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पब्लिक हेल्थ बरवाला में SDO के खिलाफ सैकड़ों कर्मचारियों ने किया जोरदार विरोध
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पब्लिक हेल्थ बरवाला में SDO के खिलाफ सैकड़ों कर्मचारियों ने किया जोरदार विरोध
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- *IAS अफसर के सेक्रेटरी ने सुसाइड किया:* चंडीगढ़ में हरियाणा सचिवालय की छठी मंजिल से छलांग लगाई, 15 दिन पहले भी कोशिश की थी1
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- जुलाना: कस्बे में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक प्रेरणादायक पहल की गई। मंडी चौकी प्रभारी अजय कुमार की शादी की सालगिरह के अवसर पर खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में थाना प्रभारी विक्रम जोसन ने शिरकत की। उन्होंने कहा कि आज के समय में बढ़ती ग्लोबल वार्मिंग और प्रदूषण पूरी दुनिया के लिए चिंता का विषय है। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को अपने स्तर पर पौधारोपण करना चाहिए। पेड़-पौधे न केवल वातावरण को शुद्ध करते हैं, बल्कि हमें छाया, फल, ऑक्सीजन और जीवनदायिनी ऊर्जा भी प्रदान करते हैं। विक्रम जोसन ने कहा कि केवल पौधा लगाना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जब तक वह पौधा बड़ा होकर पेड़ न बन जाए, तब तक उसकी देखभाल एक बच्चे की तरह करनी चाहिए। नियमित सिंचाई, सुरक्षा और संरक्षण से ही पौधा विकसित होकर पर्यावरण के लिए उपयोगी बन सकता है। उन्होंने उपस्थित लोगों से वर्ष में कम से कम एक पौधा अवश्य लगाने और उसकी देखरेख करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। इस मौके पर आरोग्यम अस्पताल के डायरेक्टर डॉ योगेश नांदल, संजीत कौशिक, जयभगवान आदि मौजूद रहे। फोटो कैप्शन: 25 जुलाना 02: खंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय में पौधारोपण करते थाना प्रभारी व अन्य।1
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- जुलाना: क्षेत्र के मालवी गांव के किसानों को इस बार दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। बरसाती पानी के कारण खेतों में लंबे समय तक जलभराव की स्थिति बनी रही, जिससे पहले तो धान की फसल पूरी तरह से खराब हो गई और अब करीब 100 एकड़ भूमि में गेहूं की बिजाई भी नहीं हो सकी। लगातार नुकसान से किसान आर्थिक संकट में आ गए हैं और प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।किसानों ने बताया कि बारिश के दौरान निकासी व्यवस्था ठीक न होने के कारण पानी कई दिनों तक खेतों में खड़ा रहा। इससे धान की फसल सड़ गई और उत्पादन शून्य के बराबर रहा। किसानों ने उम्मीद की थी कि धान के नुकसान की भरपाई गेहूं की फसल से हो जाएगी, लेकिन खेतों में अत्यधिक नमी और कीचड़ के चलते समय पर जुताई और बिजाई संभव नहीं हो पाई। परिणामस्वरूप लगभग 100 एकड़ में गेहूं की बुवाई नहीं हो सकी। किसानों ने बताया कि उन्होंने सरकार द्वारा शुरू किए गए क्षतिपूर्ति पोर्टल पर अपना पंजीकरण भी कराया है और संबंधित दस्तावेज जमा करवाए हैं। इसके बावजूद अभी तक किसी भी किसान को मुआवजे की राशि प्राप्त नहीं हुई है। किसानों का कहना है कि खाद, बीज और सिंचाई पर पहले ही हजारों रुपये खर्च हो चुके थे। धान की फसल खराब होने से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। अब गेहूं की बिजाई न होने से पूरे सीजन की आमदनी पर संकट खड़ा हो गया है। किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द सर्वे करवाकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और शीघ्र मुआवजा जारी किया जाए। फोटो केप्शन: 25 जुलाना 01: मालवी गांव में खराब हुई धान की फसल दिखाते हुए किसान।1