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जो जोहर जो छत्तीसगढ़, बलरामपुर से अंबिकापुर मार्ग न के पास डाल दोहा घाटी, ट्रक का संतुलन खराब होने का कारण ब्रेक फेल होना, आज संतुलन खराब होने पर पेड़ पर टकराई, और अचानक शार्ट सर्किट होने की वजह से गाड़ी में आग लगी, पुलिस अपनी जांच में जुड़ गए हैं कारण क्या है,
Ratan Choudhry
जो जोहर जो छत्तीसगढ़, बलरामपुर से अंबिकापुर मार्ग न के पास डाल दोहा घाटी, ट्रक का संतुलन खराब होने का कारण ब्रेक फेल होना, आज संतुलन खराब होने पर पेड़ पर टकराई, और अचानक शार्ट सर्किट होने की वजह से गाड़ी में आग लगी, पुलिस अपनी जांच में जुड़ गए हैं कारण क्या है,
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- Post by Ratan Choudhry1
- बलरामपुर में संगठन सृजन अभियान के तहत गांव चलो अभियान आज से शुरू आज बलरामपुर जिले के ग्राम तातापानी में कांग्रेस का महत्वपूर्ण बैठकआज. आज की आयोजित में मुख्य अतिथि के रूप में कांग्रेस प्रभारी शफी अहमद जी और जिला अध्यक्ष लिखना उपस्थित रहेंगे आज बलरामपुर जिले के तातापानी में विशाल बैठक आयोजित कांग्रेस का किया जाएगा.. पूरा मामला बलरामपुर जिले के तातापानी गांव का है1
- ट्रक में आग लगने का मामला1
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- रामप्रवेश गुप्ता पूर्णाहुति के साथ उमड़ी श्रद्धा की धारा महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत ग्राम चटकपुर में माता चंद्रघंटा मंदिर स्थापना की 11वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित तीन दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान शुक्रवार 3 अप्रैल को पूर्णाहुति के साथ संपन्न हो गया। 1, 2 और 3 अप्रैल तक चले इस यज्ञ में पूरे गांव सहित आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। यज्ञ का शुभारंभ छठ नदी के पवित्र जल से कलश भरकर किया गया। स्थानीय ग्रामीण महिलाएं, पुरुष और बच्चियां गाजे-बाजे व भक्ति गीतों के साथ कलश यात्रा निकालते हुए पूरे चटकपुर गांव का नगर भ्रमण कर यज्ञशाला पहुंचीं, जहां विधिवत कलश स्थापना की गई। पूरे आयोजन के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। यज्ञ में श्रीकोट स्थित गहीरा गुरु आश्रम से आए मुख्य अतिथि ब्राह्मण रिशेश्वर महाराज के मार्गदर्शन में अनुष्ठान संपन्न कराया गया। मुख्य पुजारी के रूप में विद्याकांत जी, सहायक पुजारी मंगल शुक्ला तथा स्थानीय पुजारी ओंकार नाथ पाठक, मुरारी पाठक एवं धीरज पाठक ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ, हवन और पूजा-पाठ कराया। इस धार्मिक आयोजन में मुख्य यजमान की भूमिका उदय प्रसाद ने अपनी धर्मपत्नी के साथ निभाई। यज्ञ के प्रथम दिन जल यात्रा, पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन और आरती हुई। दूसरे दिन सुबह पुनः पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ और आरती के साथ भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया तथा रात्रि में विशाल भंडारा आयोजित हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। तीसरे और अंतिम दिन शुक्रवार को सुबह पूजा-पाठ, हवन, यज्ञ, आरती और भजन-कीर्तन के बाद कुंवारी नव कन्याओं का पूजन किया गया। इसके बाद पूर्णाहुति के साथ तीन दिवसीय आयोजन का समापन हुआ। पूरे आयोजन को सफल बनाने में पश्चिमी हिंदू महासभा के अध्यक्ष रामदत प्रसाद सहित मदन प्रसाद, महेंद्र प्रसाद, कपिल देव प्रसाद, नंदकिशोर प्रसाद, बद्रीनाथ प्रसाद, ज्ञानचंद प्रसाद, विजय प्रसाद, चंद्रशेखर प्रसाद गुरुजी, संजय प्रसाद डॉक्टर, विष्णु प्रसाद महूराम, हरिलाल गुप्ता, उमाकांत गुप्ता, राहुल प्रसाद, विष्णु प्रसाद, रमेश प्रसाद, सूरज कुमार, अयोध्या राम, उमेश कुमार गुप्ता गुरुजी समेत अनेक लोगों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। विशेष बात यह रही कि पूरे यज्ञ और आयोजन में गांव की मातृ शक्ति ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और धार्मिक कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।4
- डंडई में आदिम जनजाति के राशन में हेराफेरी का आरोप, उप प्रमुख प्रतिनिधि के घर मिला चावल, ग्रामीणों का हंगामा1
- वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र में वनभूमि कब्जे का बड़ा आरोप, वनपाल पर रिश्वत लेकर जमीन दिलाने की चर्चा बलरामपुर. जिले के वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र से एक बेहद गंभीर और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने वन विभाग की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। यहां वनभूमि पर अवैध कब्जा कराने को लेकर वन विभाग के ही एक जिम्मेदार कर्मचारी, वनपाल पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि वनभूमि पर खुलेआम जेसीबी मशीन से समतलीकरण कर कब्जा कराया जा रहा है और इस पूरे मामले में विभागीय मिलीभगत की आशंका भी जताई जा रही है। ग्रामीणों ने वर्तमान में पदस्थ वनपाल विजय सिंह पर सीधे तौर पर आरोप लगाए हैं कि वे पैसे लेकर वनभूमि पर कब्जा कराने में सहयोग कर रहे हैं। मामला सामने आने के बाद पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। दिनदहाड़े चल रही जेसीबी, प्रशासन की चुप्पी पर सवाल ... जानकारी के अनुसार, वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र के कुंदी गांव में दिनदहाड़े जेसीबी मशीन से वनभूमि को समतल किया जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि यह काम खुलेआम और बिना किसी रोक-टोक के किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि कब्जा करने वालों को किसी प्रकार का भय नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि यह कार्य अवैध है, तो प्रशासन और वन विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की गई। इस चुप्पी ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं। वनपाल पर रिश्वत लेकर कब्जा कराने का आरोप .. ग्रामीणों ने वर्तमान में पदस्थ वनपाल विजय सिंह पर सीधे तौर पर आरोप लगाए हैं कि वे पैसे लेकर वनभूमि पर कब्जा कराने में सहयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इतने बड़े स्तर पर कब्जा बिना उच्च अधिकारियों की जानकारी या सहमति के संभव नहीं है, जिससे पूरे मामले में अन्य लोगों की संलिप्तता की आशंका भी जताई जा रही है। प्लांटेशन क्षेत्र पर कब्जा, पर्यावरण पर खतरा ... ग्रामीणों के मुताबिक जिस भूमि पर कब्जा किया जा रहा है, वह वन विभाग द्वारा पूर्व में विकसित किया गया प्लांटेशन क्षेत्र है। इस भूमि पर नियमित रूप से पौधारोपण किया जाता रहा है और इसे संरक्षित वन क्षेत्र के रूप में देखा जाता है। ऐसे में इस जमीन को जेसीबी से समतल कर कब्जा करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर भी सीधा प्रहार माना जा रहा है। इससे वन क्षेत्र के नुकसान के साथ-साथ जैव विविधता पर भी असर पड़ने की आशंका है। मामला सामने आते ही हरकत में वन विभाग ... घटना की जानकारी सामने आने के बाद वन विभाग के अधिकारियों ने संज्ञान लिया है। एसडीओ फॉरेस्ट ने बताया कि पूरे मामले की जांच के लिए एक टीम गठित कर दी गई है और जल्द ही मौके का निरीक्षण किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और यदि किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। जांच प्रक्रिया पर टिकी उम्मीदें .. मामले के सामने आने के बाद अब जांच की प्रक्रिया शुरू होने की बात कही जा रही है। Sdo प्रेमचंद मिश्रा का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, ग्रामीणों को अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है और वे चाहते हैं कि कार्रवाई सिर्फ कागजों तक सीमित न रहकर जमीन पर भी दिखाई दे। ग्रामीणों में भारी आक्रोश, सख्त कार्रवाई की मांग... इस पूरे घटनाक्रम के बाद स्थानीय ग्रामीणों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। उनका कहना है कि यदि अभी इस तरह के अवैध कब्जों पर रोक नहीं लगाई गई, तो आने वाले समय में और भी वनभूमि पर कब्जा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि न केवल अवैध कब्जा तत्काल हटाया जाए, बल्कि इसमें शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों पर भी कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। सबसे बड़ा सवाल: क्या अपने ही कर्मचारियों पर होगी कार्रवाई... अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या वन विभाग अपने ही कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई कर पाएगा या यह मामला भी अन्य मामलों की तरह केवल जांच तक सीमित रह जाएगा। अक्सर देखा गया है कि ऐसे मामलों में जांच लंबी खिंचती है और कार्रवाई में देरी होती है, जिससे आम लोगों का भरोसा प्रशासन से कमजोर होता है। हालांकि इस बार मामला खुलकर सामने आया है और ग्रामीणों का दबाव भी लगातार बना हुआ है, ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि प्रशासन इस पर ठोस और निर्णायक कदम उठाएगा। प्रशासनिक जवाबदेही पर खड़े हुए बड़े सवाल... वाड्रफनगर वन परिक्षेत्र का यह मामला सिर्फ अवैध कब्जे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था, निगरानी तंत्र और जिम्मेदारी पर भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। यदि समय रहते इस पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, तो यह मामला और अधिक गंभीर रूप ले सकता है और क्षेत्र में कानून व्यवस्था की स्थिति भी प्रभावित हो सकती जांच रिपोर्ट और अगली कार्रवाई पर टिकी नजरें.. फिलहाल पूरे क्षेत्र की नजरें जांच रिपोर्ट और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। अब यह देखना अहम होगा कि वन विभाग इस मामले में कितनी तेजी और सख्ती से कदम उठाता है। यदि प्रशासन निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई करता है, तो न केवल इस मामले का समाधान होगा, बल्कि भविष्य में इस तरह के अवैध कब्जों पर भी रोक लगाई जा सकेगी1