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*धनगांव में महुआ शराब माफिया का ‘काला साम्राज्य’! 10 साल से 30 गांवों तक फैलाया जाल, युवाओं की जिंदगी बर्बाद, संरक्षण के दम पर बेखौफ कारोबार* संवाददाता- विजय शंकर तिवारी देश दुनिया की हर खबर सबसे पहले पाने के लिए हमारे साथ जुड़े रहे https://www.prabhatnews24.in/single/sharab-mafia-ka-kala-samrajya-10-salon-mein-30-gaon-tak-failaya-samrajya और भी हर तरह की खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे What's group से जुड़े https://chat.whatsapp.com/F6JIC5Pbn6DEU4I5RyeKDD खबर व विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें 6260187193 सत्य के पुजारी - विजय तिवारी 🙏🙏🙏🙏🙏 जहां सच है वहां हम है।
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*धनगांव में महुआ शराब माफिया का ‘काला साम्राज्य’! 10 साल से 30 गांवों तक फैलाया जाल, युवाओं की जिंदगी बर्बाद, संरक्षण के दम पर बेखौफ कारोबार* संवाददाता- विजय शंकर तिवारी देश दुनिया की हर खबर सबसे पहले पाने के लिए हमारे साथ जुड़े रहे https://www.prabhatnews24.in/single/sharab-mafia-ka-kala-samrajya-10-salon-mein-30-gaon-tak-failaya-samrajya और भी हर तरह की खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे What's group से जुड़े https://chat.whatsapp.com/F6JIC5Pbn6DEU4I5RyeKDD खबर व विज्ञापन के लिए सम्पर्क करें 6260187193 सत्य के पुजारी - विजय तिवारी 🙏🙏🙏🙏🙏 जहां सच है वहां हम है।
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- कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… गरियाबंद। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है? जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है। आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है? क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है? विडंबना देखिए… एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है। पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है। लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है। आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े। यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा? प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए। क्योंकि अगर कलम डर गई… तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी। आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें। लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है। “अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”1
- बिलासपुर के परसदा गाँव में मदर्स डे पर एक शराबी बेटे ने अपनी माँ और बहन के साथ बेल्ट व लोटे से बेरहमी से मारपीट की। इस हमले में माँ और बहन दोनों घायल हो गईं, जिसके बाद उन्होंने चकरभाठा थाने में शिकायत दर्ज कराई। आरोपी बेटा नशे का आदी है, जिसकी वजह से उसकी पत्नी भी उसे छोड़कर जा चुकी है।1
- बिलासपुर के बिल्हा में स्थित मानस केटरिंग, अपनी लाजवाब सेवाओं के लिए क्षेत्र में लोकप्रिय है। यह स्थानीय आयोजनों और उत्सवों में स्वादिष्ट भोजन का भरोसेमंद विकल्प बन गया है।1
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- रिपोर्टर ओमनारायण तिवारी दारु भट्टी में मचा भगदड़ शराब प्रेमियों से के साथ खिलवाड़ शराब होने के बाद भी शराब प्रेमी झुझ रहे है लोकेशन बिलासपुर उसलापुर दारू भट्टी रिपोर्टर ओमनारायण तिवारी दारु भट्टी में मचा भगदड़ शराब प्रेमियों से के साथ खिलवाड़ शराब होने के बाद भी शराब प्रेमी झुझ रहे है आप को बता दे कि छत्तीसगढ़ बिलासपुर में शराब के लिए शराब प्रेमी बिलासपुर जिले के कंपोजिट शराब दुकानें है वहां शराब प्रेमी तकलीपों से जूझ रहे है जहां शासन का दावा है कि शराब पूर्ति भरपूर मात्रा में हो रही हैं जबकि मीडिया रिपोर्ट के हिसाब से देखा जाय तो शासन की कमजोरी नजर आ रही है जहां आम पब्लिक बहुत परेशान है विभाग से पूछे जाने पर मीडिया को सांत्वना दिया जाता हैं जिससे आम पब्लिको का मीडिया शासन से भरोसा उठता जा रहा हैं अब देखते हैं आम।पब्लिक कहा गुहार लगा रहे हैं2
- बिलासपुर में फर्जी बयान और कूटरचित शपथ पत्र के एक गंभीर मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने इस संबंध में पुलिस अधीक्षक से त्वरित कार्रवाई और न्याय सुनिश्चित करने की गुहार लगाई है।1
- कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… कलम की चीख: जब एक बुजुर्ग पत्रकार को अपराधी बना दिया गया… संवाददाता धीरेंद्र कुमार जायसवाल/9131419735 गरियाबंद। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की हालत आज किस दौर से गुजर रही है, इसका दर्दनाक उदाहरण छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में देखने को मिला। वर्षों तक समाज की आवाज़ बनने वाला एक बुजुर्ग पत्रकार आज खुद व्यवस्था के सवालों के बीच खड़ा दिखाई दे रहा है। जिस व्यक्ति ने पूरी जिंदगी कलम के जरिए गरीबों, पीड़ितों और आम जनता की समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुँचाया, आज उसी को अपराधी की तरह पेश किए जाने की कोशिश ने पूरे पत्रकार जगत को भीतर तक झकझोर दिया है। यह केवल एक व्यक्ति की कहानी नहीं है, बल्कि उस हर पत्रकार की पीड़ा है जो सच लिखने का साहस करता है। सवाल यह उठता है कि क्या अब सच बोलना और सच दिखाना भी गुनाह बन चुका है? जिस उम्र में इंसान सम्मान और शांति की उम्मीद करता है, उस उम्र में एक बुजुर्ग पत्रकार को मानसिक प्रताड़ना, अपमान और कार्रवाई का सामना करना पड़े — यह दृश्य केवल पत्रकार समाज ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील नागरिक को विचलित कर रहा है। आखिर वह कौन-सी गुंडागर्दी है, जो एक कमजोर, बुजुर्ग पत्रकार की आंखों में दिखाई दे रही है? क्या व्यवस्था अब इतनी असहज हो चुकी है कि सवाल पूछने वाली कलम भी उसे दुश्मन नजर आने लगी है? विडंबना देखिए… एक तरफ वे लोग जिन पर समाज में भय और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं, उनके लिए सुरक्षा के बड़े-बड़े इंतजाम किए जाते हैं। करोड़ों रुपए खर्च होते हैं। लेकिन दूसरी तरफ, जनता की आवाज़ उठाने वाला पत्रकार खुद असुरक्षित महसूस कर रहा है। पत्रकार कभी समाज का दुश्मन नहीं होता। पत्रकार वह आईना होता है जो सत्ता को उसकी सच्चाई दिखाता है। लेकिन जब सत्ता और व्यवस्था उसी आईने को तोड़ने लगे, तब समझ लेना चाहिए कि लोकतंत्र खतरे में है। आज गरियाबंद की यह घटना पूरे प्रदेश के पत्रकारों के मन में एक डर पैदा कर रही है। डर इस बात का कि कहीं कल सच लिखने की कीमत उन्हें भी न चुकानी पड़े। यदि एक बुजुर्ग पत्रकार सुरक्षित नहीं है, तो फिर आम नागरिक किस भरोसे न्याय और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की उम्मीद करेगा? प्रदेश के मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai, गृहमंत्री और प्रशासनिक अधिकारियों से पत्रकार समाज की यही मांग है कि इस मामले को केवल कानूनी कार्रवाई के नजरिए से नहीं, बल्कि लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों की दृष्टि से देखा जाए। क्योंकि अगर कलम डर गई… तो जनता की आवाज़ भी खामोश हो जाएगी। आज जरूरत है पत्रकारों को संरक्षण देने की, उन्हें सम्मान देने की, ताकि वे बिना भय के सच लिख सकें। लोकतंत्र की असली ताकत बंदूक नहीं, बल्कि स्वतंत्र कलम होती है। “अगर सच लिखना अपराध बन गया, तो आने वाला समय लोकतंत्र के लिए सबसे खतरनाक दौर साबित होगा।”1