पश्चिम बंगाल का चुनाव ममता गई। दीदी अब दीदे में दिखेंगी नहीं पश्चिम बंगाल का चुनाव अब सिर्फ चुनाव नहीं रहा, वह एक ऐसा वार्षिक उत्सव है जहाँ लोकतंत्र ढोल की थाप पर नहीं, डर की धुन पर नाचता है। यहाँ पोस्टर कम फटते हैं, आदमी ज़्यादा। हर पार्टी खुद को माँ दुर्गा का सच्चा भक्त बताती है, और विरोधी को महिषासुर घोषित कर देती है। नेता भाषणों में गरीबों के आँसू पोंछते हैं, फिर हेलीकॉप्टर में बैठकर उन्हीं आँसुओं के ऊपर उड़ जाते हैं। एक तरफ भगवा इतना नाराज़ है कि उसे हर दीवार पर पाकिस्तान दिखाई देता है। दूसरी तरफ हरा-सफेद इतना आश्वस्त है कि उसे हर आलोचक दिल्ली का एजेंट लगता है। और जनता? वह आज भी लाइन में खड़ी है — कभी राशन के लिए, कभी वोट के लिए, कभी लाठी खाने के लिए। बंगाल का बुद्धिजीवी अब कविता कम लिखता है, फेसबुक पोस्ट ज़्यादा। कॉफी हाउस की मेज़ों पर क्रांति अब भी बैठी रहती है, बस फर्क इतना है कि अब वह क्रांति Wi-Fi पासवर्ड पूछती है। यहाँ चुनाव आयोग ऐसे आता है जैसे स्कूल का निरीक्षक — जिसे पता है नकल हो रही है, पर वह सिर्फ खिड़की से झाँककर चला जाएगा। टीवी चैनलों ने पूरा चुनाव महाभारत बना दिया। एंकर ऐसे चिल्लाए मानो बंगाल नहीं, कुरुक्षेत्र बचाना हो। एक पार्टी कहती रही — “लोकतंत्र खतरे में है।” दूसरी बोली — “देश खतरे में है।” तीसरी ने सोचा — “हमारा टिकट खतरे में है।” और सबसे बड़ी बात यह कि हर हारने वाला नेता EVM को दोष देता है, जैसे मशीन ने नहीं, जनता ने गलती कर दी हो। बंगाल की राजनीति में हिंसा इतनी पुरानी हो चुकी है कि अब लोग खून देखकर चौंकते नहीं, बस पूछते हैं — “किस पार्टी का था?” फिर भी हर चुनाव के बाद नेता एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं। क्योंकि लड़ाई विचारों की कम, कुर्सियों की ज़्यादा होती है। और जनता? वह अगले चुनाव तक फिर उम्मीद पाल लेती है — कि शायद इस बार पोस्टरों से निकलकर कोई नेता सचमुच सड़क पर उतरेगा।
पश्चिम बंगाल का चुनाव ममता गई। दीदी अब दीदे में दिखेंगी नहीं पश्चिम बंगाल का चुनाव अब सिर्फ चुनाव नहीं रहा, वह एक ऐसा वार्षिक उत्सव है जहाँ लोकतंत्र ढोल की थाप पर नहीं, डर की धुन पर नाचता है। यहाँ पोस्टर कम फटते हैं, आदमी ज़्यादा। हर पार्टी खुद को माँ दुर्गा का सच्चा भक्त बताती है, और विरोधी को महिषासुर घोषित कर देती है। नेता भाषणों में गरीबों के आँसू पोंछते हैं, फिर हेलीकॉप्टर में बैठकर उन्हीं आँसुओं के ऊपर उड़ जाते हैं। एक तरफ भगवा इतना नाराज़ है कि उसे हर दीवार पर पाकिस्तान दिखाई देता है। दूसरी तरफ हरा-सफेद इतना आश्वस्त है कि उसे हर आलोचक दिल्ली का एजेंट लगता है। और जनता? वह आज भी लाइन में खड़ी है — कभी राशन के लिए, कभी वोट के लिए, कभी लाठी खाने के लिए। बंगाल का बुद्धिजीवी अब कविता कम लिखता है, फेसबुक पोस्ट ज़्यादा। कॉफी हाउस की मेज़ों पर क्रांति अब भी बैठी रहती है, बस फर्क इतना है कि अब वह क्रांति Wi-Fi पासवर्ड पूछती है। यहाँ चुनाव आयोग ऐसे आता है जैसे स्कूल का निरीक्षक — जिसे पता है नकल हो रही है, पर वह सिर्फ खिड़की से झाँककर चला जाएगा। टीवी चैनलों ने पूरा चुनाव महाभारत बना दिया। एंकर ऐसे चिल्लाए मानो बंगाल नहीं, कुरुक्षेत्र बचाना हो। एक पार्टी कहती रही — “लोकतंत्र खतरे में है।” दूसरी बोली — “देश खतरे में है।” तीसरी ने सोचा — “हमारा टिकट खतरे में है।” और सबसे बड़ी बात यह कि हर हारने वाला नेता EVM को दोष देता है, जैसे मशीन ने नहीं, जनता ने गलती कर दी हो। बंगाल की राजनीति में हिंसा इतनी पुरानी हो चुकी है कि अब लोग खून देखकर चौंकते नहीं, बस पूछते हैं — “किस पार्टी का था?” फिर भी हर चुनाव के बाद नेता एक-दूसरे को मिठाई खिलाते हैं। क्योंकि लड़ाई विचारों की कम, कुर्सियों की ज़्यादा होती है। और जनता? वह अगले चुनाव तक फिर उम्मीद पाल लेती है — कि शायद इस बार पोस्टरों से निकलकर कोई नेता सचमुच सड़क पर उतरेगा।
- छत्तीसगढ़ के जशपुर में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शख्स को धूप में बांधकर घंटों तक पीटा गया। झारपारा निवासी जोगेंद्र बढ़ई के साथ हुई इस क्रूर घटना का वीडियो भी वायरल हो रहा है।1
- रायगढ़ के धरमजयगढ़ में एक युवक दिनदहाड़े दुकान से सामान चुराते रंगेहाथ पकड़ा गया। दुकानदार ने चोर से निपटने का जो तरीका अपनाया, उसका सीसीटीवी वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहा है। स्थानीय लोग इस घटना पर हैरानी और सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त कर रहे हैं।1
- अंबिकापुर के टुनटुन दाबेली संचालक अमन ओझा की झारखंड में संदिग्ध परिस्थितियों में हत्या कर दी गई है। उसका नग्न शव सिर में गंभीर चोटों के साथ मिला, जबकि बाइक छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज से बरामद हुई। अमन पिछले दिनों पत्नी के अफेयर का वीडियो वायरल कर सुर्खियों में था, अब पुलिस प्रेम प्रसंग और पुरानी रंजिश समेत सभी एंगल से जांच कर रही है।1
- अंबिकापुर में वन विभाग की भूमि पर हुए अवैध कब्ज़े के खिलाफ प्रशासन ने सख्त कार्रवाई शुरू की है। यह कदम अवैध अतिक्रमणकारियों को रोकने और वन संपदा की रक्षा के लिए उठाया गया है।1
- सरगुजा पुलिस ने अंबिकापुर में शादी का झांसा देकर युवती का शोषण करने और उसकी आपत्तिजनक तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल करने वाले आरोपी को गिरफ्तार किया। गांधीनगर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी अनोज दास को बीएनएस, आईटी और पॉक्सो एक्ट के तहत न्यायिक रिमांड पर भेजा। यह घटना साइबर अपराधों के खिलाफ सरगुजा पुलिस की सख्त कार्रवाई को दर्शाती है।1
- जशपुर जिले के बेलवार से ड़ेवड़ाड़ तक एक भाई की शादी का भव्य समारोह आयोजित हुआ। इस मौके पर क्षेत्र में खुशी और उत्सव का माहौल देखने को मिला।1
- छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के कोहड़िया के पास एक युवक की धारदार हथियार से निर्मम हत्या कर दी गई है। इस जघन्य वारदात के बाद से इलाके में सनसनी फैल गई है और पुलिस मामले की जांच में जुट गई है।1
- मथुरा में महाराणा प्रताप की जयंती बड़े धूमधाम और उत्साह के साथ मनाई गई। इस अवसर पर क्षत्रिय सभा के पदाधिकारियों व गणमान्य लोगों ने उनके शौर्य, बलिदान और राष्ट्रभक्ति को याद किया। सभी ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया।1