उत्तर प्रदेश के अमरिया विकासखंड के धुंधरी गांव से विकास के दावों पर सवाल उठाने वाली एक तस्वीर सामने आई है। गांव में एक ग्रामीण की मौत के बाद उसके शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दर्जनों लोग कंधों पर शव उठाकर पानी के बीच से कठिन और जोखिम भरी अंतिम यात्रा पूरी करते दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि श्मशान घाट तक पहुँचने के लिए न तो कोई सड़क है और न ही पुलिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यह मुद्दा हाल ही में एक केंद्रीय राज्यमंत्री के सामने भी उठाया गया था, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। ग्रामीणों ने इस वायरल वीडियो को विकास के दावों की हकीकत बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल सड़क और पुलिया के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि जब अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक रास्ता नहीं मिलता, तो विकास के सभी दावे खोखले लगते हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, "जीते जी सड़क नहीं मिली, मौत के बाद भी सम्मानजनक रास्ता नसीब नहीं!"
उत्तर प्रदेश के अमरिया विकासखंड के धुंधरी गांव से विकास के दावों पर सवाल उठाने वाली एक तस्वीर सामने आई है। गांव में एक ग्रामीण की मौत के बाद उसके शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दर्जनों लोग कंधों पर शव उठाकर पानी के बीच से कठिन और जोखिम भरी अंतिम यात्रा पूरी करते दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि श्मशान घाट तक पहुँचने के लिए न तो कोई सड़क है और न ही पुलिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यह मुद्दा हाल ही में एक केंद्रीय राज्यमंत्री के सामने भी उठाया गया था, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। ग्रामीणों ने इस वायरल वीडियो को विकास के दावों की हकीकत बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल सड़क और पुलिया के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि जब अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक रास्ता नहीं मिलता, तो विकास के सभी दावे खोखले लगते हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, "जीते जी सड़क नहीं मिली, मौत के बाद भी सम्मानजनक रास्ता नसीब नहीं!"
- उत्तर प्रदेश के अमरिया विकासखंड के धुंधरी गांव से विकास के दावों पर सवाल उठाने वाली एक तस्वीर सामने आई है। गांव में एक ग्रामीण की मौत के बाद उसके शव को श्मशान घाट तक ले जाने के लिए परिजनों और ग्रामीणों को नदी के बीच से होकर गुजरना पड़ा। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में दर्जनों लोग कंधों पर शव उठाकर पानी के बीच से कठिन और जोखिम भरी अंतिम यात्रा पूरी करते दिखाई दे रहे हैं, क्योंकि श्मशान घाट तक पहुँचने के लिए न तो कोई सड़क है और न ही पुलिया। ग्रामीणों का आरोप है कि वे वर्षों से सड़क और पुलिया निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। यह मुद्दा हाल ही में एक केंद्रीय राज्यमंत्री के सामने भी उठाया गया था, फिर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं आया है। ग्रामीणों ने इस वायरल वीडियो को विकास के दावों की हकीकत बताते हुए जिला प्रशासन से तत्काल सड़क और पुलिया के निर्माण की मांग की है। उनका कहना है कि जब अंतिम संस्कार के लिए भी सम्मानजनक रास्ता नहीं मिलता, तो विकास के सभी दावे खोखले लगते हैं। ग्रामीणों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा, "जीते जी सड़क नहीं मिली, मौत के बाद भी सम्मानजनक रास्ता नसीब नहीं!"1
- Post by Sudheer Kumar1
- उत्तर प्रदेश के पिलभीत जिले में नल में पानी नहीं आ रहा है, जिससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।1
- कानपुर में ठेले वालों से मुफ्त में आइसक्रीम और गोलगप्पे खाना एक पुलिसकर्मी को भारी पड़ गया। इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मुख्य आरक्षी सुरेंद्र कुमार को निलंबित कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच एसीपी घाटमपुर को सौंपी गई है।1
- अमरिया से एक अच्छी और राहत भरी खबर सामने आई है, जहाँ भीषण गर्मी के बीच अमरिया व्यापार मंडल ने जनसेवा की मिसाल पेश की है। व्यापार मंडल ने कस्बे के मुख्य बाजार में राहगीरों और वाहन चालकों को ठंडा मीठा शरबत और चना वितरित किया, साथ ही लोगों को गर्मी से बचाव के लिए जागरूक भी किया। व्यापार मंडल अध्यक्ष असगर अली ने बताया कि बढ़ते तापमान को देखते हुए आम जनता को राहत पहुँचाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम आयोजित किया गया था। सुबह से देर शाम तक चले इस अभियान में बड़ी संख्या में लोगों ने शरबत पीकर गर्मी से राहत महसूस की और व्यापार मंडल की इस सराहनीय पहल की प्रशंसा की। इस मौके पर कौशल गुप्ता, मोहम्मद इमरान कादरी, विकास यादव, तारिक रजा सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।1
- बरेली जिले के नवाबगंज निवासी एक किसान का गन्ना भुगतान लंबे समय से लंबित पड़ा है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए, पैनी नजर सामाजिक संस्था की अध्यक्ष एडवोकेट सुनीता गंगवार ने संबंधित किसान के साथ मिलकर जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा है। किसान को अपनी एक पर्ची का यह बकाया भुगतान अभी तक नहीं मिल पाया है, जिससे वह लगातार परेशान है। किसान ने बताया कि वह इस भुगतान को पाने के लिए लंबे समय से गन्ना समिति के कार्यालयों और कई नेताओं के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी समस्या का कोई निवारण नहीं हो पाया है। अपनी आर्थिक स्थिति पर प्रकाश डालते हुए किसान ने यह भी जानकारी दी कि वह वर्तमान में अपना इलाज करा रहा है और बकाया भुगतान न मिलने के कारण गंभीर आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहा है। अपनी दुर्दशा से हताश होकर, किसान ने पहले नवाबगंज तहसील में अर्धनग्न अवस्था में धरना भी दिया था, लेकिन इतने प्रयासों के बावजूद भी उसकी समस्या का अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है।2
- पीलीभीत में मंगलवार को एक हृदय विदारक हादसा सामने आया, जहां कलेक्ट्रेट परिसर में बिजली पोल पर फाल्ट ठीक कर रहे एक संविदा कर्मचारी की करंट लगने और नीचे गिरने से मौत हो गई। आरोप है कि हादसे के बाद प्रशासनिक अधिकारियों की गाड़ियां मौके पर मौजूद होने के बावजूद, आधे घंटे तक किसी ने भी घायल को अस्पताल पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध नहीं कराया। जानकारी के मुताबिक, पीलीभीत शहर के मोहल्ला मदीने शाह निवासी 22 वर्षीय विजय राठौड़ बिजली विभाग में संविदा कर्मी के तौर पर कार्यरत थे। मंगलवार को वह अपने साथी रामबाबू और जनार्दन के साथ कलेक्ट्रेट परिसर में निर्वाचन कार्यालय के बाहर लगे विद्युत पोल पर फाल्ट दुरुस्त करने गए थे। बताया गया है कि लाइन बंद होने के बावजूद, अचानक जनरेटर से बैक सप्लाई का करंट आ गया, जिसकी चपेट में आकर विजय को जोरदार झटका लगा और वह सीढ़ी से सीधे जमीन पर आ गिरे। प्रत्यक्षदर्शी और उनके साथी कर्मचारी रामबाबू ने बताया कि विजय जमीन पर गिरने के बाद तड़प रहे थे। उन्होंने वहां मौजूद कलेक्ट्रेट स्टाफ और अधिकारियों से घायल को अस्पताल ले जाने के लिए गाड़ी की गुहार लगाई, लेकिन आधे घंटे तक कोई भी आगे नहीं आया। परिसर में कई सरकारी गाड़ियां खड़ी थीं, फिर भी किसी का दिल नहीं पसीजा। आखिरकार, लगभग आधे घंटे बाद एम्बुलेंस पहुंचने पर उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। हादसे की सूचना मिलने पर बिजली विभाग के एसडीओ मनोज कुमार यादव जिला अस्पताल पहुंचे। जब मीडिया ने उनसे कलेक्ट्रेट स्टाफ द्वारा घायल को समय पर वाहन न देने और संविदा कर्मियों की सुरक्षा को लेकर सवाल किया, तो उन्होंने चुप्पी साध ली। फिलहाल, पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।2
- पीलीभीत के गजरौला कला थाना क्षेत्र के घियोना गांव में रविवार देर रात उस समय हड़कंप मच गया जब एक छप्परपोश मकान में अज्ञात कारणों से भीषण आग लग गई। इस अग्निकांड में घर के अंदर रखा लाखों रुपये का घरेलू सामान जलकर खाक हो गया, वहीं आग की चपेट में आने से एक मवेशी की दर्दनाक मौत हो गई और एक अन्य गंभीर रूप से झुलस गया। प्राप्त जानकारी के अनुसार, घियोना गांव निवासी गंगाराम पुत्र छेदालाल का परिवार भीषण गर्मी के चलते घर के बाहर स्थित बाग में सो रहा था। देर रात अचानक उनके छप्परपोश मकान से आग की लपटें उठने लगीं। जब तक ग्रामीण कुछ समझ पाते, तब तक तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया, जिससे ग्रामीणों में चीख-पुकार मच गई। पीड़ित परिवार के मुताबिक, इस भीषण अग्निकांड में घर के अंदर खड़ी एक मोटरसाइकिल, तीन साइकिलें, सारा घरेलू सामान, लगभग एक कुंतल लहसुन और अन्य कीमती दस्तावेज पूरी तरह से जलकर राख हो गए। आग में झुलसने से एक गौवंशीय पशु की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा बुरी तरह से झुलस गया। पीड़ित ने इस घटना में करीब दो से ढाई लाख रुपये के नुकसान का अनुमान जताया है। घटना की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जमा हो गए और निजी संसाधनों की मदद से कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सब कुछ जल चुका था। थाना अध्यक्ष ब्रजवीर सिंह ने घटना की पुष्टि की है। राजस्व विभाग की टीम को नुकसान का आकलन करने के लिए सूचित किया जा रहा है ताकि पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता प्रदान की जा सके।3