सीहोर दिनांक 22-2-26 *रुद्राक्ष महोत्सव (14 फरवरी से 20 फरवरी) के दौरान बिछड़े श्रद्धालुओं को परिजनों से मिलाने की सराहनीय पहल* दिनांक 14 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति रही। महोत्सव में दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं के आगमन के कारण भीड़ अधिक होने से *348 श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ गए थे।* ऐसी स्थिति में पुलिस विभाग द्वारा त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विशेष “खोया-पाया केंद्र” स्थापित किए गए। इन केंद्रों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूरी सतर्कता, धैर्य एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए *बिछड़े हुए श्रद्धालुओं में महिला 152,बच्चे 69, वृद्ध 84, बालक एवं पुरुष 41 को सुरक्षित रूप से उनके परिजनों से मिलाया।* इसके अतिरिक्त 2 महिलाओं के नहीं मिलने के कारण थाना मंडी में गुम इंसान कायम किए, जिन्हें भी पुलिस ने तत्परता पूर्वक खोजकर उनके परिवार के सुपुर्द किया, जिसमें एक महिला महाराष्ट्र एवं एक महिला राजस्थान की थी । महोत्सव अवधि के दौरान लगातार सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (PA सिस्टम) तथा सोशल मीडिया एवं कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया, जिससे परिजनों की शीघ्र पहचान कर उन्हें आपस में मिलाने में सफलता मिली। विशेष रूप से वृद्धजन, महिलाएं एवं बच्चे, जो भीड़ के कारण परिजनों से अलग हो गए थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखकर आवश्यक सहायता प्रदान की गई। इस मानवीय प्रयास से न केवल श्रद्धालुओं में विश्वास की भावना सुदृढ़ हुई, बल्कि पुलिस एवं प्रशासन की संवेदनशील एवं जिम्मेदार कार्यशैली भी परिलक्षित हुई। परिजनों से मिलते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आई खुशी एवं राहत इस सफल व्यवस्था का प्रमाण रही । रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन शांति, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के साथ संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही ।
सीहोर दिनांक 22-2-26 *रुद्राक्ष महोत्सव (14 फरवरी से 20 फरवरी) के दौरान बिछड़े श्रद्धालुओं को परिजनों से मिलाने की सराहनीय पहल* दिनांक 14 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति रही। महोत्सव में दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं के आगमन के कारण भीड़ अधिक होने से *348 श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ गए थे।* ऐसी स्थिति में पुलिस विभाग द्वारा त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विशेष “खोया-पाया केंद्र” स्थापित किए गए। इन केंद्रों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूरी सतर्कता, धैर्य एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए *बिछड़े हुए श्रद्धालुओं में महिला 152,बच्चे 69, वृद्ध 84, बालक एवं पुरुष 41 को सुरक्षित रूप से उनके परिजनों से मिलाया।* इसके अतिरिक्त 2 महिलाओं के नहीं मिलने के कारण थाना मंडी में गुम इंसान कायम किए, जिन्हें भी पुलिस ने तत्परता पूर्वक खोजकर उनके परिवार के सुपुर्द किया, जिसमें एक महिला महाराष्ट्र एवं एक महिला राजस्थान की थी । महोत्सव अवधि के दौरान लगातार सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (PA सिस्टम) तथा सोशल मीडिया एवं कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया, जिससे परिजनों की शीघ्र पहचान कर उन्हें आपस में मिलाने में सफलता मिली। विशेष रूप से वृद्धजन, महिलाएं एवं बच्चे, जो भीड़ के कारण परिजनों से अलग हो गए थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखकर आवश्यक सहायता प्रदान की गई। इस मानवीय प्रयास से न केवल श्रद्धालुओं में विश्वास की भावना सुदृढ़ हुई, बल्कि पुलिस एवं प्रशासन की संवेदनशील एवं जिम्मेदार कार्यशैली भी परिलक्षित हुई। परिजनों से मिलते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आई खुशी एवं राहत इस सफल व्यवस्था का प्रमाण रही । रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन शांति, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के साथ संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही ।
- दिनांक 14 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति रही। महोत्सव में दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं के आगमन के कारण भीड़ अधिक होने से *348 श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ गए थे।* ऐसी स्थिति में पुलिस विभाग द्वारा त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विशेष “खोया-पाया केंद्र” स्थापित किए गए। इन केंद्रों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूरी सतर्कता, धैर्य एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए *बिछड़े हुए श्रद्धालुओं में महिला 152,बच्चे 69, वृद्ध 84, बालक एवं पुरुष 41 को सुरक्षित रूप से उनके परिजनों से मिलाया।* इसके अतिरिक्त 2 महिलाओं के नहीं मिलने के कारण थाना मंडी में गुम इंसान कायम किए, जिन्हें भी पुलिस ने तत्परता पूर्वक खोजकर उनके परिवार के सुपुर्द किया, जिसमें एक महिला महाराष्ट्र एवं एक महिला राजस्थान की थी । महोत्सव अवधि के दौरान लगातार सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (PA सिस्टम) तथा सोशल मीडिया एवं कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया, जिससे परिजनों की शीघ्र पहचान कर उन्हें आपस में मिलाने में सफलता मिली। विशेष रूप से वृद्धजन, महिलाएं एवं बच्चे, जो भीड़ के कारण परिजनों से अलग हो गए थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखकर आवश्यक सहायता प्रदान की गई। इस मानवीय प्रयास से न केवल श्रद्धालुओं में विश्वास की भावना सुदृढ़ हुई, बल्कि पुलिस एवं प्रशासन की संवेदनशील एवं जिम्मेदार कार्यशैली भी परिलक्षित हुई। परिजनों से मिलते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आई खुशी एवं राहत इस सफल व्यवस्था का प्रमाण रही । रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन शांति, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के साथ संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता रही ।1
- *रुद्राक्ष महोत्सव (14 फरवरी से 20 फरवरी) के दौरान बिछड़े श्रद्धालुओं को परिजनों से मिलाने की सराहनीय पहल* दिनांक 14 फरवरी से 20 फरवरी तक आयोजित रुद्राक्ष महोत्सव के दौरान श्रद्धालुओं की भारी संख्या में उपस्थिति रही। महोत्सव में दूर-दराज़ से आए श्रद्धालुओं के आगमन के कारण भीड़ अधिक होने से *348 श्रद्धालु अपने परिजनों से बिछड़ गए थे।* ऐसी स्थिति में पुलिस विभाग द्वारा त्वरित एवं मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विशेष “खोया-पाया केंद्र” स्थापित किए गए। इन केंद्रों पर तैनात अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने पूरी सतर्कता, धैर्य एवं समर्पण के साथ कार्य करते हुए *बिछड़े हुए श्रद्धालुओं में महिला 152,बच्चे 69, वृद्ध 84, बालक एवं पुरुष 41 को सुरक्षित रूप से उनके परिजनों से मिलाया।* इसके अतिरिक्त 2 महिलाओं के नहीं मिलने के कारण थाना मंडी में गुम इंसान कायम किए, जिन्हें भी पुलिस ने तत्परता पूर्वक खोजकर उनके परिवार के सुपुर्द किया, जिसमें एक महिला महाराष्ट्र एवं एक महिला राजस्थान की थी । महोत्सव अवधि के दौरान लगातार सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली (PA सिस्टम) तथा सोशल मीडिया एवं कंट्रोल रूम के माध्यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान किया गया, जिससे परिजनों की शीघ्र पहचान कर उन्हें आपस में मिलाने में सफलता मिली। विशेष रूप से वृद्धजन, महिलाएं एवं बच्चे, जो भीड़ के कारण परिजनों से अलग हो गए थे, उन्हें सुरक्षित वातावरण में रखकर आवश्यक सहायता प्रदान की गई। इस मानवीय प्रयास से न केवल श्रद्धालुओं में विश्वास की भावना सुदृढ़ हुई, बल्कि पुलिस एवं प्रशासन की संवेदनशील एवं जिम्मेदार कार्यशैली भी परिलक्षित हुई। परिजनों से मिलते समय श्रद्धालुओं के चेहरों पर आई खुशी एवं राहत इस सफल व्यवस्था का प्रमाण रही। रुद्राक्ष महोत्सव का आयोजन शांति, सुरक्षा एवं सुव्यवस्था के साथ संपन्न हुआ, जिसमें श्रद्धालुओं की सुविधा एवं सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता दिखी ।1
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