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महा-खुलासा नगर मोहम्मदी तहसील क्षेत्र अंतर्गत: 'सफ़ेदपोश' यमराजों का नंगा नाच, गोमती की कोख और शारदा की पटरियों पर 'पीले पंजे' का खूनी प्रहार! नेशनल न्यूज़ ब्यूरो: संजय कुमार राठौर लोकेशन: मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील इस वक्त भ्रष्टाचार के उस 'ज्वालामुखी' पर बैठी है, जो किसी भी दिन पूरे सिस्टम को स्वाहा कर सकता है। यहाँ 'सत्ता की हनक' और 'नोटों की चमक' ने कानून के इकबाल को बंधक बना लिया है। योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा निकालते हुए खनन माफियाओं ने आदि गंगा गोमती और शारदा नहर को अपनी जागीर समझ लिया है। यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि यह सट्टे की धमक और प्रशासनिक सरपरस्ती में चल रहा वो 'खूनी खेल' है, जिसमें आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव आंकी जा रही है। 1. नोटों की चमक ने किया 'खाकी' को अंधा! मोहम्मदी में बालू और मिट्टी का अवैध कारोबार किसी लुका-छिपी का खेल नहीं, बल्कि डंके की चोट पर होने वाली डकैती है। सूत्रों की मानें तो खनन माफियाओं ने स्थानीय प्रशासन की रग-रग में 'नोटों की चमक' भर दी है। * वसूली का 'कोड वर्ड': हर ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर का एक 'कोड' तय है। जिसकी जेब में माफिया का सिक्का है, उसके लिए लाल बत्ती भी हरी हो जाती है। * राजस्व की सरेआम लूट: सरकारी खजाने में जाने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के आलीशान बंगलों और ऐशो-आराम पर खर्च हो रही है। 2. सत्ता की हनक: जब 'झंडा' बनता है गुंडागर्दी का लाइसेंस मोहम्मदी-गोला मार्ग और शाहजहांपुर रोड पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर लगे 'विशेष दलों' के झंडे और रसूखदारों के नाम यह बताने के लिए काफी हैं कि माफियाओं को 'सत्ता की हनक' का पूरा कवच प्राप्त है। * पुलिस की मजबूरी या मिलीभगत?: मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने कुछ ट्रालियां पकड़कर हेडलाइन बटोरने की कोशिश तो की, लेकिन उन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई जो इस पूरे सिंडिकेट के आका हैं। 3. 'यमराज' बनकर दौड़ रहे ओवरहाइट डंपर: राहगीरों की आंखों में 'मौत का गुबार' सबसे खौफनाक मंजर मोहम्मदी की सड़कों पर देखने को मिलता है। माफियाओं की भूख का आलम यह है कि ट्रालियों को आवर हाइट (Over-height) यानी क्षमता से तीन गुना ऊपर तक भर दिया जाता है। * अंधा कर रही धूल: बिना तिरपाल के दौड़ रहे इन वाहनों से उड़ने वाली बालू और मिट्टी राहगीरों के लिए 'मौत का जाल' बन चुकी है। * पलक झपकते ही हादसा: तेज हवाओं के चलते मोटरसाइकिल सवारों की आंखों में जैसे ही यह मिट्टी गिरती है, वे अपना संतुलन खो देते हैं। मोहम्मदी की सड़कें अब सुरक्षित सफर के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरियां भरने के लिए 'लाशों की मंडी' बनने की कगार पर हैं। 4. सट्टे की धमक: अपराध का नया पावर हाउस खबर के पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि खनन की काली कमाई का बड़ा हिस्सा मोहम्मदी के सट्टा बाजार में खपाया जा रहा है। * काले धन का चक्रव्यूह: अवैध खनन से मिलने वाले नोटों की गड्डियां रात के अंधेरे में सट्टे और जुए के अड्डों पर दांव पर लगाई जाती हैं। इसी 'सट्टे की धमक' ने क्षेत्र के युवाओं को अपराध की अंधी खाई में ढकेल दिया है। माफिया अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि समाज की नींव भी खोद रहे हैं। 5. विनाश के मुहाने पर कुदरत: गोमती और शारदा की चीख माफियाओं ने अपनी हवस में आदि गंगा गोमती नदी का सीना छलनी कर दिया है। जेसीबी मशीनों से नदी की गहराई तक की जा रही खुदाई ने जलस्तर को पाताल में भेज दिया है। वहीं, शारदा नहर की पटरियों को इस कदर खोखला कर दिया गया है कि मानसून की एक बारिश पूरे मोहम्मदी को जलमग्न कर सकती है। निष्कर्ष: क्या 'महाराज' का बुलडोजर अब भी खामोश रहेगा? लखीमपुर खीरी का यह 'खनन कांड' अब राष्ट्रीय सुर्खी बन चुका है। संजय कुमार राठौर की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को खुली चुनौती है। * क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'हंटर' इन रसूखदार माफियाओं पर चलेगा? * क्या 'सत्ता की हनक' दिखाने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा? * क्या मोहम्मदी की जनता को धूल और मौत से आजादी मिलेगी? प्रशासन को चेतावनी: अगर इन 'सफेदपोश यमराजों' पर तत्काल गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो मोहम्मदी की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। अब फैसला 'लखनऊ' को करना है— न्याय होगा या माफिया का राज रहेगा? महा-खुलासा नगर मोहम्मदी तहसील क्षेत्र अंतर्गत: 'सफ़ेदपोश' यमराजों का नंगा नाच, गोमती की कोख और शारदा की पटरियों पर 'पीले पंजे' का खूनी प्रहार! नेशनल न्यूज़ ब्यूरो: संजय कुमार राठौर लोकेशन: मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील इस वक्त भ्रष्टाचार के उस 'ज्वालामुखी' पर बैठी है, जो किसी भी दिन पूरे सिस्टम को स्वाहा कर सकता है। यहाँ 'सत्ता की हनक' और 'नोटों की चमक' ने कानून के इकबाल को बंधक बना लिया है। योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा निकालते हुए खनन माफियाओं ने आदि गंगा गोमती और शारदा नहर को अपनी जागीर समझ लिया है। यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि यह सट्टे की धमक और प्रशासनिक सरपरस्ती में चल रहा वो 'खूनी खेल' है, जिसमें आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव आंकी जा रही है। 1. नोटों की चमक ने किया 'खाकी' को अंधा! मोहम्मदी में बालू और मिट्टी का अवैध कारोबार किसी लुका-छिपी का खेल नहीं, बल्कि डंके की चोट पर होने वाली डकैती है। सूत्रों की मानें तो खनन माफियाओं ने स्थानीय प्रशासन की रग-रग में 'नोटों की चमक' भर दी है। * वसूली का 'कोड वर्ड': हर ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर का एक 'कोड' तय है। जिसकी जेब में माफिया का सिक्का है, उसके लिए लाल बत्ती भी हरी हो जाती है। * राजस्व की सरेआम लूट: सरकारी खजाने में जाने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के आलीशान बंगलों और ऐशो-आराम पर खर्च हो रही है। 2. सत्ता की हनक: जब 'झंडा' बनता है गुंडागर्दी का लाइसेंस मोहम्मदी-गोला मार्ग और शाहजहांपुर रोड पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर लगे 'विशेष दलों' के झंडे और रसूखदारों के नाम यह बताने के लिए काफी हैं कि माफियाओं को 'सत्ता की हनक' का पूरा कवच प्राप्त है। * पुलिस की मजबूरी या मिलीभगत?: मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने कुछ ट्रालियां पकड़कर हेडलाइन बटोरने की कोशिश तो की, लेकिन उन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई जो इस पूरे सिंडिकेट के आका हैं। 3. 'यमराज' बनकर दौड़ रहे ओवरहाइट डंपर: राहगीरों की आंखों में 'मौत का गुबार' सबसे खौफनाक मंजर मोहम्मदी की सड़कों पर देखने को मिलता है। माफियाओं की भूख का आलम यह है कि ट्रालियों को आवर हाइट (Over-height) यानी क्षमता से तीन गुना ऊपर तक भर दिया जाता है। * अंधा कर रही धूल: बिना तिरपाल के दौड़ रहे इन वाहनों से उड़ने वाली बालू और मिट्टी राहगीरों के लिए 'मौत का जाल' बन चुकी है। * पलक झपकते ही हादसा: तेज हवाओं के चलते मोटरसाइकिल सवारों की आंखों में जैसे ही यह मिट्टी गिरती है, वे अपना संतुलन खो देते हैं। मोहम्मदी की सड़कें अब सुरक्षित सफर के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरियां भरने के लिए 'लाशों की मंडी' बनने की कगार पर हैं। 4. सट्टे की धमक: अपराध का नया पावर हाउस खबर के पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि खनन की काली कमाई का बड़ा हिस्सा मोहम्मदी के सट्टा बाजार में खपाया जा रहा है। * काले धन का चक्रव्यूह: अवैध खनन से मिलने वाले नोटों की गड्डियां रात के अंधेरे में सट्टे और जुए के अड्डों पर दांव पर लगाई जाती हैं। इसी 'सट्टे की धमक' ने क्षेत्र के युवाओं को अपराध की अंधी खाई में ढकेल दिया है। माफिया अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि समाज की नींव भी खोद रहे हैं। 5. विनाश के मुहाने पर कुदरत: गोमती और शारदा की चीख माफियाओं ने अपनी हवस में आदि गंगा गोमती नदी का सीना छलनी कर दिया है। जेसीबी मशीनों से नदी की गहराई तक की जा रही खुदाई ने जलस्तर को पाताल में भेज दिया है। वहीं, शारदा नहर की पटरियों को इस कदर खोखला कर दिया गया है कि मानसून की एक बारिश पूरे मोहम्मदी को जलमग्न कर सकती है। निष्कर्ष: क्या 'महाराज' का बुलडोजर अब भी खामोश रहेगा? लखीमपुर खीरी का यह 'खनन कांड' अब राष्ट्रीय सुर्खी बन चुका है। संजय कुमार राठौर की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को खुली चुनौती है। * क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'हंटर' इन रसूखदार माफियाओं पर चलेगा? * क्या 'सत्ता की हनक' दिखाने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा? * क्या मोहम्मदी की जनता को धूल और मौत से आजादी मिलेगी? प्रशासन को चेतावनी: अगर इन 'सफेदपोश यमराजों' पर तत्काल गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो मोहम्मदी की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। अब फैसला 'लखनऊ' को करना है— न्याय होगा या माफिया का राज रहेगा?

3 hrs ago
user_उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
निघासन, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

महा-खुलासा नगर मोहम्मदी तहसील क्षेत्र अंतर्गत: 'सफ़ेदपोश' यमराजों का नंगा नाच, गोमती की कोख और शारदा की पटरियों पर 'पीले पंजे' का खूनी प्रहार! नेशनल न्यूज़ ब्यूरो: संजय कुमार राठौर लोकेशन: मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील इस वक्त भ्रष्टाचार के उस 'ज्वालामुखी' पर बैठी है, जो किसी भी दिन पूरे सिस्टम को स्वाहा कर सकता है। यहाँ 'सत्ता की हनक' और 'नोटों की चमक' ने कानून के इकबाल को बंधक बना लिया है। योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा निकालते हुए खनन माफियाओं ने आदि गंगा गोमती और शारदा नहर को अपनी जागीर समझ लिया है। यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि यह सट्टे की धमक और प्रशासनिक सरपरस्ती में चल रहा वो 'खूनी खेल' है, जिसमें आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव आंकी जा रही है। 1. नोटों की चमक ने किया 'खाकी' को अंधा! मोहम्मदी में बालू और मिट्टी का अवैध कारोबार किसी लुका-छिपी का खेल नहीं, बल्कि डंके की चोट पर होने वाली डकैती है। सूत्रों की मानें तो खनन माफियाओं ने स्थानीय प्रशासन की रग-रग में 'नोटों की चमक' भर दी है। * वसूली का 'कोड वर्ड': हर ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर का एक 'कोड' तय है। जिसकी जेब में माफिया का सिक्का है, उसके लिए लाल बत्ती भी हरी हो जाती है। * राजस्व की सरेआम लूट: सरकारी खजाने में जाने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के आलीशान बंगलों और ऐशो-आराम पर खर्च हो रही है। 2. सत्ता की हनक: जब 'झंडा' बनता है गुंडागर्दी का लाइसेंस मोहम्मदी-गोला मार्ग और शाहजहांपुर रोड पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर लगे 'विशेष दलों' के झंडे और रसूखदारों के नाम यह बताने के लिए काफी हैं कि माफियाओं को 'सत्ता की हनक' का पूरा कवच प्राप्त है। * पुलिस की मजबूरी या मिलीभगत?: मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने कुछ ट्रालियां पकड़कर हेडलाइन बटोरने की कोशिश तो की, लेकिन उन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई जो इस पूरे सिंडिकेट के आका हैं। 3. 'यमराज' बनकर दौड़ रहे ओवरहाइट डंपर: राहगीरों की आंखों में 'मौत का गुबार' सबसे खौफनाक मंजर मोहम्मदी की सड़कों पर देखने को मिलता है। माफियाओं की भूख का आलम यह है कि ट्रालियों को आवर हाइट (Over-height) यानी क्षमता से तीन गुना ऊपर तक भर दिया जाता है। * अंधा कर रही धूल: बिना तिरपाल के दौड़ रहे इन वाहनों से उड़ने वाली बालू और मिट्टी राहगीरों के लिए 'मौत का जाल' बन चुकी है। * पलक झपकते ही हादसा: तेज हवाओं के चलते मोटरसाइकिल सवारों की आंखों में जैसे ही यह मिट्टी गिरती है, वे अपना संतुलन खो देते हैं। मोहम्मदी की सड़कें अब सुरक्षित सफर के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरियां भरने के लिए 'लाशों की मंडी' बनने की कगार पर हैं। 4. सट्टे की धमक: अपराध का नया पावर हाउस खबर के पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि खनन की काली कमाई का बड़ा हिस्सा मोहम्मदी के सट्टा बाजार में खपाया जा रहा है। * काले धन का चक्रव्यूह: अवैध खनन से मिलने वाले नोटों की गड्डियां रात के अंधेरे में सट्टे और जुए के अड्डों पर दांव पर लगाई जाती हैं। इसी 'सट्टे की धमक' ने क्षेत्र के युवाओं को अपराध की अंधी खाई में ढकेल दिया है। माफिया अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि समाज की नींव भी खोद रहे हैं। 5. विनाश के मुहाने पर कुदरत: गोमती और शारदा की चीख माफियाओं ने अपनी हवस में आदि गंगा गोमती नदी का सीना छलनी कर दिया है। जेसीबी मशीनों से नदी की गहराई तक की जा रही खुदाई ने जलस्तर को पाताल में भेज दिया है। वहीं, शारदा नहर की पटरियों को इस कदर खोखला कर दिया गया है कि मानसून की एक बारिश पूरे मोहम्मदी को जलमग्न कर सकती है। निष्कर्ष: क्या 'महाराज' का बुलडोजर अब भी खामोश रहेगा? लखीमपुर खीरी का यह 'खनन कांड' अब राष्ट्रीय सुर्खी बन चुका है। संजय कुमार राठौर की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को खुली चुनौती है। * क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'हंटर' इन रसूखदार माफियाओं पर चलेगा? * क्या 'सत्ता की हनक' दिखाने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा? * क्या मोहम्मदी की जनता को धूल और मौत से आजादी मिलेगी? प्रशासन को चेतावनी: अगर इन 'सफेदपोश यमराजों' पर तत्काल गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो मोहम्मदी की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। अब फैसला 'लखनऊ' को करना है— न्याय होगा या माफिया का राज रहेगा? महा-खुलासा नगर मोहम्मदी तहसील क्षेत्र अंतर्गत: 'सफ़ेदपोश' यमराजों का नंगा नाच, गोमती की कोख और शारदा की पटरियों पर 'पीले पंजे' का खूनी प्रहार! नेशनल न्यूज़ ब्यूरो: संजय कुमार राठौर लोकेशन: मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील इस वक्त भ्रष्टाचार के उस 'ज्वालामुखी' पर बैठी है, जो किसी भी दिन पूरे सिस्टम को स्वाहा कर सकता है। यहाँ 'सत्ता की हनक' और 'नोटों की चमक' ने कानून के इकबाल को बंधक बना लिया है। योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा निकालते हुए खनन माफियाओं ने आदि गंगा गोमती और शारदा नहर को अपनी जागीर समझ लिया है। यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि यह सट्टे की धमक और प्रशासनिक सरपरस्ती में चल रहा वो 'खूनी खेल' है, जिसमें आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव आंकी जा रही है। 1. नोटों की चमक ने किया 'खाकी' को अंधा! मोहम्मदी में बालू और मिट्टी का अवैध कारोबार किसी लुका-छिपी का खेल नहीं, बल्कि डंके की चोट पर होने वाली डकैती है। सूत्रों की मानें तो खनन माफियाओं ने स्थानीय प्रशासन की रग-रग में 'नोटों की चमक' भर दी है। * वसूली का 'कोड वर्ड': हर ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर का एक 'कोड' तय है। जिसकी जेब में माफिया का सिक्का है, उसके लिए लाल बत्ती भी हरी हो जाती है। * राजस्व की सरेआम लूट: सरकारी खजाने में जाने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के आलीशान बंगलों और ऐशो-आराम पर खर्च हो रही है। 2. सत्ता की हनक: जब 'झंडा' बनता है गुंडागर्दी का लाइसेंस मोहम्मदी-गोला मार्ग और शाहजहांपुर रोड पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर लगे 'विशेष दलों' के झंडे और रसूखदारों के नाम यह बताने के लिए काफी हैं कि माफियाओं को 'सत्ता की हनक' का पूरा कवच प्राप्त है। * पुलिस की मजबूरी या मिलीभगत?: मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने कुछ ट्रालियां पकड़कर हेडलाइन बटोरने की कोशिश तो की, लेकिन उन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई जो इस पूरे सिंडिकेट के आका हैं। 3. 'यमराज' बनकर दौड़ रहे ओवरहाइट डंपर: राहगीरों की आंखों में 'मौत का गुबार' सबसे खौफनाक मंजर मोहम्मदी की सड़कों पर देखने को मिलता है। माफियाओं की भूख का आलम यह है कि ट्रालियों को आवर हाइट (Over-height) यानी क्षमता से तीन गुना ऊपर तक भर दिया जाता है। * अंधा कर रही धूल: बिना तिरपाल के दौड़ रहे इन वाहनों से उड़ने वाली बालू और मिट्टी राहगीरों के लिए 'मौत का जाल' बन चुकी है। * पलक झपकते ही हादसा: तेज हवाओं के चलते मोटरसाइकिल सवारों की आंखों में जैसे ही यह मिट्टी गिरती है, वे अपना संतुलन खो देते हैं। मोहम्मदी की सड़कें अब सुरक्षित सफर के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरियां भरने के लिए 'लाशों की मंडी' बनने की कगार पर हैं। 4. सट्टे की धमक: अपराध का नया पावर हाउस खबर के पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि खनन की काली कमाई का बड़ा हिस्सा मोहम्मदी के सट्टा बाजार में खपाया जा रहा है। * काले धन का चक्रव्यूह: अवैध खनन से मिलने वाले नोटों की गड्डियां रात के अंधेरे में सट्टे और जुए के अड्डों पर दांव पर लगाई जाती हैं। इसी 'सट्टे की धमक' ने क्षेत्र के युवाओं को अपराध की अंधी खाई में ढकेल दिया है। माफिया अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि समाज की नींव भी खोद रहे हैं। 5. विनाश के मुहाने पर कुदरत: गोमती और शारदा की चीख माफियाओं ने अपनी हवस में आदि गंगा गोमती नदी का सीना छलनी कर दिया है। जेसीबी मशीनों से नदी की गहराई तक की जा रही खुदाई ने जलस्तर को पाताल में भेज दिया है। वहीं, शारदा नहर की पटरियों को इस कदर खोखला कर दिया गया है कि मानसून की एक बारिश पूरे मोहम्मदी को जलमग्न कर सकती है। निष्कर्ष: क्या 'महाराज' का बुलडोजर अब भी खामोश रहेगा? लखीमपुर खीरी का यह 'खनन कांड' अब राष्ट्रीय सुर्खी बन चुका है। संजय कुमार राठौर की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को खुली चुनौती है। * क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'हंटर' इन रसूखदार माफियाओं पर चलेगा? * क्या 'सत्ता की हनक' दिखाने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा? * क्या मोहम्मदी की जनता को धूल और मौत से आजादी मिलेगी? प्रशासन को चेतावनी: अगर इन 'सफेदपोश यमराजों' पर तत्काल गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो मोहम्मदी की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। अब फैसला 'लखनऊ' को करना है— न्याय होगा या माफिया का राज रहेगा?

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  • *लखीमपुर खीरी। गुरुवार 2अप्रेल 20260को विगत वर्षों की भांति श्री हनुमान जन्मोत्सव कार्यक्रम के तहत भीरा के प्राचीन श्री हनुमान मंदिर परिसर में सुंदरकांड पाठ हनुमत समाज सेवा मंडल के द्वारा कलयुग के साक्षात भगवान श्री बाबा बजरंगबली का गुणगान किया गया बाबा सभी की मनोकामना पूर्ण करें जय जय सीताराम जय श्री राम🙏🏻🙏🏻*
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    *लखीमपुर खीरी।
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    user_उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
    उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
    निघासन, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • *1==निघासन के बरोठा गांव में 'विकास' का कत्ल: कागजों पर स्वर्ग, जमीन पर नर्क; भ्रष्टाचार के कीचड़ में डूबीं जनता की उम्मीदें* *2=अंतिम सफर में भी कीचड़ का दंश: बरोठा प्रधान पर लगा बजट 'हड़पने' का आरोप, श्मशान-कब्रिस्तान की राह हुई बदहाल* *2=लखीमपुर खीरी: बरोठा गांव में मनरेगा घोटाले की गूंज, ग्रामीणों ने CDO से की भ्रष्ट प्रधान के खिलाफ कार्रवाई की मांग* *Rk जाटव जी की रिपोर्ट* *निघासन खीरी* बरोठा गांव में 'विकास' का कत्ल ए आम, प्रधान की जेब में सरकारी बजट और सड़क पर घुटनों तक कीचड़!" 👉 कब्रिस्तान और श्मशान के रास्ते पर 'भ्रष्टाचार' का पहरा, क्या बरोठा के प्रधान ने बेच खाई ग्रामीणों की सुविधा?" 👉 योगी राज में बरोठा गांव को नरक बना रहा प्रधान, आखिर कब गिरेगी भ्रष्टाचार पर गाज?" 👉"निघासन में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: कागजों में 'चमकता' गांव, जमीन पर 'कीचड़' का साम्राज्य—प्रधान की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल!" 👉 अंतिम विदाई में भी कीचड़ का दंश, क्या बरोठा के प्रधान को नहीं दिखता ग्रामीणों का दर्द? 👉"बरोठा गांव में 'विकास' की बलि: प्रधान जी की मौज, जनता का नरक जैसा हाल!" 👉"कब्रिस्तान और श्मशान की राह में भ्रष्टाचार का 'कांटा', आखिर कहाँ गया बरोठा का बजट?" 👉"योगी राज में प्रधान की मनमानी! कागजों पर 'स्वर्ग' और जमीन पर 'नर्क' बना निघासन का बरोठा।" 👉"सावधान! बरोठा गांव में सड़क नहीं, प्रधान की 'लापरवाही' का कीचड़ बह रहा है।" 👉"सीडीओ साहब! बरोठा में फाइलों का 'चमत्कार' देखिये, धरातल पर घुटने भर कीचड़ और जनता का हाहाकार।"एक साल से सड़क बनी 'तालाब'। 👉श्मशान-कब्रिस्तान जाने वाले लोग बेहाल। 👉 सूत्रों के अनुसार पूर्व मे मनरेगा मे भी किया गया बड़ा घोटाला,एक ही कार्य के एक से अधिक बार कराया गया भुगतान 👉प्रधान की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल। 👉सीडीओ अभिषेक सिंह से जांच की मांग। 🚨सवाल: क्या प्रधान के खिलाफ होगा बड़ा एक्शन या फाइलें फिर दबा दी जाएंगी? @⁨Lakhimpur Khiri
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    *1==निघासन के बरोठा गांव में 'विकास' का कत्ल: कागजों पर स्वर्ग, जमीन पर नर्क; भ्रष्टाचार के कीचड़ में डूबीं जनता की उम्मीदें*
*2=अंतिम सफर में भी कीचड़ का दंश: बरोठा प्रधान पर लगा बजट 'हड़पने' का आरोप, श्मशान-कब्रिस्तान की राह हुई बदहाल*
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*Rk जाटव जी की रिपोर्ट* 
*निघासन खीरी*
बरोठा गांव में 'विकास' का कत्ल ए आम, प्रधान की जेब में सरकारी बजट और सड़क पर घुटनों तक कीचड़!"
👉 कब्रिस्तान और श्मशान के रास्ते पर 'भ्रष्टाचार' का पहरा, क्या बरोठा के प्रधान ने बेच खाई ग्रामीणों की सुविधा?"
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👉"निघासन में फूटा ग्रामीणों का गुस्सा: कागजों में 'चमकता' गांव, जमीन पर 'कीचड़' का साम्राज्य—प्रधान की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल!"
👉 अंतिम विदाई में भी कीचड़ का दंश, क्या बरोठा के प्रधान को नहीं दिखता ग्रामीणों का दर्द?
👉"बरोठा गांव में 'विकास' की बलि: प्रधान जी की मौज, जनता का नरक जैसा हाल!"
👉"कब्रिस्तान और श्मशान की राह में भ्रष्टाचार का 'कांटा', आखिर कहाँ गया बरोठा का बजट?"
👉"योगी राज में प्रधान की मनमानी! कागजों पर 'स्वर्ग' और जमीन पर 'नर्क' बना निघासन का बरोठा।"
👉"सावधान! बरोठा गांव में सड़क नहीं, प्रधान की 'लापरवाही' का कीचड़ बह रहा है।"
👉"सीडीओ साहब! बरोठा में फाइलों का 'चमत्कार' देखिये, धरातल पर घुटने भर कीचड़ और जनता का हाहाकार।"एक साल से सड़क बनी 'तालाब'।
👉श्मशान-कब्रिस्तान जाने वाले लोग बेहाल।
👉 सूत्रों के अनुसार पूर्व मे मनरेगा मे भी किया गया बड़ा घोटाला,एक ही कार्य के एक से अधिक बार कराया गया भुगतान
👉प्रधान की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल।
👉सीडीओ अभिषेक सिंह से जांच की मांग।
🚨सवाल: क्या प्रधान के खिलाफ होगा बड़ा एक्शन या फाइलें फिर दबा दी जाएंगी?
@⁨Lakhimpur Khiri
    user_राजकुमार जाटव किंग रिपोर्ट
    राजकुमार जाटव किंग रिपोर्ट
    Local News Reporter निघासन, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • मोदी सरकार ने 𝟏𝟎 वर्षों में पूंजीपतियों का ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ रुपए का लोन और कर्ज माफ किया है। बट्टे खाते में डाले गए इन ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ में से किसानों, मजदूरों और गरीबों का कोई ऋण माफ नहीं किया।जिन पूंजीपति मित्रों का ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ का लोन माफ किया है उनमें से कोई भी 𝐒𝐂/𝐒𝐓 और 𝐎𝐁𝐂 नहीं है। ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ की कर्जमाफी का फायदा उठाने वाले कॉरपोरेट्स और पूंजीपतियों की सामाजिक पृष्ठभूमि की जाँच करनी चाहिए। छात्र, किसान, मजदूर और गरीब अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए ₹𝟓 हजार का भी लोन चुकता करने में देरी कर दे तो सरकारी तंत्र और बैंकिंग सिस्टम उनकी गर्दन पर पैर रख उसकी वसूली करते है। इसके बदले ये किसानों की गाय-भैंस तक खोल लेते है लेकिन पूंजीपतियों का कुछ नहीं बिगाड़ेंगे.
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    मोदी सरकार ने 𝟏𝟎 वर्षों में पूंजीपतियों का ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ रुपए का लोन और कर्ज माफ किया है।
बट्टे खाते में डाले गए इन ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ में से किसानों, मजदूरों और गरीबों का कोई ऋण माफ नहीं किया।जिन पूंजीपति मित्रों का ₹𝟐𝟔 लाख करोड़ का लोन माफ किया है उनमें से कोई भी 𝐒𝐂/𝐒𝐓 और 𝐎𝐁𝐂 नहीं है।
₹𝟐𝟔 लाख करोड़ की कर्जमाफी का फायदा उठाने वाले कॉरपोरेट्स और पूंजीपतियों की सामाजिक पृष्ठभूमि की जाँच करनी चाहिए। छात्र, किसान, मजदूर और गरीब अपने बच्चों की पढ़ाई और शादी के लिए ₹𝟓 हजार का भी लोन चुकता करने में देरी कर दे तो सरकारी तंत्र और बैंकिंग सिस्टम उनकी गर्दन पर पैर रख उसकी वसूली करते है। इसके बदले ये किसानों की गाय-भैंस तक खोल लेते है लेकिन पूंजीपतियों का कुछ नहीं बिगाड़ेंगे.
    user_न्यूज़ पेपर
    न्यूज़ पेपर
    Reporter निघासन, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • पलिया बजाज हिन्दुस्थान चीनी मिल में चल रहे धरने के बीच मृतक के परिवार की एक सदस्य की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मृतक की भाभी सारथी देवी की हालत खराब होने पर परिजन आनन-फानन में उसे पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जहां लोगों की भीड़ जमा हो गयी। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स गुड़िया ने मरीज को देखने के बाद बाहर की दवा लिख दी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए बाहर से दवाई खरीद पाना संभव नहीं हो सका, जिससे परिजन काफी परेशान नजर आए। धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि पहले से ही पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है, ऐसे में सरकारी अस्पताल में भी समुचित इलाज न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है। उधर, इस घटना के बाद धरना स्थल पर मौजूद लोगों में आक्रोश व्याप्त है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
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    पलिया बजाज हिन्दुस्थान चीनी मिल में चल रहे धरने के बीच मृतक के परिवार की एक सदस्य की तबीयत अचानक बिगड़ गई। मृतक की भाभी सारथी देवी की हालत खराब होने पर परिजन आनन-फानन में उसे पलिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे। जहां लोगों की भीड़ जमा हो गयी।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद स्टाफ नर्स गुड़िया ने मरीज को देखने के बाद बाहर की दवा लिख दी। आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए बाहर से दवाई खरीद पाना संभव नहीं हो सका, जिससे परिजन काफी परेशान नजर आए।
धरने पर बैठे लोगों का कहना है कि पहले से ही पीड़ित परिवार आर्थिक संकट से गुजर रहा है, ऐसे में सरकारी अस्पताल में भी समुचित इलाज न मिलना गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की मांग की है।
उधर, इस घटना के बाद धरना स्थल पर मौजूद लोगों में आक्रोश व्याप्त है और जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है।
    user_निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    निर्जेश मिश्र "पत्रकार"
    लखीमपुर खीरी, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • Post by संदीप कुमार शर्मा
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    Post by संदीप कुमार शर्मा
    user_संदीप कुमार शर्मा
    संदीप कुमार शर्मा
    Photographer लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    4 hrs ago
  • स्पर्म व्हेल के बच्चे को जन्म देने का बहुत ही दुर्लभ फुटेज साइंटिस्ट्स ने एक शानदार घटना का फुटेज जारी किया है, जिसे इंसानों ने बहुत कम देखा है:
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    स्पर्म व्हेल के बच्चे को जन्म देने का बहुत ही दुर्लभ फुटेज
साइंटिस्ट्स ने एक शानदार घटना का फुटेज जारी किया है, जिसे इंसानों ने बहुत कम देखा है:
    user_Saty Mev jayate
    Saty Mev jayate
    Voice of people लखीमपुर, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • Post by FH.NEWS
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    Post by FH.NEWS
    user_FH.NEWS
    FH.NEWS
    Classified ads newspaper publisher पलिया, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • महा-खुलासा नगर मोहम्मदी तहसील क्षेत्र अंतर्गत: 'सफ़ेदपोश' यमराजों का नंगा नाच, गोमती की कोख और शारदा की पटरियों पर 'पीले पंजे' का खूनी प्रहार! नेशनल न्यूज़ ब्यूरो: संजय कुमार राठौर लोकेशन: मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील इस वक्त भ्रष्टाचार के उस 'ज्वालामुखी' पर बैठी है, जो किसी भी दिन पूरे सिस्टम को स्वाहा कर सकता है। यहाँ 'सत्ता की हनक' और 'नोटों की चमक' ने कानून के इकबाल को बंधक बना लिया है। योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा निकालते हुए खनन माफियाओं ने आदि गंगा गोमती और शारदा नहर को अपनी जागीर समझ लिया है। यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि यह सट्टे की धमक और प्रशासनिक सरपरस्ती में चल रहा वो 'खूनी खेल' है, जिसमें आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव आंकी जा रही है। 1. नोटों की चमक ने किया 'खाकी' को अंधा! मोहम्मदी में बालू और मिट्टी का अवैध कारोबार किसी लुका-छिपी का खेल नहीं, बल्कि डंके की चोट पर होने वाली डकैती है। सूत्रों की मानें तो खनन माफियाओं ने स्थानीय प्रशासन की रग-रग में 'नोटों की चमक' भर दी है। * वसूली का 'कोड वर्ड': हर ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर का एक 'कोड' तय है। जिसकी जेब में माफिया का सिक्का है, उसके लिए लाल बत्ती भी हरी हो जाती है। * राजस्व की सरेआम लूट: सरकारी खजाने में जाने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के आलीशान बंगलों और ऐशो-आराम पर खर्च हो रही है। 2. सत्ता की हनक: जब 'झंडा' बनता है गुंडागर्दी का लाइसेंस मोहम्मदी-गोला मार्ग और शाहजहांपुर रोड पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर लगे 'विशेष दलों' के झंडे और रसूखदारों के नाम यह बताने के लिए काफी हैं कि माफियाओं को 'सत्ता की हनक' का पूरा कवच प्राप्त है। * पुलिस की मजबूरी या मिलीभगत?: मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने कुछ ट्रालियां पकड़कर हेडलाइन बटोरने की कोशिश तो की, लेकिन उन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई जो इस पूरे सिंडिकेट के आका हैं। 3. 'यमराज' बनकर दौड़ रहे ओवरहाइट डंपर: राहगीरों की आंखों में 'मौत का गुबार' सबसे खौफनाक मंजर मोहम्मदी की सड़कों पर देखने को मिलता है। माफियाओं की भूख का आलम यह है कि ट्रालियों को आवर हाइट (Over-height) यानी क्षमता से तीन गुना ऊपर तक भर दिया जाता है। * अंधा कर रही धूल: बिना तिरपाल के दौड़ रहे इन वाहनों से उड़ने वाली बालू और मिट्टी राहगीरों के लिए 'मौत का जाल' बन चुकी है। * पलक झपकते ही हादसा: तेज हवाओं के चलते मोटरसाइकिल सवारों की आंखों में जैसे ही यह मिट्टी गिरती है, वे अपना संतुलन खो देते हैं। मोहम्मदी की सड़कें अब सुरक्षित सफर के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरियां भरने के लिए 'लाशों की मंडी' बनने की कगार पर हैं। 4. सट्टे की धमक: अपराध का नया पावर हाउस खबर के पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि खनन की काली कमाई का बड़ा हिस्सा मोहम्मदी के सट्टा बाजार में खपाया जा रहा है। * काले धन का चक्रव्यूह: अवैध खनन से मिलने वाले नोटों की गड्डियां रात के अंधेरे में सट्टे और जुए के अड्डों पर दांव पर लगाई जाती हैं। इसी 'सट्टे की धमक' ने क्षेत्र के युवाओं को अपराध की अंधी खाई में ढकेल दिया है। माफिया अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि समाज की नींव भी खोद रहे हैं। 5. विनाश के मुहाने पर कुदरत: गोमती और शारदा की चीख माफियाओं ने अपनी हवस में आदि गंगा गोमती नदी का सीना छलनी कर दिया है। जेसीबी मशीनों से नदी की गहराई तक की जा रही खुदाई ने जलस्तर को पाताल में भेज दिया है। वहीं, शारदा नहर की पटरियों को इस कदर खोखला कर दिया गया है कि मानसून की एक बारिश पूरे मोहम्मदी को जलमग्न कर सकती है। निष्कर्ष: क्या 'महाराज' का बुलडोजर अब भी खामोश रहेगा? लखीमपुर खीरी का यह 'खनन कांड' अब राष्ट्रीय सुर्खी बन चुका है। संजय कुमार राठौर की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को खुली चुनौती है। * क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'हंटर' इन रसूखदार माफियाओं पर चलेगा? * क्या 'सत्ता की हनक' दिखाने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा? * क्या मोहम्मदी की जनता को धूल और मौत से आजादी मिलेगी? प्रशासन को चेतावनी: अगर इन 'सफेदपोश यमराजों' पर तत्काल गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो मोहम्मदी की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। अब फैसला 'लखनऊ' को करना है— न्याय होगा या माफिया का राज रहेगा?
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    महा-खुलासा नगर मोहम्मदी तहसील क्षेत्र अंतर्गत:  'सफ़ेदपोश' यमराजों का नंगा नाच, गोमती की कोख और शारदा की पटरियों पर 'पीले पंजे' का खूनी प्रहार!
नेशनल न्यूज़ ब्यूरो: संजय कुमार राठौर लोकेशन: मोहम्मदी, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश)
लखीमपुर खीरी/मोहम्मदी: उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की मोहम्मदी तहसील इस वक्त भ्रष्टाचार के उस 'ज्वालामुखी' पर बैठी है, जो किसी भी दिन पूरे सिस्टम को स्वाहा कर सकता है। यहाँ 'सत्ता की हनक' और 'नोटों की चमक' ने कानून के इकबाल को बंधक बना लिया है। योगी सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जनाजा निकालते हुए खनन माफियाओं ने आदि गंगा गोमती और शारदा नहर को अपनी जागीर समझ लिया है।
यह केवल अवैध खनन नहीं है, बल्कि यह सट्टे की धमक और प्रशासनिक सरपरस्ती में चल रहा वो 'खूनी खेल' है, जिसमें आम आदमी की जान की कीमत कौड़ियों के भाव आंकी जा रही है।
1. नोटों की चमक ने किया 'खाकी' को अंधा!
मोहम्मदी में बालू और मिट्टी का अवैध कारोबार किसी लुका-छिपी का खेल नहीं, बल्कि डंके की चोट पर होने वाली डकैती है। सूत्रों की मानें तो खनन माफियाओं ने स्थानीय प्रशासन की रग-रग में 'नोटों की चमक' भर दी है।
* वसूली का 'कोड वर्ड': हर ट्रैक्टर-ट्राली और डंपर का एक 'कोड' तय है। जिसकी जेब में माफिया का सिक्का है, उसके लिए लाल बत्ती भी हरी हो जाती है।
* राजस्व की सरेआम लूट: सरकारी खजाने में जाने वाली रॉयल्टी अब माफियाओं के आलीशान बंगलों और ऐशो-आराम पर खर्च हो रही है।
2. सत्ता की हनक: जब 'झंडा' बनता है गुंडागर्दी का लाइसेंस
मोहम्मदी-गोला मार्ग और शाहजहांपुर रोड पर दौड़ रहे ओवरलोड डंपरों पर लगे 'विशेष दलों' के झंडे और रसूखदारों के नाम यह बताने के लिए काफी हैं कि माफियाओं को 'सत्ता की हनक' का पूरा कवच प्राप्त है।
* पुलिस की मजबूरी या मिलीभगत?: मोहम्मदी कोतवाली पुलिस ने कुछ ट्रालियां पकड़कर हेडलाइन बटोरने की कोशिश तो की, लेकिन उन 'बड़े मगरमच्छों' पर हाथ डालने की हिम्मत आज तक नहीं जुटा पाई जो इस पूरे सिंडिकेट के आका हैं।
3. 'यमराज' बनकर दौड़ रहे ओवरहाइट डंपर: राहगीरों की आंखों में 'मौत का गुबार'
सबसे खौफनाक मंजर मोहम्मदी की सड़कों पर देखने को मिलता है। माफियाओं की भूख का आलम यह है कि ट्रालियों को आवर हाइट (Over-height) यानी क्षमता से तीन गुना ऊपर तक भर दिया जाता है।
* अंधा कर रही धूल: बिना तिरपाल के दौड़ रहे इन वाहनों से उड़ने वाली बालू और मिट्टी राहगीरों के लिए 'मौत का जाल' बन चुकी है।
* पलक झपकते ही हादसा: तेज हवाओं के चलते मोटरसाइकिल सवारों की आंखों में जैसे ही यह मिट्टी गिरती है, वे अपना संतुलन खो देते हैं। मोहम्मदी की सड़कें अब सुरक्षित सफर के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं की तिजोरियां भरने के लिए 'लाशों की मंडी' बनने की कगार पर हैं।
4. सट्टे की धमक: अपराध का नया पावर हाउस
खबर के पीछे की कड़वी सच्चाई यह भी है कि खनन की काली कमाई का बड़ा हिस्सा मोहम्मदी के सट्टा बाजार में खपाया जा रहा है।
* काले धन का चक्रव्यूह: अवैध खनन से मिलने वाले नोटों की गड्डियां रात के अंधेरे में सट्टे और जुए के अड्डों पर दांव पर लगाई जाती हैं। इसी 'सट्टे की धमक' ने क्षेत्र के युवाओं को अपराध की अंधी खाई में ढकेल दिया है। माफिया अब सिर्फ जमीन नहीं, बल्कि समाज की नींव भी खोद रहे हैं।
5. विनाश के मुहाने पर कुदरत: गोमती और शारदा की चीख
माफियाओं ने अपनी हवस में आदि गंगा गोमती नदी का सीना छलनी कर दिया है। जेसीबी मशीनों से नदी की गहराई तक की जा रही खुदाई ने जलस्तर को पाताल में भेज दिया है। वहीं, शारदा नहर की पटरियों को इस कदर खोखला कर दिया गया है कि मानसून की एक बारिश पूरे मोहम्मदी को जलमग्न कर सकती है।
निष्कर्ष: क्या 'महाराज' का बुलडोजर अब भी खामोश रहेगा?
लखीमपुर खीरी का यह 'खनन कांड' अब राष्ट्रीय सुर्खी बन चुका है। संजय कुमार राठौर की यह रिपोर्ट सीधे तौर पर शासन और प्रशासन को खुली चुनौती है।
* क्या मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का 'हंटर' इन रसूखदार माफियाओं पर चलेगा?
* क्या 'सत्ता की हनक' दिखाने वाले सफेदपोशों के चेहरों से नकाब उतरेगा?
* क्या मोहम्मदी की जनता को धूल और मौत से आजादी मिलेगी?
प्रशासन को चेतावनी: अगर इन 'सफेदपोश यमराजों' पर तत्काल गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई नहीं हुई, तो मोहम्मदी की जनता सड़कों पर उतरने को मजबूर होगी। अब फैसला 'लखनऊ' को करना है— न्याय होगा या माफिया का राज रहेगा?
    user_उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
    उत्तर प्रदेश मीडिया प्रभारी रम
    निघासन, लखीमपुर खीरी, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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