जयपुर के अजीतपुरा कला-कुजोता में नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के खिलाफ चल रहा 292 दिन पुराना धरना हटा दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर चार थानों की पुलिस और भारी जाब्ता सहित प्रशासनिक अमला तैनात रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से रिहायशी मकानों तक पत्थर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत सुनने के बजाय प्रशासन ने उन पर ही कार्रवाई की। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार को हुई भारी ब्लास्टिंग के कारण उड़कर आए पत्थरों से आसपास के घरों को भारी खतरा पैदा हो गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर बुलाया था। आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय तहसीलदार रामधन गुर्जर, डिप्टी राजेंद्र सिंह और चार थानों के प्रभारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धरना हटवा दिया और स्थल पर लगा टेंट भी सटवा दिया। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उनका यह भी आरोप है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी कर रही है, और आबादी, स्कूल, श्मशान भूमि तथा ग्रामीण सड़कों के बेहद नजदीक खतरनाक ब्लास्टिंग की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर बाहरी लोगों को बुलाकर महिलाओं से अभद्रता की गई और ओवरलोड डंपरों से ग्रामीणों को कुचलने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। जिला प्रशासन को कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, तहसीलदार का कहना है कि कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के कारण यह कार्रवाई की गई। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई से आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा। यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि नेतराम ताखर, पूर्व सरपंच रामकरण मीणा, महेंद्र मीणा, सुवालाल मीणा, महेंद्र दादरवाल, बिरजू धानका, राम सिंह जाट, रामस्वरूप पंच, भागीरथ मीणा, रोशन आर्य, रमेश चौधरी, धनसीराम जागिड़, लखमी कटारिया, बनवारी ताखर, शिवलाल जाट, रियाज खान, गोकल कुमावत, अफीज खान, शीशराम होलदार और लालचंद बावरिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष ग्रामीण मौजूद थे।
जयपुर के अजीतपुरा कला-कुजोता में नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के खिलाफ चल रहा 292 दिन पुराना धरना हटा दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर चार थानों की पुलिस और भारी जाब्ता सहित प्रशासनिक अमला तैनात रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से रिहायशी मकानों तक पत्थर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत सुनने के बजाय प्रशासन ने उन पर ही कार्रवाई की। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार को हुई भारी ब्लास्टिंग के कारण उड़कर आए पत्थरों से आसपास के घरों को भारी खतरा पैदा हो गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर बुलाया था। आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय तहसीलदार रामधन गुर्जर, डिप्टी राजेंद्र सिंह और चार थानों के प्रभारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धरना हटवा दिया और स्थल पर लगा टेंट भी सटवा दिया। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उनका यह भी आरोप है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी कर रही है, और आबादी, स्कूल, श्मशान भूमि तथा ग्रामीण सड़कों के बेहद नजदीक खतरनाक ब्लास्टिंग की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर बाहरी लोगों को बुलाकर महिलाओं से अभद्रता की गई और ओवरलोड डंपरों से ग्रामीणों को कुचलने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। जिला प्रशासन को कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, तहसीलदार का कहना है कि कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के कारण यह कार्रवाई की गई। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई से आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा। यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि नेतराम ताखर, पूर्व सरपंच रामकरण मीणा, महेंद्र मीणा, सुवालाल मीणा, महेंद्र दादरवाल, बिरजू धानका, राम सिंह जाट, रामस्वरूप पंच, भागीरथ मीणा, रोशन आर्य, रमेश चौधरी, धनसीराम जागिड़, लखमी कटारिया, बनवारी ताखर, शिवलाल जाट, रियाज खान, गोकल कुमावत, अफीज खान, शीशराम होलदार और लालचंद बावरिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष ग्रामीण मौजूद थे।
- राजस्थान के कोटपुतली बहरोड़ जिले की बानसूर तहसील के चीपड़ी गांव, पोस्ट हरसौरा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, लगभग 11 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से, ठेकेदार के माध्यम से किए जा रहे पीसीसी (PCC) कार्य में गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है। जब इस संबंध में ठेकेदार के कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि "यह ऐसे ही चलेगा और हम इसी तरीके से काम करेंगे।" इस जवाब से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है, जिन्होंने इस मामले में समाधान और हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।4
- अलवर में स्थित 'सिलीसेढ़ लेक पैलेस' अरावली की पहाड़ियों के मध्य एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थल है। यह अलवर शहर से लगभग 13-14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सरिस्का टाइगर रिजर्व के मार्ग में पड़ता है।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले में 292 दिनों से चला आ रहा एक धरना प्रशासन द्वारा हटा दिया गया है। इस कार्रवाई पर संघर्ष समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए इसे प्रशासन की दमनकारी कार्रवाई बताया है। समिति ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि इस कदम से आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि इसके विरोध में अब मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा।1
- सैंथल उपखंड क्षेत्र में देर रात आए तेज अंधड़ ने जमकर तबाही मचाई। इस भयंकर अंधड़ के कारण सैकड़ों पेड़-पौधे गिर गए, जिससे व्यापक नुकसान हुआ।4
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- जयपुर के अजीतपुरा कला-कुजोता में नेशनल लाइमस्टोन कंपनी के खिलाफ चल रहा 292 दिन पुराना धरना हटा दिया गया है, जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मौके पर चार थानों की पुलिस और भारी जाब्ता सहित प्रशासनिक अमला तैनात रहा। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग से रिहायशी मकानों तक पत्थर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनकी शिकायत सुनने के बजाय प्रशासन ने उन पर ही कार्रवाई की। ग्रामीणों के अनुसार, शुक्रवार को हुई भारी ब्लास्टिंग के कारण उड़कर आए पत्थरों से आसपास के घरों को भारी खतरा पैदा हो गया। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर बुलाया था। आरोप है कि समस्या का समाधान करने के बजाय तहसीलदार रामधन गुर्जर, डिप्टी राजेंद्र सिंह और चार थानों के प्रभारियों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए धरना हटवा दिया और स्थल पर लगा टेंट भी सटवा दिया। ग्रामीणों ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया है। उनका यह भी आरोप है कि नेशनल लाइमस्टोन कंपनी सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी कर रही है, और आबादी, स्कूल, श्मशान भूमि तथा ग्रामीण सड़कों के बेहद नजदीक खतरनाक ब्लास्टिंग की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि विरोध करने पर बाहरी लोगों को बुलाकर महिलाओं से अभद्रता की गई और ओवरलोड डंपरों से ग्रामीणों को कुचलने व जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। जिला प्रशासन को कई बार गुहार लगाने के बावजूद कोई सुनवाई नहीं हुई। वहीं, तहसीलदार का कहना है कि कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के कारण यह कार्रवाई की गई। संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि प्रशासन की इस दमनकारी कार्रवाई से आंदोलन थमेगा नहीं, बल्कि इसे और तेज किया जाएगा। यदि उनकी जायज मांगों पर जल्द सुनवाई नहीं हुई, तो ग्रामीण जयपुर पहुंचकर मुख्यमंत्री निवास के बाहर प्रदर्शन करेंगे। इस दौरान सरपंच प्रतिनिधि नेतराम ताखर, पूर्व सरपंच रामकरण मीणा, महेंद्र मीणा, सुवालाल मीणा, महेंद्र दादरवाल, बिरजू धानका, राम सिंह जाट, रामस्वरूप पंच, भागीरथ मीणा, रोशन आर्य, रमेश चौधरी, धनसीराम जागिड़, लखमी कटारिया, बनवारी ताखर, शिवलाल जाट, रियाज खान, गोकल कुमावत, अफीज खान, शीशराम होलदार और लालचंद बावरिया सहित बड़ी संख्या में महिलाएं और पुरुष ग्रामीण मौजूद थे।1