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आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… 🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी “नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है। जब आम के पैर ही नहीं होते… तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔 जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की… जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है। 📍 कहानी की शुरुआत कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे… जो चलने में लंगड़े थे। उनके पास एक छोटा सा बगीचा था… जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था। लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था… उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे। धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे… और हर कोई बस एक ही बात कहता— “ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!” 📍 नाम कैसे पड़ा? अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़… क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था… लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे। और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया। 👉 लोग कहने लगे— “लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”… और धीरे-धीरे वो बन गया— 👉 “लंगड़ा आम” 📍 समय बदला, नाम नहीं बदला समय बीतता गया… साधु इस दुनिया में नहीं रहे… लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है… जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं। 📍 क्या है इसकी खासियत? अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…? तो आपको बता दें— ✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है ✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है ✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए ✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल! 📍 आज की पहचान आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं… बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है। देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है… और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है। 📍 एक सीख भी इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है… कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती… बल्कि काम और खासियत से बनती है। एक साधारण से पेड़ ने… और एक अनजाने साधु ने… इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। 🎤 समापन तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी… अगर आपको ये खबर पसंद आई हो… तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें… और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ। मैं हूँ रितेश रावत… कैमरा पर्सन के साथ… नमस्कार!”

5 hrs ago
user_Ritesh Reporter
Ritesh Reporter
Mandi Agent मऊरानीपुर, झांसी, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago

आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… 🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी “नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है। जब आम के पैर ही नहीं होते… तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔 जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की… जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है। 📍 कहानी की शुरुआत कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे… जो चलने में लंगड़े थे। उनके पास एक छोटा सा बगीचा था… जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था। लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था… उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे। धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे… और हर कोई बस एक ही बात कहता— “ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!” 📍 नाम कैसे पड़ा? अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़… क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था… लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे। और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया। 👉 लोग कहने लगे— “लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”… और धीरे-धीरे वो बन गया— 👉 “लंगड़ा आम” 📍 समय बदला, नाम नहीं बदला समय बीतता गया… साधु इस दुनिया में नहीं रहे… लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है… जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं। 📍 क्या है इसकी खासियत? अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…? तो आपको बता दें— ✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है ✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है ✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए ✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल! 📍 आज की पहचान आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं… बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है। देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है… और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है। 📍 एक सीख भी इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है… कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती… बल्कि काम और खासियत से बनती है। एक साधारण से पेड़ ने… और एक अनजाने साधु ने… इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। 🎤 समापन तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी… अगर आपको ये खबर पसंद आई हो… तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें… और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ। मैं हूँ रितेश रावत… कैमरा पर्सन के साथ… नमस्कार!”

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  • 🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी “नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट। आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर… जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है। जब आम के पैर ही नहीं होते… तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔 जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की… जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है। 📍 कहानी की शुरुआत कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे… जो चलने में लंगड़े थे। उनके पास एक छोटा सा बगीचा था… जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था। लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था… उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे। धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे… और हर कोई बस एक ही बात कहता— “ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!” 📍 नाम कैसे पड़ा? अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़… क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था… लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे। और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया। 👉 लोग कहने लगे— “लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”… और धीरे-धीरे वो बन गया— 👉 “लंगड़ा आम” 📍 समय बदला, नाम नहीं बदला समय बीतता गया… साधु इस दुनिया में नहीं रहे… लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है… जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं। 📍 क्या है इसकी खासियत? अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…? तो आपको बता दें— ✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है ✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है ✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए ✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल! 📍 आज की पहचान आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं… बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है। देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है… और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है। 📍 एक सीख भी इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है… कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती… बल्कि काम और खासियत से बनती है। एक साधारण से पेड़ ने… और एक अनजाने साधु ने… इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया। 🎤 समापन तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी… अगर आपको ये खबर पसंद आई हो… तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें… और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ। मैं हूँ रितेश रावत… कैमरा पर्सन के साथ… नमस्कार!”
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    🎤 रितेश रावत रिपोर्ट – स्पेशल स्टोरी
“नमस्कार… मैं हूँ रितेश रावत… और आप देख रहे हैं रितेश रावत रिपोर्ट।
आज हम आपको लेकर चल रहे हैं एक ऐसी दिलचस्प कहानी की ओर…
जो सिर्फ स्वाद की नहीं… बल्कि इतिहास, परंपरा और पहचान की कहानी है।
जब आम के पैर ही नहीं होते…
तो फिर उसका नाम ‘लंगड़ा’ कैसे पड़ा…? 🤔
जी हां… हम बात कर रहे हैं के मशहूर लंगड़ा आम की…
जिसका स्वाद जितना मीठा है, उसकी कहानी उतनी ही अनोखी है।
📍 कहानी की शुरुआत
कहा जाता है कि सैकड़ों साल पहले में एक साधु रहा करते थे…
जो चलने में लंगड़े थे।
उनके पास एक छोटा सा बगीचा था…
जहां एक आम का पेड़ लगा हुआ था।
लेकिन ये कोई साधारण पेड़ नहीं था…
उस पर लगने वाले आम बेहद स्वादिष्ट, खुशबूदार और रसीले होते थे।
धीरे-धीरे आस-पास के लोग उस पेड़ के आम खाने आने लगे…
और हर कोई बस एक ही बात कहता—
“ऐसा आम पहले कभी नहीं खाया!”
📍 नाम कैसे पड़ा?
अब यहां से कहानी लेती है एक दिलचस्प मोड़…
क्योंकि उस साधु का असली नाम किसी को नहीं पता था…
लोग उन्हें बस “लंगड़ा बाबा” कहकर बुलाते थे।
और फिर… वही नाम उस आम के साथ जुड़ गया।
👉 लोग कहने लगे—
“लंगड़ा बाबा के बगीचे का आम”…
और धीरे-धीरे वो बन गया—
👉 “लंगड़ा आम”
📍 समय बदला, नाम नहीं बदला
समय बीतता गया…
साधु इस दुनिया में नहीं रहे…
लेकिन उनका नाम आज भी हर उस आम में जिंदा है…
जिसे हम ‘लंगड़ा आम’ के नाम से जानते हैं।
📍 क्या है इसकी खासियत?
अब सवाल ये उठता है कि आखिर ये आम इतना खास क्यों है…?
तो आपको बता दें—
✔ इसका गूदा बेहद मुलायम और मीठा होता है
✔ इसमें रेशा बहुत कम होता है
✔ खुशबू इतनी तेज कि दूर से ही पहचान में आ जाए
✔ और स्वाद… ऐसा कि एक बार खाओ, तो भूलना मुश्किल!
📍 आज की पहचान
आज का लंगड़ा आम सिर्फ एक फल नहीं…
बल्कि एक ब्रांड, एक परंपरा और एक पहचान बन चुका है।
देश ही नहीं… विदेशों तक इसकी मांग है…
और गर्मियों के मौसम में ये आम लोगों की पहली पसंद बन जाता है।
📍 एक सीख भी
इस कहानी से हमें एक छोटी सी सीख भी मिलती है…
कि पहचान सिर्फ नाम या रूप से नहीं बनती…
बल्कि काम और खासियत से बनती है।
एक साधारण से पेड़ ने…
और एक अनजाने साधु ने…
इतिहास में अपना नाम दर्ज करा दिया।
🎤 समापन
तो ये थी ‘लंगड़ा आम’ की अनोखी कहानी…
अगर आपको ये खबर पसंद आई हो…
तो वीडियो को लाइक करें, शेयर करें…
और ऐसे ही दिलचस्प किस्सों के लिए जुड़े रहें रितेश रावत रिपोर्ट के साथ।
मैं हूँ रितेश रावत…
कैमरा पर्सन के साथ…
नमस्कार!”
    user_Ritesh Reporter
    Ritesh Reporter
    Mandi Agent मऊरानीपुर, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • पुलिस के द्वारा किया गया जन जागरूकता अभियान आयोजित
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    पुलिस के द्वारा किया गया जन जागरूकता अभियान आयोजित
    user_MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
    MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
    Media company पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • लिधौरा राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद पश्तोर का निधन जतारा। क्षेत्र के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी प्रसाद पश्तोर का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। स्वामी प्रसाद पश्तोर ने अपने जीवनकाल में समाज सेवा, राजनीति और देश की आज़ादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे सरल स्वभाव, ईमानदारी और जनसेवा के लिए हमेशा याद किए जाएंगे। उनके अंतिम संस्कार में प्रशासन की ओर से राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। इस दौरान पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। क्षेत्र के लोगों ने उन्हें एक ऐसे जननायक के रूप में याद किया, जिन्होंने हमेशा जनता की आवाज़ उठाई और समाज के हर वर्ग के लिए कार्य किया। उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
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    लिधौरा 
राजकीय सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई, पूर्व विधायक स्वामी प्रसाद पश्तोर का निधन
जतारा। 
क्षेत्र के वरिष्ठ नेता, पूर्व विधायक एवं स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वामी प्रसाद पश्तोर का 97 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
स्वामी प्रसाद पश्तोर ने अपने जीवनकाल में समाज सेवा, राजनीति और देश की आज़ादी के आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वे सरल स्वभाव, ईमानदारी और जनसेवा के लिए हमेशा याद किए जाएंगे।
उनके अंतिम संस्कार में प्रशासन की ओर से राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी गई। इस दौरान पुलिस बल द्वारा गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया और कई जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों एवं स्थानीय नागरिकों ने नम आंखों से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
क्षेत्र के लोगों ने उन्हें एक ऐसे जननायक के रूप में याद किया, जिन्होंने हमेशा जनता की आवाज़ उठाई और समाज के हर वर्ग के लिए कार्य किया। उनके निधन को क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति बताया जा रहा है।
    user_Mahendra Kumar Dubey
    Mahendra Kumar Dubey
    Voice of people जतारा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    4 hrs ago
  • टीकमगढ़ जिले के थाना पलेरा के अंतर्गत ग्राम खुमानगंज के एक युवक की संदिग्ध हालत में मौत परिवार जनों ने लगाए हत्या के आरोप देखिए खास रिपोर्ट क्या कुछ कहा पीड़ितो ने
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    टीकमगढ़ जिले के थाना पलेरा के अंतर्गत ग्राम खुमानगंज के एक युवक की संदिग्ध हालत में मौत परिवार जनों ने लगाए हत्या के आरोप देखिए खास रिपोर्ट क्या कुछ कहा पीड़ितो ने
    user_राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़
    राम सिंह यादव जिला ब्यूरो चीफ टीकमगढ़
    Spa पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • रिंकू लक्ष्कार तुर्का लहचूरा जिला झांसी तहसील टहरौली जिला झांसी तहसील टहरौली प्रधान प्रदीप कुमार दीक्षित लहचूरा जिला झांसी
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    रिंकू लक्ष्कार तुर्का लहचूरा जिला झांसी तहसील टहरौली जिला झांसी तहसील टहरौली प्रधान प्रदीप कुमार दीक्षित लहचूरा जिला झांसी
    user_Rinkuu lakshkar
    Rinkuu lakshkar
    Farmer गरौठा, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    49 min ago
  • निवाड़ी जिले के नगर परिषद जेरोन खालसा के अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव में आया नया मोड़ 3 पार्षद अविश्वास के खिलाफ,,,
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    निवाड़ी जिले के नगर परिषद जेरोन खालसा के अध्यक्ष के अविश्वास प्रस्ताव में आया नया मोड़ 3 पार्षद अविश्वास के खिलाफ,,,
    user_Hemant verma
    Hemant verma
    South Indian restaurant Niwari, Madhya Pradesh•
    5 hrs ago
  • गुरसराय। अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरसराय थाना पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए जुआ खेल रहे 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार मंगलवार को गुरसराय थाना क्षेत्र के एरच रोड स्थित ईदगाह के पास कुछ लोग जुआ खेल रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और सभी आरोपियों को दबोच लिया। पुलिस ने मौके से 17,800 रुपये नकद एवं 52 अदद ताश के पत्ते बरामद किए। वहीं जामातलाशी के दौरान 2,550 रुपये अतिरिक्त भी मिले, जिससे कुल बरामदगी 20,350 रुपये हो गई। पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में मंगल कुशवाहा निवासी साहपुर स्टैंड कस्बा मोठ, राकेश कुशवाहा निवासी अखाड़ा पुरा मोठ, शनि कुशवाहा निवासी उन्नाव गेट बाहर झांसी, आशुतोष गौतम निवासी अंजनी माता मंदिर चिरगांव, अफसर खान निवासी चिरगांव, खेमचंद कुशवाहा निवासी चिरगांव, मानवेंद्र कुशवाहा निवासी चिरगांव तथा सुनील कुशवाहा निवासी बड़ागांव शामिल हैं। इस कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी फूल सिंह, उपनिरीक्षक उम्मेद सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। गुरसरांय से सोम मिश्रा की रिपोर्ट
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    गुरसराय। अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत गुरसराय थाना पुलिस को एक और बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर कार्रवाई करते हुए जुआ खेल रहे 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
जानकारी के अनुसार मंगलवार को गुरसराय थाना क्षेत्र के एरच रोड स्थित ईदगाह के पास कुछ लोग जुआ खेल रहे थे। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर घेराबंदी की और सभी आरोपियों को दबोच लिया।
पुलिस ने मौके से 17,800 रुपये नकद एवं 52 अदद ताश के पत्ते बरामद किए। वहीं जामातलाशी के दौरान 2,550 रुपये अतिरिक्त भी मिले, जिससे कुल बरामदगी 20,350 रुपये हो गई।
पुलिस द्वारा गिरफ्तार आरोपियों में मंगल कुशवाहा निवासी साहपुर स्टैंड कस्बा मोठ, राकेश कुशवाहा निवासी अखाड़ा पुरा मोठ, शनि कुशवाहा निवासी उन्नाव गेट बाहर झांसी, आशुतोष गौतम निवासी अंजनी माता मंदिर चिरगांव, अफसर खान निवासी चिरगांव, खेमचंद कुशवाहा निवासी चिरगांव, मानवेंद्र कुशवाहा निवासी चिरगांव तथा सुनील कुशवाहा निवासी बड़ागांव शामिल हैं।
इस कार्रवाई के दौरान थाना प्रभारी फूल सिंह, उपनिरीक्षक उम्मेद सिंह सहित अन्य पुलिसकर्मी मौजूद रहे। पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
गुरसरांय से सोम मिश्रा की रिपोर्ट
    user_Som mishra
    Som mishra
    पत्रकार गरौठा, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • 📍 टीकमगढ़: एक्शन में कलेक्टर, चकाचक हुआ कलेक्ट्रेट परिसर! ✨ जब मुखिया खुद मैदान में उतरें, तो बदलाव की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। मंगलवार को कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने कलेक्ट्रेट परिसर का जायजा लिया और गंदगी देखकर अधिकारियों की क्लास लगाई। नतीजा? आज सुबह से ही नगर पालिका टीकमगढ़ की टीम ने मोर्चा संभाला और कलेक्ट्रेट का कोना-कोना चमका दिया! 🧹🧼 ✅ नालियों में जमा बरसों पुराना कचरा साफ किया गया। ✅ पूरे परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर कचरे का निस्तारण हुआ। ✅ कलेक्टर ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को 'नियमित सफाई' बनाए रखने की शपथ दिलाई। "स्वच्छता केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का हिस्सा होनी चाहिए।" — कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय प्रशासन का यह संदेश साफ है—स्वच्छता के मामले में कोई समझौता नहीं! 🚫🗑️ #Tikamgarh #MadhyaPradesh #CleanIndia #SwachhBharat #CollectorAction
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    📍 टीकमगढ़: एक्शन में कलेक्टर, चकाचक हुआ कलेक्ट्रेट परिसर! ✨
जब मुखिया खुद मैदान में उतरें, तो बदलाव की रफ्तार दोगुनी हो जाती है। मंगलवार को कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय ने कलेक्ट्रेट परिसर का जायजा लिया और गंदगी देखकर अधिकारियों की क्लास लगाई।
नतीजा? आज सुबह से ही नगर पालिका टीकमगढ़ की टीम ने मोर्चा संभाला और कलेक्ट्रेट का कोना-कोना चमका दिया! 🧹🧼
✅ नालियों में जमा बरसों पुराना कचरा साफ किया गया।
✅ पूरे परिसर में विशेष स्वच्छता अभियान चलाकर कचरे का निस्तारण हुआ।
✅ कलेक्टर ने सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को 'नियमित सफाई' बनाए रखने की शपथ दिलाई।
"स्वच्छता केवल एक दिन का काम नहीं, बल्कि हमारी कार्य संस्कृति का हिस्सा होनी चाहिए।" — कलेक्टर विवेक श्रोत्रिय
प्रशासन का यह संदेश साफ है—स्वच्छता के मामले में कोई समझौता नहीं! 🚫🗑️
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    user_MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
    MUHAMMAD KHWAJA JOURNALIST
    Media company पलेरा, टीकमगढ़, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
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