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तेंदूखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौसम बदलते ही उमड़ी मरीजों की भीड़,,,वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा

12 hrs ago
user_Dharmendra sahu
Dharmendra sahu
Photographer तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
12 hrs ago

तेंदूखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मौसम बदलते ही उमड़ी मरीजों की भीड़,,,वायरल बुखार, सर्दी-खांसी और उल्टी-दस्त के मरीजों की संख्या में भारी इजाफा

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • नरसिंहपुर जिले की जीवनदायनी मां नर्मदा के बरमान घाट में नर्मदा पूजन के साथ चुनरी अर्पण
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    नरसिंहपुर जिले की जीवनदायनी मां नर्मदा के बरमान घाट में नर्मदा पूजन के साथ चुनरी अर्पण
    user_Dharmendra sahu
    Dharmendra sahu
    Photographer तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • ग्राम पंचायत बारह के मढ़खेरा टोला की... जहाँ सड़क खुदाई के बाद बनी नहीं, बल्कि दलदल बन गई। हालत ये है कि बीच सड़क पर हरी-हरी घास उग आई है। *🎙️ GAG NEWS LIVE | खास रिपोर्ट* *एंकर - गौसेवक अखलेश गौरझामर* नमस्कार, आप देख रहे हैं GAG NEWS गौरझामर, और मैं हूँ आपके साथ अखिलेश गौरझामर। *ब्रेकिंग न्यूज देवरी विकासखंड से...* गजब ग्राम में गजब हुआ विकास! यहाँ हर घर नल योजना के नाम पर पक्की CC सड़क को ही खोद डाला गया। तस्वीरें आप देखिए ग्राम पंचायत बारह के मढ़खेरा टोला की... जहाँ सड़क खुदाई के बाद बनी नहीं, बल्कि दलदल बन गई। हालत ये है कि बीच सड़क पर हरी-हरी घास उग आई है। *पक्की सड़क खोद कर उपजाऊ बनाने का कारनामा!* ग्रामीणों का कहना है - न जल निकासी है, न आवागमन। कीचड़ और जलजमाव से पूरा रास्ता बंद है। कई महीने बीत गए, लेकिन सड़क आज तक नहीं बनी। ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और जल्द मरम्मत की मांग की है। तो ये था देवरी के बारह से विकास की हकीकत दिखाता हमारा खास रिपोर्ट। आप बने रहिए GAG NEWS के साथ। *संपादक - गौसेवक अखलेश गौरझामर | GAG NEWS Gaurjhamar* #GAGNEWS #Gaurjhamar #grampanchayatbarah #ccsadak #hargharnalkajal🚰 #sagar #deori
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    ग्राम पंचायत बारह के मढ़खेरा टोला की... जहाँ सड़क खुदाई के बाद बनी नहीं, बल्कि दलदल बन गई। हालत ये है कि बीच सड़क पर हरी-हरी घास उग आई है।
*🎙️ GAG NEWS LIVE | खास रिपोर्ट*
*एंकर - गौसेवक अखलेश गौरझामर*
नमस्कार, आप देख रहे हैं GAG NEWS गौरझामर, और मैं हूँ आपके साथ अखिलेश गौरझामर।
*ब्रेकिंग न्यूज देवरी विकासखंड से...*
गजब ग्राम में गजब हुआ विकास! यहाँ हर घर नल योजना के नाम पर पक्की CC सड़क को ही खोद डाला गया।
तस्वीरें आप देखिए ग्राम पंचायत बारह के मढ़खेरा टोला की... जहाँ सड़क खुदाई के बाद बनी नहीं, बल्कि दलदल बन गई। हालत ये है कि बीच सड़क पर हरी-हरी घास उग आई है।
*पक्की सड़क खोद कर उपजाऊ बनाने का कारनामा!*
ग्रामीणों का कहना है - न जल निकासी है, न आवागमन। कीचड़ और जलजमाव से पूरा रास्ता बंद है। कई महीने बीत गए, लेकिन सड़क आज तक नहीं बनी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से जांच और जल्द मरम्मत की मांग की है।
तो ये था देवरी के बारह से विकास की हकीकत दिखाता हमारा खास रिपोर्ट।
आप बने रहिए GAG NEWS के साथ।
*संपादक - गौसेवक अखलेश गौरझामर | GAG NEWS Gaurjhamar*
#GAGNEWS #Gaurjhamar   #grampanchayatbarah #ccsadak #hargharnalkajal🚰 #sagar #deori
    user_Akhlesh jain Reportar
    Akhlesh jain Reportar
    Salesperson देवरी, सागर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • *गौरझामर में कागजों पर परोसा जा रहा कैंसर! खाद्य विभाग की भनक लगते ही भागे दुकानदार, जांच पर उठे सवाल* गौरझामर।* गौरझामर में खाद्य विभाग की टीम द्वारा किराना एवं मिठाई दुकानों की जांच के लिए पहुंचने पर पूरे बाजार में हड़कंप मच गया। टीम के आने की भनक लगते ही अधिकांश मिष्ठान भंडार, समोसा-चाट, फुलकी और किराना दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर भागते नजर आए। जानकारी के अनुसार खाद्य विभाग के अधिकारी अपनी टीम के साथ नियमित जांच एवं गुणवत्ता जांच के उद्देश्य से गौरझामर पहुंचे थे। आरोप है कि हर बार की तरह इस बार भी टीम ने कमलेश किराना एवं सुनील ट्रेडर्स पर दो घंटे तक चाय-नाश्ते में समय बिता कर खानापूर्ति की, इसी बीच सभी दुकानदारों को सूचना मिल गई कि खाद्य विभाग जांच करने आया है। टीम के बाजार में पहुंचते ही इलाके के अधिकांश किराना एवं मिठाई विक्रेताओं ने शटर गिरा दिए, जिसके कारण केवल एक दुकान सुनील किराना की ही जांच हो सकी। जांच के दौरान छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का मामला सामने आया, जहां नकली ब्रांड के कुरकुरे और एक्सपायरी डेट की चॉकलेट पाई गई। आरोप है कि अधिकारियों को चाय मिलते ही कुरकुरे, बिस्किट, मिर्ची पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मीठा तेल, दाल, बेसन, मैदा जैसी अन्य सामग्री छोड़कर केवल चॉकलेट का सैंपल लिया गया और डिब्बों को जप्त कर जांच के लिए भेज दिया गया। यह नजारा देख नगर के लोग अचंभित रह गए। लोगों में चर्चा है कि आखिर विभाग के आते ही दुकानें बंद क्यों की गईं? क्या खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सही नहीं है? क्या बाजार में मिलावटी सामग्री उपभोक्ताओं को परोसी जा रही है जो कागजों पर कैंसर बनकर बिक रही है? इसका जवाब तो आला अधिकारी और दुकानदार ही दे सकते हैं। जब इस संबंध में सागर से आए हुए अधिकारियों से पत्रकारों द्वारा जानकारी चाही गई तो उन्होंने टालमटोल जवाब देकर पढ़ला झाड़ लिया पूर्ण जानकारी न देकर हुए रफू चक्कर सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आला अधिकारी आते हैं और सेवा शुल्क लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं, उन्हें उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ से कोई मतलब नहीं है। जबकि मध्य प्रदेश शासन की मंशा है कि लोगों को स्वास्थ्यवर्धक और शुद्ध सामग्री मिले, पर गौरझामर में जमीनी हकीकत इसके उलट है। ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि व्यापारी दुकान बंद करके भागे हैं, इससे यही साबित होता है कि व्यापारी नकली प्रोडक्ट बेच रहे हैं क्या? जिससे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो भी व्यापारी दुकान बंद कर भागा है, उसकी दुकान खुलवाकर जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर दुकान सील कर बंद की जाए।
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    *गौरझामर में कागजों पर परोसा जा रहा कैंसर! खाद्य विभाग की भनक लगते ही भागे दुकानदार, जांच पर उठे सवाल*

गौरझामर।* 
गौरझामर में खाद्य विभाग की टीम द्वारा किराना एवं मिठाई दुकानों की जांच के लिए पहुंचने पर पूरे बाजार में हड़कंप मच गया। टीम के आने की भनक लगते ही अधिकांश मिष्ठान भंडार, समोसा-चाट, फुलकी और किराना दुकानदार अपनी दुकानें बंद कर भागते नजर आए।
जानकारी के अनुसार खाद्य विभाग के अधिकारी अपनी टीम के साथ नियमित जांच एवं गुणवत्ता जांच के उद्देश्य से गौरझामर पहुंचे थे। आरोप है कि हर बार की तरह इस बार भी टीम ने कमलेश किराना एवं सुनील ट्रेडर्स पर दो घंटे तक चाय-नाश्ते में समय बिता कर खानापूर्ति की, इसी बीच सभी दुकानदारों को सूचना मिल गई कि खाद्य विभाग जांच करने आया है।
टीम के बाजार में पहुंचते ही इलाके के अधिकांश किराना एवं मिठाई विक्रेताओं ने शटर गिरा दिए, जिसके कारण केवल एक दुकान सुनील किराना की ही जांच हो सकी। जांच के दौरान छोटे-छोटे बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ का मामला सामने आया, जहां नकली ब्रांड के कुरकुरे और एक्सपायरी डेट की चॉकलेट पाई गई। आरोप है कि अधिकारियों को चाय मिलते ही कुरकुरे, बिस्किट, मिर्ची पाउडर, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर, मीठा तेल, दाल, बेसन, मैदा जैसी अन्य सामग्री छोड़कर केवल चॉकलेट का सैंपल लिया गया और डिब्बों को जप्त कर जांच के लिए भेज दिया गया।
यह नजारा देख नगर के लोग अचंभित रह गए। लोगों में चर्चा है कि आखिर विभाग के आते ही दुकानें बंद क्यों की गईं? क्या खाद्य सामग्री की गुणवत्ता सही नहीं है? क्या बाजार में मिलावटी सामग्री उपभोक्ताओं को परोसी जा रही है जो कागजों पर कैंसर बनकर बिक रही है? इसका जवाब तो आला अधिकारी और दुकानदार ही दे सकते हैं। जब इस संबंध में सागर से आए हुए अधिकारियों से पत्रकारों द्वारा जानकारी चाही गई तो उन्होंने टालमटोल जवाब देकर पढ़ला झाड़ लिया पूर्ण जानकारी न देकर हुए रफू चक्कर
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आला अधिकारी आते हैं और सेवा शुल्क लेकर रफूचक्कर हो जाते हैं, उन्हें उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य से हो रहे खिलवाड़ से कोई मतलब नहीं है। जबकि मध्य प्रदेश शासन की मंशा है कि लोगों को स्वास्थ्यवर्धक और शुद्ध सामग्री मिले, पर गौरझामर में जमीनी हकीकत इसके उलट है। ग्रामीणों में भारी गुस्सा है। ग्रामीणों का कहना है कि व्यापारी दुकान बंद करके भागे हैं, इससे यही साबित होता है कि  व्यापारी नकली प्रोडक्ट बेच रहे हैं क्या? जिससे लोगों का स्वास्थ्य बिगड़ रहा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि जो भी व्यापारी दुकान बंद कर भागा है, उसकी दुकान खुलवाकर जांच की जाए और दोषी पाए जाने पर दुकान सील कर बंद की जाए।
    user_Ashok Patel journalist
    Ashok Patel journalist
    देवरी, सागर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • *मूंग भुगतान में देरी पर किसानों का फूटा गुस्सा, कलेक्टर कार्यालय में जमकर नारेबाजी; अपर कलेक्टर अरविंद सिंह के लौटने पर बढ़ा आक्रोश!* नरसिंहपुर/ 8 सितंबर 2026 समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन के 45 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं होने से चिचली क्षेत्र के किसानों का आक्रोश मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में देखने को मिला। बड़ी संख्या में किसानों ने लंबित भुगतान को लेकर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की। किसानों का कहना है कि ग्राम चिचली क्षेत्र की मूंग की फसल का उपार्जन बड़कुर वेयरहाउस, उपार्जन केंद्र क्रमांक 58434115, के माध्यम से चैनाकछार समिति द्वारा किया गया था। किसानों के अनुसार फसल दिए 45 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक उपार्जन की राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है। किसानों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने पर उन्हें वेयरहाउस का WRDA पंजीयन उपलब्ध नहीं होने की बात बताई जा रही है और भुगतान में 70 से 90 दिन तक लगने की जानकारी दी जा रही है। किसानों ने सवाल उठाया कि फसल बेचने के बाद भुगतान के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा आखिर क्यों करनी पड़ रही है। अपर कलेक्टर अरविंद सिंह के लौटने से नाराज हुए किसान कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर किसान नेता प्रतीक शर्मा सहित अन्य किसान नारेबाजी कर रहे थे। इसी दौरान अपर कलेक्टर अरविंद सिंह मुख्य द्वार पर पहुंचे। किसानों की बात सुनने के बजाय वे वापस कार्यालय के अंदर चले गए। इस घटनाक्रम से किसान और अधिक नाराज हो गए और उन्होंने विरोध तेज कर दिया। इसी दौरान कार्यालय की सुरक्षा में तैनात नगर सैनिक दिनेश राजपूत ने किसानों को परिसर के अंदर जाने से रोकने का प्रयास किया। इसे लेकर मौके पर मौजूद थाना कोतवाली पुलिस स्टाफ और कलेक्टर कार्यालय के सुरक्षाकर्मियों के बीच भी तीखी नोकझोंक की स्थिति बन गई। मामला बढ़ता देख अपर कलेक्टर अरविंद सिंह दोबारा मुख्य गेट पर पहुंचे और किसानों से शांतिपूर्वक ज्ञापन देने तथा बातचीत के माध्यम से समस्या रखने की अपील की। किसान नेता बोले—बार-बार ज्ञापन देना पड़ रहा किसान नेता प्रतीक शर्मा ने पोलखोल न्यूज़ से बातचीत में कहा कि किसानों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार ज्ञापन और आवेदन देना पड़ रहा है। उनका कहना है कि किसान अपनी उपज बेच चुका है, लेकिन भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं वरिष्ठ नेता धनीराम पटेल ने भी पोलखोल न्यूज़ से बातचीत में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए किसानों की समस्या का तत्काल निराकरण किए जाने की मांग की। किसानों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए लंबित मूंग उपार्जन राशि का भुगतान यथाशीघ्र कराने और भुगतान में देरी के कारणों की जांच कर किसानों को राहत देने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि किसानों के इस विरोध के बाद प्रशासन भुगतान को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है और किसानों को उनकी उपज की राशि आखिर कब तक मिल पाती है।
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    *मूंग भुगतान में देरी पर किसानों का फूटा गुस्सा, कलेक्टर कार्यालय में जमकर नारेबाजी; अपर कलेक्टर अरविंद सिंह के लौटने पर बढ़ा आक्रोश!*
नरसिंहपुर/  8  सितंबर 2026  समर्थन मूल्य पर मूंग उपार्जन के 45 दिन से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान नहीं होने से चिचली क्षेत्र के किसानों का आक्रोश मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय में देखने को मिला। बड़ी संख्या में किसानों ने लंबित भुगतान को लेकर जमकर नारेबाजी की और प्रशासन के सामने अपनी नाराजगी जाहिर की।
किसानों का कहना है कि ग्राम चिचली क्षेत्र की मूंग की फसल का उपार्जन बड़कुर वेयरहाउस, उपार्जन केंद्र क्रमांक 58434115, के माध्यम से चैनाकछार समिति द्वारा किया गया था। किसानों के अनुसार फसल दिए 45 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अभी तक उपार्जन की राशि उनके खातों में नहीं पहुंची है।
किसानों का आरोप है कि संबंधित अधिकारियों से जानकारी लेने पर उन्हें वेयरहाउस का WRDA पंजीयन उपलब्ध नहीं होने की बात बताई जा रही है और भुगतान में 70 से 90 दिन तक लगने की जानकारी दी जा रही है। किसानों ने सवाल उठाया कि फसल बेचने के बाद भुगतान के लिए इतनी लंबी प्रतीक्षा आखिर क्यों करनी पड़ रही है।
अपर कलेक्टर अरविंद सिंह के लौटने से नाराज हुए किसान
कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर किसान नेता प्रतीक शर्मा सहित अन्य किसान नारेबाजी कर रहे थे। इसी दौरान अपर कलेक्टर अरविंद सिंह मुख्य द्वार पर पहुंचे।  किसानों की बात सुनने के बजाय वे वापस कार्यालय के अंदर चले गए। इस घटनाक्रम से किसान और अधिक नाराज हो गए और उन्होंने विरोध तेज कर दिया।
इसी दौरान कार्यालय की सुरक्षा में तैनात नगर सैनिक दिनेश राजपूत ने किसानों को परिसर के अंदर जाने से रोकने का प्रयास किया। इसे लेकर मौके पर मौजूद थाना कोतवाली पुलिस स्टाफ और कलेक्टर कार्यालय के सुरक्षाकर्मियों के बीच भी तीखी नोकझोंक की स्थिति बन गई।
मामला बढ़ता देख अपर कलेक्टर अरविंद सिंह दोबारा मुख्य गेट पर पहुंचे और किसानों से शांतिपूर्वक ज्ञापन देने तथा बातचीत के माध्यम से समस्या रखने की अपील की।
किसान नेता बोले—बार-बार ज्ञापन देना पड़ रहा
किसान नेता प्रतीक शर्मा ने पोलखोल न्यूज़ से बातचीत में कहा कि किसानों को अपनी समस्या के समाधान के लिए बार-बार ज्ञापन और आवेदन देना पड़ रहा है। उनका कहना है कि किसान अपनी उपज बेच चुका है, लेकिन भुगतान नहीं मिलने से आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
वहीं वरिष्ठ नेता धनीराम पटेल ने भी पोलखोल न्यूज़ से बातचीत में सरकार और प्रशासन के प्रति नाराजगी जाहिर करते हुए किसानों की समस्या का तत्काल निराकरण किए जाने की मांग की।
किसानों ने कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए लंबित मूंग उपार्जन राशि का भुगतान यथाशीघ्र कराने और भुगतान में देरी के कारणों की जांच कर किसानों को राहत देने की मांग की है।
अब देखना यह होगा कि किसानों के इस विरोध के बाद प्रशासन भुगतान को लेकर क्या ठोस कदम उठाता है और किसानों को उनकी उपज की राशि आखिर कब तक मिल पाती है।
    user_Polkholnewz
    Polkholnewz
    News Anchor गाडरवारा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • इस बेसहारा मां की दर्द भरी आवाज़ को अनसुना न करें। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि प्रशासन तक उनकी गुहार पहुंचे और अवैध शराब की बिक्री पर सख्त रोक लग सके! शराब ने एक और परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है। सागर की इस बेबस महिला का दर्द आपकी आंखें भी नम कर देगा। शराब की लत के कारण इनके पति की जान चली गई। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा है। 80 साल के बीमार ससुर और 14 साल के मासूम बेटे की जिम्मेदारी इस अकेली महिला पर है, जो खुद गंभीर रूप से बीमार है। रोते हुए और हाथ जोड़कर उनकी प्रशासन से बस एक ही गुहार है कि गांव में शराब की बिक्री तुरंत बंद हो।
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    इस बेसहारा मां की दर्द भरी आवाज़ को अनसुना न करें। इस वीडियो को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि प्रशासन तक उनकी गुहार पहुंचे और अवैध शराब की बिक्री पर सख्त रोक लग सके!
शराब ने एक और परिवार को पूरी तरह उजाड़ दिया है। सागर की इस बेबस महिला का दर्द आपकी आंखें भी नम कर देगा। शराब की लत के कारण इनके पति की जान चली गई। अब घर में कमाने वाला कोई नहीं बचा है। 80 साल के बीमार ससुर और 14 साल के मासूम बेटे की जिम्मेदारी इस अकेली महिला पर है, जो खुद गंभीर रूप से बीमार है। रोते हुए और हाथ जोड़कर उनकी प्रशासन से बस एक ही गुहार है कि गांव में शराब की बिक्री तुरंत बंद हो।
    user_KHABAR WITH KK
    KHABAR WITH KK
    Local News Reporter सिलवानी, रायसेन, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • पखांजूर-गुडुम पहाड़ में जुटा अस्था का सैलाब 44 गांवों समेत क ई राज्यों से पहुचे आदिवासी समाज के लोग
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    पखांजूर-गुडुम पहाड़ में जुटा अस्था का सैलाब 
44 गांवों समेत क ई राज्यों से पहुचे आदिवासी समाज के लोग
    user_Ashish dubey
    Ashish dubey
    नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • नरसिंहपुर जिले के ग्राम नंदवाड़ा में दिखा 10 फीट लंबा अजगर, ग्रामीणों और पशुपालकों में दहशत ​नरसिंहपुर नरसिंहपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नंदवाड़ा में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां लगभग 10 फीट लंबा एक विशाल अजगर देखा गया। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और खासकर मवेशी चराने वालों में भारी दहशत का माहौल है। ​कैसे सामने आया मामला? ​प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम नंदवाड़ा में कुछ ग्रामीण और बकरी पालक अपनी बकरियों को चराने के लिए जंगल व ग्रामीण इलाकों की तरफ गए हुए थे। इसी दौरान उनकी नजर एक बड़े अजगर पर पड़ी, जो वहां आराम की मुद्रा में बैठा हुआ था। अचानक इतने बड़े सांप को देखकर बकरी चराने वाले डर गए और तुरंत वहां से भागकर अपनी जान बचाई। इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य लोगों को इसकी सूचना दी। ​ग्रामीणों की चिंता और डर ​घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने जाकर देखा तो लगभग 10 फीट का भारी-भरकम अजगर वहां मौजूद था। ​बकरी चराने वालों और किसानों का कहना है कि इस इलाके में उनका रोज आना-जाना होता है। लोग अपनी बकरियों और अन्य मवेशियों को चराने के लिए यहीं लाते हैं। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि: ​इलाके में अजगर की मौजूदगी से बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ​मवेशियों (बकरियों, गायों) के साथ-साथ इंसानों की जान को भी गंभीर खतरा है। ​यदि समय रहते वन विभाग या सर्पमित्रों द्वारा इस अजगर का रेस्क्यू नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी या दुर्घटना हो सकती है। ​ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों से तुरंत संज्ञान लेने तथा सुरक्षित तरीके से अजगर को पकड़कर घने जंगल में छोड़ने की मांग की है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
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    नरसिंहपुर जिले के ग्राम नंदवाड़ा में दिखा 10 फीट लंबा अजगर, ग्रामीणों और पशुपालकों में दहशत
​नरसिंहपुर नरसिंहपुर क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नंदवाड़ा में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब वहां लगभग 10 फीट लंबा एक विशाल अजगर देखा गया। इस घटना के बाद से स्थानीय ग्रामीणों और खासकर मवेशी चराने वालों में भारी दहशत का माहौल है।
​कैसे सामने आया मामला?
​प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम नंदवाड़ा में कुछ ग्रामीण और बकरी पालक अपनी बकरियों को चराने के लिए जंगल व ग्रामीण इलाकों की तरफ गए हुए थे। इसी दौरान उनकी नजर एक बड़े अजगर पर पड़ी, जो वहां आराम की मुद्रा में बैठा हुआ था। अचानक इतने बड़े सांप को देखकर बकरी चराने वाले डर गए और तुरंत वहां से भागकर अपनी जान बचाई। इसके बाद उन्होंने गांव के अन्य लोगों को इसकी सूचना दी।
​ग्रामीणों की चिंता और डर
​घटना की खबर फैलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर एकत्र हो गए। लोगों ने जाकर देखा तो लगभग 10 फीट का भारी-भरकम अजगर वहां मौजूद था।
​बकरी चराने वालों और किसानों का कहना है कि इस इलाके में उनका रोज आना-जाना होता है। लोग अपनी बकरियों और अन्य मवेशियों को चराने के लिए यहीं लाते हैं। ग्रामीणों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि:
​इलाके में अजगर की मौजूदगी से बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
​मवेशियों (बकरियों, गायों) के साथ-साथ इंसानों की जान को भी गंभीर खतरा है।
​यदि समय रहते वन विभाग  या सर्पमित्रों  द्वारा इस अजगर का रेस्क्यू नहीं किया गया, तो कभी भी कोई बड़ी अनहोनी या दुर्घटना हो सकती है।
​ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों से तुरंत संज्ञान लेने तथा सुरक्षित तरीके से अजगर को पकड़कर घने जंगल में छोड़ने की मांग की है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को टाला जा सके।
    user_पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    पत्रकार आशीष कुमार दुबे
    Media and information sciences faculty नरसिंहपुर, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • *कागजों में दौड़ रहा विकास, कीचड़ में दम तोड़ रही ग्रामीणों की जिंदगी* मंजीरे-हारमोनियम के साथ ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन, गूंजा नारा— “रोड नहीं तो वोट नहीं” नरसिंहपुर। सरकारी फाइलों में विकास की रफ्तार भले ही तेज दिखाई दे रही हो, लेकिन नरसिंहपुर जिले की जनपद पंचायत चाबरपाठा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भामा के लंकापुरी वार्ड में विकास की जमीनी तस्वीर शासन-प्रशासन के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है। बदहाल सड़क, कीचड़ और दलदल से परेशान ग्रामीणों का सब्र आखिरकार टूट गया। अपनी पीड़ा जिम्मेदारों तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने हाथों में मंजीरा और हारमोनियम उठाकर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। संगीत के माध्यम से ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अपनी बदहाल जिंदगी की तस्वीर दिखाने का प्रयास किया। कीचड़ में फंसी जिंदगी, जिम्मेदारों से सवाल— आखिर कब जागेगा प्रशासन? ग्रामीणों का कहना है कि लंकापुरी वार्ड की सड़क की हालत इतनी खराब है कि बारिश के दिनों में सड़क रास्ता कम और दलदल ज्यादा नजर आती है। जगह-जगह कीचड़ होने के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों के मुताबिक सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब किसी व्यक्ति को अचानक चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। उनका दावा है कि कई बार बीमार लोगों को वाहन की सुविधा नहीं मिलने पर कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं तक समय पर नहीं पहुंच पाने से गंभीर घटनाएं होने के आरोप भी लगाए हैं। प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजातों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाने से जच्चा-बच्चा की मौत होने की घटनाओं का भी ग्रामीणों ने दावा किया है। इन दावों की प्रशासनिक स्तर पर जांच और सत्यापन बेहद जरूरी है। स्कूल जाने के बजाय कीचड़ से जूझ रहे बच्चे इस बदहाल सड़क का सबसे बड़ा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। कीचड़ और दलदल के कारण कई बार बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है। चुनाव में वोट मांगने वाले नेताओं से ग्रामीणों का सीधा सवाल ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव-गांव पहुंचकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव के बाद इन्हीं गांवों की मूलभूत समस्याएं नजर नहीं आतीं। इसी नाराजगी के बीच ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में अपना संदेश दे दिया “रोड नहीं, तो वोट नहीं!” मंजीरे और हारमोनियम के साथ हुए इस अनोखे विरोध प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और स्कूली छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल रहे। अब जिम्मेदारों की परीक्षा! लंकापुरी वार्ड के ग्रामीणों का यह प्रदर्शन महज विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था से जवाब मांगने वाली आवाज है। अब सवाल सीधे शासन-प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से है क्या लंकापुरी वार्ड की बदहाल सड़क की सुध ली जाएगी? क्या ग्रामीणों को कीचड़ और दलदल से निजात मिलेगी? क्या स्कूली बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा? और क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे? या फिर हमेशा की तरह विकास के दावे सरकारी कागजों में दौड़ते रहेंगे और लंकापुरी के ग्रामीण कीचड़ में अपनी जिंदगी ढोते रहेंगे? अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
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    *कागजों में दौड़ रहा विकास, कीचड़ में दम तोड़ रही ग्रामीणों की जिंदगी*

मंजीरे-हारमोनियम के साथ ग्रामीणों का अनोखा प्रदर्शन, गूंजा नारा— “रोड नहीं तो वोट नहीं”
नरसिंहपुर।
सरकारी फाइलों में विकास की रफ्तार भले ही तेज दिखाई दे रही हो, लेकिन नरसिंहपुर जिले की जनपद पंचायत चाबरपाठा क्षेत्र की ग्राम पंचायत भामा के लंकापुरी वार्ड में विकास की जमीनी तस्वीर शासन-प्रशासन के दावों पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
बदहाल सड़क, कीचड़ और दलदल से परेशान ग्रामीणों का सब्र आखिरकार टूट गया। अपनी पीड़ा जिम्मेदारों तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों ने हाथों में मंजीरा और हारमोनियम उठाकर अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया। संगीत के माध्यम से ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को अपनी बदहाल जिंदगी की तस्वीर दिखाने का प्रयास किया।
कीचड़ में फंसी जिंदगी, जिम्मेदारों से सवाल— आखिर कब जागेगा प्रशासन?
ग्रामीणों का कहना है कि लंकापुरी वार्ड की सड़क की हालत इतनी खराब है कि बारिश के दिनों में सड़क रास्ता कम और दलदल ज्यादा नजर आती है। जगह-जगह कीचड़ होने के कारण पैदल चलना तक मुश्किल हो गया है।
ग्रामीणों के मुताबिक सबसे गंभीर स्थिति तब बनती है, जब किसी व्यक्ति को अचानक चिकित्सा की जरूरत पड़ती है। उनका दावा है कि कई बार बीमार लोगों को वाहन की सुविधा नहीं मिलने पर कंधों पर उठाकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।
ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सुविधाओं तक समय पर नहीं पहुंच पाने से गंभीर घटनाएं होने के आरोप भी लगाए हैं। प्रसव के दौरान महिलाओं और नवजातों को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा पाने से जच्चा-बच्चा की मौत होने की घटनाओं का भी ग्रामीणों ने दावा किया है। इन दावों की प्रशासनिक स्तर पर जांच और सत्यापन बेहद जरूरी है।
स्कूल जाने के बजाय कीचड़ से जूझ रहे बच्चे
इस बदहाल सड़क का सबसे बड़ा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। कीचड़ और दलदल के कारण कई बार बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या केवल आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य से जुड़ा गंभीर सवाल है।
चुनाव में वोट मांगने वाले नेताओं से ग्रामीणों का सीधा सवाल
ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रति भी नाराजगी जाहिर की। उनका कहना है कि चुनाव के समय नेता गांव-गांव पहुंचकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव के बाद इन्हीं गांवों की मूलभूत समस्याएं नजर नहीं आतीं।
इसी नाराजगी के बीच ग्रामीणों ने स्पष्ट शब्दों में अपना संदेश दे दिया
“रोड नहीं, तो वोट नहीं!”
मंजीरे और हारमोनियम के साथ हुए इस अनोखे विरोध प्रदर्शन में महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और स्कूली छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में शामिल रहे।
अब जिम्मेदारों की परीक्षा!
लंकापुरी वार्ड के ग्रामीणों का यह प्रदर्शन महज विरोध नहीं, बल्कि व्यवस्था से जवाब मांगने वाली आवाज है।
अब सवाल सीधे शासन-प्रशासन और जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों से है
क्या लंकापुरी वार्ड की बदहाल सड़क की सुध ली जाएगी?
क्या ग्रामीणों को कीचड़ और दलदल से निजात मिलेगी?
क्या स्कूली बच्चों को सुरक्षित रास्ता मिलेगा?
और क्या जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे?
या फिर हमेशा की तरह विकास के दावे सरकारी कागजों में दौड़ते रहेंगे और लंकापुरी के ग्रामीण कीचड़ में अपनी जिंदगी ढोते रहेंगे?
अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है।
    user_Dharmendra sahu
    Dharmendra sahu
    Photographer तेंदूखेड़ा, नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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