफ और जर्मनी स्विट्जरलैंड मलेशिया में भारतीय संस्कृति की सभ्यता और भारत की भाषा को अपनाया जा रहा है यह परिवर्तन हमारे संस्कृति की गरिमा को बढ़ाता है आप सभी को हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं1
- छिंदवाड़ा की कुकड़ी खपा वाटरफॉल में अचानक पानी बढ़ने से नागपुर से आए युवक फसे रेस्क्यू टीम ने बताई जान छिंदवाड़ा के मोहखेड़ थाना क्षेत्र के *कुकड़ीखापा वाटरफॉल* में रविवार को बड़ा हादसा टल गया। नागपुर से घूमने आए श्याम बोरकर,अथर्व,मनीष और सतीश फोटो-वीडियो बनाने के लिए नीचे चट्टानों तक उतर गए।अचानक वाटरफॉल का जलस्तर बढ़ गया और चारों तरफ पानी-पानी हो गया।बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। करीब *150 फीट ऊपर से पानी गिरता रहा* और चारों एक चट्टान पर बैठकर मदद का इंतजार करते रहे। दूसरे पर्यटकों ने देखा तो तुरंत पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद *SDERF की टीम* मौके पर पहुंची और चारों युवकों को सकुशल रेस्क्यू किया। *⚠️ अपील:* बरसात में वाटरफॉल के नीचे चट्टानों तक बिल्कुल न जाएं। 2 मिनट की रील के लिए जान जोखिम में न डालें। जलस्तर कब बढ़ जाए पता नहीं चलता। क्या आप भी कुकड़ीखापा गए हो? कमेंट में बताओ।3
- छिंदवाड़ा में बड़ा हादसा टला छिंदवाड़ा छिंदवाड़ा जिले के अंतर्गत SDERF टीम की तत्परता और साहस से बची 4 युवाओं की जान। कुकड़ीखापा वॉटरफॉल में 150 फीट गहराई में फंसे नागपुर के 4 युवकों को SDERF टीम ने रस्सी के सहारे सकुशल बाहर निकाला। बारिश में फिसलने से चारों गहरी खाई में फंस गए थे। MP Police की इस बहादुरी को सलाम! 🇮🇳1
- तामिया विकासखंड की एक्सक्लूसिव स्टोरी छिंदवाड़ा मध्य प्रदेश तामिया विकासखंड में विकास के दावों की खुली पोल... 2 महीने से बिना भवन के चल रही प्राथमिक शाला, खेत में बने कच्चे मकान में पढ़ने को मजबूर मासूम छिंदवाड़ा/तामिया। बीजाढाना तामिया... नाम सुनते ही मन में प्राकृतिक सौंदर्य, रहस्यमयी घाटियां और देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की तस्वीर उभर आती है। पर्यटन और विकास के नाम पर यहां लाखों-करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन इन दावों की जमीनी हकीकत क्या है, इसका खुलासा करती है हमारी यह खबर तामिया विकासखंड जी जनपद पंचायत अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत चोपना की खूबसूरत वादियों के बीच बसे ग्राम बीजाढाना में संचालित शासकीय प्राथमिक बीजा ढाना आज भी अपने भवन का इंतजार कर रही है। 2 महीने से मासूम बच्चे बिना स्थायी स्कूल भवन के शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं। समय बदला, सरकारें बदलीं, अधिकारी आए और चले गए, लेकिन इस स्कूल की तस्वीर नहीं बदली। ग्रामीणों का कहना है प्रशासनिक अधिकारी भी लगातार क्षेत्र का दौरा करते हैं, लेकिन शिक्षा व्यवस्था की इस गंभीर समस्या पर किसी का ध्यान नहीं गया। पिछले सालों से जन शिक्षक द्वारा ओर ग्रामीणों द्वारा स्कूल भवन की मांग की जा रही हे लेकिन स्कूल भवन बनाने की दिशा में आज तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। बीजाढाना जैसे दूरस्थ क्षेत्र में बच्चों की संख्या भले कम हो, लेकिन शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का समान अधिकार है। केंद्र और राज्य सरकार आदिवासी अंचलों में शिक्षा के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही हैं। प्रधानमंत्री जनमन योजना सहित विभिन्न योजनाओं के तहत करोड़ों रुपये का बजट भी स्वीकृत किया जा रहा है, लेकिन चोपना ग्राम पंचायत के ग्राम बीजा ढाना गांव की जमीनी तस्वीर सरकारी दावों से बिल्कुल अलग नजर आती है।सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पर्यटन और विकास के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो आखिर इन मासूम बच्चों के लिए एक स्कूल भवन क्यों नहीं बन पाया जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता आखिर कब खत्म होगी जब पत्रकारों की टीम इस गांव पहुंची तब वहां की वास्तविक स्थिति को कैमरे में कैद किया। जब इस बारे में स्कूल में पढ़ा रहे अतिथि शिक्षकों से पूछा गया को यह स्कूल यहां क्यों लगाया जा रहा हे तो उन्होंने बताया कि पुराने स्कूल की हालत जर्जर हे वह कभी भी गिर सकता हे इसी को देखते हुए ग्राम वासियों से से बात करके इस कच्चे मकान में यह स्कूल लगाया जा रहा हे वही जब इस बारे में जनशिक्षक दिलीप भारती से बात की गई तो उन्होंने बताया कि हमने कई उच्च अधिकारियों को इस बारे में जानकारी दिए हे लेकिन उन्होंने अभी तक इस ओर ध्यान नहीं दिया हे ग्रामीणों ओर जनशिक्षक ने बताया कि कई बार ग्राम पंचायत चोपना के सचिव को ग्राम सभा में भी स्कूल भवन की मरम्मत करने को कहा लेकिन उन्होंने आज तक हमारी कोई बात नहीं सुनी जनशिक्षक दिलीप भारती ने बताया कि जनपद पंचायत के इंजीनियर राजिक खान सर से भी हमने कई बार भवन मरम्मत की मांग की हे लेकिन उन्होंने आजतक कोई काम नहीं किया हे तामिया विकासखंड के बीईओ ओर बीआरसी सर कभी विकासखंड के स्कूलों का दौरा नहीं करते हे तभी तो स्कूलों की हालत ऐसी हो गई हे आखिर कब जागेगी सरकार ओर कब बनेगा इस गांव में स्कूल देखिए हमारी यह एक्सक्लूसिव ग्राउंड जीरो रिपोर्ट, जो विकास के दावों और हकीकत के बीच का बड़ा अंतर उजागर करती है। बाइट,शिक्षक1
- सिवनी का जम्बो सीताफल बनेगा किसानों की समृद्धि का आधार बाजार और निर्यात की संभावनाओं पर जल्द होगी कार्यशाला सिवनी। जीआई टैग प्राप्त सिवनी जम्बो सीताफल को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने के लिए ‘सीताफल से समृद्धि’ अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत सीताफल पौधों की गणना, सर्वेक्षण और किसानों के पंजीयन का कार्य अंतिम चरण में है। जल्द जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित कर सीताफल की मार्केटिंग, प्रसंस्करण, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और निर्यात की संभावनाओं पर चर्चा की जाएगी। कलेक्टर नेहा मीना ने शेष सीताफल उत्पादक किसानों से शीघ्र पंजीयन कराने की अपील की है। संपर्क नंबर 9098431856 एवं 9713448994 हैं।1
- दो माह जेल में रहने के बाद बाहर आते ही बाइक चोरी में पकड़ा गया आरोपी देहात पुलिस ने चोरी की दो मोटरसाइकिलें कीं जब्त, कुल कीमत करीब 1.28 लाख रुपये छिंदवाड़ा। देहात थाना पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से चोरी की दो बाइक बरामद की हैं। देहात पुलिस प्रभारी निरीक्षक द्वारा स्टाफ के साथ आरोपी का जुलूस निकालकर न्यायालय में ले जाया गया पुलिस के अनुसार आरोपी हाल ही में करीब दो माह जेल में रहने के बाद बाहर आया था और इसके बाद फिर चोरी की वारदात में शामिल हो गया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति कम दाम में मोटरसाइकिल बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है। सूचना पर पुलिस ने घेराबंदी कर आरोपी गणेश पिता बाबूलाल कुमरे, उम्र 28 वर्ष, निवासी बीसापुरकला थाना मोहखेड़ को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपी ने MP28-MZ-4118 नंबर की मोटरसाइकिल चोरी करना स्वीकार किया। उसकी निशानदेही पर कराबोह डैम के पास खंडहर में झाड़ियों के बीच छिपाकर रखी गई दूसरी मोटरसाइकिल भी बरामद की गई। बरामद दोनों वाहनों की कुल कीमत करीब 1 लाख 28 हजार रुपये बताई गई है। पुलिस के मुताबिक आरोपी के खिलाफ पहले से भी मोहखेड़ थाना क्षेत्र में चोरी, मारपीट और जुआ जैसे अपराध दर्ज हैं। आरोपी को न्यायालय में पेश कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस अधीक्षक अजय पाण्डेय एवं अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष खरे के मार्गदर्शन तथा नगर पुलिस अधीक्षक अभिषेक चौधरी के निर्देशन में देहात थाना प्रभारी निरीक्षक गोविंद सिंह राजपूत और पुलिस टीम की कार्रवाई रही।4